उपनल कर्मियों को 12 वर्ष की सेवा पर ‘समान काम को समान वेतन’ पर सहमति

Upanal employees Will get equal pay for equal work after 12 years of service
उपनल कर्मचारी : 12 साल की सेवा पर मिलेगा समान काम के लिए समान वेतन

सैनिक कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में बनी सहमति

शासनादेश होने पर आज स्थगित हो सकता है कर्मचारियों का आंदोलन
देहरादून 23 नवंबर2025। । उपनल कर्मचारियों को पहले चरण में 12 साल की सेवा पर समान कार्य के लिए समान वेतन मिलेगा। वहीं, आंदोलनरत कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस पर सहमति बनी है। उपनल कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के संयोजक विनोद गोदियाल के अनुसार मांगों पर आज शासनादेश होने पर आंदोलन स्थगित कर दिया जाएगा।
प्रदेश के 22 हजार उपनल कर्मचारी लंबित मांगों के लिए पिछले 14 दिन से हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें नियमित करने सहित समान काम के लिए समान वेतन दिया जाए। कर्मचारियों की शनिवार को सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी के साथ हुई वार्ता के बाद रविवार को एक बार फिर उनके कैंप कार्यालय में वार्ता हुई। उपनल कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के संयोजक विनोद गोदियाल के मुताबिक बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जाएगा। नो वर्क नो पे के आदेश को रद्द किया जाएगा। वहीं, एस्मा में कर्मचारियों पर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं होगी।
सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी से आज उनके शासकीय आवास पर उपनल कर्मचारी महासंघ के पदाधिकारियों ने भेंट कर समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग करते हुए सरकार से शीघ्र कार्यवाही की आग्रह किया था।

सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने उपनल कर्मचारी महासंघ के पदाधिकारियों को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार उपनल कर्मचारियों के हितों के प्रति संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए कल मुख्यमंत्री जी से वार्ता कर शीघ्र ही उचित निर्णय लिया जाएगा।

बैठक में उपनल कर्मचारी महासंघ के प्रदेश महामंत्री विनय प्रसाद सहित अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।

उपनल कर्मचारियों के साथ हुई बैठक में समान काम के लिए समान वेतन पर सहमति बनी है। आज मुख्यमंत्री के साथ बैठक होनी है। जिसमें कर्मचारियों की मांगों को लेकर समाधान निकाल लिया जाएगा।गणेश जोशी, सैनिक कल्याण मंत्री

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डॉक्टर सुभाष थैलेडी की फेसबुक वॉल से

#उपनल_के_बहाने: उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड (UPNL) उत्तराखंड सरकार द्वारा पूर्व सैनिकों के कल्याण हेतु बनाई गई एक सार्वजनिक लिमिटेड कंपनी है। इसका उद्देश्य विभिन्न एजेंसियों में आउटसोर्सिंग के माध्यम से पूर्व सैनिकों को सेवाएं उपलब्ध कराना था।

लेकिन समय के साथ उत्तराखंड के नेताओं ने इसे सरकारी कार्यालयों में भर्ती हेतु बैकडोर एंट्री का माध्यम बना दिया। आज स्थिति यह है कि उपनल के माध्यम से आउटसोर्स किए गए लगभग बाइस हजार से अधिक बेरोजगार युवाओं के विनियमितीकरण का मामला सरकार के सामने लंबित है।

मेरी संवेदनाएँ उन सभी युवाओं के साथ हैं। यह भी सही है कि आउटसोर्स कर्मियों को समय-समय पर महंगाई भत्ते के साथ उनका मानदेय बढ़ाया जाना चाहिए, जो पर्याप्त रूप से नहीं किया गया। परंतु यह प्रश्न भी महत्वपूर्ण है कि क्या यह नियुक्ति प्रक्रिया स्वयं में उचित थी?

मेरे विचार में उपनल के माध्यम से विभिन्न विभागों में लगाए गए इन युवाओं के साथ छल हुआ है। इनमें से अधिकतर नियुक्तियाँ कानूनी रूप से संदिग्ध हैं। गंभीर प्रश्न यह भी है कि उपनल की आउटसोर्सिंग में क्या विशेषज्ञता थी? चयन प्रक्रिया क्या थी? क्या किसी पद के लिए विज्ञापन जारी हुए? क्या सक्षम चयन समिति गठित हुई? क्या आरक्षण नियमों का पालन हुआ?

यदि नियुक्तियाँ उपनल ने कीं, तो फिर विनियमितीकरण का भार सरकार पर क्यों डाला जा रहा है? इसे उपनल की जिम्मेदारी माना जाना चाहिए और यदि अनियमितता हुई है, तो उपनल के खिलाफ कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए। विनियमितीकरण उन्हीं कर्मियों का होता है जिन्हें सरकार नियमित पदों के स्थान पर तदर्थ रूप से नियुक्त करती है और जिनकी नियुक्ति में नियमित प्रक्रिया जैसे नियमों का पालन किया गया हो।

सवाल यह भी है कि जब प्रत्येक जिले में सेवायोजन कार्यालय मौजूद हैं, जिनका कार्य ही रोजगार उपलब्ध कराना है, तो उपनल जैसी संस्था से सेवाएँ क्यों ली गईं? सेवायोजन कार्यालयों को निष्क्रिय क्यों होने दिया गया? उत्तर स्पष्ट है, वहाँ नियमों का पालन अनिवार्य था, और नेताओं के ‘मनचाहे’ काम वहाँ संभव नहीं थे। उपनल इस बैकडोर व्यवस्था का सबसे सुविधाजनक माध्यम बन गया।

उपनल द्वारा की गई नियुक्तियों पर अनेक सवालिया निशान हैं।
यदि सरकार के पास नियमित पद नहीं थे, तो आउटसोर्स कर्मियों की इतनी बड़ी संख्या क्यों नियुक्त की गई? सामान्यतः आउटसोर्स कर्मी निश्चित समय और कार्य के लिए रखे जाते हैं और काम पूरा होते ही उनकी सेवाएँ समाप्त कर दी जाती हैं। परंतु उपनल के मामले में यह नियम लागू नहीं हुआ। उपनल द्वारा अकुशल, अर्धकुशल, कुशल, उच्च कुशल और अधिकारी श्रेणी में मानव संसाधन उपलब्ध कराया जा रहा है। यह सभी पद नियमित नियुक्ति के पद नहीं हैं। इन कर्मियों को मानदेय (basic wages) दिया जा रहा है। अतः स्पष्ट है कि उपनल कार्मिकों को वेतन नहीं दिया जाता है। इतनी मात्रा में कुशल, अकुशल मानव संसाधन को अनुबंधित करना किसी बड़ी साजिश से कम नही है।

प्रथमदृष्टया यह पूरा मामला गंभीर अनियमितताओं से भरा प्रतीत होता है। इसकी जांच सीबीआई से करवाई जानी चाहिए।

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