उप्र विधानसभा चुनाव में गौ माता रहेगी केंद्र में?

Yogi Adityanath, Akhilesh Yadav, Arshad Madni, Saif Abbas and Iqbal Ansari

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गौमाता विषय: विपक्ष के हथियार से ही उस पर वार करने के लिए तैयार उत्तर प्रदेश की योगी सरकार
गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने की मांग करके मुस्लिम संगठन और विपक्ष के दल भाजपा के निशाने पर आ गए हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें याद दिलाला है कि गाय को हिंदू संस्कृति में ‘माता’ माना जाता है और माता ‘पशु’ नहीं है। गाय उत्तर प्रदेश के चुनाव में बड़ा विषय बन सकता है।
सूर्यकांत पाठक

लखनऊ: गाय ‘गौ माता’ है या ‘पशु’? गायों को सुरक्षा और संरक्षण देने को क्या उसे ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने की जरूरत है? प्राचीन हिंदू मान्यता में जिसे ‘माता’ माना जाता है, क्या उसे पशु कहा जा सकता है? क्या गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किए जाने के बाद गौवध  बंद हो सकता है? क्या सरकार गौवध पर इसलिए पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगी रही क्योंकि गौमांस का निर्यात किया जाता है? ऐसे कई सवाल उत्तर प्रदेश की राजनीति में पिछले कुछ दिनों में उभरे हैं। संकेत मिल रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में गौ माता विषय पर योगी सरकार को घेरने की तैयारी की जा रही है। हालांकि यह संकेत भी मिलने लगे हैं कि चुनाव में यही विपक्ष पर हमले के लिए भाजपा का मुख्य विषय बन सकता है।

उत्तर प्रदेश में गाय को केंद्र में रखकर राजनीति शुरू हो गई है

गाय के प्रति श्रद्धा और उनकी सुरक्षा विषय उभरा
उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव अगले साल फरवरी-मार्च में होंगे। इस चुनाव में समाजवादी पार्टी के नेतृत्व में विपक्ष के इंडिया गठबंधन में शामिल कांग्रेस सहित अन्य दल चुनाव लड़ेंगे। समाजवादी पार्टी ने पीडीए (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) की रणनीति पर चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी कर ली है। दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार जातियों या धर्मों को लेकर कोई बात नहीं कर रही है। हालांकि इसी बीच गायों की सुरक्षा और गौ माता के प्रति श्रद्धा का एक ऐसा मुद्दा उभर आया है जिसके अगले चुनाव में प्रभाव दिखाने के पूरे आसार नजर आने लगे हैं।

बंगाल से शुरू हुई गाय पर राजनीति
विशेष बात यह है कि गौमाता और गौ रक्षा विषय  भाजपा या सत्ता पक्ष की किसी पार्टी ने नहीं बल्कि मौलानाओं और विपक्ष के नेताओं ने उठाया है। बकरीद पर गाय की कुर्बानी विषय को लेकर बहस शुरू हुई, जो धीरे-धीरे राजनीति के अखाड़े में पहुंच गई। मई के अंतिम सप्ताह में मुस्लिम समुदाय का बकरीद पर्व था। इससे पहले मुस्लिमों के कुर्बानी रिवाज को इस्तेमाल किए जाने वाले पशुओं पर विवाद शुरू हुआ। इसकी शुरुआत पश्चिम बंगाल से हुई, जहां मई के पहले सप्ताह में ही पहली बार भाजपा सत्ता में आई है।

सुवेंदु अधिकारी की पश्चिम बंगाल सरकार ने बकरीद से पहले एक नोटिस जारी किया था। इसमें कहा गया था कि बिना प्रमाण पत्र के किसी भी बैल, बछड़े, गाय या भैंस का वध नहीं किया जा सकता। उसमें यह भी कहा गया था कि इसका उल्लंघन संज्ञेय अपराध माना जाएगा।

हुमायूं कबीर के बिगड़े बोल
इस पर 20 मई को आम जनता उन्नयन पार्टी के अध्यक्ष हुमायूं कबीर ने बीजेपी और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को निशाना बनाते हुए कहा था कि मुस्लिम समुदाय कुर्बानी के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेगा। हुमायूं कबीर ने कहा था कि संविधान का सम्मान करना चाहिए, लेकिन कुर्बानी होगी। गाय की भी होगी, बकरे की भी होगी और ऊंट की भी होगी। कुर्बानी के लिए जो पशु जायज हैं, उनकी कुर्बानी होगी।

 

हुमायूं कबीर ने कहा था कि मैं बीजेपी सरकार को चेतावनी देता हूं। सुवेंदु अधिकारी से सीधे तौर पर कह रहा हूं कि आग से मत खेलो। उन्होंने कहा था कि 37 प्रतिशत से अधिक मुसलमान गाय का गोश्त खाते हैं। सबसे पहले स्लॉटर हाउस बंद करना चाहिए। उन्हें तो लाइसेंस दिया गया है। भारत सरकार तो बीफ बाहर भेजकर पैसे कमा रही है। क्या सरकार इसे बंद करेगी?

गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने की मांग
इसके बाद गौरक्षा को लेकर पश्चिम बंगाल के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में भी बयानबाजी शुरू हो गई। हुमांयू कबीर जहां गायों को कुर्बान करने के लिए हुंकार भर रहे थे वहीं उत्तर प्रदेश में मुस्लिम समुदाय के एक वर्ग ने गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने की मांग की। बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि केस के पूर्व वादी मोहम्मद इकबाल अंसारी ने गाय की कुर्बानी का खुलकर विरोध किया। उन्होंने कहा कि हम भारतीय मुसलमान हैं और गाय को ‘गौमाता’ कहा जाता है। इसलिए मुसलमानों को गाय का सम्मान करना चाहिए। सरकार को इसे ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित कर देना चाहिए। उन्होंने इसके लिए यूपी की योगी सरकार से आवश्यक कदम उठाने की मांग की।

इकबाल अंसारी ने कहा कि, गाय का सम्मान होना चाहिए। गाय की कुर्बानी बिल्कुल नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गाय बहुत सीधा जानवर है, इसीलिए लोग उसको पूजते हैं। हिंदू धर्म में गौमाता पूज्य हैं। मुसलमान भी गाय का सम्मान करते हैं, गाय पलते हैं। गाय का दूध फायदेमंद है। गाय का गोश्त खाने के लिए मना किया गया है। अंसारी ने कहा कि इस्लाम गौहत्या से मना करता है। इसके बाद भी कुछ सरफिरे लोग मुसलमानों को बदनाम करने के लिए यह सब काम करते हैं।

इकबाल अंसारी के बयान का कांग्रेस ने किया समर्थन
इकबाल अंसारी की बात का कांग्रेस नेता हुसैन दलवाई ने समर्थन किया। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में गाय की पूजा की जाती है, इसलिए लोगों को गाय का सम्मान करना चाहिए। आप बकरियों की कुर्बानी दे सकते हैं। गायों की कुर्बानी देने की क्या मजबूरी है? गाय की कुर्बानी की अनुमति बिल्कुल नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि गाय का दूध फायदेमंद और औषधीय गुणों से भरपूर होता है।

 

मौलाना अरशद मदनी ने भी अंसारी के सुर में सुर मिलाया
इसी बीच बकरीद से पहले 27 मई को सहारनपुर में जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने भी सरकार से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग कर दी। उन्होंने कहा कि, यदि ऐसा होता है तो इस पर मुसलमानों को कोई आपत्ति नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा कि, इससे गाय के नाम पर होने वाली मॉब लिन्चिंग की घटनाएं बंद हो जाएंगी और समाज में नफरत और तनाव का माहौल खत्म हो जाएगा।

मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि गाय के मुद्दे को राजनीतिक और भावनात्मक हथियार बना दिया गया है। गोकशी और पशु तस्करी के नाम पर निर्दोष लोगों को निशाना बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि कई बीजेपी शासित राज्यों में खुलेआम गौमांस खाया जाता है, लेकिन वहां पर कोई हिंसा नहीं होती और वहां के लोग खामोश रहते हैं। दूसरी तरफ कुछ राज्यों में गाय के प्रति श्रद्धा से ज्यादा राजनीति को प्राथमिकता दी जा रही है। गाय को राजनीतिक मुद्दा बना दिया गया है।

 

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती गौरक्षा के लिए मैदान में
इसी बीच बांदा में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गायों की दुर्दशा के लेकर यूपी सरकार पर हमला बोल दिया। उन्होंने कहा कि सरकार गौमाता के संरक्षण और सुरक्षा की बात तो करती है, लेकिन कुछ करती नहीं है। प्रदेश के 118 विधानसभा क्षेत्रों में मैंने गौ माता का हाल देखा है, जहां पर गौमाता तड़प रही हैं और काटी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव को लेकर हजारों लोग संकल्प ले चुके हैं कि वे इस बार सड़क, बिजली और पानी के मुद्दे के बजाय गौमाता की रक्षा के मुद्दे को लेकर मतदान करेंगे।

 

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बताया कि उन्होंने गौरक्षा की मुहिम के तहत गविष्टी यात्रा गोरखपुर से 3 मई को शुरू की है, जो कि उत्तर प्रदेश के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों से गुजरेगी। इसमें लोगों को गौ माता की रक्षा के लिए प्रेरित किया जाएगा। यह यात्रा 22 जुलाई को गोरखपुर में ही समाप्त होगी।

गाय को ‘पशु’ कहने पर भड़के सीएम योगी
बकरीद पर्व तो गुजर गया लेकिन गाय को लेकर बहस जारी रही। दो जून को यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिजनौर में एक कार्यक्रम में गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग उठाने वाले मौलानाओं पर जोरदार हमला किया। सीएम योगी ने कहा कि कुछ मौलाना और मुस्लिम संगठन गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गाय हमारे लिए पशु नहीं, माता है। उसका सम्मान किसी सरकारी घोषणा का मोहताज नहीं है। योगी ने आरोप लगाया कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग करने वाले कुछ संगठन एक ओर गोहत्या में शामिल लोगों को संरक्षण देते हैं, वहीं दूसरी ओर गाय के सम्मान की बात करते हैं।

 

‘आक्रांताओं की पशुवत सोच’
योगी आदित्यनाथ ने जमीयत उलमा-ए-हिंद (एएम गुट) के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी और अन्य मुस्लिम संगठनों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ‘पशुवत’ सोच के ‘आक्रांता’ लोग सनातन परंपरा में ‘माता’ का दर्जा रखने वाली गाय को पशु बता रहे हैं। गाय हमारी माता है और हमारा जन्म-जन्मांतर का नाता है। उन्होंने मुस्लिम संगठनों से कहा कि गाय हमारे लिए पशु नहीं है। पशुवत आपकी सोच है, जो आप गौ माता को पशु बोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि, गाय तो स्व घोषित राष्ट्र माता है और किसी को उसे राष्ट्र माता घोषित करने की जरूरत नहीं है।

 

शिया धर्मगुरु ने की गौ हत्या पर पाबंदी लगाने की मांग
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान के बाद शिया धर्मगुरु मौलाना सैफ अब्बास ने गौहत्या पर देश भर में प्रतिबंध लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने कहा है कि गाय हमारी माता है। हम भी माता होने की वजह से पूरे देश में गाय की हत्या पर पाबंदी लगाए जाने की मांग कर रहे हैं। सौ करोड़ हिंदुओं की आस्था का ध्यान न रखा जाए, यह अफसोसनाक है।

समाजवादी पार्टी ने मांस निर्यात का मुद्दा उठाया
इसके बाद समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा कि सभी की धार्मिक भावनाओं का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने बीजेपी से सवाल पूछा कि देश में मांस निर्यात में उत्तर प्रदेश की बड़ी हिस्सेदारी को लेकर सरकार का क्या रुख है? उन्होंने कहा कि बीजेपी हर बार धर्म-आधारित मुद्दों को उठाकर बेरोजगारी, महंगाई, किसान और मजदूरों के सवालों से बचने का प्रयास करती है।

 

अयोध्या के संत मुख्यमंत्री योगी के साथ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान का अयोध्या के साधु-संतों ने समर्थन किया। महंत सीताराम दास महाराज ने कहा, योगी आदित्यनाथ ने जो कहा है, वह सौ फीसदी सही है। गौमाता विश्व की माता हैं। गौमाता को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग करने वाले मौलाना-मौलवियों की बुद्धि पशुवत है। गौमाता स्वघोषित माता हैं। हनुमानगढ़ी के महंत डॉ देवेशाचार्य महाराज ने कहा कि, गाय हमारी माता है। माता को पशु घोषित करने की मांग के पीछे एक साजिश है। गौमाता को पशु कहकर दुर्व्यवहार किया जाएगा।

 

स्वामी रामभद्राचार्य और अविमुक्तेश्वरानंद आमने-सामने
इस बीच लखनऊ में जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने कहा कि, गाय विश्व माता है। मुख्यमंत्री ने बिल्कुल ठीक कहा है। गाय स्वयं मां हैं, गौवध बंद होने का एक ही उपाय है, अगले निर्वाचन में हिंदुत्ववादियों को 370 सीटें मिल जाएं तो तुरंत गौवध बंद हो जाएगा। हम लोग गोवध बंद करवाकर रहेंगे, लेकिन हमको हिंदुत्ववादियों की 370 सीटें लोकसभा में चाहिए। यह 2029 तक हो जाएगा। जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बयान पर कहा कि अपनी छवि के लिए कभी राजनीति नहीं करनी चाहिए।

 

यूपी सरकार का समाजवादी पार्टी पर निशाना
गाय की सुरक्षा पर बहस के बीच यूपी के मंत्री धर्मपाल ने गौ संरक्षण को लेकर समाजवादी पार्टी को निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि, गायों की सुरक्षा योगी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उत्तर प्रदेश में 7500 गौशालाओं में करीब 14 लाख गायों को आश्रय दिया जा रहा है। मैं सीएम योगी आदित्यनाथ को उनके बयानों, उनके विजन और उनके समर्थन के लिए बधाई देना चाहूंगा। समाजवादी पार्टी के कार्यकाल के दौरान एक गाय के भरण-पोषण के लिए प्रतिदिन मात्र 30 रुपये आवंटित किए जाते थे। योगी जी ने इस राशि को बढ़ाकर 50 रुपये कर दिया है।

 

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जनवरी 2026 में बीजेपी पर गायों की रक्षा को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि उनके घर में 45 गायें हैं। उन्होंने चुनौती देते हुए सवाल पूछा था कि क्या किसी भी पत्रकार, बीजेपी कार्यकर्ता या नेता के पास उनसे ज्यादा गायें हैं?

विपक्ष पर उसी के हथियार से वार की तैयारी
ऐसा लगता है कि उत्तर प्रदेश में प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी मुस्लिम संगठनों के जरिए गौरक्षा के मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष को निशाना बनाने की कोशिश कर रही है। हालांकि  उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके हथियार से उन्हीं पर वार करने की तैयारी कर ली है। गायों के संरक्षण की बात जब राजनीतिक विमर्श से बाहर थी तब मुस्लिम संगठनों ने इस मुद्दे को लेकर आग भड़का दी है। भाजपा अब इसी विषय को उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के प्रचार में बड़े मुद्दे के रूप में पेश करके विपक्ष को निशाना बना सकती है।

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