मुख्यमंत्री धामी दो को देखेंगें राज्यव्यापी मानसून आपदा माॅक ड्रिल
राज्य स्तरीय माॅक ड्रिल की तैयारियां परखीं,यूएसडीएमए में टेबल टाॅप एक्सरसाइज आयोजित
2 जुलाई को सभी 13 जनपदों में माॅक ड्रिल, मुख्यमंत्री धामी करेंगे माॅक ड्रिल निरीक्षण
देहरादून 30 जून 2026 । 02 जुलाई को राज्यभर में व्यापक मॉक ड्रिल के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अंतिम चरण की तैयारियों के आकलन को मंगलवार को उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में टेबल टॉप एक्सरसाइज आयोजित हुई जिसमें राज्य के सभी 13 जनपदों एवं विभिन्न रेखीय विभागों की आपदा प्रतिक्रिया प्रणाली, आपसी समन्वय, संसाधनों की उपलब्धता तथा राहत एवं बचाव कार्यों की कार्ययोजना का विस्तृत परीक्षण किया गया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के क्रम में 02 जुलाई को राज्य में अब तक की सबसे व्यापक माॅक ड्रिल का आयोजन होगा। सभी 13 जनपदों में मानसून के दौरान आपदाओं का प्रभावी तरीके से सामना करने के लिए राज्य के अलग-अलग 66 स्थानों पर माॅक ड्रिल होगी। खास बात यह है कि जिन स्थानों पर यह माॅक ड्रिल आयोजित की जा रही है, उनमें से 95 प्रतिशत स्थान नए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी माॅक ड्रिल का निरीक्षण करेंगे।
इस अवसर पर सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर विभिन्न रेखीय विभागों के बीच समन्वय को बेहतर बनाने, उपकरणों तथा संसाधनों का आपदा के समय बेहतर से बेहतर उपयोग करने तथा वास्तविक आपदा के समय राहत और बचाव कार्यों को प्रभावी तरीके से संचालित करने के लिए इस मॉक ड्रिल का आयोजन हो रहा है। मॉक ड्रिल का उद्देश्य केवल एक अभ्यास तक सीमित नहीं है, बल्कि वास्तविक आपदा की स्थिति में विभिन्न विभागों की तत्परता, संसाधनों की उपलब्धता, त्वरित निर्णय क्षमता तथा समन्वित प्रतिक्रिया प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाना है। उन्होंने कहा कि प्रभावी आपदा प्रबंधन की आधारशिला पूर्व तैयारी है। यदि सभी विभाग समय रहते अपनी व्यवस्थाओं का परीक्षण एवं सुधार कर लें, तो किसी भी आपदा के दौरान जन-धन की हानि को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि इस अभ्यास के माध्यम से संभावित कमियों एवं चुनौतियों की पहचान कर उनका समय रहते समाधान किया जाएगा, ताकि वास्तविक परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्य अधिक प्रभावी, समन्वित और त्वरित रूप से संचालित किए जा सकें। उन्होंने यह भी कहा कि आपदा प्रबंधन एक बहु-विभागीय दायित्व है, जिसमें सभी संबंधित विभागों, एजेंसियों तथा स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल अत्यंत आवश्यक है।
टेबल टाॅप एक्सरसाइज के दौरान विभिन्न रेखीय विभागों की तैयारियों को परखा गया। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से पूछा गया कि अतिवृष्टि, बाढ़, भूस्खलन, जलभराव, मानव वन्य जीव संघर्ष की सूचना प्राप्त होने पर क्या किया गया। किस तरह राहत और बचाव कार्य संचालित किए गए। किन-किन उपकरणों का उपयोग किया गया। गोताखोर, जल पुलिस, जेसीबी, बोट, राफ्ट आदि के परिचालन पर भी विमर्श हुआ। राहत शिविरों में रेस्क्यू किए गए लोगों के लिए क्या-क्या व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं, इन सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
यूएसडीएमए के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी-क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी ने माॅक ड्रिल के लिए क्या-क्या तैयारियां करनी हैं, इसके बारे में विस्तार से जनपदों को बताया।
इस अवसर पर आईजी अग्निशमन विभाग श्रीमती विम्मी सचदेवा, एससीईओ क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, निदेशक पशुपालन डाॅक्टर उदय शंकर, कमाण्डेंट एनडीआरएफ संतोष कुमार, डीआईजी एसएसबी दुर्गा बहादुर, राजीव बलूनी, कर्नल पंकज अवस्थी, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मौहम्मद ओबैदुल्लाह अंसारी, उप निदेशक अग्निशमन विभाग एसके राणा, डाॅक्टर अनीता चमोला, डाॅक्टर रोहित थपलियाल, डाॅक्टर पंकज सिंह, ग्रुप कैप्टन आरआर रौंथाण आदि उपस्थित रहे।
30 जून को उत्तराखण्ड में पहुंचा मानसून
टेबल टाॅप एक्सरसाइज के दौरान मौसम विज्ञान विभाग देहरादून के डाॅक्टर रोहित थपलियाल ने बताया कि मानसून ने 30 जून को उत्तराखण्ड में दस्तक दे दी है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि जून में उत्तराखण्ड में 83 मिलीमीटर बारिश हुई है, जबकि जून का औसत 132 मिलीमीटर है।
आधुनिक आपदा राहत उपकरणों की प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र
टेबल टॉप एक्सरसाइज में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ एवं अग्निशमन विभाग के आधुनिक राहत एवं बचाव उपकरणों की प्रदर्शनी लगाई गई, जो अधिकारियों एवं प्रतिभागियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। विभिन्न विभागों के नोडल अधिकारियों ने उपकरणों का अवलोकन कर उनके संचालन, उपयोगिता एवं आपदा में उनकी भूमिका की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। प्रदर्शनी में विशेष रूप से एनडीआरएफ के सीबीआरएनई (रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, परमाणु) आपदाओं में उपयोग किए जाने वाले अत्याधुनिक उपकरणों ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। इसके अलावा डीप डाइविंग सेट, नाइट विजन कैमरा, थर्मल इमेजिंग कैमरा, विभिन्न प्रकार के हाइड्रोलिक कटर, अंडरवाटर कम्युनिकेशन सिस्टम, अंडरवाटर ड्रोन तथा सोनार सिस्टम सहित कई आधुनिक उपकरणों का प्रदर्शन किया गया। 02 जुलाई को आयोजित होने वाली राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इन उपकरणों की प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे।
एसडीआरएफ के सभी कार्मिकों के पास सचेत और भूदेव एप
उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) संचालित सचेत एवं भूदेव ऐप डाउनलोड अभियान में एसडीआरएफ के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने दोनों ऐप अपने मोबाइल फोन में डाउनलोड कर लिए हैं। इसके साथ ही विभाग ने शत-प्रतिशत डाउनलोड का लक्ष्य हासिल कर लिया है। टेबल टॉप एक्सरसाइज में एसडीआरएफ के डिप्टी कमांडेंट शुभांक रतूड़ी ने इसकी जानकारी दी। इस उपलब्धि पर सचिव, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास, विनोद कुमार सुमन ने एसडीआरएफ की सराहना करते हुए कहा कि आपदा प्रबंधन में तकनीक आधारित प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली का अधिकतम उपयोग अत्यंत आवश्यक है। यूएसडीएमए द्वारा यह अभियान राज्यभर में सभी विभागों एवं कर्मचारियों के बीच निरंतर चलाया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक लोग समय पर मौसम एवं आपदा संबंधी चेतावनी प्राप्त कर सकें।
01 एवं 02 जुलाई को कई जनपदों में बहुत भारी वर्षा की आशंका,SEOC, DEOC और प्रशासन को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), देहरादून द्वारा जारी नवीनतम मौसम पूर्वानुमान के अनुसार राज्य के विभिन्न जनपदों में 01 एवं 02 जुलाई, 2026 को कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना व्यक्त की गई है। इसे देखते हुए राज्य आपातकालीन परिचालन केन्द्र (SEOC) ने सभी जिलाधिकारियों को आवश्यक सतर्कता एवं एहतियाती उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं।
मौसम विभाग के अनुसार 01 जुलाई को देहरादून एवं बागेश्वर जनपदों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी वर्षा (ऑरेंज अलर्ट) की संभावना है। इसके अतिरिक्त टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, चम्पावत, ऊधमसिंह नगर एवं पिथौरागढ़ जनपदों में भारी वर्षा, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों में गर्जन, आकाशीय बिजली, तेज वर्षा तथा 30–40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने की आशंका है।
इसी प्रकार 02 जुलाई को देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी, नैनीताल एवं बागेश्वर जनपदों में भारी से बहुत भारी वर्षा (ऑरेंज अलर्ट) जारी किया गया है। वहीं हरिद्वार, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग एवं चमोली जनपदों में भारी वर्षा तथा पर्वतीय क्षेत्रों में गर्जन, आकाशीय बिजली एवं तेज हवाओं की संभावना व्यक्त की गई है।
राज्य आपातकालीन परिचालन केन्द्र ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि संवेदनशील क्षेत्रों की सतत निगरानी की जाए, राहत एवं बचाव दलों को हाई अलर्ट पर रखा जाए तथा किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। सड़क अवरुद्ध होने की स्थिति में संबंधित विभाग तत्काल मार्ग खोलने की कार्रवाई करें। सभी विभागीय अधिकारी, आपदा प्रबंधन से जुड़े नोडल अधिकारी एवं आईआरएस प्रणाली के अधिकारी सक्रिय रहें तथा अपने मोबाइल एवं संचार माध्यम निरंतर चालू रखें।
इसके अतिरिक्त पर्वतीय क्षेत्रों में ट्रैकिंग गतिविधियों पर मौसम की स्थिति के अनुसार आवश्यक प्रतिबंध लगाने, विद्यालयों में विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, नगर क्षेत्रों में नालियों एवं कल्वर्टों की सफाई कराने, आवश्यक खाद्य सामग्री एवं चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध रखने तथा जिला सूचना अधिकारियों के माध्यम से मौसम संबंधी चेतावनियों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने नागरिकों से अपील की है कि मौसम विभाग एवं प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी का पालन करें, अनावश्यक यात्रा से बचें तथा किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन अथवा आपदा नियंत्रण कक्ष से तत्काल संपर्क करें।

