SC/ST क्षतिपूर्ति की खेती: मुस्लिम लड़की,मंजय राम करते थे SC/ST फर्जी मुकदमे
Darbhanga Man Marry Mumbai Muslim Girl Obtained Scst Certificate Fraudulently Case Against Upper Caste
मुंबई की मुस्लिम लड़की से शादी, बिहार में बनवाया SC/ST सर्टिफिकेट, सवर्णों पर केस कर उठाया मुआवजा
दरभंगा के बिरौल में एक शख्स ने मुंबई की मुस्लिम लड़की से शादी की। फिर बिहार में उसका फर्जी नाम और SC/ST प्रमाण पत्र बनवाया। आरोपी ने रिश्तेदारों को फर्जी सास-ससुर बनाकर मुआवजा लिया। फिर ग्रामीणों पर SC/ST एक्ट में केस दर्ज करा दिया। फिलहाल मामले की प्रशासनिक जांच जारी है।
दरभंगा 26 जुलाई 2026 : बिहार के दरभंगा जिले के बिरौल थाना क्षेत्र स्थित बूचौली गांव से हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। मुंबई में मजदूरी करने वाले मंजय राम नाम के शख्स ने मुस्लिम लड़की से लव मैरिज की। गांव में उसका नाम बदलकर अंकिता देवी रख दिया। इसके बाद उसने फर्जी कागजातों के आधार पर अपनी पत्नी का SC/ST प्रमाण पत्र बनवाया। इतना ही नहीं, उसने इस फर्जी पहचान के जरिए गांव के लोगों पर SC/ST एक्ट में केस दर्ज कराकर सरकारी सहायता राशि भी हासिल कर ली। फर्जी सास के खुलासा किए जाने के बाद अब प्रशासन इस पूरे फर्जीवाड़े की जांच में जुट गया है।
फर्जी सास-ससुर से SC/ST प्रमाण पत्र का खेल
मुंबई से गांव लौटने के बाद मंजय राम ने अपनी पत्नी के स्थानीय दस्तावेज बनवाए। इसमें उसने पटनिया गांव निवासी अपने रिश्तेदार देवेंद्र मोची और घूरनी देवी को युवती का सास-ससुर दिखाया। इन्हीं फर्जी कागजातों के आधार पर उसने अंकिता देवी के नाम से SC/ST प्रमाण पत्र जारी करवा लिया।
सवर्णों पर फर्जी केस से सरकारी मुआवजा,मुकदमा: फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर मंजय ने गांव के बड़गांव निवासी अखिलेन्द्र कुमार सिंह और संजय कुमार सिंह समेत कई लोगों पर SC/ST एक्ट में केस कराया।
सरकारी लाभ: इस केस के आधार पर उसने अनुसूचित जाति अत्याचार निवारण योजना में सरकारी मुआवजा राशि भी हासिल कर ली।
शिकायत: पीड़ितों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए बिरौल एसडीपीओ और सीओ को आवेदन सौंपा है।
जांच में फर्जी सास का बड़ा अनावरण
पुलिस क्षेत्राधिकारी की ओर से गठित जांच टीम के सामने घूरनी देवी ने कहा कि अंकिता देवी नाम की उनकी कोई बेटी नहीं है और न ही उन्होंने उसकी शादी बूचौली में की है। घूरनी देवी ने बताया कि मंजय एक साल पहले उनका आधार कार्ड ले गया था, जिसका इस्तेमाल उसने इस फर्जीवाड़े में किया।
अत्याचार निवारण में कितनी क्षतिपूर्ति मिलती है?
बिहार में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम में पीड़ितों और उनके आश्रितों को अपराध की गंभीरता के आधार पर 85,000 से लेकर 8.25 लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता( क्षतिपूर्ति /राहत राशि) और पुनर्वास लाभ दिए जाते हैं।
अपराध की प्रकृति कुल क्षतिपूर्ति राशि
हत्या/मृत्यु होने पर
8,25,000 रुपए (साथ ही परिवार को पेंशन और पुनर्वास)
गंभीर शारीरिक चोट या अंग-भंग/एसिड अटैक
4,15,000 से 8,25,000 तक
बलात्कार या यौन उत्पीड़न
5,00,000 (वयस्क)/8,25,000 (नाबालिग के मामले में विशेष प्रावधान)
महिला की अस्मिता से खिलवाड़/हमला (Sec 354 IPC)
2,00,000 रुपए
गाली-गलौज, सार्वजनिक अपमान या छुआछूत 1,00,000 रुपए
मकान/संपत्ति का नुकसान, भूमि पर अवैध कब्जा 1,00,000 (साथ ही जमीन/संपत्ति की वापसी)
मतदान से रोकना या चुनाव लड़ने से रोकना 85,000 रुपए
पंचायत की मुखिया रीता देवी ने बताया कि जांच में दिए गए पते पर अंकिता देवी नाम की कोई महिला नहीं रहती और प्रथम दृष्टया जाति प्रमाण पत्र पूरी तरह फर्जी लग हो रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि फर्जीवाड़े और सरकारी राशि के दुरुपयोग पर प्रशासन क्या सख्त कार्रवाई करता है।

