पहलगाम हमले पर आरोप पत्र:26 निर्दोषों की मौत में साझीदार थे लोकल गाइड परवेज और बशीर
EXCLUSIVE: लोकल गाइड चाहते तो बच सकती थी 26 बेगुनाहों की जान, पहलगाम हमले की चार्जशीट में खुलासा
पहलगाम आतंकी हमले की NIA चार्जशीट में बड़ा खुलासा हुआ है. जांच में सामने आया कि स्थानीय लोगों ने आतंकियों को खाना, पनाह और जानकारी दी थी. समय रहते सूचना मिलती तो 26 लोगों की जान बच सकती थी.
पहलगाम हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी.
अरविंद ओझा
नई दिल्ली,20 मई 2026,कश्मीर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पहलगाम में दिल दहला देने वाले आतंकी हमले को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की चार्जशीट से चौंकाने वाली बातें पता चली हैं कि घाटी में पर्यटकों के पैसों पर अपना पेट पालने वाले दो स्थानीय गाइड परवेज और बशीर अहमद चाहते तो 26 लोगों की जान बच सकती थी.लेकिन उनकी खामोशी और आतंकियों को दी गई ‘लोकल मदद’ ने कश्मीर के इतिहास के सबसे बड़े आतंकी हमलों में से एक की पटकथा लिख दी.
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम की खूबसूरत बैसरन घाटी (मिनी स्विट्जरलैंड) में हुई आतंकी घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। उस हमले में 26 मासूम नागरिकों की जान गई थी। अब इस मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने जो चार्जशीट दाखिल की है, उसने रोंगटे खड़े कर देने वाली बातें बताई हैं। जांच में स आया है कि इस नरसंहार की नींव सिर्फ 3,000 रुपये के लालच में रखी गई थी।
3000 रुपये ले आतंकियों को दी पनाह
NIA के अनुसार, पहलगाम के दो स्थानीय गाइड परवेज अहमद जोथड और बशीर अहमद जोथड-ने हमले से ठीक एक रात पहले (21 अप्रैल) तीन पाकिस्तानी आतंकियों को अपने घर शरण दी। इन गद्दारों ने 3000 रुपये ले आतंकियों को खाना खिला पांच घंटे उन्हें सुरक्षित ठिकाना दिया। इन्होने तभी पुलिस को बताया होता, तो अगले दिन हत्याकांड रोका जा सकता था।
आतंकियों को छिपे देखा, पर खामोश रहे
चार्जशीट में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि 22 अप्रैल को हमले से कुछ मिनट पहले,दोपहर 12:30 बजे परवेज और बशीर ने तीनों आतंकियों को बैसरन घाटी में एक बाड़ के पीछे हथियारबंद छिपे देखा था। वहां सैकड़ों पर्यटक और स्थानीय गाइड थे। ये दोनों चाहते तो चिल्लाकर लोगों को सावधान कर सकते थे या टूरिस्ट यूनियन को बता सकते थे,लेकिन ये वहां से चुपचाप अपने घोड़े लेकर भाग गए। इनकी इसी चुप्पी ने 26 घरों के चिराग बुझा दिए।
कौन है मास्टरमाइंड ‘अली भाई’?
NIA ने अपनी जांच में पाया कि हमलावर तीन आतंकी-सुलेमान शाह, जिब्रान और हमजा अफगानी-लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF)’ के थे। पकड़े गए आरोपितों के बयान और डिजिटल साक्ष्यों में बार-बार ‘अली भाई’ नाम आया। यह ‘अली भाई’ कोई और नहीं, बल्कि पाकिस्तान के कसूर का TRF कमांडर साजिद जट्ट है, जो सरहद पार से इस पूरे षड्यंत्र को कंट्रोल कर रहा था।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ और पाकिस्तानी षड़यंत्र के प्रमाण
इस हमले के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखाया था। अब जांच में डिजिटल सबूत भी पाकिस्तान की ओर इशारा कर रहे हैं। फेसबुक पर “जिब्रान हमारा आदमी था” नाम से किए गए पोस्ट को जब ट्रैक किया गया, तो उसके तार रावलपिंडी और बहावलपुर के पाकिस्तानी मोबाइल नंबरों से जुड़े पाए गए। यह साफ करता है कि यह हमला पूरी तरह से पाकिस्तानी एजेंसियों से प्रायोजित था। परवेज और बशीर जेल में हैं और उन पर देशद्रोह व हत्या की गंभीर धाराओं में मुकदमा चल रहा है।
चार्जशीट के अनुसार, हमले से एक दिन पहले यानी 21 अप्रैल 2025 को तीन आतंकी फैजल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ छोटू और हमजा अफगानी पहलगाम इलाके में घूम रहे थे. तीनों आतंकियों ने स्थानीय लोगों से संपर्क किया और उन्हें सुरक्षित ठिकाना मांगा.
झोपड़ी में आतंकियों की खातिरदारी!
NIA के सामने दिए बयान में बशीर अहमद ने बताया कि उसने तीनों आतंकियों को देखा था. आतंकियों ने उससे कहा कि उन्हें किसी सुरक्षित जगह पर ले जाए. बशीर उन्हें एक पेड़ के नीचे रुकने को कहकर परवेज की झोपड़ी यानी ढोंक पर पहुंचा और परवेज व उसकी पत्नी को चुप रहने को कहा.
यही वो परवेज की ढोंक है, जहां 5 घंटे तक रुके थे आतंकी
शाम करीब 5 बजे बशीर इशारे से तीनों आतंकियों को बुलाकर परवेज की झोपड़ी में ले गया. चार्जशीट के अनुसार आतंकियों के हाथों में हथियार थे और उनके बैग भी हथियारों से भरे थे. वे उर्दू में बात कर रहे थे लेकिन उनका लहजा पंजाबी था. बशीर ने पूछताछ में माना कि हुलिया देखकर वह समझ गया था कि वे ‘मुजाहिद’ यानी आतंकी हैं.
आतंकियों ने खुद को बेहद थका-प्यासा बताते हुए अल्लाह के नाम पर मदद मांगी. परवेज और बशीर ने उन्हें पानी पिलाया, चाय दी और खाना खिलाया. जांच में सामने आया है कि तीनों आतंक पांच घंटे तक झोपड़ी में रुके रहे. इस बीच उनके और दोनों स्थानीय लोगों में लंबी बातचीत भी हुई.
चार्जशीट के अनुसार, आतंकियों ने अमरनाथ यात्रा, पहलगाम में सुरक्षा बलों के कैंप, फोर्सेज की मूवमेंट और इलाके में सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी जानकारी भी जुटाई. NIA का कहना है कि परवेज और बशीर को इस बात का पूरा पता था कि वे आतंकियों की मदद कर रहे हैं.
हमले से चंद घंटे पहले भी दिखे थे आतंकी
रात 10 बजे आतंकी वहां से निकलने लगे तो परवेज और बशीर ने उनके लिए 10 रोटियां और सब्जी पैक करके दी. आतंकी अपने साथ हल्दी, मिर्च, नमक, पतीला और करछी भी ले गए. चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि आतंकियों ने बदले में परवेज को 3 हजार रुपये दिए थे.
जांच में यह भी सामने आया है कि हमले वाले दिन यानी 22 अप्रैल को भी परवेज और बशीर ने उन्हीं तीनों आतंकियों को बैसरन घाटी के बाहर फेंस पर बैठे देखा था. दोनों उस दिन दो पर्यटकों को लेकर बैसरन घाटी गए थे. जब वे पर्यटक लेकर वापस लौट रहे थे, तभी उनकी नजर आतंकियों पर पड़ी और वे सतर्क हो गए. कुछ देर बाद दोनों नीचे पहलगाम पहुंचे, तभी ऊपर बैसरन घाटी में बड़ा आतंकी हमला हो गया. हमले के बाद दोनों गाइड चुपचाप अंडरग्राउंड हो गए.
