नकदी गणना लापरवाही को स्थानीय ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र उत्तरदायी:SIT
चंदा गिनने की जगह जेब-मोजे में छिपाते थे नोट, अनिल मिश्रा पर गंभीर आरोप… SIT रिपोर्ट में बड़े अनावरण
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की जांच कर रही SIT की अंतरिम रिपोर्ट में बड़े अनावरण हुआ है. रिपोर्ट श्रीराम मंदिर ट्रस्ट ने सार्वजनिक कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार CCTV फुटेज में नोट छिपाने, फुटेज हटाने और गबन जैसे 70 संकेत मिले हैं. 6 लोगों की प्रथमदृष्टया संलिप्तता मिली है,जबकि ट्रस्ट के डॉक्टर अनिल मिश्रा की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं.
अयोध्या,06 जुलाई 2026, अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी की जांचकर्ता विशेष जांच टीम की अंतरिम रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण दावे हैं. रिपोर्ट के अनुसार CCTV फुटेज में नोट छिपाने, फुटेज हटाने और गबन जैसी गतिविधियों के 70 प्रमाण मिले हैं. रिपोर्ट में जांच की दिशा, प्रमुख निष्कर्ष, जमीन खरीद का ब्यौरा और अलग-अलग बैंकों में जमा करोड़ों रुपए की जानकारी का भी दावा किया गया है.
अंतरिम रिपोर्ट के अनुसार, ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी डॉ. अनिल मिश्रा वित्तीय मामलों और नकदी संकलन प्रबंधन की निगरानी कर रहे थे. बैंक के साथ तय SOP और सहमति बिंदु तैयार करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है. SIT का कहना है कि तलाशी न किए जाने की जानकारी उन्हें आंतरिक माध्यमों से दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद कोई प्रभावी लिखित निर्देश जारी नहीं किए गए.
बायोमीट्रिक उपस्थिति, निर्धारित वेशभूषा, निजी वस्तुओं पर प्रतिबंध, हुंडीवार गणना, मूल्यवर्गवार अभिलेखीकरण और दैनिक प्रतिवेदन जैसी व्यवस्थाओं को लागू कराने के लिए भी कोई प्रभावी सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए. विशेष जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि पूर्व निर्धारित तलाशी व्यवस्था को शिथिल करने के लिए भी डॉक्टर अनिल मिश्रा उत्तरदायी हैं.
सीसीटीवी फुटेज में क्या मिला?
SIT का कहना है कि उन्होंने सुरक्षा उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित नहीं किया. अनुपालन में कमी की जानकारी होने के बावजूद पर्याप्त सुधारात्मक कार्रवाई नहीं कराई. रिपोर्ट में कहा गया है कि उपलब्ध CCTV फुटेज का परीक्षण किया गया. ट्रस्ट ने SIT को बताया कि CCTV प्रणाली की स्टोरेज क्षमता सीमित थी. फुटेज तय अवधि के बाद अपने आप डिलीट हो जाती थी हो जाती थी.
इसलिए केवल सीमित अवधि की फुटेज उपलब्ध हो सकी. यह फुटेज 27 अप्रैल से 5 जून 2026 तक की आंशिक अवधि की बताई गई है. SIT के अनुसार गणना कक्ष में कुछ कर्मचारियों को नोटों की गड्डियों से खुले नोट निकालकर अपने कपड़ों, जेबों, जूतों और अन्य जगहों में रखते हुए देखा गया. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ कर्मचारी इशारों के जरिए एक-दूसरे को सतर्क करते दिखाई दिए.
70 बार चोरी या गबन का दावा
रिपोर्ट के मुताबिक कई जगह CCTV कैमरों को जानबूझकर ढंका गया या रिकॉर्डिंग में बाधा डाली गई. फुटेज में कर्मचारियों की नोट छिपाने और हटाने जैसी गतिविधियां भी दिखाई देने का दावा किया गया है. SIT ने कहा कि उपलब्ध फुटेज से यह किसी एक बार की घटना नहीं, बल्कि लगातार दोहराई जाने वाली प्रवृत्ति प्रतीत होती है. गणना कर्मचारियों की दान में मिली नकदी तक सीधी पहुंच थी.
प्रवेश-निकास के दौरान प्रभावी तलाशी नहीं होती थी, जिससे नकदी बाहर ले जाना संभव हुआ. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 70 बार चोरी या गबन कर CCTV फुटेज हटाए जाने के संकेत मिले. SIT ने यह भी कहा कि यदि इससे पहले की फुटेज उपलब्ध होती तो संभव है कि ऐसी गतिविधियां 27 अप्रैल 2026 से पहले भी सामने आतीं, लेकिन फुटेज उपलब्ध न होने के कारण इसकी पुष्टि नहीं हो सकी.
किन लोगों पर संलिप्तता का दावा?
SIT रिपोर्ट में छह लोगों की प्रथम दृष्टया संलिप्तता बताई गई है. इनके नाम हैं…
1. अवनीश शुक्ला
2. अनुज कुमार मिश्रा
3. लवकुश मिश्रा
4. मनीष कुमार यादव
5. कृष्णम पाण्डेय
6. रामशंकर मिश्रा
रिपोर्ट में कहा गया है कि इन व्यक्तियों के संबंध में CCTV फुटेज, बयान और वित्तीय लेन-देन से जुड़ी सामग्री उपलब्ध है. SIT ने यह भी उल्लेख किया कि चोरी/गबन से जुड़े विश्लेषण और निगरानी सीमित परिस्थितियों में की गई. उदाहरण के तौर पर रिपोर्ट में कहा गया कि मनीष कुमार यादव को बैंक की ओर से गणना प्रक्रिया के लिए नियुक्त नहीं किया गया था.
तो राम मंदिर में चढ़ावा चोरी न होती, SIT ने बताया कौन सी 9 चूकों से लगती रही सेंध
एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में कुल 9 ऐसी चीजों के बारे में बताया है, जिनका पालन करने से इस चोरी को रोका जा सकता था. रिपोर्ट में कहा गया कि गणना कक्ष में जाने वाले लोगों की निगरानी की सही व्यवस्था नहीं थी.
राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी वाले प्रकरण में आज का दिन बेहद अहम रहा है. एक तरफ ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों को स्वीकार कर लिया गया तो वहीं SIT की रिपोर्ट भी आज सार्वजनिक तौर पर सामने आ गई. इस रिपोर्ट में कई चीजों पर विस्तार से बात की गई है. रिपोर्ट में माना गया है कि पुलिस की गिरफ्त में आए 8 लोगों की भूमिका संदिग्ध थी. इसके अलावा इनमें से 6 लोगों को तो सीसीटीवी फुटेज में ही चढ़ावे में हेराफेरी करते पाया गया. ये लोग हैं- लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्रा.
रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि इन लोगों के संबंध में सीसीटीवी फुटेज, बरामदगी और वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं. इससे इनकी संलिप्तता सामने आई है. यही नहीं रिपोर्ट में पूरी प्रक्रिया में ही खामी पाई गई है. एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में कुल 9 ऐसी चीजों के बारे में बताया है, जिनका पालन करने से इस चोरी को रोका जा सकता था. रिपोर्ट में कहा गया कि गणना कक्ष में जाने वाले लोगों की निगरानी की सही व्यवस्था नहीं थी और इससे चोरी के हालात पैदा हुए. इन लोगों की नीयत खराब हुई और फिर वे लगातार ही रामलला के खजाने में सेंध लगाने लगे.
आइए जानते हैं, SIT ने बताईं कौन सी 9 चूक, जिनके चलते होती रही चोरी…
1. एंट्री और एग्जिट पर तलाशी की व्यवस्था नहीं की गई.
2. निर्धारित जेब रहित वेशभूषा का नियम लागू नहीं हुआ.
3. निजी वस्तुएं साथ रखने पर प्रतिबंध लागू नहीं हुआ.
4. हुंडीवार गणना नहीं की गई.
5. विभिन्न हुंडियों की राशि मिश्रित की गई.
6. मूल्यवर्गवार अभिलेख, वाउचर एवं प्रमाण-पत्र तैयार नहीं किए गए.
7. बायोमीट्रिक उपस्थिति प्रभावी रूप से लागू नहीं की गई. इससे कोई भी कभी कहीं भी आ जा रहा था.
8. गणना कक्ष में खाद्य पदार्थ एवं पेय पदार्थों पर प्रतिबंध का पालन नहीं हुआ.
9. सीसीटीवी निगरानी का उपयोग सही से नहीं किया गया. ऐसा होता तो गलती पहले भी पकड़ी जा सकती थी.
राम मंदिर चढ़ावे में 70 बार चोरी के ‘प्रमाण कैसे हाथ लगे?
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट आ गई है. इस रिपोर्ट ने मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और वित्तीय प्रबंधन की पोल खोलकर रख दी है. सीसीटीवी फुटेज और जांच में सामने आया है कि कैसे कर्मचारियों ने मिलकर करोड़ों के चढ़ावे पर हाथ साफ किया.
राम मंदिर के चंदा चोरी मामले में एक्शन
अयोध्या राम मंदिर में दान और चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में सुरक्षा की गंभीर खामियों और संगठित चोरी का पर्दाफाश किया है. मंदिर में 27 अप्रैल 2026 से 5 जून 2026 के बीच मिले 40 दिनों के सीसीटीवी फुटेज में काउंटिंग रूम के कर्मचारियों द्वारा नोटों की गड्डियों और खुले पैसों को कपड़ों, जूतों तथा जेबों में छुपाकर कुल 70 बार चोरी करने की पुष्टि हुई है. ट्रस्ट के जिम्मेदार प्रतिनिधि डॉ. अनिल मिश्रा और प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव की लापरवाही के चलते बिना लिखित प्राधिकार के रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के पास दानपात्रों की चाबियां रहती थीं.
कपड़ों और जूतों में नोट छिपाकर करते थे चोरी
एसआईटी जांच में बड़ा अनावरण हुआ है कि पकड़े गए मुख्य आरोपितों में अविनाश शुक्ला और टिन्नू यादव का भतीजा मनीष यादव प्रमुख चोर थे. सीसीटीवी फुटेज में दोनों बार-बार चढ़ावे की रकम गायब करते दिखे, जबकि अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा और करुणेश पांडे चोरी में उनकी मदद करते मिले. 15 हजार की मामूली नौकरी करते इन आरोपियों के बैंक खातों में भारी कैश जमा हुआ, एफडी (FD) और कई बड़े लेनदेन हुए. 4 जून 2026 को ट्रस्ट को बाथरूम से भी 2,25,000 रुपये मिले थे.
राम मंदिर ट्रस्ट की सुरक्षा व्यवस्था में थीं भारी कमियां
जांच रिपोर्ट के अनुसार,ट्रस्ट सुरक्षा के मूल मानकों का पालन ही नहीं कर रहा था.काउंटिंग रूम में आते-जाते कर्मियों की तलाशी का नियम शिथिल कर रोजाना की बजाय रैंडम (कभी-कभी) कर दिया गया था.कर्मियों के लिए जेबरहित वेशभूषा पहनने का प्रतिबंध लागू नहीं था और मोबाइल फोन व चाबी जैसी निजी वस्तुएं रखने पर कोई पाबंदी नहीं थी.हुंडीवार गणना (डोनेशन बॉक्स) का कोई लेखा-जोखा नहीं था,सभी राशियां आपस में मिला दी जाती थी.इसके अलावा बायोमैट्रिक अटेंडेंस और खाने-पीने की चीजों पर रोक नहीं थी.
वित्तीय जिम्मेदारियों में अनिल मिश्रा की मिली बड़ी लापरवाही
ट्रस्ट प्रतिनिधि डॉक्टर अनिल मिश्रा वित्तीय मामलों और नकदी संकलन के मुख्य जिम्मेदार थे.बैंक से एमओयू (MoU) में वही आधिकारिक व्यक्ति थे.उन्हें कर्मचारियों की तलाशी न होने की पूरी जानकारी थी,फिर भी उन्होंने कोई लिखित आदेश जारी नहीं कराया.वहीं,उनके नियुक्त गणना कक्ष के प्रभारी रिटायर्ड बैंक अफसर सुभाष श्रीवास्तव ने भी अनुशासन और निगरानी में भारी लापरवाही की.उन्होंने हुंडियों (डोनेशन बॉक्स) की चाबियां अनाधिकृत रूप से टिन्नू यादव के पास रहने दीं,जिसे एसआईटी ने बेहद खतरनाक और जोखिमपूर्ण माना.
चाबियां रख षडयंत्र का दोषी मिला टिन्नू यादव
SIT रिपोर्ट के अनुसार,जहां अविनाश शुक्ला,अनुकल्प मिश्रा,लवकुश मिश्रा,मनीष यादव और करुणेश पांडे सीधे चोरी और उसमें मदद करने के दोषी मिले,वहीं दूसरी तरफ रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव इस आपराधिक षड्यंत्र रच चोरी में मदद करने और इसको उकसाने का दोषी मिला.टिन्नू की ही सिफारिश पर उसका भतीजा मनीष यादव 15 अप्रैल 2026 से काउंटिंग रूम में ड्यूटी करने लगा.बैंक खातों के रिकॉर्ड बताते हैं कि चोरी 27 अप्रैल से भी काफी पहले से चल रही थी.

