उत्तराखंड कैसे बना ‘पूर्ण साक्षर राज्य’ ?
उत्तराखंड बना ‘पूर्ण साक्षर राज्य’, मात्र 2 साल में साक्षरता दर पहुंची 98.7% पर
उत्तराखंड ने दो वर्षों में अपनी साक्षरता दर में 14.9% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है, जो अब 98.7% तक पहुंच गई है।
उत्तराखंड की साक्षरता दर में 14.9% की वृद्धि
राज्य को पूर्ण साक्षर घोषित करने की कैबिनेट मंजूरी
‘उल्लास’ कार्यक्रम मानकों में 95% से अधिक साक्षरता
देहरादून 18 जून 2026 । उत्तराखंड ने साक्षरता के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए दो वर्षों में अपनी साक्षरता दर में 14.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है।
वर्ष 2023-24 में राज्य की साक्षरता दर 83.8 प्रतिशत आंकी गई थी, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 98.7 प्रतिशत तक पहुंच गई।
केंद्र सरकार के नव भारत साक्षरता कार्यक्रम ‘उल्लास’ के मानकों के अनुरूप राज्य में 95 प्रतिशत से अधिक लोग साक्षर होने के आधार पर धामी मंत्रिमंडल ने गुरुवार को उत्तराखंड को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे ।
माध्यमिक शिक्षा निदेशकडाॅक्टर मुकुल कुमार सती ने 25 मई को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के संशोधित मानकों के अनुरूप राज्य को पूर्ण साक्षर घोषित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा था।
प्रस्ताव में बताया गया कि भारत सरकार के अनुसार किसी राज्य को पूर्ण साक्षर घोषित करने के लिए शत-प्रतिशत साक्षरता आवश्यक नहीं है, क्योंकि वृद्धावस्था और बौद्धिक अक्षमताओं जैसे कारणों से यह व्यावहारिक रूप से संभव नहीं माना जाता।
इसलिए 95 प्रतिशत या उससे अधिक साक्षरता दर प्राप्त करने वाले राज्यों को पूर्ण साक्षर माना जा सकता है।
उल्लास कार्यक्रम में वर्ष 2025 में सात वर्ष से कम आयु की आबादी को छोड़कर उत्तराखंड की अनुमानित जनसंख्या एक करोड़ 23 लाख चार हजार 601 आंकी गई।
इनमें केवल एक लाख 31 हजार 986 व्यक्ति निरक्षर हैं, जो कुल जनसंख्या का मात्र 1.3 प्रतिशत है। इसी आधार पर राज्य की साक्षरता दर 95 प्रतिशत से अधिक मानी गई और पूर्ण साक्षर राज्य घोषित करने का प्रस्ताव मंत्रिमंडल के समक्ष रखा गया, जिसे स्वीकृति मिल गई।

