मायावती की रक्षा ढाल बने ब्रह्मदत्त द्विवेदी की 10 महीने में हो गई थी हत्या

विरोधी महिला की भी जान / इज्जत बचाने की खातिर अपना बलिदान देने वाले
संघ के स्वयंसेवक / भाजपा नेता “ब्रह्मदत्त द्विवेदी” की वार्षिकी
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10 फरवरी 1997. बसंत पंचमी का दिन था. फर्रुखाबाद शहर में बसंत पंचमी का त्यौहार बहुत उत्साह से मनाया जाता है. सुबह पतंगबाजी होती है और शाम को आतिशबाजी. उस रोज़ शहर के पतंगबाज अपने-अपने मांझे की चरखियों को तैयार कर रहे थे कि – एक खबर ने लोगों को सदमे में डाल दिया. भाजपा नेता ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या हो गई.

इसके बाद दिन भर शहर पर हैलीकॉप्टर मंडराते रहे. अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण अडवाणी, मुरली मनोहर जोशी जैसे तमाम दिग्गज सारे काम छोड़कर उत्तर प्रदेश के छोटे से शहर फर्रुखाबाद पहुंच रहे थे. फर्रुखाबाद के रहने वाले भाजपा नेता ब्रह्मदत्त द्विवेदी तब चर्चा में आये थे जब उन्होंने सपाई गुंडों से बसपा नेत्री मायावती की रक्षा की थी.

ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या का कारण भी यही था. 3 जून 1995 को मायावती भाजपा के समर्थन से उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी थीं. इससे कुछ घंटे पहले वो लखनऊ के मीरा गेस्ट हाउस के कमरा नंबर एक में बंद थीं. डरी, सहमी और घबराई. समाजवादी पार्टी के हथियारबंद समर्थकों ने गेस्ट हाउस को घेर रखा था और धमकाया जा रहा था.

सपाई गुंडों के डर से बसपा कार्यकर्ता भी भाग गए थे. मायावती ने उस समय जिन नेताओं को फोन मिलाया था उनमें से एक ब्रह्मदत्त द्विवेदी थे. ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने पुलिस एसपी और डीएम से बात की और उनको सूचना देकर खुद मायावती की मदद करने निकल पड़े. डीएम और एसपी के पहुंचने के पहले ब्रह्मदत्त द्विवेदी खुद हाथ में लाठी लेकर खुद वहां पहुंच गए थे.

गौरतलब है कि भाजपा के नेता ब्रह्मदत्त द्विवेदी जी बाल्यकाल से संघ के स्वयंसेवक थे. वे लाठी चलाने में माहिर थे और संघ के शारीरिक वर्ग में शिक्षार्थियों को लाठी चलाना सिखाते थे. उस समय उनका रौद्ररूप देखकर समाजवादी पार्टी के गुंडों की सिट्टी पिट्टी गुल हो गई थी. जबकि उनके पास कट्टे तमंचे थे और ब्रह्मदत्त द्विवेदी के पास सिर्फ लाठी थी.

मायावती के कपडे फटे हुए थे. ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने अपना कुरता उतारकर मायावती की इज्ज़त ढंकी और बाहर लेकर आये. तब तक पुलिस भी वहां आ गई. बाद में जिलाधिकारी राजीव खेर ने आकर स्थिति संभाली. बस इस घटना के बाद से ही सपा  ब्रह्मदत्त द्विवेदी की दुश्मन बन गई और उनसे बदला लेने की ताक में रहने लगे.

कुछ ही दिन बाद 10 फरवरी को एक विवाह समारोह में जाते समय ब्रह्मदत्त द्विवेदी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. ब्रह्मदत्त द्विवेदी की मौत पर भी मायावती बहुत रोई थी. उनकी पत्नी के उपचुनाव में मायावती ने खुद भाजपा के लिए वोट मांगे थे और अपने समर्थकों से कहा था कि – मेरे भाई की विधवा (भाभी) को जिताइये.

ब्रह्मदत्त द्विवेदी पर की गई फायरिंग के दौरान, उनके साथ मौजूद गनर बृजकिशोर तिवारी की भी मौत हो गई थी, जबकि ड्राइवर शेर सिंह भी घायल हुआ था. उनके भतीजे सुधांशु दत्त ने सदर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था. इस मामले की सीबीआई द्वारा जांच हुई थी. सीबीआई ने आठ लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था.

सीबीआई कोर्ट लखनऊ से 23 जुलाई 2001 को आरोप तय किया गया. सीबीआई ने कुल 67 गवाह पेश किए. 17 जुलाई 2003 को ट्रायल कोर्ट ने पूर्व विधायक विजय सिंह और संजीव महेश्वरी जीवा को दोषी करार देकर उम्रकैद की सजा सुनाई. सुनवाई के दौरान एक आरोपी रमेश ठाकुर की मौत हो गई. कुछ समय बाद विजय सिंह को जमानत मिल गई.

26 मई 2017 को हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के जस्टिस विजय लांबा और जस्टिस विजय लक्ष्मी की बेंच ने विजय सिंह और जीवा की अपील खारिज कर ट्रायल कोर्ट से मिली उम्रकैद की सजा को बहाल रखा. तबसे विजय सिंह जेल में ही हैं. उम्मीद है कि – मातावती और बसपा कार्तकर्ता इस घटना को याद रखेंगे

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