ममता कुर्सी न छोडे तो क्या: नई सरकार का शपथग्रहण तो रुकेगा नही

क्या बंगाल में नए CM का शपथ ग्रहण अटकेगा? जानें- ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं देंगी तो
पश्चिम बंगाल चुनाव में बीजेपी ने 207 सीटें जीती हैं जबकि टीएमसी 80 सीटों पर सिमटकर रह गई. वहीं, कांग्रेस सिर्फ दो सीट ही जीत पाई.

क्या बंगाल में अटकेगा नए सीएम का शपथ ग्रहण.
नई दिल्ली,05 मई 2026,पश्चिम बंगाल में बीजेपी की प्रचंड जीत और तृणमूल कांग्रेस की हार पर ममता बनर्जी खफा हैं. उन्होंने चुनाव में टीएमसी की हार के लिए बीजेपी और चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया. ममता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर वो पद से इस्तीफा नहीं देंगी तो क्या बंगाल में नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण अटक सकता है?

लेकिन सच ये है कि अगर ममता बनर्जी पद से इस्तीफा नहीं भी देती हैं तो भी नई विधानसभा के गठन और नए मुख्यमंत्री के शपथ विधि पर कोई असर नहीं पड़ेगा. राज्यपाल मौजूदा मुख्यमंत्री के इस्तीफे के बगैर भी नई विधानसभा में नई सरकार का मुख्यमंत्री नियुक्त कर सकते हैं.

दरअसल कार्यकाल के बीच मुख्यमंत्री बदलने को लेकर संवैधानिक अड़चन है लेकिन विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने और नई विधानसभा में कोई अड़चन नहीं है. ममता के इस्तीफा देने या नहीं देने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा. चुनाव आयोग ने जिनको जीत का प्रमाण पत्र दिया है वही मान्य होगा. सात मई को मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल पूरा हो जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट में वकील और संविधान के जानकार ज्ञानंत सिंह के मुताबिक, विधानसभा के कार्यकाल के बीच मुख्यमंत्री बदलने को लेकर तो संवैधानिक अड़चन हो सकती है लेकिन विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने के बाद नई विधानसभा में नई सरकार के गठन में कोई अड़चन नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट में वकील विष्णु शंकर जैन के मुताबिक ममता के इस्तीफा देने या नहीं देने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा. ममता लाख कहे कि मैं नहीं हारी हूं लेकिन जीत उसी की मानी जाएगी जिसे चुनाव आयोग ने सर्टिफिकेट दिया है.

कानून और संवैधानिक परंपराओं के जानकारों के मुताबिक, संविधान के अनुच्छेद 172 में विधानसभा का कार्यकाल पांच साल का होगा. विधानसभा का कार्यकाल उसकी पहली बैठक से शुरू होता है. सात मई को मौजूदा विधान सभा का कार्यकाल पूरा हो जाएगा.

ज्ञानंत सिंह के मुताबिक, संविधान के अनुच्छेद 164 में राज्य में सरकार गठन की प्रक्रिया और राज्यपाल के अधिकार और शक्तियों का वर्णन है. उसमें कहा गया है कि राज्यपाल अपनी सरकार चलाने के लिए मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करता है. ये सरकार राज्यपाल की इच्छा तक चलती है. अब अगर ममता इस्तीफा देने से मना कर रही है तो राज्यपाल संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग कर संवैधानिक मशीनरी का ब्रेकडाउन यानी संकट का हवाला देते हुए राष्ट्रपति शासन की सिफारिश भी कर सकते हैं.

बता दें कि मंगलवार को कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ममता बनर्जी ने इस्तीफे के सवाल पर कहा कि मेरा इस्तीफा देने का सवाल ही नहीं उठता. हम चुनाव हारे नहीं है. यह पूछे जाने पर कि क्या वह राजभवन जाएंगी. इस पर ममता ने कहा कि हम नैतिक रूप से जीते हैं. मैं लोकभवन जाकर इस्तीफा नहीं दूंगी. पार्टी सदस्यों के साथ आगे की स्ट्रैटेजी पर चर्चा की जाएगी.

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