भारत का रक्षा औद्योगिक उत्पादन 5 साल में बढा 110%, फिर भी क्षमता में भारत 7वें, निर्यात में 21वें स्थान पर

रक्षा उद्योग (Defense Industrial Production) के आधार पर देशों की रैंकिंग विभिन्न स्रोतों के अनुसार बदल सकती है, क्योंकि कुछ देश घरेलू उत्पादन पर और कुछ निर्यात पर अधिक निर्भर हैं। कुल रक्षा विनिर्माण क्षमता, सैन्य प्रौद्योगिकी, हथियार उत्पादन और रक्षा कंपनियों के आकार को देखते हुए शीर्ष 25 देशों की एक सामान्य सूची इस प्रकार है:
रैंक    देश
1      United States
2      China
3      Russia
4      France
5      United Kingdom
6      Germany
7       India
8       Israel
9       South Korea
10     Italy
11      Japan
12      Turkey
13      Spain
14      Sweden
15      Canada
16      Australia
17       Netherlands
18       Poland
19       Ukraine
20       Brazil
21      Switzerland
22      Norway
23      Pakistan
24      South Africa
25      Singapore
प्रमुख बातें
अमेरिका विश्व के रक्षा उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र है, जहाँ lockheedmartin.com⁠, rtx.com⁠ और northropgrumman.com⁠ जैसी कंपनियाँ हैं।
चीन जहाजों, मिसाइलों, ड्रोन और लड़ाकू विमानों के बड़े पैमाने पर उत्पादन के कारण तेजी से अमेरिका के करीब पहुँचा है।
भारत रक्षा उत्पादन में तेजी से बढ़ रहा है और मिसाइल, युद्धपोत, रडार, तोपखाना तथा लड़ाकू विमान निर्माण में आत्मनिर्भरता बढ़ा रहा है।
दक्षिण कोरिया और तुर्की पिछले दशक में सबसे तेज़ी से उभरने वाले रक्षा उत्पादक देशों में शामिल हैं।
इज़राइल आकार में छोटा होने के बावजूद ड्रोन, मिसाइल रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों में अग्रणी है।
रक्षा निर्यात (arms exports) के आधार पर शीर्ष 25 देशों की सूची में रैंकिंग  अलग है-

यदि हथियार एवं रक्षा निर्यात (Arms Exports) के आधार पर देशों की बात करें, तो हाल के वर्षों में (SIPRI और अन्य रक्षा विश्लेषणों के अनुसार) शीर्ष निर्यातकों की सूची लगभग इस प्रकार रही है:
रैंक   देश
1     United States
2     France
3     Russia
4    China
5   Germany
6   Italy
7   United Kingdom
8   Spain
9   Israel
10  South Korea
11  Turkey
12   Netherlands
13   Sweden
14   Canada
15   Norway
16   Switzerland
17   Australia
18   Brazil
19   Poland
20   Ukraine
21    India
22   South Africa
23    Singapore
24     Pakistan
25   Czech Republic
विशेष तथ्य

1-अमेरिका अकेले वैश्विक हथियार निर्यात का लगभग 40% से अधिक हिस्सा रखता है।
2-फ्रांस ने हाल के वर्षों में लड़ाकू विमान (विशेषकर Dassault Rafale) की बिक्री से रूस को पीछे छोड़कर दूसरा स्थान प्राप्त किया।
3-रूस के निर्यात हाल के वर्षों में उल्लेखनीय रूप से गिरा है।
4-भारत अभी भी शीर्ष आयातकों में  है, लेकिन रक्षा निर्यात तेज़ी से बढ़ रहा है। भारत की प्रमुख निर्यात वस्तुओं में BrahMos, रडार, गश्ती नौकाएँ और रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स शामिल हैं।
5-दक्षिण कोरिया और तुर्की वैश्विक रक्षा बाज़ार में सबसे तेज़ी से उभरते निर्यातक हैं।

भारत सरकार के अनुसार भारत का रक्षा निर्यात 2014-15 के लगभग ₹2,000 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹23,000 करोड़ से अधिक हो चुका है, हालांकि वह अभी भी अमेरिका, फ्रांस और रूस जैसे प्रमुख निर्यातकों से काफी पीछे है।

पांच साल में 110% वृद्धि, 4 गुना हुआ भारत का डिफेंस प्रोडक्शन, देखें पिछले 13 साल की ग्रोथ

डिफेंस प्रोडक्शन के क्षेत्र में भारत ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। भारत का रक्षा उत्पादन पिछले 13 साल में 4 गुना तक बढ़ गया है। पिछले 5 साल की ही बात की जाए तो डिफेंस प्रोडक्शन 110 प्रतिशत तक बढ़ गया है। आइए आपको बताते हैं कि 2013-14 के बीच डिफेंस प्रोडक्शन में हर साल किस तरह से वृद्धि हुई है।

वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत में एक खुशखबरी है। भारत का सालाना डिफेंस प्रोडक्शन पिछले 13 साल में 4 गुना बढ़कर 1.78 लाख करोड़ तक तक पहुंच गया है। यह अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है। ये वृद्धि  पिछले फाइनेंशियल ईयर के 1.54 लाख करोड़ रुपये के प्रोडक्शन के मुकाबले 15.6%  वृद्धि दिखाती है।

भारत ने डिफेंस प्रोडक्शन के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि पाई है

13 साल पहले था 4 गुना कम
फाइनेंशियल ईयर 2020–21 के मुकाबले ये ग्रोथ 110 फीसदी है। क्योंकि 2020-21 में यह आंकड़ा 84,643 करोड़ रुपये था। वहीं, साल 2013-14 की बात की जाए तो डिफेंस प्रोडक्शन 4 गुना तक बढ़ गया है, क्योंकि उस समय देश का रक्षा उत्पादन 43,746 करोड़ रुपये हुआ करता था।

इस तरह बढ़ता गया डिफेंस प्रोडक्शन
1.  2013-14   ₹43,746 करोड़
2.  2014-15   ₹46,429 करोड़
3.  2020-21   ₹84,643 करोड़
4.  2021-22   ₹95,000 करोड़
5.  2022-23     ₹1.00 लाख करोड़
6.  2023-24    ₹1.27 लाख करोड़
7.  2024-25    ₹1.54 लाख करोड़
8.  2025-26    ₹1.78 लाख करोड़

रक्षा औद्योगिक आधार का साफ संकेत
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने खुद ये जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर की है। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का डिफेंस प्रोडक्शन हर साल नई ऊंचाइयों को छू रहा है। हाल के वर्षों में भारत के रक्षा उत्पादन में हुई जबरदस्त बढ़ोतरी, रक्षा उत्पादन विभाग और सभी संबंधित पक्षों की मिली-जुली कोशिशों का नतीजा है। यह बढ़त देश के बढ़ते रक्षा औद्योगिक आधार का साफ संकेत है। लगातार नीतिगत समर्थन, कई नई पहलों, निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी और निर्यात की बढ़ती क्षमताओं के साथ, रक्षा उत्पादन क्षेत्र आने वाले वर्षों में और तेजी से आगे बढ़ने के लिए तैयार है।                   

भारतीय रक्षा औद्योगिक उत्पादन में सरकारी उपक्रमों (PSUs) और निजी क्षेत्र (Private Sector) दोनों की भागीदारी ऐतिहासिक स्तर पर पहुँच गई है, जिससे वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया है।

कंपनियों की भागीदारी और इस क्षेत्र के विभाजन का पूरा विवरण नीचे दिया गया है:
📊 उत्पादन और निर्यात में भागीदारी (2025-26)
प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के हाल के आंकड़ों के अनुसार, कुल घरेलू उत्पादन और निर्यात में हिस्सेदारी इस प्रकार है:
सार्वजनिक क्षेत्र (DPSUs/PSUs): कुल घरेलू रक्षा उत्पादन में सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी लगभग 76% है। वहीं, देश के कुल रक्षा निर्यात में इनका योगदान 54.84% रहा है।

निजी क्षेत्र (Private Sector): निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़कर रिकॉर्ड 24% (करीब ₹42,000 करोड़) हो गई है। रक्षा निर्यात में निजी कंपनियों का योगदान 45.16% है।

🏛️ प्रमुख सरकारी रक्षा कंपनियाँ (DPSUs)
भारत के रक्षा उत्पादन का मुख्य आधार ये सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियाँ हैं:
Hindustan Aeronautics Limited (HAL): यह भारत की सबसे बड़ी रक्षा कंपनी है। यह ‘तेजस’ लड़ाकू विमान, हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर (LCH) और सैन्य विमानों के निर्माण व रखरखाव का काम करती है।

Bharat Electronics Limited (BEL): यह सेना के लिए उन्नत रडार, मिसाइल सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन और संचार प्रणालियों (Sonar/Radar) का निर्माण करती है।
Bharat Dynamics Limited (BDL): यह कंपनी भारत की प्रमुख मिसाइल प्रणालियों जैसे ‘आकाश’ मिसाइल, एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल और टॉरपीडो का उत्पादन करती है।

शिपयार्ड्स (Cochin Shipyard / Mazagon Dock): ये नौसेना के लिए युद्धपोत, पनडुब्बियां और विमानवाहक पोत (जैसे INS विक्रांत) तैयार करते हैं।

🏢 प्रमुख निजी रक्षा कंपनियाँ (Private Sector)
‘मेक इन इंडिया’ और उदारीकृत रक्षा नीतियों के कारण निजी क्षेत्र तेज़ी से अपनी पहचान बना रहा है:
Tata Advanced Systems (TASL): टाटा समूह की यह कंपनी सैन्य विमानों के पुर्जे, रडार, ड्रोन प्रणालियों और मिसाइल लॉन्चरों का निर्माण करती है।
Larsen & Toubro (L&T) Defence: यह कंपनी नौसेना की पनडुब्बियों, बख्तरबंद प्रणालियों (जैसे के-9 वज्र तोप) और मिसाइल प्रणालियों के निर्माण में शामिल है।
Bharat Forge (Kalyani Group): यह कंपनी उन्नत तोपखाने प्रणालियों (जैसे ATAGS हॉवित्जर तोप) और बख्तरबंद वाहनों का निर्माण व वैश्विक निर्यात करती है।

Adani Defence & Aerospace: यह मुख्य रूप से मानवरहित विमान (UAV/ड्रोन), काउंटर-ड्रोन सिस्टम और छोटे हथियारों (Small Arms) के उत्पादन पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
🚀 MSMEs और स्टार्टअप्स की भूमिका
16,000 से अधिक MSMEs:भारतीय रक्षा आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) की रीढ़ अब 16,000 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम बन चुके हैं, जो कलपुर्जे और इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियाँ प्रदान करते हैं।

औद्योगिक लाइसेंस: निजी भागीदारी को सुगम बनाने के लिए सरकार ने 462 कंपनियों को 788 औद्योगिक लाइसेंस जारी किए हैं।

भारत के रक्षा उत्पादन (Defense Production) और निर्यात (Defense Export) ने पिछले कुछ वर्षों में ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ अभियानों के तहत रिकॉर्ड सफलता हासिल की है। हालिया वित्तीय वर्षों (FY 2024-25 और वर्तमान 2025-26) के आंकड़े बताते हैं कि भारत अब केवल एक आयातक देश नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक उभरता हुआ निर्यातक बन रहा है।
​इसका पूरा विवरण नीचे दिया गया है:
​1. भारतीय रक्षा निर्यात (Indian Defense Exports)
​भारत का रक्षा निर्यात अब तक के अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, रक्षा निर्यात लगभग ₹21,083 करोड़ (लगभग $2.6 बिलियन) को पार कर चुका है, जो पिछले दशक की तुलना में 30 गुना से भी अधिक की वृद्धि है।
​भारत के मुख्य रक्षा उत्पाद और उनके खरीदार देश:
​भारत वर्तमान में दुनिया के लगभग 85 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण और प्रणालियाँ निर्यात कर रहा है।

2. घरेलू रक्षा उत्पादन (Domestic Defense Production)
​’मेक इन इंडिया’ में सरकार का ध्यान आयात पर निर्भरता कम करने और स्थानीय स्तर पर विनिर्माण को बढ़ावा देने पर है।
​रिकॉर्ड उत्पादन मूल्य: भारत का कुल घरेलू रक्षा उत्पादन मूल्य ₹1.27 लाख करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर को छू चुका है।
​सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियाँ (Positive Indigenisation Lists): रक्षा मंत्रालय ने अब तक 5,000 से अधिक सैन्य प्रणालियों, हथियारों और घटकों की सूचियाँ जारी की हैं, जिनका एक निश्चित समय के बाद विदेशों से आयात पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। इन्हें अब केवल भारत में ही निर्मित किया जा रहा है।
​3. इस बदलाव के मुख्य चालक (Key Drivers of Growth)
​सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की भागीदारी: जहाँ एक ओर HAL (तेजस फाइटर जेट, प्रचंड हेलीकॉप्टर), mazagon dock (MDL) (पनडुब्बियाँ और डेस्ट्रॉयर्स) जैसी सरकारी कंपनियाँ (DPSUs) बड़े ऑर्डर संभाल रही हैं, वहीं टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, लार्सन एंड टुब्रो (L&T), और कल्याणी ग्रुप जैसी निजी कंपनियाँ वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उत्पाद बना रही हैं।
​रक्षा नीति में सुधार: निर्यात प्रक्रियाओं का सरलीकरण (सिंगल-विंडो क्लीयरेंस) और मित्र देशों को रक्षा क्रेडिट (Line of Credit) देने की नीति ने भारतीय कंपनियों के लिए नए बाजार खोले हैं।
​भविष्य का लक्ष्य: भारत सरकार ने आने वाले समय में रक्षा निर्यात को ₹35,000 करोड़ ($5 बिलियन) तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, जिसमें एयरोस्पेस घटकों और मिसाइल प्रणालियों की मांग सबसे अधिक रहने की उम्मीद है।

वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरणों और री-आर्मामेंट (सैन्य आधुनिकीकरण) के इस दौर में रक्षा उद्योग (Defense Industry) में भारी उछाल देखा जा रहा है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हथियारों के आयात-निर्यात और उत्पादन की स्थिति में काफी बदलाव आए हैं।
​विश्व के शीर्ष रक्षा उत्पादकों और निर्यातक कौन?:
​1. शीर्ष रक्षा निर्यातक देश (Top Arms Exporters)
​वैश्विक स्तर पर हथियारों के निर्यात में अमेरिका का दबदबा और मजबूत हुआ है, जबकि रूस के निर्यात में भारी गिरावट दर्ज की गई है। फ्रांस और जर्मनी की स्थिति में सुधार हुआ है।

​बड़ा बदलाव: रूस का रक्षा निर्यात पहले के मुकाबले करीब 64% तक गिरा है। वहीं अमेरिका का निर्यात 27% बढ़ा है, जो अकेले बाकी के शीर्ष 7 देशों के कुल निर्यात से भी अधिक है।
​2. शीर्ष रक्षा उत्पादक कंपनियाँ (Top Defense Producers)
​राजस्व (Revenue) के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी रक्षा कंपनियाँ (Defense Contractors) मुख्य रूप से अमेरिका और चीन की हैं। यूरोपीय कंपनियों (जैसे जर्मनी की Rheinmetall) के ऑर्डर बैकलाग में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है।
​प्रमुख वैश्विक कंपनियाँ और उनका राजस्व:
​लॉकेड मार्टिन (Lockheed Martin – USA): करीब $64.6 बिलियन से अधिक के रक्षा राजस्व के साथ यह दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी है (मुख्य उत्पाद: F-35 लड़ाकू विमान, मिसाइल सिस्टम)।
​आरटीएक्स कॉर्पोरेशन (RTX Corporation – USA): लगभग $43.6 बिलियन (मुख्य उत्पाद: मिसाइलें, सेंसर्स और एयर डिफेंस)।
​नॉथ्रोप ग्रुमैन (Northrop Grumman – USA): रणनीतिक प्रणालियों और बॉम्बर्स के लिए प्रसिद्ध।
​बीएई सिस्टम्स (BAE Systems – UK): यूरोप की सबसे बड़ी रक्षा कंपनी, जो लैंड सिस्टम्स और नेवल प्लेटफॉर्म बनाती है।
​एविएशन इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन ऑफ चाइना (AVIC – China): चीन की सबसे बड़ी सैन्य विमान निर्माता कंपनी।
​3. भारतीय रक्षा परिदृश्य (Indian Defense Context)
​आयात की स्थिति: भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक देश बना हुआ है। भारत के कुल आयात में रूस की हिस्सेदारी घटकर 40% रह गई है, जबकि फ्रांस (विशेषकर राफेल सौदों के बाद) भारत का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है।
​उत्पादन में वृद्धि: भारत की स्वदेशी कंपनियाँ जैसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) वैश्विक टॉप 100 रक्षा उत्पादकों की सूची में लगातार अपनी स्थिति मजबूत कर रही हैं।

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