मीठे की लत नशे से कम हानिकारक नही:राष्ट्रीय पोषण संस्थान
मीठे की लत नशे से कम हानिकारक नही:राष्ट्रीय पोषण संस्थान
उत्तराखंड के 15 सदस्यीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने हैदराबाद में आईसीएमआर-राष्ट्रीय पोषण संस्थान का किया दौरा
– उत्तराखंड के मंडुआ, झंगोरा, चौलाई और कोदा जैसे स्थानीय अनाजों के पोषक तत्वों पर शोध जारी: डॉ. भारती कुलकर्णी
– कम उम्र से ही स्वस्थ खान-पान की आदतों का विकास किया जाना चाहिए: डॉ. भारती कुलकर्णी, निदेशक (आईसीएमआर-राष्ट्रीय पोषण संस्थान)
– आईसीएमआर-एनआईएन ने पोषण अनुसंधान, जन स्वास्थ्य शिक्षा और राष्ट्रीय नीतियों में योगदान की दी जानकारी
देहरादून/हैदराबाद 02 अगस्त 2026। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के पीआईबी देहरादून से आयोजित हैदराबाद प्रेस भ्रमण के दूसरे दिन उत्तराखंड का 15 सदस्यीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय पोषण संस्थान (आईसीएमआर-एनआईएन), हैदराबाद पहुँचा। इस भ्रमण में पत्रकारों को पोषण अनुसंधान, जन स्वास्थ्य शिक्षा तथा राष्ट्रीय नीतियों एवं कल्याणकारी कार्यक्रम निर्माण में संस्थान के योगदान की जानकारी मिली।
प्रतिनिधिमंडल को हैदराबाद आईसीएमआर-राष्ट्रीय पोषण संस्थान की निदेशक डॉक्टर भारती कुलकर्णी ने खाद्य संरचना, पोषक तत्वों की आवश्यकताओं तथा आहार संबंधी दिशा-निर्देशों पर वैज्ञानिक प्रमाण तैयार करने में संस्थान की भूमिका बताई। उन्होंने बताया कि इंडियन फूड कंपोजिशन टेबल्स देश में उपलब्ध विभिन्न खाद्य पदार्थों में ऊर्जा, प्रोटीन, सूक्ष्म पोषक तत्वों और खनिजों की विस्तृत जानकारी देती हैं। यह जानकारी शोधकर्ताओं, खाद्य उद्योग तथा जन स्वास्थ्य नीति निर्माताओं को महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री रूप में उपयोगी है।
डॉक्टर कुलकर्णी ने भारतीयों को पोषक तत्व आवश्यकता और रिकमेंडेड डायटरी प्लान के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि ये विभिन्न आयु वर्गों एवं शारीरिक अवस्थाओं को पोषण संबंधी आवश्यकताओं का आधार निर्धारित करते हैं।
भारतीयों को आहार संबंधी दिशा-निर्देश के प्रमुख पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए डॉक्टर कुलकर्णी ने कहा कि स्वस्थ खान-पान की आदतों का विकास बचपन की शुरुआती अवस्था से ही होना चाहिए। उन्होंने विशेषत: दो वर्ष से कम उम्र के बाल आहार में अतिरिक्त चीनी के सेवन से बचने संबंधी दिशा-निर्देश बताये।
कुपोषण के दोहरे बोझ पर चिंता व्यक्त करते हुए डॉक्टर कुलकर्णी ने विशेषत: बच्चों में अधिक वजन और मोटापे की समस्या का उल्लेख करते हुए कहा कि निष्क्रिय जीवनशैली तथा वसा, चीनी और नमक की अधिक मात्रा वाले खाद्य पदार्थों का अत्यधिक सेवन इस समस्या के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। उन्होंने खाद्य सुरक्षा और पोषण सुरक्षा में अंतर स्पष्ट किया कि केवल भोजन उपलब्धता पोषण संबंधी बेहतर स्थिति सुनिश्चित नहीं करती। इसको आहार में विविधता तथा व्यवहार में सकारात्मक बदलाव भी आवश्यक हैं।
डॉक्टर कुलकर्णी ने बताया कि उत्तराखंड के स्थानीय कृषि उत्पादों एवं मोटे अनाजों, जिनमें मंडुआ, झंगोरा, चौलाई और कोदा शामिल हैं, के विशिष्ट पोषक तत्वों का अध्ययन करने को शोध हो रहा है। रागी (फिंगर मिलेट) के सेवन से एनीमिया में कमी पर इसके प्रभाव का आकलन करने को नैदानिक एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन भी जारी हैं।

मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने आईसीएमआर-एनआईएन के पोषण सूचना, संचार एवं स्वास्थ्य शिक्षा प्रभाग के प्रमुख एवं वैज्ञानिक-जी डॉक्टर सुब्बा राव एम गवारावरापु के तकनीकी सत्रों में भी भाग लिया।
डॉक्टर सुब्बा राव एम गवारावरापु ने वर्तमान पोषण संबंधी चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए अल्पपोषण, सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी तथा जीवनशैली से संबंधित चयापचय संबंधी विकारों के एक साथ होने की स्थिति समझायी। उन्होंने वैज्ञानिक पोषण संबंधी जानकारी और सामान्य जन की दैनिक खान-पान की आदतों का अंतर पाटने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों से खाद्य संबंधी भ्रांतियां दूर कर प्रमाण-आधारित आहार आदतें प्रोत्साहन को जिम्मेदार पत्रकारिता का आह्वान किया। उन्होने अनेक मिथकों का भेद बताते हुए कहा कि शिशुओं को मिठास की लत लगवाने के पीछे कार्पोरेट सेक्टर के निहित स्वार्थ हैं और यह लत नशीले पदार्थों की लत से कम खतरनाक है। उन्होने बताया कि विविध स्थानीय मौसमी उत्पादों से हमारी अधिकांश पोषण आवश्यकताएं पूरी हो जाती हैं।
डॉक्टर सुब्बा राव एम गवारावरापु ने बताया कि 1918 में स्थापित संस्थान समय-समय पर संतुलित आहार संबंधी दिशा-निर्देश प्रकाशित करता है जिसका नवीनतम 2023 के 17 दिशा-निर्देश हैं। ये संस्थान की वैबसाइट https://pic. ncbi. nlm.nih.gov से भी लिये जा सकते हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने आईसीएमआर-एनआईएन की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का भ्रमण कर शोधकर्ताओं से संवाद कर खाद्य विश्लेषण एवं लिपिड रसायन विज्ञान में चल रहे अनुसंधान की जानकारी ली।
इस भ्रमण पर प्रतिनिधिमंडल ने हैदराबाद प्रेस टूर के सांस्कृतिक कार्यक्रम में सालार जंग संग्रहालय का भ्रमण किया और हैदराबाद की समृद्ध ऐतिहासिक परंपरा तथा संग्रहालय में संरक्षित ऐतिहासिक एवं अभिलेखीय संग्रह की जानकारी ली।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन देहरादून केंद्र के उपनिदेशक संजीव सुन्द्रियाल के नेतृत्व में पहुंचे पत्रकार प्रतिनिधिमंडल में सर्वश्री रवीन्द्र नाथ कौशिक,अनिल बहुगुणा (पौडी),मोहम्मद सलीम सैफ़ी,भागीरथ शर्मा,अजय रावत अजेय(पौडी), योगेश सेमवाल,ललित उनियाल,राजेश कुमार पांडेय,मौहम्मद फहीम तन्हा,सुकांत ममगाईं ,आफताब अजमत,गिरीश जोशी (हल्द्वानी) तथा संतोष कुमार थपलियाल हैं।


