इसी देश में पलते हैं गौतम नवलखा, कमल मित्र चिनॉय, हमीदा बानो जैसे खतरनाक नमूने
सन् २००१ या २ ईस्वी की बात है,कश्मीर से निष्कासन पर मेरी डायरी तथा कविता संग्रह छप चुका था।मुझे WISCOMP नाम के एक एनजीओ से कश्मीर पर दो दिवसीय कांफ्रेंस में भाग लेने का निमंत्रण मिला। जहाँ मुझे अपनी बात रखनी थी।मेरी बात क्या थी;एक गौरवपूर्ण उत्पीडित भारतीय जनसमुदाय के जनसंहार और सर्वनाश की कथा थी,जिसे राज्य की सहमति से जिहादियों ने अंजाम दिया था।
यह हाई फ़ाई कांफ्रेंस इंडिया इंटरनैशनल सेंटर में थी जहाँ
गौतम नवलखा नाम का जीव भी था और
कमल मित्र चिनॉय नाम का भी। और भी अनेक देशद्रोही।
यहाँ कश्मीरी मुसलमाननियों की भीड़ थी,जिनमें
हमीदा बानो नाम की हुर्रियत के एक नेता की बीबी। मैंने इन राक्षसों- राक्षसणियों को पहली बार देखा था । गरज यह बाज़ार पहली बार देखा था। पर मैं ख़ुश थी कि मैं भी अपनी व्यथा कहूँगी ।मुसलमान स्त्रियाँ जी भर-भर कर भारतीय सेना,भारत तंत्र,हिंदूधर्म,भारत राज्य को पानी पी- पी कर गरिया रही थीं।भारत द्वारा उन पर हो रहे अत्याचारों को झूठ के बड़े – बड़े पुलिंदे बना- बना कर फैंक रही थीं। कि एक बार तो मैंने सोचा कहीं यह कांफ्रेंस पाकिस्तान में तो नहीं हो रही । इतनी मुसलमान वक़्ता थीं कि मैं सारा समय अपने खौलते रक्त में उबलती रही। भारत दुर्दशा के इन कर्ताओं को समझने का प्रयास करती रही। इस हॉल में एक दिल्ली की मुसलमान महिला भी थी जिसे बाद में मनमोहन सिंह ने योजना आयोग की सदस्य भी बनाया था। यह सारा कार्यक्रम आयोजित किया था किसी महिला ने जो उस समय लेडी श्रीराम कॉलेज की प्रिंसिपल बताई जाती थी। उसकी सीधी और बाधारहित पहुँच प्रधानमंत्री सरदार मनमोहन सिंह तथा सोनिया गांधी से बताई जाती थी।
जब गौतम नवलखा बोल रहा था,मेरे होश उड़ने लगे। कश्मीर की मुसलमाननियों का तो समझ में आता है ,पर यह भयानक जानवर भी भारत में हैं,यह पता न था। उसने भारत की सेना के विरुद्ध निकृष्टतम शब्दों का प्रयोग किया। सेना को रेपिस्ट ,हत्यारे,मानवाधिकार हंता तीव्रतम भाषा में कहा ।उसने मारे गए आतंकियों को शहीद और मासूम शिकार कहा। और भारत की सेना को कातिल। उसने आतंकियों के मानवाधिकारों की ऐसी झूठी वकालत की कि जो न्यायसंगत कदापि न थी अपितु दुखद आश्चर्य से भरी। इतना झूठ इससे पूर्व की मुस्लिम स्त्री वक़्ता भी न बोली थीं। जब मैंने बीच में टोक कर कहा कि “आतंकियों के मानवाधिकारों की वकालत कर रहे हो जबकि उन्हें मारा ही जाना चाहिए;देश की बहुविध सेवा करती सेना भी तो मानव निर्मित हैं ,उनके मानवाधिकार नहीं ? उन्हें आत्मरक्षा का अधिकार नहीं?”वह सिर हिला हिलाकर बोला,”नहीं सेना के मानवाधिकार नहीं,साथ में हिमायत में बढचढकर बोली कुर्रत और हमीदा बानो।
अगली वक्ता थी हमीदा बानो । वह बोली,”जो मुझे कहना था गौतम ने मुझसे बेहतर ढंग से कह दिया,धन्यवाद गौतम !” मेरे मन में भारत राज्य,इस एनजीओ का उद्देश्य ,इन सभी भागीदारों ,लोकतंत्र?संविधान के विषय में प्रश्नों का अंबार बन गया। मन में आया सारे देश को एक आवाज दूं कि यहां भयानक आतंकी/देशद्रोही है,जिसका नाम गौतम नवलखा है,जिस पर बडे-बडे आतंकी,हमीदा बानो जैसी पीठ टिकाती है,इससे पहले ये टुकडे करें ,हमें इसके/इनके टुकडे करने चाहिए।
जब मैं ने अपना वक्तव्य पढा तो खौलते खून के साथ उंगली से नवलखा की ओर इंगित कर कर हर शब्द उच्चारा। मेरे शब्दों में से सच का रक्त बह रहा था क्योंकि मेरा हर शब्द उसके महाझूठ का उत्तर था। तब पगला कर सईदा हमीद चीख़ कर बोली,”क्य तु चाहती हो हम लोग इस हॉल से बाहर जाएँ।” कौन थे ये”हम लोग”?
“हम लोग “ये बौद्धिक पशु जिनका सरगना था गौतम नवलखा। मेरा वक्तव्य बीच में रोकने का प्रयास किया गया था,पर मैंने तीव्र विरोध खडा कर उन्हें पूरा सुनने पर विवश कर दिया। मेरा वक्तव्य आने तक वहां एकतरफा झूठ की कहानियों के पहाड चढाए गए थे कि मुसलमान मर रहा है,जिनोसाइड और उत्पीडन हो रहा है उस पर ,पर मेरे वक्तव्य ने पासा पलट दिया। वहां अन्य कोई कश्मीरी हिंदू न था। दो सॉफिस्टिकेटेड महिलाएं ही थी। एक का बेटा शीघ्र ही जम्मू विश्वविद्यालय का उपकुलपति बना दिया गया और दूसरी एक मुसलमान डॉक्टर की पत्नी थी। अत: पीडितों की प्रतिनिधि मैं ही थी,जो सीधे जम्मू के शरणार्थी शिविर से वहां गई थी।
गौतम नवलखा मेरे एक-एक शब्द की खिल्ली उडा रहा था।दरअसल वह मन ही मन चुल्लू भर पानी में डूबकर मर रहा था और उसे खिल्ली में उडाने का नाटक कर रहा था। पर मेरे पास उसे ढेर करने को कोई शस्त्र न था। जब मेरा वक्तव्य समाप्त हुआ तो एक लिपी,पुती;सजी धजी स्त्री मेरे पास आई और बोली,”तुम्हें शऊर नहीं कि अपने वक्तव्य को कैसे बैलेंस किया जाता है?”
मैं ने मासूमियत से उतर दिया,”मैंने बैलेंस ही तो किया। अभी तक सिर्फ एकतरफा झूठी कथा ही चल रही थी,जो सभी बारी- बारी से दुहरा रहे थे ताकि वह सच बन जाए। मैंने सच बोलकर इसे बैलेंस करने का ही काम किया। वह मुक्तकेशी लीना मनचंदानी मुसलमान स्त्रियों से कहीं अधिक परेशान और लगभग विक्षिप्त होकर,रक्तिम मुख से बोली,”आगे से तुम्हे नहीं बुलाया जाएगा।”
इन सब बातों के अर्थ मेरे लिए बाद में खुलते गए । कश्मीर भूमि और हम बर्बाद होते रहे,कश्मीरी मुसलमान आबाद होते रहे।भारत को लूटते रहे,लूट भयानक ढंग से जारी है,और ये ही वे स्रोत हैं जहां से जिहादी आतंक,गजबए हिंद की कल्पना (संकल्प) ,इस्लामी कट्टरपंथ प्राणवायु पा -पा कर पुष्ट हो रहा है।
आज यह खतरनाक एनजीओ क्या कर रहा है,मैं नहीं जानती,हालांकि अनुमान लगा सकती हूं।हाल ही में कुछ गतिविधियां जम्मू में देखी जिनमें तथाकथित जम्मू की लेखिकाएं कवि (अबोधता के चलते ) इस तत्वावधान में देखी,जो सेक्युलरिज्म बघार रही थीं।अस्तु।
कल जब इन पांच व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया,मैं आनंदित तो हुई पर ये खतरनाक लोग भारत की न्याय व्यवस्था में भी गहरे घुसे हैं। इनकी जडें विषैली एवं फैली हैं,इतना ही विषाक्त संविधान का सेक्युलरिज्म है।
अब प्रश्न है भारत की विश्वविद्यालयों का समूचा अध्यापक समुदाय ,(अपवादों को छोडकर ,)युवा पीढी में भारत के टुकडे करने का जहर भर रहा है । राज्य पर देश की क्षेत्रीय सुरक्षा का सर्वोपरि दायित्व होता है,तो क्यों राज्य चुप है?और अब तो तथाकथित भारतीय? राज्य है। क्यों नहीं चुन चुन कर ऐसे अध्यापकों को कठोर दंड दिया जा रहा,क्यों नहीं इनकी अध्यापकी छीनी जा रही। लोकतंत्र की यह कोई मजबूरी तो नहीं होनी चाहिए कि देश के लिए विषैले इन अध्यापकों को सहा जाए,इन्हें बख्शा जाए,इनको मोटी- मोटी तनख्वाहें दी जाए ताकि इनके भारत के टुकडे करने के कार्यक्रमों में कोई बाधा न पडे।
अध्यापकों का चयन करते समय यह अनिवार्य हो कि वह देश को किस दिशा में ले जाने का छात्र को सबक पढायेंगे। यदि वह कन्हैया कुमारों और उमर खालिदों को पैदा करने वाले हैं तो चाहे कितना ही पढा लिखा हो उसे समाप्त करना चाहिए।ऐसे सभी प्रोफेसरों कुलपतियों की नौकरियां रद्द करने का प्रावधान आवश्यक है।बौद्धिकों की परिभाषा ही हमारे देश में अबौद्धिक है,और दुखद है कि इन अबौद्धिकों को ,जनता को बुद्धू बनाकर बौद्धिक कहलाया जाता है। जबर्दस्ती।
जो हिंसा के पक्षधर हैं,देश के विरोधी हैं,सेना के शत्रु हैं,देशखंडन के लिए गुप चुप विदेशों से भारी राशि लेते हैं,वे बौद्धिक कैसे हैं? वे तो सामान्य ज्ञान में और नैतिक मापदंड दोनों पर एक खूंखार आतंकी,महापापी,अपराधी ही है। ऐसे लोग तो सिर्फ और सिर्फ मृत्युदंड के योग्य हैं।
अत: इस देश में बहुत सारे गौतम नवलखा हैं,ढूंढ – ढूंढ कर इन्हें ठिकाने लगाया जाए। कानून में बैठे आतंक हितैषियों को चुन -चुन कर बाहर किया जाए। लोकतंत्र को मर्यादा में बाँधा जाए।
यह काम भारतीय जनता का महत्वपूर्ण स्वायत्त काम है।राज्य,चाहे वह संघ समर्थित भाजपा का ही क्यों न हो,;गरज सत्ता के सहारे देश नहीं बच सकता।यह तय है।
@क्षमा कौल की फेसबुक पोस्ट


