TCS कनवर्जन केस की निदा खान को क्यों न मिले जमानत? पुलिस ने कोर्ट में बताये कारण
TCS Conversion Case,Nida Khan Bail Plea: नासिक के टीसीएस धर्मांतरण मामले में निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका पर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है. एसआईटी जांच में पता चला कि निदा खान ने पीड़िता को जबरन इस्लाम अपनाने के लिए दबाव डाला और मोबाइल में धार्मिक ऐप डाले.
निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित
नासिक 28 अप्रैल 2026 । टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) धर्मांतरण मामले में आरोपित निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका पर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. एसआईटी जांच में निदा खान और मामले के अन्य आरोपितों के खिलाफ कई चौंकानेवाली बातें सामने आई हैं. निदा खान, पीड़िता को अपने घर ले जाती थी और उसे जबरदस्ती नमाज पढ़ना और हिजाब पहनना सिखाती थी. पुलिस को इस मामले में ‘मालेगांव पार्टी’ के बारे में भी आरोपित से पूछताछ करनी है, जिससे आरोपित पीड़िता का नाम बदलने को इस्तेमाल करते. हैरानी की बात यह है कि कनवर्जन बाद पीड़िता का नाम हनिया रखने का भी फैसला किया गया था. निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई में कई ऐसे सवाल पुलिस ने उठाए, जिससे बेल याचिका पर फैसला फिलहाल कोर्ट ने सुरक्षित रख लिया है. अगली सुनवाई 2 मई को है.
धमकी, यौन शोषण, कनवर्जन प्रयास
पीड़िता ने पुलिस को बताया है कि आरोपितों में से एक ने उसका यौन उत्पीड़न किया, अपनी शादी की बात छिपाई और कार्यस्थल पर उसका धर्म अपमानित किया, साथ ही उस पर इस्लाम अपनाने को दबाव डाला. ऐसे में कोर्ट ने माना कि मामला गंभीर है, आरोपित नंबर 1 ने शादी का झांसा देकर पीड़िता का यौन शोषण किया. आरोपित नंबर 2 ने कार्यस्थल पर पीड़िता को धमकाया कि उसके और दानिश शेख के संबंध वह उसके घर बता देगा, और इस तरह शारीरिक संबंध की मांग कर मोलेस्टेशन किया. साथ ही, पीड़िता की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाकर उसे डरा-धमकाकर कनवर्जन कराने का प्रयास किया गया.
निदा के मोबाइल की जांच को बताया जरूरी
निदा खान ने पीड़िता को कनवर्जन को ‘बुर्का’ और इस्लाम संबंधित पुस्तक (मुहम्मद पैगंबर का पवित्र जीवन) दी थी, जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया है. आरोपित निदा खान ने कनवर्जन उद्देश्य से पीड़िता के मोबाइल में इस्लामिक ऐप डाले और उसे यूट्यूब, इंस्टाग्राम और रील्स के मजहबी लिंक भेजे थे. इस संबंध में आरोपित का मोबाइल जब्त कर जांच करना जरूरी है. आरोपित निदा खान पीड़िता को अपने घर ले जाकर नमाज पढ़ना, हिजाब और बुर्का पहनना सिखाती थी. पुलिस को इस बारे में और अधिक जांच करनी है कि उसे ये वीडियो और सामग्री कहां से मिली.
क्या आरोपितों को मिली आर्थिक मदद, जांच जरूरी
पुलिस को यह पता लगाना है कि आरोपितों को यह अपराध करने को क्या किसी ने आर्थिक सहायता या मदद दी थी, और अपराध पकड़ में आया तो उन्हें किसने शरण दी. कंपनी से ट्रांसफर होने पर भी क्या निदा खान अन्य आरोपित के संपर्क में थी, इसकी भी जांच होनी बाकी है.
SC Act की धाराएं भी लगीं
मामले के सभी आरोपितों को पता था कि पीड़िता अनुसूचित जाति (SC) से है, फिर भी यह अपराध किया गया. इसलिए इस मामले में ‘अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम’ (Atrocities Act) की धाराएं लगाई गई हैं.
कौन है ‘मालेगांव पार्टी’, जानना चाहती है पुलिस
आरोपित दानिश शेख ने पीड़िता के शैक्षणिक और अन्य महत्वपूर्ण कागजात कब्जा लिये जो ‘मालेगांव पार्टी’ को दिये जाने थे और जिनसे पीड़िता का नाम बदला जाना था. पुलिस को इस ‘मालेगांव पार्टी’ के बारे में आरोपित से पूछताछ करनी है. आरोपित नंबर 1 (दानिश शेख) और आरोपित नंबर 2 (तौसिफ) पीड़िता को नौकरी के बहाने मलेशिया में ‘इमरान’ के पास भेजने वाले थे. पुलिस को इस इमरान और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जांच करनी है.
जमानत मिली, तो अन्य पीड़ित डर से सामने नहीं आएंगे
पुलिस को संदेह है कि आरोपितों ने इस पीड़िता की तरह अन्य लड़कियों से भी ऐसे ही अपराध किए होंगे, जिसकी जांच जरूरी है. पीड़िता के हिम्मत दिखाने के बाद, उसी कंपनी की 7 महिलाओं और 1 पुरुष ने आगे आकर आरोपितों के खिलाफ शिकायत की है. अब तक 8 मुकदमें हो चुके. आरोपित को जमानत मिली, तो अन्य पीड़ित भयवश सामने नहीं आएंगे. मामले की जांच अभी जारी है और महत्वपूर्ण गवाहों के बयान (B.N.S.S. धारा 183 में) अंकित होने बाकी है. जमानत पा आरोपित गवाहों को डरा-धमका सकते हैं.
सिर्फ पुलिस की फाइलों में ‘फरार’, AIMIM नेता इम्तियाज जलील तो मिल चुका निदा खान से 
नासिक टीसीएस (TCS) कंपनी के ऑफिस में यौन और धार्मिक उत्पीड़न में आरोपित प्रोसेस एसोसिएट निदा खान का ओवैसी की पार्टी AIMIM के नेता इम्तियाज जलील ने समर्थन किया है. जलील ने निदा खान से मिलने का दावा किया है. इस मुलाकात से पुलिस प्रशासनिक कार्यक्षमता पर सवाल उठ रहे हैं. टीसीएस मामले में मुकदमे के बाद से निदा खान भागी हुई है.
इस बीच, AIMIM नेता इम्तियाज जलील निदा खान का समर्थन कर उनके परिवार से मिला. मुंबई में एक कार्यक्रम में जलील ने कहा कि भले पूरी दुनिया खिलाफ हो, लेकिन वे निदा और उनके परिवार के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे. जलील ने मीडिया की कार्यप्रणाली पर भी निशाना साध मामले को कवर करने के तरीके पर सवाल उठाए.
कार्यक्रम में महाराष्ट्र सरकार पर साधा निशाना
AIMIM नेता जलील ने प्रशासन पर सांप्रदायिक सौहार्द बनाने में विफलता और विभाजनकारी बयानबाजी को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाया. जलील ने राज्य में बिगड़ती सुरक्षा व्यवस्था पर गहरी चिंता जताई कहा कि पुलिस शांति व्यवस्था बनाए रखने में असमर्थ है तो उसे “अपने थाने बंद करके घर बैठना चाहिए. गृह मंत्री सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकते तो उन्हें इस्तीफ़ा देकर नागपुर लौट जाना चाहिए.
पिछली सुनवाई में वकील ने निदा खान के गर्भवती होने का किया था दावा
कोर्ट जांच अधिकारी और शिकायतकर्ता के लिखित जवाब पर विचार कर अग्रिम जमानत को लेकर अपना आदेश देगा. पिछली सुनवाई में निदा खान के वकील ने अग्रिम जमानत को उसके गर्भवती होने का तर्क दिया था. साथ ही कहा था कि टीसीएस में महिलाओं के उत्पीड़न और कन्वर्जन के आरोपों से उसका कोई लेना-देना नहीं है.
निदा को कभी भी पकड़ सकती है पुलिस
स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अजय मिस्र ने कोर्ट में बताया कि निदा खान अभी भागी है और उसका मोबाइल फोन जब्त कर पता लगाना ज़रूरी है कि उसने और कितनी लड़कियों से ऐसा किया है.अगर उसे बेल मिलती है तो वह गवाहों पर दबाव डाल सकती है। कोर्ट से निदा खान को कोई प्रोटेक्शन नहीं है,इसलिए पुलिस उसे कभी भी पकड़ सकती है. इन सभी तर्कों के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। फैसला 2 मई को आयेगा.
निदा खान के वकील ने आरोपों को नकारा
निदा खान के वकील राहुल कासलीवाल ने सब बातें नकारी है.उन्होंने मीडिया से कहा कि हम पहले दिन से कह रहे हैं कि महाराष्ट्र में धर्मपरिवर्तन कानून नहीं है, उत्तर प्रदेश और बाकी स्टेट्स में लागू धर्म परिवर्तन कानून का हमने अभ्यास किया है. केस में जो भारतीय न्यायसंहिता अनुसार धाराएं लगी है वह सिर्फ धार्मिक भावनायें आहत करने जैसी धाराएं हैं,कनवर्जन हुआ ही नहीं. मामले में अलग-अलग FIR हैं जबकि केस का स्थान और विक्टिम एक ही है. इसलिए एक ही FIR होनी चाहिए, इस मामले में 9 FIR हैं.
कैसे खुला TCS कांड?
मामले की शुरुआत फरवरी 2026 में हुई, जब एक राजनीतिक कार्यकर्ता ने नासिक पुलिस में शिकायत कराई कि एक कंपनी में कार्यरत हिंदू महिला रमजान के रोजे रख रही थी. इसी पर पुलिस को संदेह हुआ और उन्होंने गुप्त जांच की, जो आगे चलकर बड़े अनावरण में बदली.
पुलिस ने महिला कांस्टेबल हाउसकीपिंग स्टाफ बनाकर कंपनी में भेजी, ताकि आंतरिक गतिविधियों पर नजर रखी जा सके. अधिकारियों ने हर आंतरिक गतिविधि पर निगरानी रखी और महत्वपूर्ण प्रमाण एकत्र किए.
जांच में यह भी आया कि कुछ टीम लीडर पद का गलत इस्तेमाल कर चुनी कर्मचारियों को मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान कर कन्वर्जन को दबाव बना रहे थे. मामला खुलने पर सात पुरुष और एक महिला पकड़ी गई, जबकि निदा खान अभी भी भागी बताई जा रही है.

