अंकिता भंडारी हत्या :ऑडियो केस में सुरेश राठौर व उर्मिला से 2 FIR निरस्त, 2 पर जांच
सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर के खिलाफ दुष्यंत गौतम व आरती गौड़ ने दर्ज कराई है एफआईआर, हाईकोर्ट ने दो एफआईआर की निरस्त
Uttarakhand High Court
नैनीताल हाईकोर्ट
नैनीताल 04 जून 2026 : बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर पूर्व विधायक सुरेश राठौर और
उर्मिला सनावर के खिलाफ कथित ऑडियो-वीडियो मामले में भाजपा प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम व आरती गौड़ की ओर से लिखाई 4 एफआईआर में से 2 को एक समान होने के आधार पर हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया है. जबकि, 2 अन्य एफआईआर में जांच जारी रखने का निर्देश दिया है.
इन मुकदमों को सुरेश राठौर ने नैनीताल हाईकोर्ट में चुनौती दी है. मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ में हुई. मामले में पूर्व विधायक सुरेश राठौर ने देहरादून और हरिद्वार में दर्ज चार अलग-अलग एफआईआर (FIR) को चुनौती दी थी. याचिकाकर्ता का कहना था कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं. उन्हें राजनीतिक कारणों से फंसाया गया है.
दुष्यंत गौतम और आरती गौड का कथन : वहीं,
उत्तराखंड भाजपा प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम और
पूर्व जिला पंचायत सदस्य आरती गौड़ की ओर से अदालत को बताया गया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित ऑडियो-वीडियो सामग्री के माध्यम से उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया.
दो एफआईआर एक समान : अदालत ने पाया कि हरिद्वार के बहादराबाद और झबरेड़ा थानों में दर्ज एफआईआर संख्या 0534/2025 और 0356/2025 में लगाए गए आरोप लगभग वही हैं, जो देहरादून के डालनवाला थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 0004/2026 में लगाए गए हैं.
न्यायालय ने कहा कि इन दोनों मामलों के शिकायतकर्ता खुद पीड़ित नहीं थे. जबकि, वास्तविक पीड़ित पहले ही अलग एफआईआर दर्ज करा चुका था. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के टीटी एंटनी और राजेंद्र बिहारी लाल मामलों में दिए गए सिद्धांतों के अनुसार, इन एफआईआर को ‘सक्सेसिव एफआईआर’ मानते हुए निरस्त किया जाना उचित है.
आरती गौड़ और दुष्यंत गौतम के इन दो एफआईआर को निरस्त करने से इनकार: अदालत ने नेहरू कॉलोनी देहरादून में आरती गौड़ की ओर से दर्ज एफआईआर संख्या 0420/2025 और डालनवाला थाने में दुष्यंत गौतम की ओर से दर्ज एफआईआर संख्या 0004/2026 निरस्त करने से मना कर दिया.
कोर्ट की तीखी टिप्पणी: न्यायालय ने कहा कि प्रथम दृष्टया इन मामलों में संज्ञेय अपराध के तत्व दिखाई देते हैं और विस्तृत जांच आवश्यक हैं. अदालत ने ये भी माना कि किसी व्यक्ति को सोशल मीडिया के माध्यम से गंभीर अपराध से जोड़कर उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के आरोप गंभीर प्रकृति के हैं.
फैसले में न्यायालय ने टिप्पणी की कि यदि किसी व्यक्ति के पास किसी अपराध से संबंधित कोई सूचना या साक्ष्य है, तो उसे सक्षम प्राधिकारी के समक्ष पेश करना चाहिए, न कि सोशल मीडिया मंचों का उपयोग किसी व्यक्ति की छवि खराब करने को किया जाना चाहिए.
अदालत ने कहा कि सोशल मीडिया का उपयोग सार्वजनिक हित के विषय उठाने को होना चाहिए, न कि किसी की प्रतिष्ठा धूमिल करने को. हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि मामले में ये जांच का विषय है कि कथित ऑडियो-वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर किस उद्देश्य से प्रसारित किए गए और क्या इसके पीछे कोई राजनीतिक उद्देश्य या सुनियोजित षड्यंत्र थी?
सुरेश राठौर की दो याचिकाएं निरस्त: अदालत ने माना कि इस पक्ष की गहन जांच आवश्यक है, इसलिए संबंधित जांच एजेंसियों को अपना कार्य जारी रखने दिया जाना चाहिए. न्यायालय ने सुरेश राठौर की दो याचिकाएं निरस्त करते हुए उन्हें मिला अंतरिम संरक्षण भी समाप्त कर दिया. जबकि, दो अन्य याचिकाएं स्वीकार करते हुए हरिद्वार में दर्ज दोनों एफआईआर निरस्त कर दीं.
इसके अलावा अदालत ने शिकायतकर्ता आरती गौड़ और दुष्यंत कुमार गौतम को किसी प्रकार की सुरक्षा संबंधी आशंका होने पर पुलिस महानिदेशक एवं संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से संपर्क करने की स्वतंत्रता दी. साथ ही अधिकारियों को खतरे का आकलन कर आवश्यक सुरक्षा उपाय करने के निर्देश दिए.
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