सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद अवैध,30 दिन में हटा 6.41 करोड़ भरने का आदेश
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद अवैध घोषित, कोर्ट ने लगाया 6.41 करोड़ रुपए का जुर्माना
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को नगर मजिस्ट्रेट न्यायालय ने अवैध घोषित कर बेदखली का आदेश दिया है।
कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद
कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद अवैध घोषित, बेदखली का आदेश।
अवैध कब्जे पर 6.41 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना।
अध्यासियों को कब्जा हटाने के लिए 30 दिन का समय।
सहारनपुर 24 जुलाई 2026 । कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को न्यायालय नगर मजिस्ट्रेट ने अवैध घोषित किया है। लोक परिसर अप्राधिकृत अध्यासियों की बेदखली अधिनियम-1972 में दायर वाद की सुनवाई में दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने यह आदेश पारित किया है।
बेदखली आदेश पारित करते हुए न्यायालय ने अध्यासियों पर अवैध कब्जे की क्षतिपूर्ति के रूप में 6.41 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना भी लगाया। न्यायालय ने अध्यासियों को कब्जा हटाने को 30 दिन का समय दिया गया है। कब्जा न हटाए जाने पर बलपूर्वक बेदखली के आदेश दिए।
कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को शिकायतकर्ता ने अवैध रूप से निर्मित होना बताया गया था। जांच के बाद लेखपाल नीरज कुमार ने सरकार की ओर से मामले में 24 मार्च 2025 ने वाद दर्ज करने को प्रार्थना पत्र दिया था। इस पर न्यायालय ने मस्जिद के कथित प्रबंधक अब्दुल हमीद (पुत्र हसीबुद्दीन) व अन्य को प्रतिवादी बनाते हुए वाद दर्ज कर लिया था।
मामले की सुनवाई न्यायालय नगर मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह के यहां हुई। इसमें प्रतिवादी ने मस्जिद को 1947 से पहले ब्रिटिश काल में निर्मित होने का दावा किया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद गुरुवार को न्यायालय ने आदेश पारित किया । इसमें न्यायालय ने कलक्ट्रेट परिसर में निर्मित मस्जिद अवैध मानते हुए बेदखली का आदेश पारित किया।
न्यायालय के आदेश के मुताबिक उक्त जमीन नान जेड ए खसरा नंबर-539 में कचहरी कलेक्ट्ररी का नाम अंकित है, जो सरकारी भूमि है। इस भूमि के 315 वर्ग मीटर में अवैध रूप से मस्जिद निर्मित थी। न्यायालय द्वारा बेदखली आदेश पारित करते हुए अवैध अध्यासियों पर 70 साल तक अवैध रूप से संपत्ति का अधिभोग करने को लेकर क्षतिपूर्ति के तौर पर छह करोड़ 41 लाख 65 हजार 500 रुपये का जुर्माना लगाया और नियमानुसार वसूली करने का आदेश पारित किया गया।
इस आदेश से पहले सभी न्यायिक औपचारिकताएं पूरी कर निर्णय दिया गया, जिसमें विपक्षी अपना दावा साबित करने में असफल रहे। न्यायायल ने आदेश के तहत अवैध अध्यासियाें को कब्जा हटाने के लिए 30 दिन का समय दिया है। साथ ही कब्जा नहीं हटाए जाने पर बलपूर्वक बेदखली की कार्रवाई किए जाने के आदेश दिए।
परिसर का इस्तेमाल धार्मिक गतिविधियों के अलावा व्यावसायिक उद्देश्यों में भी हो रहा था। वहां एक पोस्ट ऑफिस चल रहा था और कई कमरे बाहरी लोगों को किराये पर दिए गए थे। इसका हर महीने किराया मस्जिद समिति वसूल रही थी।
कोर्ट ने DM ऑफिस परिसर में बनी मस्जिद गिराने का दिया आदेश, 6.41 करोड़ का लगाया जुर्माना
परिसर का इस्तेमाल धार्मिक गतिविधियों के अलावा व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए भी किया जा रहा था। वहां एक पोस्ट ऑफिस चल रहा था और कई कमरे बाहरी लोगों को किराये पर दिए गए थे। इसका हर महीने किराया मस्जिद समिति वसूल रही थी।
कोर्ट ने यह आदेश बजरंग दल के पूर्व क्षेत्रीय समन्वयक विकास त्यागी की शिकायत पर आया है। विकास त्यागी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि मस्जिद को परिसर के अंदर अवैध तरीके से बनाया गया था। यह संवेदनशील प्रशासनिक कामों को एक हाई सिक्योरिटी वाला एरिया है।
इसके अलावा, परिसर का इस्तेमाल धार्मिक गतिविधियों के अलावा व्यावसायिक में भी हो रहा था। वहां एक पोस्ट ऑफिस चल रहा था और कई कमरे बाहरी लोगों को किराये पर दिए गए थे। इसका हर महीने किराया मस्जिद समिति वसूल रही थी।
कलेक्ट्रेट परिसर में बनी थी अवैध मस्जिद
बजरंग दल के पूर्व क्षेत्रीय समन्वयक विकास त्यागी ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “कलेक्ट्रेट परिसर में अवैध मस्जिद बनी थी, जो गोपनीय सरकारी कामकाज की जगह है। मस्जिद में पोस्ट ऑफिस चल रहा था और पांच-छह कमरे बाहरी लोगों को किराये पर दिए गए थे। मस्जिद खुद पोस्ट ऑफिस का किराया वसूल रही थी।”
#WATCH | Saharanpur, Uttar Pradesh: Former Regional Coordinator, Bajrang Dal, Vikas Tyagi, says, “An illegal mosque had been constructed within the Collectorate premises, a place where confidential official work takes place. Inside this mosque, a post office was operating, and… https://t.co/vT9F35O9eF pic.twitter.com/tQM5U9uWWI
— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) July 17, 2026
उन्होंने आगे कहा, “मैंने जनवरी 2025 में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी से मिल इसकी शिकायत की। इसके बाद जांच में आरोप सही मिले। तब प्रशासनिक कार्रवाई हुई। सिटी मजिस्ट्रेट अदालत ने इसे गिराने का आदेश जारी किया। प्रशासन से मेरी मांग है कि जुर्माना बढ़ाकर 10-12 करोड़ रुपये हो और प्रशासन को मस्जिद गिराने के अदालत के आदेश पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।”
कुशीनगर में मदनी मस्जिद के एक हिस्से को गिराया गया था
यह घटनाक्रम उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में कथित तौर पर अवैध ढांचों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई की बीच हुआ है। पिछले साल फरवरी में, अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में मदनी मस्जिद के एक हिस्से को गिरा दिया था, यह आरोप लगाते हुए कि इसे कब्जा की गई जमीन पर बनाया गया था।
हालांकि, मस्जिद के देखभाल करने वाले का कहना था कि मुस्लिम समुदाय के सदस्यों ने मस्जिद के निर्माण के लिए लगभग एक साल पहले जमीन खरीदी थी और किसी भी तरह के कब्जे से इनकार किया। मस्जिद समिति ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और 8 फरवरी तक गिराने की कार्रवाई पर रोक लगवा ली थी।
9 फरवरी को रोक की अवधि समाप्त होते ही, अधिकारियों ने गिराने की कार्रवाई फिर से शुरू की। इसके बाद, सुप्रीम कोर्ट ने कुशीनगर में मदनी मस्जिद के एक हिस्से को गिराए जाने को चुनौती देती अवमानना याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारियों को नोटिस जारी किया। याचिका में आरोप लगाया गया कि यह तोड़-फोड़ सुप्रीम कोर्ट के 13 नवंबर, 2024 के आदेश का उल्लंघन करके की गई।

