भारत अमेरिका से कितने साल और चीन से कितने साल पीछे

यह एक ऐसा सवाल है जिसका कोई एक सीधा जवाब नहीं है, क्योंकि “विकास” को नापने के अलग-अलग पैमाने होते हैं। अगर हम आर्थिक उत्पादन (GDP), प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के आधार पर देखें, तो भारत को इन देशों के वर्तमान स्तर तक पहुँचने में कई दशक लग सकते हैं।
​वैश्विक आर्थिक डेटा (विश्व बैंक और IMF) के विश्लेषण के आधार पर स्थिति कुछ इस प्रकार है:
​1. प्रति व्यक्ति आय (GDP Per Capita – Nominal) के आधार पर
​यह पैमाना देश के हर नागरिक की औसत आर्थिक स्थिति को दर्शाता है। वर्तमान में (वर्ष 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार):
​चीन से अंतर: भारत की वर्तमान प्रति व्यक्ति आय लगभग $2,800 है। चीन इस स्तर पर वर्ष 2006-2007 के आसपास था। इस लिहाज से भारत चीन से करीब 19 से 20 साल पीछे है।
​अमेरिका से अंतर: अमेरिका की प्रति व्यक्ति आय इस समय $80,000 से ऊपर है। अगर भारत 7% की निरंतर वार्षिक दर से भी आगे बढ़ता है, तो अमेरिका के वर्तमान स्तर तक पहुँचने में भारत को 65 से 75 साल का समय लग सकता है।
​2. कुल अर्थव्यवस्था के आकार (Nominal GDP) के आधार पर
​चीन से अंतर: भारत की GDP वर्तमान में लगभग $4.15 ट्रिलियन (विश्व की 5वीं बड़ी अर्थव्यवस्था) है। चीन ने $4 ट्रिलियन का यह आंकड़ा वर्ष 2007-2008 में छुआ था। यानी कुल आर्थिक आकार के मामले में भारत चीन से करीब 18-19 साल पीछे चल रहा है।
​अमेरिका से अंतर: अमेरिका की अर्थव्यवस्था $28 ट्रिलियन से अधिक की है। भारत को इस आकार तक पहुँचने में (वर्तमान विकास दर के हिसाब से) लगभग 25 से 30 साल लग सकते हैं।
​3. मानव विकास सूचकांक (HDI) और बुनियादी ढांचा
​चीन से अंतर: चीन ने अपने यहाँ साक्षरता, स्वास्थ्य सुविधाओं और मैन्युफैक्चरिंग (हार्डवेयर इंफ्रास्ट्रक्चर) पर 1980 और 90 के दशक में बहुत भारी निवेश किया था। भारत एक्सप्रेसवे, डिजिटल पेमेंट और रिन्यूएबल एनर्जी में तो बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन मानव पूंजी (Human Capital) यानी शिक्षा और स्वास्थ्य के मानकों पर हम चीन से लगभग 15 से 20 साल पीछे हैं।
​अमेरिका से अंतर: रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D), पेटेंट्स, और उच्च तकनीक (जैसे सेमीकंडक्टर और एयरोस्पेस) में अमेरिका के पास एक सदी से अधिक की बढ़त है। इस क्षेत्र में तकनीकी आत्मनिर्भरता के स्तर पर अंतर 40 से 50 साल का माना जाता है।
​सकारात्मक पहलू (The Catch-up Advantage):
विकास की यह दूरी स्थायी नहीं होती। भारत इस समय दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है (विकास दर ~6.5% – 7%)। ‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’ (युवा आबादी) और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर भारत इस अंतर को अनुमानित समय से तेजी से भी पाट सकता है।

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