दारुल इस्लाम:सोशल मीडिया फ्रेडशिप, ढूंढते कमजोरी,फिर मतांतरण को शिकार

‘पिता ने रुपये नहीं भेजे तो…’, धर्मांतरण का घिनाैना खेल, ऐसे उठाया मजबूरी का फायदा; युवतियों का दर्द

अवैध धर्मांतरण गिरोह
16 से 25 साल उम्र, आर्थिक कमजोरी, परिवार का साथ न मिलना और नौकरी की जरूरत…। अवैध मतांतरण कराने वाले गिरोह के निशाने पर जरूरतमंद से लेकर परेशान, उच्च शिक्षित से लेकर मजदूर वर्ग तक के थे। उन्हें कहीं न कहीं मदद का भरोसा देकर जाल में फंसाया जाता था। फिर हिंदू धर्म के बारे में भड़काया जाता था।

 

आगरा धर्मांतरण कांड।

पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने बताया कि गिरोह में छह लोग ऐसे हैं, जिन्होंने पूर्व में अपना मतांतरण किया था। इसके बाद वह अन्य लोगों का भी मतांतरण करा रहे थे। मुक्त कराई सात युवतियों से पुलिस ने पूछताछ की है। एक युवती ऐसी थी, जिसने बताया कि वो पढ़ाई करने घर से बाहर गई थी। परीक्षा पास करने के बाद प्रवेश तो मिल गया, मगर अन्य खर्चों के लिए उसे रुपयों की जरूरत थी।

आगरा धर्मांतरण केस।

पिता के पास दो बीघा ही जमीन थी। इससे घर का खर्च मुश्किल से चल पाता था। बेटी की पढ़ाई को वह पैसा नहीं भेज पा रहे थे। एक महीने बाद उन्होंने खर्च को पैसे भेजना बंद कर दिया। इससे युवती को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। तभी वह सोशल मीडिया पर गिरोह के संपर्क में आ गई। उसे मदद दी जाने लगी। इससे उसे उनके मजहब के लिये उसके मन के कोने में सोफ्टकार्नर  में बनने लगा। वह जाल में फंस गई। इसी तरह बरेली और देहरादून की युवतियां भी गिरोह के संपर्क में आई थीं।

Illegal conversion

इस तरह गिरोह के निशाने पर कम उम्र के युवक -युवतियां रहते थे जिनकी कोई न कोई मजबूरी होती। गिरोह के सक्रिय सदस्य इन लोगों को अपनी बातों में फंसा लेते। ग्रुपों में जोड़कर इस्लाम का प्रचार करते। कश्मीर भी ले जाते। मजदूरी और सफाई कार्य से जुड़े लोग जल्दी उनकी बातों में आ जाते हैं। पैसा मिलने  से आसानी से मतांतरण कर लेते हैं।

धर्मांतरण के आरोपी।

16 साल या उससे कम  उम्र में जिन्हे फंसाया जाता है, उनके बालिग होने का इंतजार किया जाता है। इसके बाद ही घर छोड़ने को बोला जाता है। इस बात की भनक उनके परिजन को भी नहीं लगने दी जाती, जिससे एक बार कोई घर छोड़ आए तो वापस नहीं जा सके। उनके परिजन उनको ढूंढ भी न सकें।
मतांतरण गिरोह का भंडाफोड
अब तक 14 आरोपित पकड़े
पुलिस ने आयशा उर्फ एस.बी. कृष्णा (गोवा), शेखर रॉय उर्फ अली हसन ( कोलकाता), ओसामा (कोलकाता), रहमान कुरैशी (आगरा), अब्बू तालीब (खालापार, मुजफ्फरनगर), अबुर रहमान (देहरादून), रित बानिक उर्फ इब्राहिम (कोलकाता), जुनैद कुरैशी (जयपुर), मुस्तफा उर्फ मनोज (दिल्ली), मोहम्मद अली (जयपुर), अब्दुल रहमान (मुस्तफाबाद, दिल्ली), जुनैद कुरैशी (दिल्ली), अब्दुल्ला और अब्दुल रहीम (मुस्तफाबाद, दिल्ली) पकड़े हैं। इनमें से 11 को 10 दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड पर लिया गया है। जुनैद कुरैशी, अब्दुल्ला और अब्दुल रहीम को जेल भेजा जा चुका है।

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