‘जन-जन की सरकार,जन-जन के द्वार’ उत्तराखण्ड में शासकीय सोच बदलने का अभियान:धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार‘ अभियान में खैरीमान सिंह में आयोजित शिविर का किया निरीक्षण
प्रशासन ग्रामीणों के द्वार पर भेजकर जन-समस्याओं के निस्तारण एवं सरकारी योजनाओं से लाभान्वित करने के अभियान की मौके पर जाकर पड़ताल
जन-समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी एवं संतोषजनक समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश
देहरादून 02 जनवरी 2026 । मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के क्रियान्वयन की जमीनी पड़ताल को आज देहरादून जिले में रायपुर ब्लॉक के खैरीमानसिंह में न्याय पंचायत स्तरीय शिविर का निरीक्षण कर ‘प्रशासन गांव की ओर’ कार्यक्रम के बहुद्देश्यीय शिविर में जन-समस्या निस्तारण की स्थिति की जानकारी ली और अभियान का फीडबैक पाया।
मुख्यमंत्री धामी ने शिविर में विभिन्न विभागों के स्टॉलों का भी निरीक्षण किया और सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं एवं सेवाओं से ग्रामीणों को लाभान्वित करने को व्यवस्थायें परखी। इस अवसर पर 102 दिव्यांगों एवं वृद्धजनों को सहायक उपकरण भी वितरित किए गए।
मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जन-समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी एवं संतोषजनक समाधान सुनिश्चित किया जाए। ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान का उद्देश्य अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं और सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करना है, इसलिए इस अभियान को पूरी संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और प्रभावशीलता से संचालित किया जाना जरूरी है।
इस अवसर पर विधायक उमेश शर्मा, ब्लॉक प्रमुख सरोजिनी जवाड़ी, जिला पंचायत सदस्य वीर सिंह चौहान एवं अन्य जनप्रतिनिधिगण, मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, परगनाधिकारी हरि गिरि, परियोजना निदेशक विक्रम सिंह, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार तथा विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी भी उपस्थित रहे।
उत्तराखण्ड में सुशासन की नई परिभाषा — मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में ऐतिहासिक जनसंपर्क अभियान
“धामी सरकार का सुशासन मॉडल: 204 कैम्पों में 1.35 लाख से अधिक लोगों को मिला सीधा लाभ”
“सरकार पहुँची जनता के द्वार: ‘जन-जन की सरकार’ कार्यक्रम में रिकॉर्ड निस्तारण”
“मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में जवाबदेह शासन की मिसाल”
“शिकायत से समाधान तक—एक ही मंच पर जनता को मिला भरोसा”
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तराखण्ड सरकार का “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम प्रदेश में सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और त्वरित समाधान का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा है। यह कार्यक्रम न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली में गुणात्मक परिवर्तन का उदाहरण है, बल्कि इसने सरकार और सामान्य नागरिक की दूरी भी प्रभावी रूप से समाप्त की है। आज 02 जनवरी 2026 को आयोजित कार्यक्रम की दैनिक प्रगति रिपोर्ट दर्शाती है कि राज्य सरकार अब काग़ज़ी योजनाओं से आगे बढ़कर ज़मीनी स्तर पर वास्तविक परिणाम देने में सफल हो रही है।
प्रदेश के सभी 13 जनपदों में एक ही दिन 204 जनसेवा कैम्प आयोजित किये गये, जिनमें 1 लाख 35 हजार 194 से अधिक नागरिकों ने प्रत्यक्ष सहभागिता की। इतनी व्यापक जनभागीदारी पुष्टि करती है कि यह कार्यक्रम जनता की वास्तविक आवश्यकताओं से जुड़ा हुआ है और लोगों ने इसे पूरे विश्वास से अपनाया है। इन कैम्पों से शासन-प्रशासन पहली बार सीधे जनता के द्वार पहुँचा, जिससे ग्रामीण, पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान को जिला अथवा तहसील मुख्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़े।
कार्यक्रम में 17 हजार 747 शिकायतें एवं प्रार्थना पत्र मिले, जिनमें से 12 हजार 776 मामलों का मौके पर अथवा त्वरित कार्यवाही से निस्तारित किया गया। यह आँकड़ा दर्शाता है कि तीन-चौथाई समस्याओं का समाधान तत्काल किया गया, जो प्रशासनिक दक्षता, निर्णय क्षमता और उत्तरदायित्व का स्पष्ट प्रमाण है। शेष मामलों को भी समयबद्ध कार्ययोजना में संबंधित विभागों को प्रेषित कर निरंतर निगरानी में रखा गया है, जिससे कोई भी शिकायत लंबित न रहे।
इन कैम्पों में आय, जाति, निवास, सामाजिक श्रेणी एवं अन्य आवश्यक प्रमाण पत्रों से संबंधित 19 हजार 734 आवेदन मिले। इससे यह स्पष्ट होता है कि सामान्य नागरिकों को अब मूलभूत सेवाओं के लिए अनावश्यक विलंब या औपचारिकताओं का सामना नहीं करना पड़ता। सरकारी सेवाओं को नागरिकों के निकट लाने की यह पहल विशेष रूप से गरीब, वंचित और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुई है।
इसके अतिरिक्त, विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं में कुल 77 हजार 203 नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ दिया गया। यह संख्या इस बात का ठोस प्रमाण है कि योजनाएँ अब केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पात्र लाभार्थियों तक वास्तविक रूप से पहुँच रही हैं। सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ एक ही मंच पर उपलब्ध कराकर सरकार ने जनसुविधा और पारदर्शिता दोनों सुदृढ़ की है।
इस कार्यक्रम की सफलता के मूल में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट, कठोर और परिणामोन्मुख निर्देश रहे हैं। मुख्यमंत्री धामी ने आरंभ से ही यह सुनिश्चित किया कि अधिकारी जनता को कार्यालयों में बुलाने के बजाय स्वयं फील्ड में जाकर समस्याओं का समाधान करें। उन्होंने प्रत्येक कैम्प में निर्णय लेने में सक्षम अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य की तथा निर्देश दिए कि शिकायतों का प्राथमिक स्तर पर ही निस्तारण किया जाए। इसके साथ ही लंबित मामलों का जिला और राज्य स्तर पर नियमित अनुश्रवण, कमजोर वर्गों, दिव्यांगों, वृद्धों और दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों को प्राथमिकता तथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों का उत्तरदायित्व निर्धारण जैसे निर्देशों ने प्रशासनिक तंत्र को अधिक संवेदनशील और सक्रिय बनाया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि“

