सरना वनवासी और सनातन हैं अटूट
अगर वनवासी और ईसाई एक ही मां के दो संतान है तो वनवासियों के बहुत सारे पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार क्यों और कैसे मनाए जाते हैं ? जैसे ….
पौष महीने की मकर संक्रांति को टुसु पर्व..
माघ महीने में माघे पर्व…
फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को बाहा पर्व…..
चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को सरहुल पर्व…..
चैत्र माह में सरहुल पर्व के दूसरे दिन से जानी शिकार पर्व….
वैशाख माह की पूर्णिमा को पारंपरिक शिकार उत्सव सेंदरा पर्व.
आषाढ़ माह में हेरो पर्व….
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को करमा पर्व….
कार्तिक माह की अमावस्या दीपावली के दूसरे दिन सोहराय पर्व…
ये है सरना और सनातन के बीच का अटूट संबंध …. दोनों ही प्रकृति उपासक….
कोई भी भारतीय सनातनी का पर्व और त्योहार ईसाई कैलेंडर के अनुसार नहीं मनाए जाते, क्योंकि इनका हमारे भारतीय त्योहारों के लिए कोई स्थान या महत्व है ही नहीं….
सच्चे वनवासी इस सच्चाई को भली भांति समझते हैं….
इसलिए पत्थर,पेड़, नदी, जंगल, पहाड़, चाँद सूरज को देवता सरना और सनातन ही मानते है |
