उत्तराखण्ड सहकारी संघों ने संपादित किये दो राष्ट्रीय ज्ञापन समझौते

राजभवन में अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष-2025 के  क्रम में ‘सहकारिता में सहकार’ कार्यक्रम, दो समझौता ज्ञापन संपादित

राजभवन देहरादून 17 सितम्बर, 2025 । राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त)  एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राजभवन में अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष-2025 के उपलक्ष्य में आयोजित ‘सहकारिता में सहकार’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री की उपस्थिति में भारतीय सहकारी समिति लिमिटेड और उत्तराखण्ड राज्य सहकारी संघ में समझौता ज्ञापन संपादित हुआ। समझौता ज्ञापन से न केवल बीज उत्पादन और वितरण क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलेंगी बल्कि राज्य सहकारी समितियों और किसानों के लिए भी मील का पत्थर सिद्ध होगा। दूसरा समझौता ज्ञापन राष्ट्रीय सहकारी निर्यात समिति और उत्तराखण्ड राज्य सहकारी संघ में हुआ जो राज्य के कृषि उत्पादकों, सहकारी समितियों और किसानों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।

राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने दो नवीन योजनाओं, उत्तराखण्ड राज्य सहकारी बैंक की ऋण नीति एवं वाणिज्यिक अचल संपत्ति- आवासीय गृण ऋण नीति का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में जसपुर की फीकापार एमपैक्स को उत्कृष्ट कार्य को सम्मानित किया गया। राज्य में उत्कृष्ट कार्य में जिला सहकारी बैंक लिमिटेड मुख्य शाखा देहरादून भी सम्मानित हुआ। साथ ही दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना लाभार्थियों को चेक वितरण भी किए गए।

इस अवसर पर राज्यपाल ले.जनरल गुरमीत सिंह ने कहा कि सहकारिता आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि सामूहिक प्रयासों का आंदोलन है। इसमें सभी का लाभ, सभी की भागीदारी और सभी की जिम्मेदारी निहित रहती है। भारतीय संस्कृति की इस धरा पर सहकारिता कोई नई अवधारणा नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन दर्शन का अभिन्न अंग है। सहकारिता एक ऐसी क्रांति है, जो हमें सामाजिक-आर्थिक समृद्धि की दहलीज तक ले आई है और मुझे विश्वास है कि यह क्रांति बहुत शीघ्र फलित होगी।

राज्यपाल जनरल सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति में ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम्’’  भाव सहकारिता की आत्मा है। इसका अर्थ है- सम्पूर्ण विश्व को परिवार मानकर सभी के हित में काम करना। आज जब संयुक्त राष्ट्र ने 2025 को अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष घोषित किया है, तब यह हमारे लिए गर्व की बात है कि भारतीय परंपराएँ इस वैश्विक दृष्टिकोण की आधारशिला रही हैं।

राज्यपाल ले.  जनरल सिंह ने कहा कि हमारे ‘महिला स्वयं सहायता समूह’ न केवल परिवार की आर्थिक रीढ़ बने हैं, बल्कि उद्यमिता में भी नई ऊँचाइयाँ छू रहे हैं। युवा भी अब स्टार्टअप, ऑर्गेनिक उत्पाद मार्केटिंग, प्रोसेसिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़कर सहकारिता आंदोलन को आधुनिक स्वरूप दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की सहकारी समितियाँ सेना, आईटीबीपी और अन्य अर्धसैनिक बलों को खाद्यान्न, डेयरी और अन्य आवश्यक वस्तुएँ आपूर्ति कर रही हैं। यह न केवल राज्य की सहकारिता क्षमता दर्शाता है, बल्कि राष्ट्रीय सेवा में योगदान का भी उत्कृष्ट उदाहरण है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सहकारिता, मानव समाज का सबसे पुराना और कीमती सिद्धांत है। सहकारिता केवल संगठनात्मक व्यवस्था नहीं, बल्कि समाज के समग्र विकास का सशक्त माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि सहकारिता का मूल उद्देश्य स्पर्धा नहीं अपितु आपसी सहयोग भावना से आगे बढ़ना है। इसका उद्देश्य एक-दूसरे को स्वावलंबी और सशक्त बनाना है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य में सहकारिता से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत की जा रही है। उन्होंने कहा कि देश में बहुउद्देश्यीय सहकारी समितियों के कंप्यूटरीकरण की शुरुआत उत्तराखण्ड से हुई है। प्रदेश की सभी 671 सहकारी समितियों का कंप्यूटरीकरण पूर्ण हो चुका है। उन्होंने बताया कि 24 समितियां जन औषधि केंद्र का कार्य कर रही हैं। 640 समितियां कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में विकसित की गई हैं। 13 जिलों की कुल 5511 समितियों में से 3838 समितियों का डेटा राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस पर अपलोड कर दिया गया है जिससे पारदर्शिता आई है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार ने फरवरी 2023 से अब तक 800 पैक्स, 248 नई डेयरी समितियाँ और 116 मत्स्य समितियाँ गठित की हैं। दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना में किसानों को 5 लाख रुपए तक ब्याज मुक्त ऋण दिया जा रहा है। प्रदेश के सहकारी बैंकों में 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक की जमापूंजी है, जिससे इन संस्थाओं में जनविश्वास प्रमाणित होता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की 1 लाख 63 हजार से अधिक बहनों ने ‘लखपति दीदी’ बनकर महिला सशक्तिकरण  में नया इतिहास रचा है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2024 में भारत में वैश्विक सहकारी सम्मेलन का सफल आयोजन हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी ने सहकारिता को भारतीय संस्कृति का आधार और जीवन पद्धति बताया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने सहकार से समृद्धि को साकार करने को अलग सहकारिता मंत्रालय गठित किया। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में देश में सहकारिता आंदोलन और अधिक मजबूत बनाया जा रहा है।

कार्यक्रम में सहकारिता मंत्री डॉक्टर धन सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य है जिसने महिला स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रुपये तक शून्य ब्याज ऋण योजना प्रारंभ की है। उन्होंने कहा कि अभी प्रदेश में लगभग 2 लाख लखपति दीदी बनी हैं, जिन्हें वर्ष 2026 तक 4 लाख तक पहुँचाने का लक्ष्य है। डॉक्टर रावत ने कहा कि यह देश का पहला राज्य है जिसने सहकारिता में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया है।

निदेशक सहकारिता (केंद्र सरकार) कपिल मीणा ने केंद्र सरकार के सहकारिता क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। सचिव सहकारिता डॉक्टर बी.वी.आर सी पुरुषोत्तम ने राज्य सहकारिता विभाग की योजनाओं और कार्यों की जानकारी दी। इस अवसर पर निबंधक सहकारिता डॉक्टर मेहरबान सिंह बिष्ट, अपर निबंधक श्रीमती ईरा उप्रेती एवं मंगला प्रसाद त्रिपाठी, संयुक्त निबंधक नीरज बेलवाल सहित सहकारिता विभाग एवं सहकारी बैंकों के अन्य अधिकारीगण तथा विभिन्न जिलों से आयी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं भी उपस्थित थी।

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