श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद में समझौता प्रयास विफल

श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद: लोक अदालत में नहीं पहुंचा मुस्लिम पक्ष, समझौते की कोशिश विफल
श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर लोक अदालत में सुलह की कोशिश हुई, लेकिन मुस्लिम पक्ष के बहिष्कार से बातचीत नहीं हो सकी. तब अदालत ने सुलह प्रक्रिया विफल होने का आदेश दे दिया.

मथुरा विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बुलाई गई लोक अदालत की बैठक विफल।
नई दिल्ली,12 जुलाई 2026,मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद में समझौते की कोशिश फिलहाल असफल रही. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर विशेष लोक अदालत में दोनों पक्षों को सुलह वार्ता के लिए बुलाया गया था, लेकिन मुस्लिम पक्ष के मौजूद नहीं होने की वजह से बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी. इसके बाद अदालत ने सुलह प्रक्रिया विफल होने का आदेश पारित कर दिया.

इस विवाद से जुड़ी सात विशेष अनुमति याचिकाएं (SLP) सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मथुरा की विशेष लोक अदालत भेजी गई थीं. इन याचिकाओं में मांग की गई थी कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत के जरिए विवाद का समाधान निकालने की कोशिश की जाए.

मुस्लिम पक्ष नहीं पहुंचा कोर्ट

विशेष लोक अदालत में एडीजे-11 सुरेंद्र प्रसाद की अदालत में सुलह वार्ता की प्रक्रिया शुरू हुई. इस दौरान हिंदू पक्ष के वादी अदालत पहुंचे, लेकिन मुस्लिम पक्ष की ओर से कोई भी मौजूद नहीं हुआ. इसी वजह से बातचीत नहीं हो सकी और सुलह की कोशिश अधूरी रह गई. जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की रिपोर्ट मिलने के बाद अदालत ने सुलह वार्ता विफल होने का आदेश पारित कर दिया. यानी फिलहाल इस विवाद का समाधान आपसी बातचीत से नहीं हो सका.

हिंदू पक्षकारों में से एक महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर से जुड़े इस पूरे विवाद में अब तक कुल 18 मुकदमे दायर किए जा चुके है. इन सभी मामलों की मुख्य सुनवाई इस वक्त इलाहाबाद हाई कोर्ट में चल रही है. पिछले दिनों सात विशेष अनुमति याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लगाई गई थीं, जिसके बाद ही कोर्ट ने लोक अदालत में समझौते का यह प्रयास करने को कहा था. फिलहाल कोर्ट के इस नए आदेश के बाद अब यह साफ हो गया है कि बातचीत से हल निकालने की इस शुरुआती कोशिश को झटका लगा है.

श्रीकृष्ण जन्मभूमि केस, दोनों पक्षों में समझौता कराने की कवायद; हिंदू पक्ष की पेशकश…विवादित ढांचा हटाएं, हम उपलब्ध कराएंगे जमीन

Sat, 04 Jul 2026

श्रीकृष्ण जन्मस्थान-शाही मस्जिद ईदगाह विवाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सुलह वार्ता का प्रयास विफल रहा। मुस्लिम पक्ष अनुपस्थित रहा, जबकि हिंदू पक्ष ने विवादित ढांचा हटाने पर अन्यत्र भूमि देने का प्रस्ताव दिया; अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी।

श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही मस्जिद ईदगाह विवाद में शनिवार को में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर विशेष अदालत में सुलह वार्ता का प्रयास किया गया। मुस्लिम पक्ष सुनवाई के दौरान उपस्थित नहीं हुआ। हिंदू पक्ष की ओर से प्रस्ताव दिया गया कि मुस्लिम पक्ष विवादित ढांचा हटा ले, हम अन्य स्थान पर भूमि उपलब्ध करा देंगें।

दोनों पक्षों के बीच सुलह न हो पाने की स्थिति में अब 21 से 23 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में लगने वाली विशेष अदालत में दोनों पक्षों की सुनवाई होगी। श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही मस्जिद ईदगाह मामले में अब तक 18 वाद दायर हो चुके हैं। इन सभी की सुनवाई इलाहाबाद हाई कोर्ट में चल रही है। पिछले दिनों कुछ लोगों ने सात विशेष अनुमति याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कीं।

इसमें कहा गया था कि दोनों पक्षों में समझौता कराकर विवाद का निस्तारण किया जाए। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने मथुरा में विशेष लोक अदालत में यह मामला स्थानांतरित किया और समझौते का प्रयास कराने को कहा। शनिवार को इस मामले में विशेष लोक अदालत में जज सुरेंद्र प्रसाद के न्यायालय में सुलह समझौते का प्रयास हुआ।

हिंदू पक्ष की ओर से याचिकाकर्ता महेंद्र प्रताप सिंह, सुरेंद्र गुप्ता उनके सहयोगी प्रदीप श्रीवास्तव, महावीर प्रसाद के अलावा अन्य याचिकाकर्ता कौशल किशोर, अजय प्रताप सिंह और श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट भी उपस्थित रहा। शाही मस्जिद ईदगाह पक्ष की ओर से कोई भी यहां उपस्थित नहीं हुआ।

सुरेंद्र गुप्ता, महेंद्र प्रताप सिंह और कौशल किशोर आदि ने कहा कि जिस भूमि पर शाही मस्जिद ईदगाह बनी है, वह भूमि श्रीकृष्ण जन्मस्थान की है। ऐसे में मुस्लिम पक्ष अपना ढांचा हटा ले। उसे हम ईदगाह बनाने के लिए जन्मस्थान के दूर अन्य स्थान पर भूमि उपलब्ध करा देंगे। दोनों पक्षों के उपस्थित न होने की स्थिति में समझौता नहीं हो सका।

अब न्यायालय से रिपोर्ट बनाकर सुप्रीम कोर्ट में भेजी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट मेें लगने वाली लोक अदालत में 21 से 23 अगस्त के बीच इसमें सुनवाई होगी।

Mathura Shri Krishna Janmabhoomi: शाही ईदगाह मस्जिद का सच! 160 साल पूर्व सर्वे ने खोली थी मुस्लिम पक्ष के दावों पोल

हरिशंकर जैन कहते हैं कि कल को नौकर को अगर घर की जिम्मेदारी दी जाए तो मालिक की अनुपस्थिति में पड़ोसी के साथ नौकर मकान का समझौता कर दे तो नौकर के समझौते के आधार पर क्या मकान पड़ोसी का हो जाएगा.

Mathura Shri Krishna Janmabhoomi Shahi Idgah Masjid Dispute: मथुरा में पिछले लगभग दो सौ वर्ष से शाही ईदगाह मस्जिद के नीचे मंदिर होने का दावा हिंदू पक्ष की ओर से किया जा रहा है. हालांकि, अब हिंदू पक्ष द्वारा उठाई गई शाही ईदगाह मस्जिद के सर्वे की मांग को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपनी स्वीकृति दे दी है. साथ ही कोर्ट की ओर से आदेश जारी किया गया है कि मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि से सटी शाही ईदगाह मस्जिद का सर्वेक्षण भी करवाया जाए. इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष ने चुनौती दी थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी इलाहाबाद हाईकोर्ट के शाही ईदगाह मस्जिद के सर्वेक्षण के आदेश पर रोक लगाने से साफ इनकार किया जिससे मुस्लिम पक्ष को झटका लगा है. हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह की भूमि विवाद में Court Commissioner के द्वारा शाही ईदगाह परिसर का सर्वेक्षण किया जाएगा.

कोर्ट कमिश्नर करेंगे मस्जिद का सर्वे
शाही ईदगाह परिसर में Court Commissioner की एक टीम जाकर उसके नीचे मंदिर होने के दावे को लेकर जांच करेगी, साथ ही इस संबंध में सबूत भी जुटाएगी. सर्वे के तरीके, सर्वे का समय और इससे जुड़ी अन्य बातों को हाईकोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई में तय किया जाएगा. अगली सुनवाई 18 दिसंबर को होनी है.
हालांकि यह बात बहुत कम लोगों को पता होगी कि आज से 160 वर्ष पूर्व Archeological Survey of India के द्वारा पुष्टि की गई थी कि मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद प्राचीन मंदिर के अवशेषों पर बनी है. अंग्रेजों के जमाने में यानी 1832 से 1935 तक मथुरा की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट से लेकर इलाहाबाद हाइकोर्ट तक ने हर बार पूरी भूमि का मालिक हिंदुओं को मानता रहा और आज भी मथुरा के राजस्व रिकॉर्ड में मस्जिद वाली जगह यानी जहां पर यह ढांचा बनी है, उसके मालिक के रूप में श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट ही लिखा हुआ है.

5 बड़े प्रमाण 
आज से 160 वर्ष पुरानी Archeological Survey of India की रिपोर्ट , मुस्लिम आक्रांता औरंगजेब का फरमान जो 27 जनवरी 1670 को दिया गया और समझौते की वो Original Copy, जो श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और शाही ईदगाह इंतजामिया कमेटी के बीच वर्ष 1968 में हुआ था. वर्ष 1935 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय की Copy, जिसमें इस विवाद को लेकर फैसला हिंदुओं के पक्ष में सुनाया गया. यूपी सरकार के राजस्व विभाग का एक दस्तावेज जिसमें श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के नाम शाही ईदगाह मस्जिद की भूमि का मालिकाना हक दर्ज है. इन सबूतों के आधार पर हिंदू पक्ष की ओर से दावा किया जाता है कि प्राचीन कृष्ण मंदिर को तोड़कर मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद खड़ी की गई. ध्यान देने वाली बात ये है कि इन दस्तावेजों में दर्ज सच को समझने के लिए यह आवश्यक है कि विवाद का इतिहास जान लिया जाए.

13.37 एकड़ भूमि पर विवाद
पूरा विवाद 13.37 एकड़ भूमि का है, इसमें श्रीकृष्ण जन्मस्थान के पास 10.9 एकड़ भूमि और शाही ईदगाह मस्जिद के पास 2.5 एकड़ भूमि है. 1968 के समझौते को आधार बनाकर यह बंटवारा किया गया. हालांकि खुद समझौता भी विवादों में ही है. दरअसल, हिंदू हमेशा से दावा करते हैं कि ईदगाह मस्जिद जिस भूमि पर है वहां पर पहले मंदिर था और औरंगजेब ने मंदिर तुड़वाकर उस जगह पर मस्जिद बनवाई थी.

हिंदू पक्ष दावा करता है कि जहां कंस की कारागार में माता देवकी ने श्रीकृष्ण को जन्म दिया ईदगाह मस्जिद वही जगह है यानी श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर ही ईदगाह मस्जिद बनाई गई है. हिंदू पक्ष ये चाहता है कि पूरी 13.37 एकड़ भूमि पर उसको मालिकाना हक मिले जिसके लिए 25 सितंबर 2020 में मथुरा कोर्ट में याचिका दाखिल की गई. तब Places Of Worship Act 1991 के आधार कोर्ट ने याचिका को खारिज किया था. हालांकि इस संबंध में साल 2020 के ही 12 अक्टूबर को पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई थी. अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसी केस में शाही ईदगाह मस्जिद के सर्वेक्षण करने का आदेश दिया है.

औरंगजेब के आदेश पर मंदिर तोड़ा गया
ऐतिहासिक प्रमाणों और सबूतों के बारे में आइए जानते हैं, तो इसकी शुरुआत 27 जनवरी 1670 को औरंगजेब के द्वारा दिए उस फरमान से करते हैं जिसकी मूल प्रति फारसी भाषा में है. जिसका अंग्रेजी अनुवाद.. पुस्तक Masir A alamgiri में किया गया है जोकि औरंगजेब के फरमानों के अनुवाद पर लिखी पुस्तक है. इस फरमान में लिखा है कि मथुरा स्थित केशव देव मन्दिर को तोड़ने का फरमान रमज़ान के पाक महीने में बादशाह ने दिया है. मन्दिर को तोड़ने के बाद आगरा स्थित बेगम साहिब मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे उसकी मूर्तियों को दफना दिया जाना है और अब से मथुरा का नाम बदल कर इस्लामाबाद कर दिया गया है. इतिहासकारों की माने तो मन्दिर को विध्वंस करने के फरमान पर अमल होने के बाद शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण वर्ष 1670 में ही ध्वस्त मन्दिर के अवशेषों किया गया था.

विदेशियों की तारीफ
विध्वंस से पहले मन्दिर कितना सुंदर था इस संबंध में अपनी किताब Travels in the Mogul Empire 1656-1666 में डॉक्टर Francois Bernier (बेर्नियर) करता है. Francois Bernier ने लिखा- लिखता है कि दिल्ली से आगरा के बीच यानी 50 से 60 मील (277 से 330 किलोमीटर) की दूरी के बीच में देखने लायक कुछ भी नहीं है. सब बेकार है सिवाए मथुरा के, एक प्राचीन व सुंदर मंदिर यहां पर अभी भी खड़ा है. इतिहासकारों का मानना है कि ये मथुरा का केशव राय मन्दिर है, बेर्नियर जिसका जिक्र कर रहा है और जिसको औरंगजेब ने तुड़वाया और फिर उस पर शाही ईदगाह मस्जिद बनवाया.

मथुरा में स्थिति मस्जिद की दीवारों पर मंदिर के चिह्ननों की पहचानने के लिए कोई पारखी आंखों की आवश्यकता नहीं. हिंदू निशानों और प्रतीक चिह्नों को मिटाने में मुस्लिम आक्रांताओं ने मेहनत तो की लेकिन दीवारें सच को नहीं दबा पाएं. पूरी 13.37 एकड़ भूमि का मालिकाना हक राय पटनीमल से होकर खुद भगवान श्रीकृष्ण के पास ही आ गया पर 2.5 एकड़ भूमि के लिए सैकड़ों साल से खुद अपनी जन्मभूमि के मालिकाना हक की लड़ाई भगवान श्रीकृष्ण कोर्ट में लड़ रहे हैं. महेंद्र प्रताप सिंह पैरवीकारों में शामिल हैं .

मस्जिद कमेटी को ASI पर भरोसा नहीं
ऐतिहासिक तथ्यों से लेकर ASI की रिपोर्ट तक मस्जिद के हिन्दू मन्दिर को तोड़ कर बनाने पर गवाही दे रही है लेकिन ASI की रिपोर्ट को ही शाही ईदगाह मस्जिद इंतजामिया कमेटी मनगढंत बता रही है. वकील हरिशंकर जैन कोर्ट में 30 वर्ष से आराध्यों के हक की लड़ाई लड़ रहे हैं. हरिशंकर जैन कहते हैं कि कल को नौकर को अगर घर की जिम्मेदारी दी जाए तो मालिक की अनुपस्थिति में पड़ोसी के साथ नौकर मकान का समझौता कर दे तो नौकर के समझौते के आधार पर क्या मकान पड़ोसी का हो जाएगा. मथुरा जन्मभूमि व शाही ईदगाह के विवाद पर मथुरा की अलग अलग अदालतों में कई मुकदमे चल रहे हैं. लेकिन प्रत्यक्ष को प्रमाण की जरूरत नहीं होती .

सरकारी कागज
शाही ईदगाह मस्जिद की इंतजामिया कमेटी साल 1976 में इसी कथित समझौते को लेकर मथुरा नगर पालिका के पास अगर जाती है, 2.5 एकड़ भूमि जहां पर मस्जिद है, उसे मस्जिद इंतजामिया कमेटी के नाम करने का आवेदन करती है पर इस समझौते को ही मथुरा नगरपालिका खारिज कर देती है. मथुरा नगर निगम का Document भी है इसमें खेवत संख्या 255…जहां पर शाही ईदगाह मस्जिद खड़ी है उस भूमि का मालिक..श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट..लिखा है.

इसके अलावा वर्ष 2015 का उत्तर प्रदेश सरकार से verified खतौनी की भी Copy मौजूद है. खेवत संख्या 255 का मालिक भगवान श्रीकृष्ण को ही यहां पर भी बताया गया है. इसके अलाव शाही ईदगाह मस्जिद की दीवारों पर भी सच्चाई साफ दिखाई दे रही है. हालांकि इलाहाबाद हाईकोर्ट के शाही मस्जिद परिसर के सर्वे का आदेश दे दिया ,

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