KGMU जिहाद: इंटर पास हस्साम अहमद “डॉक्टर” बन घेर रहा था हिंदू छात्रायें,जेल

लखनऊ 28 अप्रैल 2026 । किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ इंटर पास हस्साम अहमद  “डॉक्टर” बनकर हिंदू छात्राओं को निशाना बना रहा था।

फर्जी पहचान और जालसाजी: आरोपित हस्साम अहमद मात्र 12वीं पास है, लेकिन वह KGMU में एप्रन और स्टेथोस्कोप पहनकर खुद को डॉक्टर बताता था।  वह सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से छात्राओं के संपर्क में रहता था।
निशाने पर हिंदू लड़कियां:  दावा किया जा रहा है कि उसके निशाने पर विशेष रूप से हिंदू छात्राएं और पैरामेडिकल स्टाफ थे। उसने कथित तौर पर 50 से अधिक लड़कियों को दिल्ली एम्स (AIIMS) की एक अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में ले जाने के नाम पर फर्जी लेटर भी दिए थे।
कनवर्जन का आरोप:रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां इस मामले की जांच कनवर्जन रैकेट (Conversion Racket) के एंगल से भी कर रही हैं। आरोप है कि वह ‘कार्डियो सेवा संस्थान ट्रस्ट’ बनाकर लड़कियों को मुस्लिम बहुल इलाकों में कैंप लगाने के बहाने ले जाता था।
कैसे पकड़ा गया : KGMU की सतर्कता समिति ने आरोपित की संदिग्ध गतिविधियां देखते हुए उसे पकड़ पुलिस को सौंप दिया। वह काफी समय से अस्पताल परिसर में सक्रिय था और सीनियर डॉक्टर के रूप में छात्रों से घुलता-मिलता था।
पुलिस और प्रशासन इस मामले की गंभीरता से जांच कर रहे हैं। आरोपित हस्साम अहमद वर्तमान में पुलिस के कब्जे में है और जांच एजेंसियां पता लगा रही हैं कि क्या इस गतिविधि के पीछे कोई बड़ा समूह या सिंडिकेट कार्यरत है। सुरक्षा की दृष्टि से KGMU और अन्य चिकित्सा संस्थानों में बाहरी व्यक्तियों की पहचान की जांच और अधिक कठोर कर दी गई है।

निशाने पर थीं हिंदू छात्राएं… KGMU के 12वीं पास ‘डॉक्टर’ हस्साम अहमद पर सनसनीखेज खुलासा; लड़कियों को अपने जाल में था फंसाता
लखनऊ के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में एक सनसनीखेज जालसाजी सामने आई है. खुद को डॉक्टर बताने वाला 12वीं पास हस्साम अहमद हिंदू छात्राओं को निशाना बना रहा था. पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और इस मामले में लव जिहाद के एंगल से भी जांच की जा रही है.

लखनऊ में हस्साम अहमद नामक फर्जी डॉक्टर गिरफ्तार (Photo- ITG)

KGMU प्रशासन और पुलिस ने मिलकर फर्जी डॉक्टर हस्साम अहमद गिरफ्तार किया है, जो मेडिकल यूनिवर्सिटी की हिंदू छात्राओं को कनवर्जन रैकेट का शिकार बना रहा था. आरोपित ने खुद को डॉक्टर बताकर ‘कार्डियो सेवा संस्थान ट्रस्ट’ बना 50 से अधिक छात्राओं को दिल्ली एम्स (AIIMS) की कॉन्फ्रेंस में ले जाने के फर्जी लेटर थमा दिए.

वह फर्जी लेटर पैड और सोशल मीडिया से छात्राओं को मुस्लिम आबादी वाले इलाकों में मेडिकल कैंप लगाने के बहाने ले जाता था.केजीएमयू के डीन डॉक्टर केके सिंह की सक्रियता से 20 अप्रैल को इस पूरे फर्जीवाड़े का पता चला और आरोपित पुलिस को सौंप दिया गया.

हमारे पास आये विशिष्ठ प्रपत्रों से KGMU के फर्जी डॉक्टर हस्साम का बड़ा खेल उजागर हुआ है.आरोपित स्वयं को “भारतीय गौरव प्रतिभा सम्मान” से सम्मानित बताकर डॉक्टरों का भरोसा जीतता था.उसने प्रॉक्टर डॉक्टर केके सिंह के फर्जी हस्ताक्षर वाले प्रपत्र और फर्जी सर्टिफिकेट से डॉक्टरों,खासकर मुस्लिम महिला डॉक्टरों का नेटवर्क बनाने की कोशिश की.इन्हीं जाली प्रपत्रों से वह कॉन्फ्रेंस के नाम पर डॉक्टरों को प्रभावित करता था.

KGMU के प्रवक्ता का बयान

KGMU के प्रवक्ता डॉक्टर केके सिंह के अनुसार,इस जालसाजी के तार कनवर्जन और लड़कियों के शोषण से जुड़े हो सकते हैं.यह रैकेट केजीएमयू की छात्राओं को निशाना बनाकर उन्हें मुस्लिम बहुल इलाकों में ‘मेडिकल कैंप’ के नाम पर ले जाता था.19 अप्रैल को डॉक्टर केके सिंह ने खुद एक कैंप की पड़ताल की,जहां 10 केजीएमयू छात्राएं मिलीं.जांच में सामने आया कि हस्साम ने छात्राओं को दिल्ली एम्स में फर्जी कॉन्फ्रेंस का झांसा दिया था.एम्स से संपर्क करने पर पता चला कि ऐसी कोई कॉन्फ्रेंस प्रस्तावित ही नहीं है.

हस्साम के पास से केजीएमयू प्रशासन के अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर वाले दस्तावेज और ‘कार्डियो सेवा संस्थान’ नामक फर्जी ट्रस्ट के पेपर मिले हैं.इस संस्था का फाउंडर फईक अहमद मंसूरी है,जो केजीएमयू का ही छात्र है और अब संदेह के घेरे में है.हस्साम संस्था का को-फाउंडर था। फिलहाल,केजीएमयू प्रशासन और पुलिस इस ‘लव जिहाद’ और कन्वर्जन कोण की गहराई से जांच कर रहे हैं.

फर्जी लेटर और कॉन्फ्रेंस का झांसा

हस्साम अहमद ने जालसाजी के लिए बाकायदा एक नेटवर्क तैयार किया था. उसने हिंदू पैरामेडिकल स्टाफ और छात्राओं को ईमेल और डाक के जरिए दिल्ली एम्स में होने वाली इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का न्योता दिया. आरोपी ने छात्राओं को यकीन दिलाया कि उनका चयन इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिए हुआ है. पूछताछ में सामने आया कि वह छात्राओं को प्रभावित करने के लिए केजीएमयू के प्रवक्ता की डीपी का इस्तेमाल करता था. आरोपित ने स्वीकार किया कि वह सोशल मीडिया के जरिए छात्राओं से संपर्क कर उन्हें अपने जाल में फंसाता था.

हिंदू छात्राएं थीं निशाने पर

डीन डॉक्टर केके सिंह के मुताबिक, यह गिरोह विशेष रूप से हिंदू छात्राओं को टारगेट कर रहा था.आरोपित उन्हें सामाजिक सेवा के नाम पर प्रभावित करता और फिर मुस्लिम बहुल इलाकों के कैंपों में बुलाता था.एक छात्रा ने बताया कि वह इसे केवल सोशल एक्टिविटी समझकर शामिल हुई थी.प्रशासन ने लव जिहाद जैसे गंभीर एंगल पर भी जांच शुरू कर दी है.हालांकि, शारीरिक शोषण की खबरों पर संस्थान ने कहा है कि फिलहाल ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है,लेकिन हर पहलू की गहनता से पड़ताल जारी है.

3 साल पहले भी पकड़ा गया था हस्साम

यह पहली बार नहीं है जब हस्साम अहमद ने धोखाधड़ी की है.वह 3 साल पहले भी मरीजों से इलाज के नाम पर पैसे वसूलने के आरोप में पकड़ा गया था.इस बार उसने 8 लोगों का एक नेटवर्क बना रखा था,जिसमें कुछ मेडिकल संस्थानों के लोग भी शामिल बताए जा रहे हैं. आरोपित ने खुद माना कि वह केवल 12वीं पास है और एम्स कॉन्फ्रेंस को उसने कोई अनुमति नहीं ली थी. केजीएमयू प्रशासन की कमेटी ने आरोपित को पकड़कर पुलिस को सौंपा और पुलिस ने उसे जेल भेज दिया है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *