क्रिप्टो-क्रिश्चियन राशिद गोदाम में करा रहा था प्रार्थना, 14 पर मुकदमा

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कौन हैं क्रिप्टो-क्रिश्चियन लोग? ईसाई धर्म में गुप्त रखते हैं अपनी आस्था! मुजफ्फरनगर में खुला धर्मांतरण का राज
मुजफ्फरनगर के मंसूरपुर में गुप्त ईसाई प्रार्थना सभा पर पुलिस ने छापा मारा। धर्मांतरण के मामले में 12 आरोपी पकड़े गए। इनमें पांच महिलाएं भी शामिल हैं। दो लोग फरार हैं जिनको पुलिस तलाश रही है।

मुजफ्फरनगर : जिल के मंसूरपुर क्षेत्र के जड़ौदा गांव में ‘ क्रिप्टो-क्रिश्चियन ‘ मामले का भंडाफोड़ हुआ है। यहां एक गोदाम में प्रार्थना सभा चल रही थी। इसी बीच पुलिस और बजरंग दल के कार्यकर्ता वहां पहुंच गए। वहां पर 12 आरोपी पकड़े गए। पुलिस ने गोदाम के मालिक सहित 14 लोगों के खिलाफ धर्मांतरण की एफआईआर दर्ज की है। वहां पर पकड़े गए लोगों में पांच महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस ने उनको वन स्टॉप सेंटर भेज दिया है।

मुजफ्फरनगर के मंसूरपुर में लालच देकर धर्म परिवर्तन कराने के मामले में पांच महिलाओं को भी पकड़ा है (फोटो-NBT)

बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन का षड्यंत्र
बताया जाता है कि बजरंग दल ने पुलिस को जानकारी दी थी कि सुजडू गांव का राशिद जड़ौदा गांव के अपने गोदाम में लोगों का धर्मांतरण करा रहा है। वह अपने साथियों के साथ क्षेत्र के गांवों के लोगों को बहला-फुसलाकर और लालच देकर धर्मांतरण करा रहा है। इस पर मिशन शक्ति और पुलिस टीम मौके पर पहुंची। उस समय राशिद के गोदाम में प्रार्थना सभा चल रही थी। जब पुलिस ने वहां मौजूद लोगों को घेरा तो उसका विरोध हुआ।

14 के खिलाफ एफआईआर दर्ज
पुलिस ने उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 की धारा-3 व 5 के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली है। पुलिस ने मौके से महिलाओं सहित 12 लोगों को पकड़ा है। अन्य दो आरोपियों को तलाशा जा रहा है। पुलिस ने वादी की तहरीर पर राशिद सहित 14 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

क्रिप्टो-क्रिश्चियन कौन लोग होते हैं?
क्रिप्टो-क्रिश्चियन (Crypto-Christian) गुप्त ईसाई धर्म अनुयायियों को कहते हैं। यह वे लोग होते हैं जो आंतरिक रूप से ईसाई धर्म में विश्वास रखते हैं, लेकिन वे अपनी आस्था को गुप्त रखते हैं। वे सार्वजनिक रूप से खुद को किसी अन्य धर्म, जैसे हिंदू, इस्लाम आदि धर्म का अनुयायी बताते हैं, लेकिन वास्तव में उनकी आस्था ईसाई धर्म में होती है। यानी वे दिखावा किसी धर्म का करते हैं और मानते ईसाई धर्म को हैं।

गोपनीय आस्था का क्या कारण?
क्रिप्टो-क्रिश्चियन लोगों के ऐसा करने के पीछे कई कारण हैं। इनमें से प्रमुख कारण धार्मिक उत्पीड़न और सुरक्षा से जुड़ा है। अफगानिस्तान, सोमालिया जैसे कई इस्लामिक देशों या फिर उत्तर कोरिया जैसे कम्युनिस्ट देश में ईसाई धर्म अपनाना गैरकानूनी है। ऐसा होने पर जानलेवा हमले तक हो सकते हैं। इन देशों में ईसाई धर्म अनुयायी अपनी आस्था जाहिर नहीं करते हैं। वे गुप्त रूप से प्रार्थना करते हैं।

आरक्षण और सुविधाएं छिनने का भय
दुनिया के कई देशों में ऐसे कई सामाजिक समुदाय हैं जिनमें ईसाई धर्म के लिए स्वीकार्यता नहीं है। ऐसे समुदायों में रहने वाले लोग अपने समुदाय और कहीं-कहीं परिवार से भी बहिष्कृत होने के भय से अपनी आस्था छिपाते हैं। भारत में इससे अलग ऐसे बहुत मामले देखने को मिलते हैं जिनमें धर्म परिवर्तन करके ईसाई बन चुके लोग आदिवासी या दलित जातियों के होने से मिलने वाले सरकारी आरक्षण और अन्य सुविधाओं को खोना नहीं चाहते। इसके लिए वे सरकारी दस्तावेजों में या सार्वजनिक जीवन में अपनी मूल पहचान हिंदू ही बनाए रखते हैं।

क्रिप्टो-क्रिश्चियनिटी सदियों से अस्तित्व में
क्रिप्टो-क्रिश्चियनिटी कोई नई बात नहीं है, इसका जिक्र इतिहास में भी है। इतिहास में ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं। ऑटोमन साम्राज्य के दौरान ग्रीस और तुर्की में ईसाइयों को अपनी जान की रक्षा के लिए बाहरी तौर पर इस्लाम धर्म अपनाना पड़ा था। तब वे अपने घरों में गुप्त रूप से ईसाई धर्म परंपराओं का पालन करते थे। उन्होंने अपने नाम भले ही बदल लिए थे, लेकिन उनकी आस्था ईसाई धर्म के प्रति ही थी।

लालच देकर धर्म परिवर्तन
बताया जाता है कि मंसूरपुर में धर्मांतरण करने वाले ईसाई धर्म अपनाने के लिए लोगों को लालच देते थे। वे मुफ्त में मकान बनवाने, शादी कराने, मुफ्त में इलाज कराने और शादी के लिए पैसे देने का लालच देते थे। वे सीधे-साधे गांव के लोगों को लालच देकर फंसा लेते थे। वे ग्रामीणों को छलपूर्वक प्रलोभन देकर लोगों को धर्म बदलने के लिए प्रेरित करते थे।

पुलिस ने राशिद के गोदाम से छह मोबाइल, तीन धार्मिक पुस्तकें और तीन डायरियां बरामद की हैं। इनमें आरोपियों की गतिविधियों का रिकॉर्ड है। पुलिस इनकी जांच कर कर रही है। पुलिस राशिद और उसके भाई मोनिश की तलाश कर रही है।

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