काकरोच सौरव दास/योगेश शर्मा कहां का नागरिक है? मद्रास हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

क्या CJP नेता सौरव दास ‘नेपाली’ हैं? मद्रास हाई कोर्ट ने जांच के लिए केंद्र को भेजा नोटिस; 6 सप्ताह में देना होगा उत्तर
कांचीपुरम के एक व्यवसायी ने मद्रास हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की। उन्होंने सीजेपी नेता सौरव दास के कथित तौर पर मूल नेपाल से जुड़े होने की जांच की मांग की। याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार, क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी और 10 अन्य लोगों को नोटिस जारी किया है।सौरव दास की नागरिकता की जांच के लिए हाई कोर्ट ने भेजा नोटिस।
चेन्नई 03 नवंबर  2026: मद्रास हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक नोटिस जारी किया है। यह नोटिस सौरव दास की नागरिकता की जांच और उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स को ब्लॉक करने की मांग वाली एक याचिका पर दी गई है। यह याचिका कांचीपुरम जिले के एक व्यवसायी गणेश कुमार ने दायर की थी। उन्होंने मांग की कि केंद्रीय गृह मंत्रालय को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के राष्ट्रीय सह-संयोजक योगेश शर्मा उर्फ ​​’सौरव दास’ और उनके माता-पिता की पृष्ठभूमि और अन्य विवरणों की तुरंत एक विस्तृत, गहन और निष्पक्ष जांच करने का निर्देश दिया जाए। अपनी याचिका में गणेश कुमार ने कहा है कि कथित तौर पर दास का मूल नेपाल से जुड़ा है, और इस बात की जांच होनी चाहिए। अगर यह सच साबित होता है, तो “उन्हें हमारी सरकार और हमारी न्यायपालिका के बारे में उपदेश देने का कोई अधिकार नहीं है।” उन्होंने दास पर न्यायपालिका के प्रति “अपमानजनक भाषा” इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।

‘निरस्त हो पासपोर्ट और आधार कार्ड’

याचिकाकर्ता ने मांग की है कि अगर सौरव दास दोषी पाए जाते हैं, तो उनका पासपोर्ट और आधार कार्ड रद्द कर दिया जाए। मुख्य न्यायाधीश एस.ए. धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ के समक्ष कांचीपुरम जिले के गणेश कुमार द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) सुनवाई के लिए आई। कोर्ट ने केंद्र सरकार, क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी और 10 अन्य लोगों को नोटिस जारी किया है, जिसका जवाब छह सप्ताह के भीतर देना होगा। गणेश कुमार ने अपनी याचिका में इलेक्ट्रॉनिक्स और दूरसंचार मंत्रालय से यह निर्देश देने की भी मांग की है कि “सौरव दास” नाम के ट्विटर और इंस्टाग्राम हैंडल को ब्लॉक किया जाए। साथ ही, उन्हें न्यायपालिका और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के खिलाफ आगे कोई भी अपमानजनक बयान देने से रोका जाए।

संविधान के अपमान का आरोप
गणेश कुमार ने यह भी मांग की कि जब तक यह मामला चल रहा है, तब तक सौरव दास को न्यायपालिका के खिलाफ किसी भी तरह की मानहानिपूर्ण, डराने-धमकाने वाली, अभद्र, अश्लील या अपमानजनक टिप्पणी करने से रोका जाए। इसमें विशेष रूप से सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और निचली अदालतों के न्यायाधीशों के खिलाफ की जाने वाली व्यक्तिगत टिप्पणियां शामिल हैं। यह रोक सोशल मीडिया सहित किसी भी मीडिया प्लेटफॉर्म पर लागू होनी चाहिए, चाहे वह सौरव दास खुद करें या उनके किसी दोस्त, सहयोगी, एजेंट या प्रतिनिधि के माध्यम से हो। गणेश कुमार ने कहा कि सौरव दास लगातार न्यायपालिका के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो अपने आप में संविधान का अपमान है।

फंडिंग की भी जांच की मांग
गणेश कुमार ने कहा कि अगर यह जानकारी सच है कि सौरव दास की जड़ें नेपाल से जुड़ी हैं, तो योगेश शर्मा नाम के इस व्यक्ति ने जानबूझकर इन तथ्यों को छिपाया है और धोखाधड़ी करके भारत में आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड और पासपोर्ट हासिल किया है। उसे न्यायपालिका को अपशब्द कहने का कोई अधिकार नहीं है। राष्ट्रहित में, इस बात की गहराई से जांच होनी चाहिए कि उसने आधार कार्ड और पासपोर्ट कैसे हासिल किया, उसे कहां से फंड मिल रहा था, और वह किन स्रोतों से पैसा पा रहा था। साथ ही, इस बात की भी जांच जरूरी है कि वह किस मकसद से न्यायपालिका के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहा था। उन्होंने आगे कहा कि जवाबदेही तय करने के लिए, उस खाते की भी निश्चित रूप से जांच होनी चाहिए जहां से उसे फंड मिल रहा था।

 

केजरीवाल के पालतू पत्रकार सौरव दास और केजरीवाल को बरी करने वाले जज का पूरा सच👇

जो दिख रहा है और दिखाया जा रहा है सब नार्मल लग रहा होगा, मगर सब खेल एक बड़ी प्लानिंग के तहत हो रहा है 🤔

अचानक केजरीवाल बरी हुए, फिर एक ट्वीट आया और सारे AAP नेता लगे उसको Quote Tweet कर एक जज और न्यायपालिका पर सवाल उठाने। आइए जानें कि कौन है वह पत्रकार, कैसे और कहां लिखी गई यह स्क्रिप्ट –

कड़ियां जोड़िए, दिनांक देखिए और मामला समझिए कि यह संयोग है या साजिश?

◾️11 फरवरी 2026- AAP सप्पोर्टर सौरव दास को एक स्क्रिप्टेड सपना आता है और वह एक RTI फाइल करता है। पूछता है – पिछले तीन साल में सरकारी पैनल वकीलों को कितने केस दिए गए।

◾️12 फरवरी 2026- निचली अदालत केस में डिस्चार्ज ऑर्डर सुरक्षित रख लेती है।

◾️27 फरवरी 2026 को फैसले आता है केजरीवाल और 22 आरोपी डिस्चार्ज हो जाते हैं।

◾️CBI इस फैसले के ख़िलाफ़ हाई कोर्ट जाती है

◾️11 मार्च 2026 – केजरीवाल मुख्य न्यायधीश से रिक्यूजल मांगते हैं।

◾️13 मार्च को मुख्य न्यायधीश इससे साफ मना कर देते हैं क्योंकि 31 दिसंबर 2025 के ऑर्डर के मुताबिक 5 जनवरी 2026 से सांसदों और विधायकों के सभी अपराधिक मामले जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा सुनेंगी ऐसा रोस्टर जारी हुआ था। यह एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है।

◾️22 मार्च 2026-राहत न मिलने पर केजरीवाल सुप्रीम कोर्ट जाते हैं और फिर अपनी याचिका वापस ले लेते हैं।

◾️9 अप्रैल 2026- सौरव दास अपनी स्क्रिप्टेड कहानी का इस्तेमाल कर एक लेख लिखता है, जिसे AAP के नेता सभी नेता उसे quote tweet करते हैं और जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा और उनके बच्चों को टारगेट करते हैं।

◾️प्लानिंग के तहत हाई कोर्ट में केजरीवाल ने खुद अपने केस की पैरवी किया और जज पर ही इल्ज़ाम लगा दिया, क्योंकि उनके वकील की पैरवी पर मीडिया में ज़्यादा चर्चा नहीं होता, इसके तहत मीडिया में चर्चा करवाकर जज पर प्रेशर बनाने की मंशा थी

◾️कोई वकील जज पर झूठा इल्ज़ाम लगा नहीं सकते, इसलिए प्लानिंग के तहत ख़ुद केजरीवाल वकील बनकर जज पर इल्ज़ाम लगाया

ऐसा पहली बार नहीं हुआ यह अनगिनत बार हुआ प्रदूषण हो या अन्य कई ऐसे मामले जब सौरव दास को आपियों ने quote किया और हल्ला मचाया।

अब सोचिए एक सीटिंग जज जो प्रक्रिया के तहत अपना काम कर रही हों उन्हें और उनके बच्चों पर यह निजी हमले इसलिए किए गए क्योंकि उन्होंने शराब के मुख्य आरोपी केजरीवाल के पक्ष में मनचाहा फैसला नहीं दिया। यह सवाल एक जज का नहीं पूरी न्याय व्यवस्था को कठघरे में खड़ा करने का है और पूरी साजिश के साथ केजरीवाल ने इसकी पटकथा लिखी।

अब इस केस के दूसरे पहलू पर आते हैं

केजरीवाल शायद यह भूल गए कि एक जज पर आरोप लगाते हुए वह खुद यह याद दिलाएंगे कि सिक्के का दूसरा पहलू क्या है? जिस जज ने केजरीवाल को डिस्चार्ज किया –

आपिए और पापिये पार्टी के नेता ट्रायल कोर्ट के जज ‘जितेंद्र सिंह’ के बारे में बात क्यों नहीं कर रहे हैं:

1 – 27 फरवरी 2026 : शराब घोटाले के सभी 23 आरोपियों अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसौदिया सहित को बरी कर दिया गया।
2 – 31 जुलाई 2025 : सत्येन्द्र जैन मानहानि मामला बनाम बांसुरी स्वराज दिनांक: जैन द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका/मानहानि शिकायत खारिज।


3 – 14 नवंबर 2024: अमानतुल्ला खान दिल्ली वक्फ बोर्ड मनी लॉन्ड्रिंग केस: जमानत दी गई और मंजूरी की कमी के कारण पूरक आरोप पत्र पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया गया; रिहाई का आदेश दिया.


4 – 2024:2025- मनीष सिसौदिया उत्पाद शुल्क नीति जमानत / प्री-चार्ज कार्यवाही: उत्पाद शुल्क नीति मामले में यह कार्रवाई डिस्चार्ज देने की एक प्रक्रिया जैसी थी।


5 – 2024:2025- संजय सिंह उत्पाद शुल्क नीति संबंधित कार्यवाही: ढीली कार्रवाई, अंततः जमानत, यह केस को आसान बनाने का एक हिस्सा प्रतीत होता है।

6 – नवंबर 2024: अमानतुल्ला खान अनुपूरक आरोपपत्र: प्रक्रियात्मक राहत प्रदान की गई; मंजूरी के आधार पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया।


7 – 2025: मनीष सिसौदिया नियमित जमानत आवेदन (आबकारी नीति): 2025 से पहले की सुनवाई परिणाम: पूर्ण रिहाई से पहले अंतरिम राहत।

अब जरा इन सवालों का जवाब ढूंढिए, पूछिए👇

👉 40 हजार पेज का जजमेंट लिख कर बिना कुछ तथ्य देखे बरी कैसे किए गए केजरीवाल? क्या यह जजमेंट AAP दफ्तर में लिखे गए थे?

👉केजरीवाल को जिस जज ने बरी किया उसकी विचारधारा क्या है? हर बार AAP के हर अपराधी, भ्रष्ट नेता को राहत एक ही जज से कैसे मिलती है?

👉केजरीवाल, सिसोदिया, अमानतुल्लाह खान इन सबको जमानत देने वाला जज एक ही कैसे है?

👉दूसरे जज जिस मामले में इन्हें लताड़ लगा चुके, किंगपिन बता चुके वहीं यह कैसा संयोग बना कि फैसला देते हुए एकतरफा बरी का फैसला सुना दिया गया?

 

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