UP STF जांच रिपोर्ट शासन को,KGMU की हालत पाकिस्तान से बदतर
छठ पूजा और अंतिम संस्कार में भी छुट्टी नहीं… KGMU में हिंदू डॉक्टरों के धर्मांतरण की रिपोर्ट चौंका देगी
लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में कथित यौन शोषण और धर्म परिवर्तन के दबाव के 12 मामलों की जांच के बाद उत्तर प्रदेश विशेष कार्य बल (यूपी एसटीएफ) ने शासन को रिपोर्ट सौंप दी है. करीब 10 महीने की जांच में कई डॉक्टरों और कर्मचारियों पर गंभीर आरोपों की पुष्टि हो गई हैं.रिपोर्ट में पैथोलॉजी,माइक्रोबायोलॉजी,रेडियोलॉजी और गांधी वार्ड का उल्लेख है.
KGMU में STF की धर्मांतरण पर चौंकाने वाली रिपोर्ट. (Photo: ITG)
आशीष श्रीवास्तव
लखनऊ ,31 अक्टूबर 2026, लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में महिला डॉक्टरों और कर्मचारियों के कथित यौन शोषण, धर्म परिवर्तन के दबाव और शिकायतों को दबाने के मामले में यूपी एसटीएफ की जांच रिपोर्ट सामने आई है. करीब 10 महीने की जांच के बाद एसटीएफ ने 12 कथित मामलों का उल्लेख करते हुए अपनी रिपोर्ट शासन को भेजी है. रिपोर्ट में कई डॉक्टरों और कर्मचारियों के नाम हैं. साथ ही विभागीय अधिकारियों पर आरोपियों को संरक्षण देने और पीड़ितों की शिकायतों पर उचित कार्रवाई नहीं करने के आरोप भी लगाए गए हैं. जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी गई है.
KGMU के कई विभागों में सामने आए कथित मामले
एसटीएफ की जांच के दायरे में गांधी वार्ड, माइक्रोबायोलॉजी, पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी विभाग आए. रिपोर्ट के अनुसार इन विभागों में काम करने वाली महिला डॉक्टरों और कर्मचारियों ने शारीरिक शोषण, उत्पीड़न, ब्लैकमेलिंग और धर्म परिवर्तन के दबाव की शिकायतें की थीं.
जांच रिपोर्ट में पैथोलॉजी विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. रमीजुद्दीन नायक पर कई महिला डॉक्टरों के शोषण और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने के आरोपों का उल्लेख है. रिपोर्ट के मुताबिक उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराने वाली जूनियर डॉक्टर के अलावा आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज की एक बैचमेट और अन्य महिला डॉक्टरों ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं.
एसटीएफ की रिपोर्ट में डॉ. रमीजुद्दीन नायक पर छह महिला डॉक्टरों के शोषण का आरोप बताया गया है. हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का जवाब और मामले की न्यायिक स्थिति सामने आना अभी बाकी है.
नर्सिंग स्टाफ से लेकर डॉक्टरों तक पर आरोप
रिपोर्ट में गांधी वार्ड के नर्सिंग स्टाफ नफीस पर एक हिंदू महिला कर्मचारी के शारीरिक शोषण और धर्म परिवर्तन के बाद निकाह करने का आरोप है.फुरकान पर भी महिला कर्मचारी को प्रेम संबंध में फंसाकर निकाह को दबाव बनाने का आरोप लगा है.
माइक्रोबायोलॉजी विभाग के कर्मचारी शफात अली खान पर एक महिला कंप्यूटर ऑपरेटर से छेड़छाड़ और मुसलमान बनने का दबाव बनाने का आरोप है.शिकायत के बाद पीड़िता को संविदा की नौकरी से हटाए जाने का भी उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है.
रेडियोलॉजी विभाग के डॉक्टर रिजवान पर दो महिला डॉक्टरों को ब्लैकमेल कर मुसलमान बनने को दबाव का आरोप है.शिकायत करने पर परीक्षा में फेल करने की धमकी देने की बात भी सामने आई है.
विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल
एसटीएफ की रिपोर्ट में पैथोलॉजी विभाग के तत्कालीन विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सुरेश बाबू,डॉक्टर सुमायरा कय्यूम और बायोकेमेस्ट्री विभाग के लैब इंचार्ज डॉक्टर वाहिद अली की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं.
रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों पर शिकायतों के मामले में पक्षपात करने और आरोपियों को बचाने के आरोप हैं.विभाग में हिंदू रेजिडेंट डॉक्टरों को छुट्टी देने में भी पक्षपात किया जाता रहा.छठ पूजा/ परिजनों के अंतिम संस्कार तक में हिंदू रेजिडेंट डॉक्टरों को छुट्टी देने में अपमानित किया जाता था.जबकि मुस्लिम रेजिडेंट डॉक्टर और स्टाफ को नमाज पढ़ने और रिश्तेदारों के निकाह के लिए भी आसानी से छुट्टी दी जाती थी.
एसटीएफ चीफ ने शासन को भेजी सात पेजी रिपोर्ट
KGMU में आस्था परिवर्तन और उत्पीड़न के मामलों की शिकायत मिलने के बाद जांच यूपी एसटीएफ को सौंपी थी. जांच की जिम्मेदारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रमेश शुक्ला को दी गई थी.
जांच के आधार पर विशेष कार्य बल प्रमुख और अपर पुलिस महानिदेशक कानून-व्यवस्था अमिताभ यश ने सात पेज की संस्तुति रिपोर्ट शासन को भेजी है.अब इस मामले में शासन स्तर पर आगे की कार्रवाई और आरोपों की विस्तृत जांच पर नजर रहेगी.
लखनऊ के एरा यूनिवर्सिटी में लगा है अधिकतर डॉक्टरों का पैसा
जांच में यह बात भी सामने आई कि लखनऊ के एरा मेडिकल कॉलेज में ज्यादातर मुस्लिम डॉक्टरों का पैसा लगा है.इंटीग्रल यूनिवर्सिटी की फिजियोलॉजी डिपार्टमेंट में डॉक्टर नसीम खान कट्टरपंथी हैं.उन्होंने केजीएमयू में डॉक्टर जाकिर नायक की विचारधारा का सबसे पहले प्रचार प्रसार किया.
केजीएमयू में आई सर्जन रही डॉक्टर खालिदा नसीम ने इंटीग्रल यूनिवर्सिटी ज्वाइन की थी.लेकिन दिल्ली ब्लास्ट में मुख्य आरोपित डॉक्टर शाहीन के विरुद्ध कार्रवाई में ही डॉक्टर खालिदा नसीम ने इंटीग्रल यूनिवर्सिटी छोड दी. साल 2013 में केजीएमयू के जिम की सेकंड फ्लोर मस्जिद बना दी गई जिसमें इटावा,मैनपुरी, करहल के मौलाना आकर भाषणबाजी करते हैं.

