ये भी याद रहे- इतिहास और हमारे समय के खलनायक
अदालत में राम प्रसाद बिस्मिल ने अपनी वकालत खुद करने की इच्छा रखी। गोरी सरकार का उपलब्ध करवाया वकील न उस मामले को लड़ने के काबिल था न यक़ीन के…
अंग्रेज़ो की तरफ से वकालत कर रहा था जगत नारायण मुल्ला… मुल्ला की सबसे बड़ी ख़ास बात बस इतनी थी के ये मोतीलाल नेहरू का रिश्ते में समधी था… और इस समधियाने के चलते कांग्रेस और अंग्रेज़ो दोनो के यहाँ इसकी बड़ी पूछ थी…
शुरुआती बहस में ही जगत नारायण मुल्ला को समझ आ गया कि साधारण सा दिखने वाला वो गवई क्रांतिकारी उनके स्तर से कहीं ऊंचा है… पंडित राम प्रसाद बिस्मिल धारा प्रवाह हिंदी, उर्दू व अंग्रेज़ी बोलते थे तब के कानूनों की गहरी जानकारी रखते थे…
जगत नारायण मुल्ला लगातार कोर्ट में अपने आकाओं के सामने बगलें झांकने को मजबूर था… अंततः जगत नारायण मुल्ला ने अपने आकाओं से कह बिस्मिल के खुद की पैरवी करने पर रोक लगवाई और अपने ही पालतू वकील को सामने खड़ा कर घटनास्थल पर मिले एक चादर को पर्याप्त सबूत मान बिस्मिल को मौत की सज़ा दे दी गयी अंग्रेज जज के जरिये…
नेहरू का रिश्तेदार जगत नारायण मुल्ला ही था जिसने जलियांवाला बाग हत्याकांड की जांच में डायर को क्लीनचिट देने में गुरेज़ नहीं किया…
इसका इनाम भी उसे मिलां और आज तक मिल रहा है…
वो खुद कांग्रेस के लखनऊ अधिवेशन का अध्यक्ष बना, UP हाइकोर्ट का जज बना, उसका बेटा आज़ाद भारत में ढेर सम्मान पाया और सांसद चुना गया राज्यसभा कांग्रेस ने भेजा आनंद नारायण मुल्ला को तो लोकसभा लखनऊ की महान जनता ने… किसी दूसरे मुल्क में आपको ऐसी बेग़ैरती सायद ही दिखे…
भगत सिंह को फांसी की सज़ा देने वाला जज भी कोई अंग्रेज न था इसी हिंदुस्तान की मिट्टी का था शादी लाल पुनः वही कहानी नेहरू का परम मित्र शादीलाल जज, नेहरू का ही दूसरा करीबी मित्र शोभा सिंह गवाह… बिना ठोस सबूत फांसी दे दी गयी…
शोभा सिंह और उसके कुनबे को दिल्ली में निर्माणकार्यों के ठेके दे कर आज़ाद भारत में नवाजा गया इसी का सपूत था खुशवंत सिंह, पंजाब में शादीलाल के विरोध के चलते उसे नेहरू द्वारा सरकारी अनुदान में UP के शामली में लंबी चौड़ी जमीनें दी गयी और भगत सिंह का दिन रात नाम रटने वाले जाट बंधु उसी सर् शादी लाल इंडस्ट्रीज को आज तक पाल पोस रहे हैं… शादी लाल का कुनबा चीनी उद्योग का पश्चिम UP का बड़ा नाम है…
आनंद भवन में भगत सिंह केस पर नेहरू से बात करने पहुंचे चंद्रशेखर आज़ाद वहां हुई गर्मागर्म बहस के बाद निकल आये और कंपनी बाग में जा बैठे आनंद भवन से ही नेहरू का रसोइया पीछे लग चुका था… आज़ाद का पुराना साथी और तब कांग्रेस से जुड़ चुका वीर भद्र तिवारी पुलिस के साथ कंपनी बाग पहुंचा था ताकि पहचान की कोई गलती न रहे… वीर भद्र तिवारी पर भी कांग्रेस और नेहरू की खूब मेहरबानियां बरसीं… हालांकि चंद्र शेखर के साथी रहे रमेश चंद्र गुप्ता ने बाद में वीरभद्र तिवारी को मारने का प्रयत्न किया पर वो एक गोली खा बच गया…
ऐसे 100 अन्य उदाहरण और लिख सकता हूँ…
पर कमाल देखिये के ये ही बेगैरत कांग्रेसी आरएसएस को अंग्रेज़ो का मुखबिर बताते हैं… कौन था मुखबिर??? कभी तो आईने में खुद से ये सवाल करो बे…
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Category: भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas
#ये है देश के दो बड़े गद्दारों शोभा सिंह और शादी लाल की कहानी….
जब दिल्ली में भगत सिंह पर अंग्रेजों की अदालत में असेंबली में बम फेंकने का मुकद्दमा चला तो…
*#भगत सिंह और उनके साथी बटुकेश्वर दत्त के खिलाफ #शोभा सिंह ने गवाही दी और #दूसरा गवाह था शादी लाल !
दोनों को वतन से की गई इस गद्दारी का इनाम भी मिला। दोनों को अंग्रेजोसे न सिर्फ सर की उपाधि दी गई बल्कि और भी कई दूसरे फायदे मिले।
#शोभा सिंह को दिल्ली में बेशुमार दौलत और करोड़ों के सरकारी निर्माण कार्यों के ठेके मिले आज कनौट प्लेस में सर शोभा सिंह स्कूल में कतार लगती है बच्चो को प्रवेश नहीं मिलता है जबकि
#शादी लाल को पंजाब में पांव रखने को जगह नहीं मिली तो अंग्रेजों ने बागपत के नजदीक अपार संपत्ति दी। आज भी शामली में शादी लाल के वंशजों के पास चीनी मिल और शराब कारखाना है।
👉 सर शादीलाल और सर शोभा सिंह, भारतीय जनता कि नजरों मे सदा घृणा के पात्र थे और अब तक हैं
लेकिन शादी लाल को गांव वालों का ऐसा तिरस्कार झेलना पड़ा कि उसके मरने पर किसी भी दुकानदार ने अपनी दुकान से कफन का कपड़ा तक नहीं दिया। शादी लाल के लड़के उसका कफ़न दिल्ली से खरीद कर लाए तब जाकर उसका अंतिम संस्कार हो पाया था।
*#शोभा सिंह खुशनसीब रहा। उसे और उसके पिता सुजान सिंह (जिसके नाम पर पंजाब में कोट सुजान सिंह गांव और दिल्ली में सुजान सिंह पार्क है) को राजधानी दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में हजारों एकड़ जमीन मिली और खूब पैसा भी। शोभा सिंह के बेटे खुशवंत सिंह ने शौकिया तौर पर पत्रकारिता शुरु कर दी और बड़ी-बड़ी हस्तियों से संबंध बनाना शुरु कर दिया। याद करें ये वही खुशवंत सिंह थे जिन्होने ठोक कर एमरजेंसी का समर्थन किया और खालिस्तानी आतंकवाद के चरम में सिखी को सनातन की बजाय इस्लाम के नजदीक बताना शुरु कर दिया था. सर शोभा सिंह के नाम से एक चैरिटबल ट्रस्ट भी बन गया जो अस्पतालों और दूसरी जगहों पर धर्मशालाएं आदि बनवाता तथा मैनेज करता है। आज दिल्ली के कनॉट प्लेस के पास बाराखंबा रोड पर जिस स्कूल को मॉडर्न स्कूल कहते हैं वह शोभा सिंह की जमीन पर ही है और उसे सर शोभा सिंह स्कूल के नाम से जाना जाता था।
खुशवंत सिंह ने अपने संपर्कों का इस्तेमाल कर अपने पिता को एक देशभक्त. दूरद्रष्टा और निर्माता साबित करने की भरसक कोशिश की।
खुशवंत सिंह ने खुद को इतिहासकार भी साबित करने की भी कोशिश की और कई घटनाओं की अपने ढंग से व्याख्या भी की। खुशवंत सिंह ने भी माना है कि उसका पिता शोभा सिंह 8 अप्रैल 1929 को उस वक्त सेंट्रल असेंबली मे मौजूद था जहां भगत सिंह और उनके साथियों ने धुएं वाला बम फेंका था। #बकौल खुशवंत सिह, बाद में शोभा सिंह ने यह गवाही दी, शोभा सिंह 1978 तक जिंदा रहा और दिल्ली की हर छोटे बड़े आयोजन में वह बाकायदा आमंत्रित अतिथि की हैसियत से जाता था। हालांकि उसे कई जगह अपमानित भी होना पड़ा लेकिन उसने या उसके परिवार ने कभी इसकी फिक्र नहीं की।
खुशवंत सिंह का ट्रस्ट हर साल सर शोभा सिंह मेमोरियल लेक्चर आयोजित करवाता जिसमे बड़े-बड़े नेता और लेखक अपने विचार रखने आते,और…बिना शोभा सिंह की असलियत जाने (य़ा फिर जानबूझ कर अनजान बने) उसकी तस्वीर पर फूल माला चढ़ा आते
👉#आज़ादी के दीवानों के विरुद्ध और भी गवाह थे ।
*1. शोभा सिंह
*2. शादी राम
*3. दिवान चन्द फ़ोर्गाट
*4. जीवन लाल
*5. नवीन जिंदल की बहन के पति का दादा
*6. भूपेंद्र सिंह हुड्डा का दादा
👉#दीवान चन्द फोर्गाट DLF कम्पनी का Founder था इसने अपनी पहली कालोनी रोहतक में बनाई थी .इसकी इकलौती बेटी थी जो कि K.P.Singh को ब्याही और वो मालिक बन गया DLF का ।
*👉#अब K.P.Singh की भी इकलौती बेटी है जो कि कांग्रेस के गुलाम नबी आज़ाद के बेटे सज्जाद नबी आज़ाद के साथ ब्याही है । अब वह DLF का मालिक बनेगा ।
👉#जीवन लाल मशहूर एटलस साईकल कम्पनी का मालिक था।
#हुड्डा को तो आज किसी परिचय की जरुरत नहीं है हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री जिनकी कुर्सी जाने से आज वो इतना तिलमिला गए हैं की उन्होंने जाट आंदोलन की आड़ में पूरा हरियाणा जला दिया .इसका बेटा भी काँग्रेस का सांसद है.
*प्रभाकर मुंबईकर
गोधरा के दंगे याद हैं लेकिन साबरमती एक्सप्रेस दाह?
गोधरा में जब साबरमती एक्सप्रेस की उन जली हुई बोगियों मे से जले शव निकाले जा रहे थे तब उनमे एक जला हुआ शव ऐसा भी था जो दिख तो एक रहा था मगर करीब जाकर गौर से देखा तो मालूम हुआ ये जला हुई एक शव नही बल्कि दो हैं……!
एक मां अपना दूध पीता बच्चा अपने सीने से चिपकाये राख हो गई थी…..!
प्रशासन ने मां बच्चे के शव अलग करने की कोशिश की मगर वो दोनो शव अलग नही किये जा सकें …
बच्चे की पसलियां गलकर मां के सीने से चिपक गई थी…..!
पहचान नहीं हुई, प्रशासन ने दोनों की अंत्येष्टि एक साथ करवाई ….!
कांग्रेस और असामाजिक देश विरोधी वामपंथी चरित्र वालों को गुजरात दंगे याद है…!
मगर गोधरा में हिंदूओं से निर्ममता याद नही ….!
तीस्ता सीतलवाड़ को कोर्ट की हरी झंडी पर गुजरात ATS ने गिरफ्तार किया । आखिर कौन है ये “तीस्ता सीतलवाड़”?
आखिर 20 साल बाद इसे क्यों गिरफ्तार किया गया….
गुजरात दंगे क्यों और किसकी योजनाओं की हिस्सा था?
कैसे नरेंद्र भाई मोदी को दंगे का जिम्मेदार ठहराने की कोशिश हुई……
तीस्ता सीतलवाड़ के NGO को UPA सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने फंड दिया था…….जिसका उपयोग नरेंद्र मोदी के विरुद्ध एजेंडा चलाने में हुआ ……?
मात्र 20 हजार महीना कमाने वाली सीतलवाड़ रातों रात कैसे अरबों रूपये की मालिक बनकर NGO चलाने लगी…? जो आज तक सनातन विरोधी ऐजेंडा चलाता रहा है….
अपने आस पास मंडरा रहे देश में अराजकता फैलाने वाले ‘तीस्ता सीतलवाड़’ जैसे असामाजिक देश विरोधी वामपंथी चरित्र वालों को पहचान उन्हे बेनकाब करना सबका दायित्व होना चाहिए……।
यही नही….
तीस्ता सीतलवाड़ के अलावा राजदीप सरदेसाई और सागरिका घोष को भी गिरफ्तार करके उन पर रासुका लगाया जाना चाहिए……. क्यों ? इन लोगों ने पिछले 20 सालों में नरेंद्र मोदी के नाम पर जो रोटियां सेंकी हैं’…!
तीस्ता जावेद सीतलवाड के साथ और भी लोग इस अपराध में शामिल थे उन्हें भी गिरफ्तार करना चाहिए, चाहे कितने भी पावरफुल नामचीन हस्तियां क्यों न हो !
सिर्फ तिस्ता सीतलवाड़ ही नही,कहानियां गढ़ने वाले पत्रकारों के कारगुजारियां की भी जांच हो कि आखिर क्या कुछ इन्हे बदले में मिल रहा था …..आलीशान बंगला और अथाह संपत्ति के मालिक भ्रष्टाचार के पुजारी ऐसे कई पत्रकारों के सच को देश की जनता के सामने लाना ही चाहिए है…..
तीस्ता सीतलवाड़ गुजरात आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) सड़क मार्ग से अहमदाबाद लाया है । सीतलवाड़ से किसी से पूछा कि जब दंगे हुये ही नही थे तो दंगे के एक दिन पहले गुजरात दंगों के बारे में उसने रिपोटिंग कैसे की….?
उसे दंगे की भनक कैसे, और कहां से लगी….!?
तीस्ता सीतलवाड़ के बाद राजदीप सरदेसाई नंबर क्यों नही लगा जिसने फर्जी रिपोर्टिंग करके पद्मश्री लिया…..?
तीस्ता सीतलवाड़ मतलब पत्रकार, राजनेता, NGO, कुछ वकीलों और आतंवादियों का ऐसा गठजोड़ जो इस देश को दीमक की तरह खा रहा था ,विदेशी पैसों से देश को जलाने वाला पूरा गैंग है । ……..
तीस्ता जावेद सीतलवाड़ को सुप्रीम कोर्ट के दिये फैसले की वजह से गुजरात SIT ने घर से उठाया ।
पर ….
ये कोई नहीं जानता कि ये देश जस्टिस एमबी सोनी का भी कर्जदार है!!*
*_आइए बताता हूं!_*
*नरेंद्र मोदी को जेल में सडाने की प्लानिंग किसकी थी!!!?*
*कैसे नरेंद्र मोदी बच सके!!? *
_षड्यंत्र कितने खतरनाक!!!_
आप अंदाज नहीं लगा सकते!!!
अगर वो सफल हो जाते!!!
तो हम क्या खो देते????
तो नरेंद्र मोदी का हश्र क्या होता!!!?
*कांग्रेस राज में कोई भी केस सुप्रीम कोर्ट में जाने के पहले ही सब कुछ मैनेज हो जाता था!!*
_वो…कि केस किस जज की बेंच में जायेगा और वो जज क्या फैसला देंगे …_
*कांग्रेस की 70 सालों की सफलता का यही सबसे बड़ा राज है कि!!…उसने मीडिया और न्यायपालिका सब मैनेज कर अपना राज स्थापित किया ..*
*गुजरात हाईकोर्ट के रिटायर जज जस्टिस एमबी सोनी ने इसका खुलासा तब किया, जब उन्होंने पाया कि गुजरात दंगो के सम्बन्धित कोई भी याचिका, जो तीस्ता सीतलवाड सुप्रीम कोर्ट में दायर करती है वो सिर्फ जस्टिस आफताब आलम के बेंच में ही क्यों जाती है, जबकि रोस्टर के अनुसार वो किसी और के बेंच में जानी चाहिए ।..*
_फिर उन्होंने और तहकीकात की तो पता चला कि रजिस्ट्रार को ऊपर से आदेश था कि तीस्ता का केस जस्टिस आफ़ताब आलम के बेंच में ही भेजा जाए और इसके लिए मस्टर रोल और रोस्टर को बदल दिया जाये .._
फिर उन्होंने और तहकीकात की तो पता चला कि…. *जस्टिस आफताब आलम की सगी बेटी अरुसा आलम, तीस्ता के एनजीओ सबरंग में पार्टनर है और … उस समय के केबिनेट मंत्री और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल की पत्नी भी उसी NGO में हैं, ..*
यह सब जानकर उन्होंने …इसके खिलाफ चीफ जस्टिस को पत्र भेजा, और…. *जस्टिस आफ़ताब आलम, कांग्रेस नेता और हिमाचल के मुख्यमंत्री की बेटी (जस्टिस अभिलाषा कुमारी) के 10 फैसलों की बकायदा आठ हजार पन्नों में विस्तृत विवेचना करके भेजा …. और कहा कि इन लोगों ने खुलेआम न्यायव्यवस्था का बलात्कार किया है।*
इसके बाद ही इस गैंग को ….गुजरात के हर एक मामले से अलग किया गया।
…..अगर जस्टिस एम बी सोनी नहीं होते” तो कांग्रेस सरकार नरेंद्र मोदी को दंगों के मामलों में फंसाने की पूरी प्लानिंग कर चुकी थी।
*कभी आपने राहुल गाँधी, लालू यादव, सीताराम येचुरी, मायावती, अखिलेश, ममता, महबूबा, और विपक्ष के नेताओं को एक दूसरे को चोर बोलते सुना है ?*
…नहीं !!!
*_जबकि इनमें से कुछ को ….सजा भी हो चुकी है, …कोई जेल में है, ….कोई बेल पर है और ….कुछ पर कोर्ट में मुकदमे चल रहे हैं, मगर …. ये लोग एक दूसरे को चोर कभी नहीं बोलते !_*
परन्तु मोदी जिस पर …कोई भी आधिकारिक आरोप नहीं है, ….कोई FIR नहीं है, ….कोई मुकदमा भी नहीं चल रहा है और ….किसी कोर्ट ने किसी जाँच का आदेश भी नहीं दिया, उसे ये सारे नेता चोर बोलते हैं !
यह देखकर आश्चर्य होता है …. धन्य है इस तरह की बेहूदगी को, और देश के प्रति गैरजिम्मेदारी को …..बल्कि *लानत है ऐसे देशद्रोही समझ पर! और लानत है इनके पीछे चलने वाले चमचों पर!!*
और ये भी …
जब आप मुंबई में मुंबई के पॉश एरिया जुहू में घूमेंगे तब जूहू तारा रोड पर अमिताभ बच्चन के बंगले के बाद 2-3 बड़े उद्योगपतियों के बंगले है फिर एक बेहद विशाल बंगला आपको नजर आएगा
जिसका नाम है निरान्त
यह बंगला अमिताभ बच्चन के बंगले से भी 3 गुना बड़ा है जिसमें 3 एकड़ का लॉन है। बेहद आलीशान बंगला है। आप सोच में पड़ जाएंगे कि आखिर यह किस उद्योगपति का मुंबई के जुहू जैसे पॉश एरिया में इतना आलीशान बंगला है
और यह बंगला तीस्ता जावेद सीतलवाड़ का है ।
🙄🙄सुभम वर्मा
भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas
कौन है तीस्ता जावेद सेतलवाड?
अंग्रेजो के नौकर जस्टिस “आगा हुसैन” ने भगत सिंह के पूरे केस की सुनवाई की थी और सजा लिखी थी.
लेकिन सजा सुनाने के समय छुट्टी पर चले गए थे और सजा सुनाने का काम अंग्रेजों के एक और नौकर जस्टिस शादीलाल ने किया था. जस्टिस आगा हुसैन और जस्टिस शादीलाल दोनों कांग्रेस से जुड़े हुए थे.
इससे पहले वीर सावरकर को भी कालापानी की सजा किसी अंग्रेज ने नहीं बल्कि अंग्रेजों के एक नौकर जस्टिस नारायण गणेश चंदावरकर खरे ने सुनाई थी जो कांग्रेस का पूर्व अध्यक्ष था.
आप गूगल पर सर्च कर सकते हैं नारायण गणेश चंद्राकर की मूर्ति मुंबई यूनिवर्सिटी में लगी है।
जब जलियांवाला बाग का आदेश देने वाले जनरल डायर पर पूरे विश्व की मीडिया में थू-थू हुआ तब अंग्रेजों ने जलियांवाला बाग़ की जांच को हंटर कमेटी बनायी।
लॉर्ड विलियम हंटर कमेटी अध्यक्ष थे और इसमें सिर्फ दो भारतीय पंडित जगत नारायण मुल्ला और सर चिमनलाल हीरालाल सेतलवाड थे। 
पं. जगत नारायण मुल्ला मोती लाल नेहरू के घनिष्ठ मित्र और उनके छोटे भाई नन्दलाल नेहरू के समधी थे.
अंग्रेजों ने विश्व को दिखाने को दो भारतीयों पंडित जगत नारायण मुल्ला और सर चिमनलाल हीरालाल सेतलवाड को हंटर आयोग का सदस्य बनाया जो अंग्रेजों के पालतू थे। जैसी उम्मीद थी वही हुआ यानी हंटर आयोग ने सर्वसम्मति से जनरल डायर को जलियांवाला बाग कांड से बरी कर दिया।
इसका इनाम अंग्रेजों ने चमन लाल हीरा लाल सेतलवाड को सर की उपाधि से दिया।
जगत नारायण मुल्ला तो नेहरु के सगे रिश्तेदार थे और सर चिमन लाल हीरा लाल सेतलवाड नेहरू के बहुत अच्छे मित्र थे।
देश आजाद हुआ तो प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उनके पुत्र
एम. सी. सीतलवाड़ को भारत का पहला अटार्नी जनरल (1950 से 1963) बनाया.ये भारत के सबसे समय तक रहे अटार्नी जनरल रहे. चिमन सीतलवाड़ तीस्ता चिमन सीतलवाड़ के सगे परदादा थे.
एमसी सीतलवाड़ का बेटा था
अतुल सेतलवाड जो मुंबई हाई कोर्ट का वकील था और घोर सेकुलर था। इसी अतुल की बेटी है तीस्ता जावेद सेतलवाड । अतुल सेकुलर था तो इसके घर कट्टर जिहादी जावेद आनंद का आना-जाना था और तीस्ता जावेद ने लव जिहाद में इस्लाम कबूल जावेद आनंद से निकाह कर लिया। 
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