हरदा के विषपुरुष अनावरण से भाजपा चौकन्नी, कांग्रेस कार्यकर्ताओं से सहानुभूति

हरदा के विष पुरुष खुलासे से भाजपा सतर्क, कांग्रेस कार्यकर्ताओं से सहानुभूति : चमोली

*लंबे राजनैतिक जीवन में कार्यकर्ताओं में भरा विष, उसका पश्चाताप कर रहे हैं हरदा : चमोली*

देहरादून 17 नवम्बर। हरीश रावत के विष पुरुष वाले अनावरण पर सतर्क भाजपा ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से सहानुभूति जताई है। वरिष्ठ विधायक एवं भाजपा प्रवक्ता विनोद चमोली ने कटाक्ष किया कि जो विष हरदा ने अपने लंबे राजनैतिक कार्यकाल में कांग्रेस में भरा, वह उसी को वापिस मांग रहे हैं। शायद यह उनके पश्चाताप करने का तरीका है।

पार्टी मुख्यालय में मीडिया के सवालों का ज़वाब देते हुए उन्होंने कहा, जैसा गंभीर और उग्र भाषण हरीश रावत ने दिया उससे लगा कि शायद पार्टी में उनके मन की नहीं हो रही । एक अनुभवी और वरिष्ठ नेता होने पर भी जैसी हताशापूर्ण आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल उन्होने किया,  वह कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए बेहद अपमानजनक है। बहुत ही दुर्भाग्य है कि उन्हें अपने कार्यकर्ता और नेता विष पुरुष दिखते हैं। इनमें अधिकांश वही हैं जिनके दम पर वे चुनाव लड़ते आए हैं और जिन्हें अपने विचारों से उन्ही ने राजनीति में अनुभवी बनाया है। इसका स्पष्ट है कि कहीं न कहीं वे कार्यकर्ताओं में जहर भरते आए हैं। उनका यह कहना कि कई कार्यकर्ता चाहते हैं उनका विधायक हार जाए और अन्य जगह कांग्रेस जीत जाए। दुख है कि कितना बड़ा अपमान और निरुत्साह वे अपने कार्यकर्ताओं को लौटा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि  यह कांग्रेस् का आंतरिक मामला है फिर भी हरीश रावत जैसे अनुभवी नेता के मुंह से ऐसे बयान सुनकर मैं स्वयं अचंभित और निराश हूं। उनके इस अनावरण से भाजपा तो सतर्क होगी ही, लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर दुष्प्रभाव निश्चित है।  ऐसे आत्मघाती बयानों से किसी तरह की सहानुभूति उन्हें जनता से मिलेगी, असंभव है। ऐसे टोटकों से कांग्रेस की नैया पार लगेगी, किसी को गलतफहमी नहीं होनी चाहिए। प्रदेश की जनता, पूरी तरह मोदी और धामी के नेतृत्व में भाजपा के साथ है।

हरीश रावत की नजर में कौन हैं कांग्रेस के विष पुरुष, भाजपा ने क्यों दिया जवाब? ये रहा पूरा मामला

हरीश रावत ने बड़ा बयान दिया है, जिसे लेकर भाजपा ने भी उन्हे घेरने में देरी नही की.

उत्तराखंड कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के शपथ ग्रहण समारोह में हरीश रावत ने बड़ा बयान दिया, जो इस वक्त सबसे ज्यादा चर्चा में है. हरीश रावत के इस बयान के बाद भाजपा को भी बैठे बिठाये कांग्रेस पर हमले का मौका मिल गया है.

दरअसल, कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय देहरादून में पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के स्वागत कार्यक्रम में हरीश रावत ने मंच से  कहा कि समाज में बहुत सारे विष पुरुष होते हैं. मैं उन सब से कहना चाहूता हूं, जिनके मन में थोड़ा-थोड़ा है, उस विष को मेरी जेब में उड़ेल दो, उसको मैं अपने गले में रख लूंगा. लेकिन कांग्रेस के लिए उस विष को या तो अपने पास रखो या फिर उनकी जेब में डाल दो. विष पुरुषों ने कांग्रेस को बहुत नुकसान पहुंचा दिया
हरीश रावत की नजर में कौन हैं कांग्रेस के विष पुरुष

कांग्रेस यदि ऐसे विष पुरुषों को दूर नहीं रखेगी, तो पार्टी (कांग्रेस) का कल्याण नहीं होगा. पार्टी को ऐसे ही विष पुरुषों से नुकसान हुआ है. विष पुरुषों को पार्टी से दूर रखना होगा. कांग्रेस के सामने लक्ष्य बड़ा है. मंजिल बड़ी है. बिहार चुनाव ने कांग्रेस के सामने बड़ा दायित्व सौंप दिया है.
-हरीश रावत, पूर्व सीएम उत्तराखंड-

अब सवाल यही है कि हरीश रावत का विष पुरुषों वाली व्यंग्योक्ति किसके लिए थी. कौन वो लोग हैं, जो कांग्रेस के लिए विष पुरुष बने हैं. हरीश रावत जैसे वरिष्ठ नेता का कथन भाजपा कैसे देखती है. इस पर भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधायक विनोद चमोली का भी बयान आया है.

हरीश रावत के विष पुरुष वाले बयान पर बीजेपी विधायक विनोद चमोली का कहना है कि हरीश रावत बहुत आक्रोशित थे. शायद कुछ उनके मन का नहीं हो रहा. इसीलिए वो इतना आक्रोशपूर्ण भाषण दे गये।

हरीश रावत की भाषा बहुत ही आपत्तिजनक है, जो मैं देख रहा हूं. हरीश रावत अपने ही कार्यकर्ताओं को विष पुरुष बता रहे हैं. कठिनाई ये है कि जिस कांग्रेस के दम पर वो अगला चुनाव लड़ रहे हैं, उसमें उन्हें सारे विष पुरुष दिख रहे हैं, इससे समझा जा सकता है कि कांग्रेस कहां खड़ी है. इतने वरिष्ठ नेता को ऐसा नहीं कहना चाहिए.
-विनोद चमोली, भाजपा विधायक और प्रवक्ता

भाजपा विधायक विनोद चमोली ने हरीश रावत के बयान उल्लिखित करते हुए कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं अपने विधायक को हराता है. ऐसा पहली बार सुना जा रहा है. उनकी खुद की समझ में नहीं आ रहा है कि हरीश रावत कांग्रेस को किस ओर ले जाना चाहते हैं. हरीश रावत के इस बयान का कितना कुप्रभाव कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर गया होगा, उसका वो अनुमान लगा सकते हैं. हरीश रावत अगर सोचते हैं कि इस तरह कांग्रेस की नैया पार लगेगी, तो वो गलत सोचते हैं.

 हरीश रावत के इस बयान पर भाजपा नेता ज्योति प्रसाद गैरोला का कहना है कि कांग्रेस की आज इस तरह की प्रवृत्ति और परिस्थिति बन गई है, उससे कहा जा सकता है कि कांग्रेस आज जहर और घृणा का पर्याय बन गई है. कांग्रेस इतनी ज्यादा जहरीली हो गई कि वो एक दिन इसी में समाप्त हो जायेगी.
प्रीतम बोले- भीतरघात के गंभीर आरोप के बावजूद नेताओं की पार्टी में वापसी गलत

“>प्रदेश में विधानसभा चुनाव में माननीय बनने के सपने देखने वाले नेता और उसके समर्थक अक्सर पार्टी से बगावत करते दिखे हैं. लेकिन हैरानी की बात है कि बगावत करने वाले नेताओं को पार्टी से बाहर करने के बाद कुछ समय बाद फिर वापस ले लिया जाता है. वहीं कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह ने इस प्रक्रिया को गलत बताया है.भीतरघात करने वाले नेताओं की वापसी पर बोलते प्रीतम सिंह.

>देहरादून: उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव के दौरान ऐसे कई नेता रहे हैं, जिन पर भितरघात के गंभीर आरोप भी लगे और उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता भी दिखाया गया. लेकिन चुनाव के बात कुछ नेताओं की वापसी भी कर ली गई. पार्टी के भीतर इन्हीं स्थितियों को लेकर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और मौजूदा विधायक प्रीतम सिंह से किए गए सवाल पर उन्होंने बड़ा बयान देते हुए ऐसी प्रक्रिया को गलत करार दे दिया है.

>प्रीतम ने घर वापसी पर उठाए सवाल: उत्तराखंड कांग्रेस में अनुशासनहीनता के मामले अक्सर सुर्खियों में रहते हैं. इस दौरान कम मौके ही होते हैं, जब पार्टी भितरघात से जुड़े मामलों पर कार्रवाई कर पाती है. लेकिन परेशानी तब खड़ी हो जाती है जब पहले पार्टी बगावत करने वालों पर कार्रवाई करती है और फिर फौरन उन्हें घर वापसी भी करा लेती है. इन स्थितियों में अक्सर कई नेता अपना विरोध भी दर्ज करा देते हैं. फिलहाल कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और मौजूदा विधायक प्रीतम सिंह इस मामले में पार्टी संगठन स्तर पर होने वाली ऐसी प्रक्रियाओं को गलत ठहरा रहे हैं. वैसे तो विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी के कई प्रत्याशियों ने विधानसभाओं में भितरघात होने की शिकायतें की और संगठन से ऐसे लोगों पर कार्रवाई करने की भी मांग की. लेकिन संगठन इस मामले में उदासीन बना रहा. यही नहीं अनुशासन समिति का अध्यक्ष पर भी लंबे समय तक खाली रहा और पार्टी संगठन को इस पद को भरने की जरूरत भी महसूस नहीं हुई. हालांकि इन स्थितियों को पार्टी और पार्टी के नेता भी पचा गए.

>कार्यकर्ता होते हैं असहज: लेकिन विवाद की वजह वह नेता बन गए जो पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव में काम करने के चलते पार्टी से बाहर भी किए गए और चुनाव होते ही फौरन उन्हें पार्टी में वापस भी ले लिया गया. ऐसी स्थितियों पर अक्सर तमाम नेता अपनी नाराजगी भी जाहिर करते रहे हैं. फिलहाल पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और चकराता विधानसभा से विधायक प्रीतम सिंह ने पार्टी में इस तरह की प्रक्रियाओं को गलत ठहराया है.प्रीतम सिंह ने कहा कि जिन नेताओं पर गंभीर आरोप लगते हैं उनको पहले तो पार्टी संगठन पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा देता है और उसके बाद फौरन इनकी वापसी भी करा दी जाती है, जो पूरी तरह से गलत है. उन्होंने कहा कि संगठन स्तर पर ऐसे लोगों को पार्टी के भीतर लेने से न केवल पार्टी प्रत्याशी का मनोबल कमजोर होता है. बल्कि तमाम पार्टी के कार्यकर्ता भी ऐसी स्थिति में असहज महसूस करते हैं. प्रीतम सिंह के इस बयान को पिछले दिनों पार्टी में सदस्यता के दौरान बागियों को वापसी कराने से जोड़कर देखा जा रहा है.

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