भारत के आधा दर्जन गांव,सबसे ज्यादा गुजरात में

ये हैं भारत के 5 सबसे अमीर गांव, हर घर में करोड़पति, इनके आगे बड़े-बड़े शहर फेल
ये हैं भारत के 5 सबसे अमीर गांव, हर घर में करोड़पति, इनके आगे बड़े-बड़े शहर फेल
India Richest Village List : भारत गांवों का देश है. देशभर में 6 लाख से ज्यादा गांव हैं. बदलते भारत के साथ गांवों की तस्वीर भी बदली है. भारत के कुछ गांव भी ऐसे भी हैं जहां सिर्फ करोड़पति रहते हैं. सिर्फ नाम के लिए ये गांव है. इन गांवों में ऊंची-ऊंची इमारतें, पक्की-चमचमाती सड़कें हैं. बड़े-बड़े शहर भी इन गांवों की चमक के आगे फीके हैं. आज हम ऐसे ही 5 गावों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनकी गिनती देश के सबसे अमीर गांवों में होती है. ये गांव किन राज्यों में है, यहां कौन सी सुविधाएं हैं, इन गांवों की अमीरी का राज क्या है, आइये जानते

भारत में कुछ गांव ऐसे हैं जहां सिर्फ करोड़पति रहते हैं. इन गांवों की चमचमाती स‌ड़कें फॉरेन कंट्री का फील देती हैं. इन गांवों का हर मकान पक्का-सुंदर है. हर घर-गली में अमीरी झलकती हैं. कुछ गांवों में दर्जनों बैंक भी हैं. आज हम ऐसे ही 5 गांवों के बारे में आपको बताने जा रहे हैं. ये गांव महाराष्ट्र-गुजरात से लेकर हिमाचल प्रदेश में हैं. इन गांवों की समृद्धि के पीछे की असल वजह क्या है, आइये जानते हैं……

इस लिस्ट में पहला नाम हिवरे बाजार गांव का जो कि महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में आता है. इस गांव की कहानी पूरे देश के लिए उम्मीद है. किसी जमाने में यह गांव पलायन-गरीबी और हताशा का प्रतीक था. आज इसकी पहचान करोड़पति गांव के रूप में होती है. पहले यहां जमीन बंजर थी, कुओं में पानी नहीं था. गांव की 90 फीसदी आबादी गरीब थी. 1989 में यहां पोपट राव बागूजी पवार नाम के शख्स गांव लौटे. उन्होंने गांव की किस्मत पलट दी. उन्होंने पंचसूत्रीय योजना से गांव की तस्वीर बदल दी. आज इस गांव को आदर्श ग्राम, निर्मल ग्राम, वनग्राम का पुरुस्कार मिल चुका है. यहां के किसानों की औसत आय ₹30,000 महीना है. गांव में 235 परिवारों हैं. इसमें से 60 परिवार लखपति हैं।

इस लिस्ट में दूसरा नाम माधापर गांव का है जो कि गुजरात के कुच्छ जिले में आता है. यह भुज शहर के पास है. माधापर गांव कम शहर ज्यादा लगता है.आबादी करीब 60 हजार है लेकिन यहां 16 बैंक हैं.बैंकों में फिक्स डिपॉजिट के रूप में लोगों के पांच हज़ार करोड़ रुपये जमा हैं.इस गांव की अमीरी की कहानी का राज बहु दिलचस्प है.वास्तव में,अफ्रीका में 1945 में रेलवे लाइन डाली जा रही थी.इसे बिछाने को मजदूर कच्छ से अफ्रीका गए.यहां के लोग अफ्रीका,अमेरिका,इंग्लैंड गए, वहां काम किया. ये एनआरआई अपनी जिंदगीभर की जमा-पूंजी के साथ इस गांव में लौट आए हैं.गांव के लोगों के ज्यादातर बच्चे विदेश में सेटल हैं.

गुजरात के आणंद का गांव धर्मज भी इस लिस्ट में है. इस गांव के हर घर से एक परिवार विदेश में है. इस गांव में भी 14 बैंक हैं. गांव के विकास में ग्रामीणों ने मिलकर काम किया. इस गांव को गुजरात का पेरिस बोलते हैं. गांव में स्कूल-कॉलेज और अस्पताल, डायग्नोस्टिक सेंटर, वॉटर पार्क, स्वीमिंग पूल और एंटरटेनमेंट पार्क की सुविधा है. गांव की अपनी एक आत्मकथा है. गांव का अपना एक एंथम है. गांव का स्थापना दिवस मनाया जाता है.

इस लिस्ट में गुजरात का एक और गांव पुंसरी है. यह साबरकांठा जिले में आता है. लोकतांत्रिक मूल्यों और पंचायती राज का शानदार उदाहरण प्रस्तुत करता है. गांव में बिजली-हाईटेक शिक्षा, मिनिरल वॉटर, इंटरनेट और वाई-फाई की सुविधा भी उपलब्ध है. यहां के पूर्व प्रधान हिमांशु पटेल ने गांव की किस्मत बदली. गुजरात के भुज जिले से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बल्दिया गांव भी स्मार्ट विलेज में आता है. 8000 लोगों के इस छोटे से गाँव की कुल संपत्ति 1200 करोड़ रुपये है.

हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले का मड़ावग (मरोग) गांव एशिया के सबसे अमीर गांवों में गिना जाता है. यह गांव मुख्य रूप से सेब की खेती के लिए फेमस है. यह शिमला के चौपाल में स्थित है. यह क्षेत्र सेब के बागानों और समृद्ध कृषि अर्थव्यवस्था के लिए जाना जाता है. यहां की प्राकृतिक सुंदरता पर्यटकों को भी आकर्षित करती है. मड़ावग गांव के लोगों ने सेब की उन्नत किस्मों की खेती की. मॉडर्न तकनीकी अपनाई. आज हर घर में करोड़पति किसान हैं. 1954 में गांव के किसान छेनिया राम मेहता ने अपनी आलू की फसल बेचकर कोटखाई में सेब के प्लांट खरीदे. धीरे-धीरे पूरे गांव के किसान सेब की खेती करने लगे.
इसी कड़ी में पंजाब के जालंधर का डडोवाल गांव है जो अपनी महंगी कोठियां के लिए मशहूर है. दुखद बात यह अहि कि पूरा गांव उजाड़-वीरान प‌ड़ा हुआ है. गांव के ज्यादातर लोग एनआरआई हैं. यूके और अमेरिका-कनाडा और दूसरे देशों में रहते हैं. हर घर के सदस्य विदेश में हैं. डडोवाल जैसा ही जालंधर का गांव उप्पल भूपा और लावड़ा हैं. इन गांवों में महंगे घर हैं लेकिन रहने वाला कोई नहीं.
राजस्थान के बीकानेर जिले के नोखा ब्लॉक में स्थित रासीसर गांव भी विकास और समृद्धि की अनूठी मिसाल है. यह गांव ट्रांसपोर्ट हब बन गया है. हर घर में ट्रक-बस या कोई अन्य कॉमर्शियल वाहन है. आबादी 15 हजार से ज्यादा है. गांव इतना बड़ा है कि दो ग्राम पंचायतें हैं : रासीसर पुरोहितान और रासीसर बड़ा बास. दो सरपंच भी हैं. गांव में कुछ परिवारों के पास तो 200-300 वाहन हैं. प्रशासन को नोखा में अलग से डीटीओ ऑफिस खोल दिया है. 2000 से ज्यादा दोपहिया वाहन हैं. गांव के मंडा परिवार ने सबसे पहले 1978 में ट्रांसपोर्ट बिजनेस की शुरुआत की थी. आज मंडा परिवार के पास 100 ट्रक-ट्रेलर और 25 बसें से ज्यादा बसें हैं. आज पूरा गांव ट्रांसपोर्ट के बिजनेस में है. गांव के लोग करोड़ों में टैक्स भरते हैं.

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