NEET UG MBBS फर्जी सर्टिफिकेट मामले में पहली गिरफ्तारी, सरगना समेत 2 अरेस्ट, इतने लाख में हुआ था सौदा
NEET UG MBBS फर्जी सर्टिफिकेट मामले में हुई पहली गिरफ्तारी, सरगना समेत 2 अरेस्ट, इतने लाख में हुआ था सौदा
एसआईटी ने एमबीबीएस और बीडीएस में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के फर्जी सर्टिफिकेट से एडमिशन पाने वालों पर शिकंजा कसा
NEET UG MBBS FAKE CERTIFICATE
एसआईटी की गिरफ्तार में दो आरोपी
देहरादून: NEET UG में फर्जी सर्टिफिकेट मामले में जांच कर रही एसआईटी टीम ने पहली दो गिरफ्तारी कर ली हैं. आज 10 सदस्यीय एसआईटी टीम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के नाम पर बने फर्जी सर्टिफिकेट से एमबीबीएस और बीडीएस में एडमिशन लेने वाले आरोपियों की जांच के लिए हरिद्वार पहुंची थी. उधर दो आरोपियों को पूछताछ के लिए देहरादून के रायपुर थाने बुलाया गया था. पूछताछ के बाद वहीं दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया.
NEET UG में फर्जी सर्टिफिकेट मामले हुई पहली गिरफ्तारी: इस मामले में देहरादून एसएसपी और एसआईटी टीम ने देहारादून में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके MBBS सर्टिफिकेट फ्रॉड में पहली गिरफ्तारियों का खुलासा किया है. अब तक गिरोह के सरगना रूपेश पंडित ओर अरविंद कुमार को अरेस्ट किया गया है. एसआईटी ने खुलासा किया है कि फर्जी सर्टिफिकेट बनाने के लिए 45 लाख रुपए में सौदा हुआ था. तीन लोगों ने एडवांस के तौर पर 20 लाख रुपए दिए थे. 12 आरोपी अभी भी संदिग्ध हैं, जिनकी जांच की जा रही है.
एसआईटी की गिरफ्तार में दो आरोपित
एसआईटी के अनुसार, आरोपित अरविंद कुमार ने अनावरण किया कि उसने अपनी बेटी के फर्जी सर्टिफिकेट बनाने को 20 लाख रुपए दिए थे. अरविंद की बेटी के खिलाफ भी थाना रायपुर में मुकदमा दर्ज हुआ था.
रूपेश पंडित मास्टरमाइंड: एसआईटी ने फर्जी सर्टिफिकेट मामले में मास्टर माइंड रूपेश पंडित को पकड़ा है. देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र डोबाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि-
रूपेश मेरठ के एक बड़े इंस्टीट्यूट जो मेडिकल और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराता, उसका मालिक है. भारत समेत अन्य देशों में भी रूपेश द्वारा बनाए फर्जी सर्टिफेकेट बनाकर उपयोग में लाए गए.
– प्रमेंद्र डोबाल, एसएसपी, देहरादून –
आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं: अभी ई डिस्ट्रिक्ट सेंटर और सीएससी सेंटर की जांच की जा रही है. आने वाले समय में और गिरफ्तारियां की जा सकती है. अभी कई सारे संदिग्ध हमारे रडार पर हैं. एसआईटी अपनी जांच तेजी से कर रही है.
एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने जारी की पूरी डिटेल: प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद देहरादून एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने नीट यूजी 2025 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एमबीबीएस में प्रवेश के प्रकरण में 02 अभियुक्तों की गिरफ्तार से संबंधित बातें डिटेल से बताई गईं.
ऐसे मिले संदिग्ध अभ्यर्थियों के मूल पते: वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बताया कि एसआईटी टीम द्वारा प्रकरण में संलिप्त अभियुक्तों के विरुद्ध साक्ष्य संकलन की कार्रवाई करते हुए प्रकरण से जुड़े सभी दस्तावेजों को कब्जे मे लिया गया. एसआईटी जांच के दौरान उक्त सभी अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में अंकित पते गलत पाये गये. इस पर एसआईटी द्वारा सम्बन्धित शिक्षण संस्थानों में जाकर प्रकरण से जुड़े सभी दस्तावेजों को कब्जे में लिया गया. उनकी जांच से उक्त अभ्यर्थियों के मूल पतों की जानकारी प्राप्त हुई.
प्राप्त जानकारी और जांच के दौरान प्रकाश में आये साक्ष्यों के आधार पर एसआईटी द्वारा 02 व्यक्तियों, 1- रूपेश पंडित तथा 2- अरविन्द कुमार को पूछताछ हेतु थाना रायपुर पर लाया गया, जिनसे आवश्यक पूछताछ व प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर पुलिस द्वारा उन्हें मौके से गिरफ्तार किया गया.
रूपेश पंडित कमीशन पर दिलवाता है एडमिशन: पूछताछ में पुलिस टीम को जानकारी मिली कि अभियुक्त रूपेश पंडित अपने साथियों के साथ मिलकर पिछले 05 वर्षों से एजुकेशन कन्सल्टेन्सी का कार्य कर रहा था. वो मेरठ में मिकोडो (MECODO) पाठशाला नाम से एक कम्पनी संचालित कर रहा था. इस कंपनी के माध्यम से वह विभिन्न प्राइवेट यूनिवर्सिटीज और विदेशों में भी एमबीबीएस, बीटेक, बीसीए, बीबीए, बीकॉम आदि कोर्सों में कमीशन पर एडमिशन दिलवाने का काम करता था.
3 बच्चों के एमबीबीएस में एडमिशन के लिए तय हुए 45-45 लाख रुपए: गिरफ्तार अभियुक्त अरविन्द, रूपेश का पुराना परिचित था. पिछले 02-03 सालों से उसे जानता था. अपनी पुत्री के एमबीबीएस में दाखिले के लिये उसके द्वारा रूपेश से सम्पर्क किया गया था. अपनी पुत्री के साथ अपने 02 अन्य परिचितों के बच्चों को भी एमबीबीएस में एडमिशन दिलाने की बात की थी. इस पर रूपेश द्वारा अपने साथियों के साथ मिलकर उन्हें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे से एडमिशन दिलवाने तथा प्रत्येक एडिमिशन की एवज में 45 लाख रुपए लेने की बात कही थी. तीनों अभ्यर्थियों के परिजनों से रूपेश तथा उसके साथियों द्वारा एडवांस के तौर पर 20-20 लाख रुपए लिये गये थे तथा एमबीबीएस में दाखिले व क्लासों के शुरू होने के बाद बाकी के पैसे देने की बात तय हुई थी.
तीनों अभ्यर्थियों ने अलग-अलग मेडिकल कॉलेज में MBBS में पाया एडमिशन: अभियुक्त रूपेश पंडित द्वारा अपने साथियों के साथ मिलकर तीनों अभ्यर्थियों के कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनावाये गये थे. उनके आधार पर उक्त तीनों अभ्यर्थियों द्वारा अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस कोर्स के लिये दाखिला प्राप्त किया गया था. एसआईटी द्वारा प्रकरण से जुड़े सभी पहलुओं की गहनता से विवेचना की जा रही है. उक्त प्रकरण से जुड़े सभी अभियुक्तों के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई की जायेगी.
गिरफ्तार अभियुक्तों के नाम और पते
रूपेश पंडित (पुत्र गोपाल पंडित, निवासी ग्राम- शिवपुरी थाना केहाट, तहसील/ जिला पूर्णिया, (बिहार) हाल निवासी प्लॉट नंबर 90, द्वारिकापुरी कॉलोनी, थाना ब्रह्मपुरी, जनपद मेरठ, उत्तर प्रदेश, आयु 30 वर्ष)
अरविद कुमार (पुत्र विजयपाल सिंह, निवासी ग्राम – बहादरपुर खादर, थाना लक्सर, जनपद- हरिद्वार)
क्या है उत्तराखंड का एमबीबीएस फर्जी सर्टिफिकेट फर्जीवाड़ा: उत्तराखंड का एमबीबीएस फर्जीवाड़ा नीट-यूजी काउंसलिंग के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित और अन्य स्थानीय आरक्षण कोटे का लाभ लेने के लिए फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने और उनसे मेडिकल कॉलेजों में दाखिला पाने का मामला है.
ऐसा आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों ने मृत या अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के फर्जी आश्रित प्रमाण पत्र बनवाकर राज्य कोटे की आरक्षित एमबीबीएस और बीडीएस सीटों पर प्रवेश पाया. जांच में सामने आया कि प्रशासनिक रिकॉर्ड में एक ही स्वतंत्रता सेनानी के नाम और जाली दस्तावेजों का उपयोग करके कई अलग-अलग अभ्यर्थियों ने खुद को उनका पोता/आश्रित बताकर कोटे का लाभ ले लिया. दिलचस्प बात ये है कि असली परिवार ने ऐसे किसी लाभ का दावा ही नहीं किया था. यहां तक कि फर्जी प्रमाण पत्रों पर एआई-जेनरेटेड तस्वीरों का भी इस्तेमाल किया गया.
स्वास्थ्य मंत्री को सौंपे गए हैं 350 से अधिक डोमिसाइल: इसके बाद व्हिसलब्लोअर और पत्रकारों ने स्वास्थ्य मंत्री और प्रशासन को सौंपे गए दस्तावेजों में 350 से अधिक डोमिसाइल यानी निवास और अन्य आरक्षित श्रेणियों जिनमें SC, ST, OBC, EWS आदि के प्रमाण पत्र भी संदिग्ध बताए गए हैं.
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस प्रशासन ने एसपी ग्रामीण जया बलूनी के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया है. एसआईटी, एसडीएम और पटवारी कार्यालयों से जुड़े दस्तावेजों और सरकारी प्रक्रिया की गहराई से जांच कर रही है. संदिग्ध प्रमाण पत्रों को निरस्त करने और संलिप्त लोगों पर मुकदमे दर्ज करने की कार्रवाई भी शुरू हो चुकी है.

