बिंदी-तिलक-कलावा को “ना”, हिजाब,पगड़ी को”हां”.. TCS के बाद चर्चा में Lenskart के पीयूष बंसल का ड्रेस कोड
बिंदी-तिलक की मनाही, हिजाब को परमिशन.. TCS के बाद चर्चा में Lenskart का ड्रेस कोड
इन दिनों TCS नासिक ऑफिस के एचआर पॉलिसी लेकर विवाद चर्चा में है. इस बीच लेंसकार्ट के वर्कप्लेस ड्रेस कोड को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है. जानते हैं अब लेंसकार्ट से जुड़ा ये नया मामला क्या है.
TCS के बाद अब लेंसकार्ट के ड्रेस कोड को लेकर विवाद (Photo – Pexels)
नई दिल्ली,16 अप्रैल 2026, इन दिनों TCS के नासिक ऑफिस में एचार पॉलिसी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. वहां की एचआर हेड पर कर्मचारियों को धर्म परिवर्तन के लिए उकसाने और दबाव डालने जैसे आरोप लग रहे हैं. इसी बीच लेंसकार्ट से जुड़ी एक ड्रेसकोड पॉलिसी का डॉक्यूमेंट लीक हो गया. हालांकि, इस पर लेंसकार्ट के फाउंडर की सफाई भी आई है. ऐसे में समझते हैं यह पूरा मामला क्या है.
TCS के बाद अब लेंसकार्ट को अपनी ग्रूमिंग गाइड को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है. क्योंकि कंपनी के ड्रेसकोड पॉलिसी से जुड़े एक लीक डॉक्यूमेंट की कुछ बातों ने लोगों का ध्यान खींचा है. इस लीक डॉक्यूमेंट के मुताबिक, यह आईवियर स्टार्टअप अपने वर्कप्लेस पर कर्मचारियों को हिजाब पहनने की अनुमति देता है, लेकिन बिंदी, तिलक और कलावा पहनना बैन करता है.
लेंस्कार्ट ऑफिस के ड्रेस कोड संबंधी गाइडलाइन से जुड़ा एक डॉक्युमेंट लीक होने से भारी विवाद खड़ा हो गया है. क्योंकि लोगों ने इस बात पर ध्यान दिलाया कि इसमें वर्क प्लेस पर बिंदी और तिलक लगाने की अनुमति नहीं है, जबकि हिजाब की परमिशन है.
इस पर लेंसकार्ट के संस्थापक और सीईओ पीयूष बंसल ने स्पष्ट किया कि कंपनी की नीतियों में बदलाव आया है और यह डॉक्यूमेंट उनके वर्तमान गाइडलाइन को नहीं दिखाती है. विवाद बढ़ने पर, लेंस्कार्ट के संस्थापक और सीईओ पीयूष बंसल ने स्पष्ट किया कि नीतिगत दस्तावेज़ गलत था.
वहीं इस डॉक्यूमेंट में हिजाब पहनने की अनुमति है. ऑनलाइन शेयर किए गए ड्रेस कोड दस्तावेज में लिखा है कि हिजाब/पगड़ी पहनने पर उसका रंग काला होना चाहिए. हिजाब से शरीर का ऊपरी हिस्सा ढका होना चाहिए और लोगो नहीं ढकना चाहिए. वहीं दुकान में बुर्का पहनने को मना किया गया है. इसमें लिखा है, बिंदी क्लचर की अनुमति नहीं है. कलावा के संदर्भ में धार्मिक धागे या कलाईबंद उतारकर ऑफिस आना होगा.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेफाली वैद्य नाम की एक यूजर ने लिखा है – हाय पीयूष बंसल, कृपया क्या आप यह स्पष्ट कर सकते हैं कि लेंसकार्ट पर हिजाब ठीक है लेकिन बिंदी, कलवा क्यों नहीं? यूजर ने लेंसकार्ट के संस्थापक को टैग करते हुए X पर यह पोस्ट शेयर किया है.
इस पर पीयूष बंसल की प्रतिक्रिया से ऐसा लगता है कि लेंसकार्ट के पास पहले से इस तरह की ग्रूमिंग गाइड मौजूद थी. पीयूष ने लिखा है – मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि यह दस्तावेज हमारा वर्तमान गाइड लाइन को नहीं दर्शता है. हमारी ग्रूमिंग पॉलिसी वर्षों से विकसित होती रही है. आउटडेटेड वर्जन आज हमारी स्थिति को नहीं दर्शाते हैं. इस स्थिति से उत्पन्न भ्रम और चिंता के लिए हम क्षमा चाहते हैं.
बंसल ने कहा कि लेंसकार्ट ने बिंदी और तिलक सहित किसी भी प्रकार की धार्मिक अभिव्यक्ति पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है. उन्होंने आगे कहा कि कंपनी नियमित रूप से अपने दिशानिर्देशों की समीक्षा करती रहती है.हमारे पास पूरे भारत में हजारों टीम मेंबर्स हैं जो हमारे स्टोर्स में हर दिन गर्व से अपने धर्म और संस्कृति का प्रदर्शन करते हैं. वे ही लेंसकार्ट हैं.
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Lenskart Controversy: बिंदी और तिलक पर बैन और हिजाब ओके! लेंसकार्ट में ड्रेसिंग के नियम पर उठी उंगली, बढ़ा विवाद
Lenskart के एक इंटरनल ट्रेनिंग डॉक्यूमेंट में बिंदी और तिलक को बैन करने की बात सामने आने पर विवाद शुरू हो गया है। CEO पीयूष बंसल ने इसे पुरानी गलती बताकर माफी मांगी है।
लेंसकार्ट की पॉलिसी पर छिड़ा विवाद तो सीईओ ने दी सफाई।
Lenskart Controversy : चश्मा बनाने वाली मशहूर कंपनी लेंसकार्ट इस समय सोशल मीडिया पर बड़े विवादों में घिरी है। विवाद की जड़ कंपनी का एक कथित ट्रेनिंग डॉक्यूमेंट है, जिसमें कर्मचारियों के लिए बिंदी, तिलक और कलावा पहनने पर रोक की बात कही गई थी, जबकि हिजाब को अनुमति दी गई थी। इस मुद्दे ने अब तूल पकड़ लिया है क्योंकि लोग इसे धार्मिक भेदभाव मान रहे हैं। यह सीधे तौर पर एक ग्राहक के रूप में आपकी पसंद और कंपनी के कार्यक्षेत्र में धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों से जुड़ा मामला है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ विवादित डॉक्यूमेंट
सोशल मीडिया पर लेंसकार्ट का एक ‘स्टाइल गाइड’ डॉक्यूमेंट वायरल हो रहा है। लेखिका शेफाली वैद्य ने एक स्क्रीनशॉट शेयर किया है, जिसमें लिखा है कि कंपनी में ‘हिजाब पहनना ठीक है, लेकिन बिंदी और कलावा की अनुमति नहीं है।’ शेफाली ने इसे ‘धार्मिक विषमता’ करार दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि हिंदू बहुल भारत में, जहां कंपनी के अधिकतर कर्मचारी और ग्राहक हिंदू हैं, वहां ऐसी पॉलिसी कैसे हो सकती है?
पीयूष बंसल की सफाई और माफी
विवाद बढ़ता देख लेंसकार्ट के फाउंडर और सीईओ पीयूष बंसल ने सोशल मीडिया पर सफाई दी। उन्होंने कहा, ‘यह डॉक्यूमेंट हमारी वर्तमान गाइडलाइंस को नहीं दर्शाता है। हमारी पॉलिसी में बिंदी और तिलक सहित किसी भी धार्मिक अभिव्यक्ति पर कोई रोक नहीं है।’ बंसल ने स्वीकार किया कि यह एक पुराना इंटरनल ट्रेनिंग डॉक्यूमेंट था जिसमें बिंदी/तिलक को लेकर गलत लाइन लिखी गई थी। उन्होंने आगे कहा, ‘जब हमें 17 फरवरी को इस बारे में पता चला, तो हमने इसे तुरंत हटा दिया था। एक फाउंडर के तौर पर इस चूक की जिम्मेदारी मेरी है।’
कानूनी और सार्वजनिक विरोध तेज
सुप्रीम कोर्ट के वकील शशांक शेखर झा ने भी इस मुद्दे पर पीयूष बंसल की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि फरवरी 2026 के इस डॉक्यूमेंट में हिंदू पहचान के प्रतीकों जैसे कलावा और बिंदी पर बैन लगाया गया था, जो शर्मनाक है। वहीं, सावित्री मुमुक्षु नाम की यूजर ने कंपनी के बयान को ‘सच्चाई से भागने वाला’ बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल भाषा की गलती नहीं है, बल्कि यह स्पष्ट भेदभाव का सबूत है।
उधर, वैज्ञानिक डॉ. विजय चौथेवाले ने पीयूष बंसल ने कहा कि पीयूष बंसल का सफाई उत्तर देने के बजाय और कई प्रश्न खड़े करते हैं। उन्होंने पूछा कि क्या ऐसी पॉलिसी लागू करने वाले को दंडित किया गया है? उन्होंने यह भी पूछा कि क्या लेंसकार्ट में भी नासिक स्थित टीसीएस जैसा गैंग चल रहा है?
शेफाली वैद्य ने फिर साधा निशाना
सीईओ की सफाई के बाद शेफाली वैद्य ने एक बार फिर तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ ‘डैमेज कंट्रोल’ का एक कमजोर प्रयास है। उन्होंने सवाल पूछा, ‘यह भयानक डॉक्यूमेंट किसने तैयार किया? यह इंटरनल मीटिंग में कैसे पास हो गया? कंपनी को संदर्भ की बजाय स्पष्ट माफी मांगनी चाहिए।’ उन्होंने यह भी घोषित किया कि वह अब कभी लेंसकार्ट से कोई सामान नहीं खरीदेंगी।
कंपनी का भविष्य का रुख
पीयूष बंसल ने आश्वासन दिया है कि वह खुद इन चीजों की समीक्षा करेंगे ताकि भविष्य में ऐसी गलती न हो। उन्होंने कहा कि लेंसकार्ट के हजारों कर्मचारी स्टोर पर अपनी आस्था और संस्कृति के प्रतीक गर्व से पहनते हैं और कंपनी कभी भी धार्मिक प्रतीकों पर रोक नहीं लगाएगी।
हमारी ग्रूमिंग पॉलिसी पिछले कुछ सालों में विकसित हुई है, और इसके पुराने वर्जन से हमारी आज की स्थिति का पता नहीं चलता है। इस स्थिति से जो भी भ्रम और चिंता पैदा हुई है, उसके लिए हम माफी चाहते हैं। एक कंपनी के तौर पर, हम लगातार सीखते और आगे बढ़ते रहते हैं। हमारी भाषा या नीतियों में जो भी कमियां रही हैं, उन्हें दूर किया गया है और आगे भी किया जाता रहेगा।- पीयूष बंसल, संस्थापक, लेंसकार्ट
टीसीएस नासिक में धार्मिक उत्पीड़न का केस
ध्यान रहे कि महाराष्ट्र के नासिक स्थित आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) में मुस्लिम अधिकारियों पर हिंदू महिलायें प्रताड़ित करने, हिंदू धर्म का मजाक उड़ाने, इस्लामी प्रतीकों का दबदबा कायम करने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।
वहां मुस्लिम महिला एचआर थी जिस पर हिंदू पीड़ितों की शिकायतें अनसुनी करते हुए बिरादरी के मुस्लिम आरोपितों का पक्ष लेने का आरोप है। मामले में नौ मुस्लिम आरोपित पकड़े गए हैं। खबर सामने आने के बाद दावा हो रहा है कि कॉर्पोरेट वर्ल्ड में ऐसे जिहादी तत्व भरे पड़े हैं जहां हिंदुओं से अन्याय और अत्याचार हो रहे हैं।

