जाट न हिंदू ,ना मुसलमान,ना सिख ? तो क्या है ये “कौम”?

आजादी के पहले की बात है, इतिहासकार पंडित भगवदत्त जी के पास शिमला में अंग्रेज अफसर आये। उन्होंने पंडित जी के सामने बात रखी कि महाराज भगतसिंह के बलिदान के बाद हमे जाटों ने उत्तर में बहुत तंग कर दिया है। आप एक ऐसी किताब लिख दीजिये जिससे यह साबित हो कि जाट जाति विदेशी आक्रमणकारियों की संतानें हैं। हम फिर इन्हें दूसरी हिन्दू जातियों से भिड़ा देंगे, इससे उत्तर में स्वतंत्रता की लड़ाई मंद पड़ जायेगी।
पंडित भगवदत्त ने आश्चर्यचकित होकर अंग्रेज से पूछा – जो आपने दलित जातियों के साथ किया वह अब जाटों के साथ भी करना चाहते हो ?
जाट आर्य हैं, भारत की कृषि और पशुपालन में उनके कबीलों का बेहतरीन योगदान है।
मुझे क्षमा कीजिये मैं यह नही कर सकता।

इसके बाद अंग्रेजों के कई प्रयास किये जाटों को हिंदुओं से अलग थलग करने के लेकिन असफल रहे।
अंग्रेजों के जाने के बाद वामपंथियों ने चौधरी छोटूराम के यूनियनिस्ट मिशन में घुसपैठ की। मदरसों और मिशनिरियों ने भी ऐसे प्रयास किये, ये युद्धवीर सिंह जैसे लोग ऐसे ही प्रयासों के मोहरे हैं।
कोई इनसे पूछे की जाट हिन्दू नही तो इनका नाम युद्धवीर क्यों हैं ?
जंगबहादुर या वारियर क्यों नही है ?
क्योंकि इनके माँ बाप सनातन के फॉलोवर हैं।
युद्धवीर, मनोज दुहन, हर्ष छिकारा दरअसल लिबरल, वामपंथी और मदरसाछाप मानसिकता के प्राणी हैं।
कुछ दिन पहले इन्होंने बनियों पर टिप्पणी की थी, फिर बनियों से माफी मांगनी पड़ी थी।
भारत के समृद्धि और खुशहाली के दिनों में कृषि और पशुपालन चरम पर था। कहा जाता था कि भारत मे दूध घी की नदियां बहती हैं। इन नदियों की धारा में जाट समाज का बड़ा योगदान रहा है। पशुपति अर्थात शिव की पूजा करने वाली इस देशभक्त कौम ने समृद्ध संस्कृति को जिया है।
अपनी मेहनत के बल पर ब्रज क्षेत्र के डींग पर महाराजा सूरजमल का स्वर्णिम शासन हुआ है।
औरंगजेब का अत्याचार जब बढ़ गया तो एक किसान गौकुला जाट ने कृषि उपकरणों के साथ युद्ध करके आगरा में औरंगजेब की नींव हिला दी थी।
खाल, बाल और नाखून तक खींच लिए जाने के बाद भी गौकुला ने सनातन नही छोड़ा। गांव खेड़े, पूर्वजों और शिव को आराध्य मानने वाले जाट समाज को स्वामी दयानंद सरस्वती के आर्य समाज आंदोलन ने एक नई दिशा दी। आडंबरों और कुरुतियों से मुक्त इस समाज ने खुलकर आर्य समाज का समर्थन किया और वैदिक जीवन को अपनाया।
धन्ना जाट की भक्ति को समस्त सनातनी सिर झुकाते हैं, भगवान स्वयं उसके खेत जोतने आते थे।
कर्माबाई की भक्ति ऐसी अटल है कि आज भी कलियुग के ज्योतिर्लिंग जगन्नाथ जी मे खिचड़ी का प्रसाद बंटता है क्योंकि भगवान कर्माबाई जाटनी की खिचड़ी खाने आते थे।
शिव में जाटों की इतनी श्रद्धा है कि वे मानते हैं – जाटों की उत्पत्ति शिव की जटा से हुई है। कांवड़ यात्रा में कुछ सालों से जाने का चलन ज्यादा बढ़ गया, उससे पहले आप देखेंगे तो पश्चिमी यूपी, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान तक का जाट समाज सबसे बड़ी संख्या में कांवड़ लेने जाता था। जाट सभी हिन्दू धार्मिक रीतिरिवाजों और त्योहारों में भाग लेता है। हिन्दू समाज की गौत्र व्यवस्था में जाटों जैसा विश्वास किसी अन्य का नही है, सगोत्रीय चाहे कहीं का भी हो उसे भाई बहन मानते हैं, सगोत्रीय विवाह करने पर अपने बेटे-बेटियों का जीवनहरण करने से भी पीछे नही हटा जाट समाज।
जिस पोडियम पर खड़े होकर बोल रहे हैं उस पर तेजाजी महाराज की फोटों लगी है जिन्हें शिव का अंश माना जाता है, तेजाजी ने गौरक्षा का अभूतपूर्व काम किया। आज ये लोग गौरक्षकों को गाली देते हैं लेकिन जाट समाज से ही दादा हरफूल जाट ‘जुलानी वाला’ से बड़ा गौरक्षक कौन हुआ भारत में ? इतना तो कसाई योगी जी से भी नही कांपते जितना भय जुलानी वाले का था।
ये जगदेव सारण , युद्धवीर और आयुष मलिक जैसे लोग विघटनकारी तत्व हैं। अभी सर्वखाप की पंचायत हुई थी, समाज को शसक्त रूप देने वाली खाप व्यवस्था का भी सर्वाधिक प्रभाव जाटों पर रहा है।

जाट समाज का बच्चा बच्चा खुद को हिन्दू कहकर गौरवान्वित होता है, औरंगजेब के भय से मुल्ले बन जाने वाले ऐसे ही लोग थे।

जाटों की पहचान सनातन से है और हम किसी भी अन्य सनातनी की तरह दृढ़ता से सनातन के साथ खड़ें हैं।

Sumit ……..

आयुष मलिक के बहाने ही सही जाटो को अब खुद की बनाई और लिखी हुई दुनिया से बाहर आना चाहिए…

जाटो की वर्तमान पीढी ने पूरा जोर लगा दिया है अपने लोगो को यह समझाने में कि हम न हिंदू न मुसलमान है हम तो केवल जाट है!

हमारा DNA हमारे जीन्स अलग है हम ही असली आर्य है हम अनोखे है हमसे बड़ा कोई वीर नही हुआ आदि आदि! इनका कहना है कि जाट मुसलमानो मे भी “पाए” जाते है और हिंदुओ मे भी!
कोई ये नही बताएगा कि जाट मुसलमानो मे कैसे पाए जाते है, कोई यह बताने का कष्ट नही उठाता कि आज के मुले जाट ही अतीत के पराजित हिंदू जाट है!
जो इनसे हारा अपनी घर जमीन बेटिया और आस्था तक खो बैठा!

जाटों की बकचोदी से युवा जाट identity crisis अर्थात पहचान की संकट से गुजर रहा है! चूंकि जाट समाज में धर्म और आस्था को बड़े ही सतही स्तर पर निभाया जाता है तो इसके कारण पहचान का संकट ओर गहरा जाता हैं! जाटो में कोई विशेष धार्मिक परवरिश धार्मिक अध्य्यन अथवा धार्मिक शिक्षा की कोई व्यवस्थित परंपरा है ही नही!
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तो बहुतायत में कावड यात्रा और खेत में स्थापित देवताओं की पूजा ही लगभग अंतिम धार्मिक क्रिया कलाप मानकर चलो!

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुले जाटो के गाँव के गाँव है, कमोबेश यही स्थिति गुर्जर और राजपूतों की है!

मुसलमान जाट, गुर्जर और राजपूतो के गाँव के गाँव है, लेकिन जाट और गुजरो ने जो भसड मचाई वो राजपूतो ने थोड़ी कम मचाई, जो राजपूत लडाई के कालखंड मे मुसलमान बना उसे राजपूतो ने कभी बाप नही बनाया, संबंध रहे पर बहुत ही सतही स्तर पर!

जाटों और गूजरों ने खुद की राजनैतिक ताकत बढ़ाने को अपने परिवर्तित लोगो को सर पर बैठा कर रखा! नतीजा… नई पीढी मे identity crisis अर्थात पहचान का संकट!

जब एक बच्चा दिन में 100 बार हर जगह यही पढ़ेगा कि हम अलग हैं, हमारी पहचान अलग है, हमारा जीन्स अलग है, हमारा DNA अलग है , हम अनोखे हैं, हम विशेष हैं… हम किसान कौम है हम हिंदू नही है तो कहीं न कहीं इन बातो का दो चार प्रतिशत असर तो होगा ही!

थोड़े दिन पहले एक किताब आई थी, हरियाणा के किसी जाट ने लिखी थी, किताब का नाम था “जाट हिंदू नही”
आप राजनैतिक लाभ के लिए ऐसी मूर्खता करेंगे व 99% समाज इन बातो पर आँखे मूंद लेगा और आप लोग समझते है कि इन बातों का असर नही होगा? ये देखिये राजस्थान के जगदेव सारण की करतूत

अपने बच्चों को आपने जड़ों से काट दिया सिर्फ इसलिए कि कही वो एक गर्वित हिंदू न बन जाए और बन गया तो भाजपा का वोटर बन जायेगा! जो पेड़ जड़ों से कट जाते हैं वो सूख जाते हैं और सूखे हुए पेड़ काट दिये जाते हैं!

आयुष मालिक एक अंध प्रेमी तो है ही साथ ही अपनी जड़ो से कटा हुआ सूखा हुआ पेड़ भी है, जो बच्चा यूट्यूब पर बैठकर इस्लाम सीख गया उसे कभी घर में हिंदू शिक्षा हिंदू संस्कार दिये ही नही गए क्योंकि हम तो किसान कौम है और धार्मिक संस्कार तो ब्राह्मणवाद है! अपने बेटे को ब्राह्मणवाद से बचाना जरूरी है भले ही वो मुहम्मद अली बन जाए, औरत के लिए धर्म बदल दे!

आयुष मलिक सामूहिक हार है!
आयुष मलिक उस विमर्श का पहला शिकार है जिसे हमी ने आगे बढ़ाया है, पता नही कितने आयुष मलिक मुहम्मद अली बनने की राह में होंगे!
और ये भी है कि कल कोई तुम्हारा अपना बेटा बेटी या सगा कोई भी अली बन सकता है ये आपके जेहन में हमेशा रहना चाहिए ,और ये कोई ढकोसला भी बल्कि वास्तविकता भी हो सकती है ,आयुष मलिक आपके सामने है उदारहण।

जाट सुधरे, अपनी हिंदू पहचान को स्वीकार करे अपने बच्चो को सनातन की शिक्षा दे ब्राहमणवाद के विरोध की आड़ मे नास्तिको जैसा व्यवहार करना और आस्थाओ का मखौल बनाना बंद करे! सनातन के विरुद्ध बोलने वाले सजातीय लोगो की कनपटी लाल करे तो ही कोई समाधान निकलेगा नही तो आयुष मलिक न पहला है और न आखिरी।।

और ये सिर्फ जाटों के लिए नहीं बल्की हर उस बिरादरी को लिए एक संदेश है जो खुद की जड़ो से कटना चाहती है मात्र इसलिए कि कही भाजपा को फायदा न हो ।
अरे मूर्खो भाजपा को वोट न देना तुम लेकिन अपने घर की संतानों और आने वाली पीढ़ियों को तो बचा ही सकते है – मत देना संघियो को वोट, मत देना भाजपा मोदी योगी को वोट , गरियाते रहना भक्तों को , ये सब चलेगा , लेकिन कोई आयुष अगर कहीं अली बन गया इसमें तुम्हारा ही नुकसान है, बाकी आपकी मर्जी🙏🙏🙏
साभार सोशल मीडिया

https://www.instagram.com/reel/DZhCbF1oMdX/?igsh=MTdieDF6bXQ1Nm85cw==

Gemini की जानकारी—-
जाट समुदाय के धार्मिक वितरण (हिंदू, मुस्लिम और सिख) का कोई एक सटीक, समकालीन आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, क्योंकि भारत में 1931 के बाद बड़े पैमाने पर जातिगत जनगणना के धार्मिक आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। हालांकि, ऐतिहासिक अनुमानों, पुराने जनगणना रिकॉर्ड (जैसे 1931 की जनगणना) और जनसांख्यिकीय विशेषज्ञों के अनुसार, जाट आबादी मोटे तौर पर तीन मुख्य धर्मों में विभाजित है।
​विभाजन और जनसांख्यिकी के आधार पर एक सामान्य अनुमान इस प्रकार है:
​1. हिंदू जाट (लगभग 45% – 50%)
​स्थिति: वर्तमान में कुल जाट आबादी का सबसे बड़ा हिस्सा हिंदू धर्म को मानने वालों का है।
​मुख्य क्षेत्र: ये मुख्य रूप से भारत के हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान (जहां इन्हें ‘जाट’ और ‘चौधरी’ कहा जाता है) और दिल्ली में केंद्रित हैं।
​2. मुस्लिम जाट (लगभग 30% – 35%)
​स्थिति: मध्यकाल (विशेषकर 12वीं से 18वीं शताब्दी के बीच) में सूफी संतों के प्रभाव, सामाजिक कारणों और तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों के कारण पश्चिमी क्षेत्रों के एक बड़े हिस्से के जाटों ने इस्लाम अपनाया।
​मुख्य क्षेत्र: मुस्लिम जाटों की बहुसंख्या वर्तमान पाकिस्तान (पंजाब और सिंध प्रांत) में निवास करती है। भारत के जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों (जैसे ‘मूला जाट’) में भी मुस्लिम जाट पाए जाते हैं।
​3. सिख जाट (लगभग 15% – 20%)
​स्थिति: 17वीं और 18वीं शताब्दी में, विशेषकर गुरु अर्जुन देव जी और गुरु गोबिंद सिंह जी के समय, पंजाब के केंद्रीय और पूर्वी क्षेत्रों के जाटों ने बड़ी संख्या में सिख धर्म अपनाया और खालसा पंथ का एक मजबूत स्तंभ बने।
​मुख्य क्षेत्र: ये मुख्य रूप से भारतीय पंजाब और उसके आसपास के क्षेत्रों में केंद्रित हैं। इन्हें पंजाब में आमतौर पर ‘जट्ट सिख’ कहा जाता है।
​ऐतिहासिक संदर्भ (1931 की अंतिम विस्तृत जनगणना):
अविभाजित भारत की 1931 की जनगणना के आसपास के आंकड़ों के अनुसार, उस समय कुल जाट आबादी में से लगभग 47% मुस्लिम, 33% हिंदू और 20% सिख थे। 1947 में विभाजन के बाद, मुस्लिम जाटों की बहुसंख्या पाकिस्तान में रह गई, जबकि हिंदू और सिख जाट भारत में केंद्रित हो गए।
ChatGPT की जानकारी-
जाट एक जातीय/सामाजिक समुदाय है, जो मुख्यतः भारत और पाकिस्तान में पाया जाता है। जाटों की कुल जनसंख्या का कोई आधिकारिक और सटीक धार्मिक विभाजन उपलब्ध नहीं है, क्योंकि भारत में जाति-आधारित जनगणना सभी समुदायों के लिए नहीं होती और पाकिस्तान में भी ऐसा विस्तृत डेटा नहीं है। फिर भी, विभिन्न जनसांख्यिकीय अध्ययनों के आधार पर मोटा अनुमान लगाया जाता है:
हिंदू जाट: लगभग 70–80%
मुख्यतः Haryana, Rajasthan, Uttar Pradesh, Delhi, Madhya Pradesh आदि में।
मुस्लिम जाट: लगभग 15–25%
बड़ी संख्या में Pakistan के Punjab और Sindh में, तथा भारत के कुछ क्षेत्रों (विशेषकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश) में।
सिख जाट: लगभग 10–15%
मुख्यतः Punjab, Haryana और प्रवासी सिख समुदायों में।
ध्यान दें कि ये प्रतिशत अलग-अलग स्रोतों के अनुमानों पर आधारित हैं और इनमें कुछ ओवरलैप या क्षेत्रीय भिन्नता हो सकती है। सामान्यतः यह माना जाता है कि हिंदू जाट सबसे बड़ा समूह हैं, उसके बाद मुस्लिम जाट और फिर सिख जाट।
META AI की जानकारी-
जाट समुदाय 3 धर्मों में बंटा है – *हिंदू, मुस्लिम और सिख*। सटीक जनगणना के आंकड़े नहीं मिलते क्योंकि 1931 के बाद जाति-आधारित जनगणना धर्म के साथ नहीं हुई। फिर भी उपलब्ध डेटा ये है:
*1. ऐतिहासिक आंकड़ा – 1931 जनगणना, यूनाइटेड प्रोविंस (UP)*
उस समय कुल जाट: 8,10,394
– *ब्राह्मणिक हिंदू जाट*: 7,12,803 → 87.9%
– *मुस्लिम जाट*: 19,689 → 2.4%
– *सिख जाट*: 30,595 → 3.8%
– *आर्य जाट*: 47,027 → 5.8%
– बाकी जैन, राधा स्वामी आदि <0.1% bd82
*2. आज के अनुमान*
पूरा भारत लेवल पर कोई ऑफिशियल ब्रेकअप नहीं है। मोटे तौर पर समझें:
– *हिंदू जाट*: सबसे बड़ा हिस्सा। हरियाणा, राजस्थान, पश्चिमी UP, दिल्ली में ज्यादातर जाट हिंदू हैं। UP में 1931 में ∼88% हिंदू थे। आज भी हरियाणा-राजस्थान में 90%+ हिंदू जाट हैं।
– *सिख जाट*: पंजाब में जाटों का बड़ा हिस्सा सिख है। इन्हें “जट्ट सिख” कहते हैं। पंजाब की कुल आबादी में सिख 58% हैं, और उनमें जाट सबसे बड़ी बिरादरी मानी जाती है। अनुमान: कुल जाटों का ∼15-20% सिख हो सकता है।
– *मुस्लिम जाट*: इन्हें “मुले जाट/मुल्ला जाट” भी कहते हैं। विभाजन के बाद ज्यादातर पाकिस्तान चले गए। भारत में अब पश्चिमी UP के कुछ जिलों में हैं। 1931 में UP में सिर्फ 2.4% थे। आज भारत के कुल जाटों में ∼1-2% ही मुस्लिम बचे हैं। पाकिस्तान के पंजाब में मुस्लिम जाट बड़ी संख्या में हैं। bd82afc1ed3c
*3. मोटा अनुपात आज के लिए*
अगर पूरे भारत+पाकिस्तान के जाट लें तो अनुमानित बंटवारा:
– *हिंदू जाट*: ∼60-65%
– *सिख जाट*: ∼20-25%
– *मुस्लिम जाट*: ∼15-20% – ज्यादातर पाकिस्तान में
अगर सिर्फ भारत की बात करें तो: *∼80% हिंदू, ∼18-19% सिख, ∼1-2% मुस्लिम जाट*।
नोट: ये सरकारी आंकड़े नहीं हैं, 1931 की जनगणना और सामाजिक रिसर्च के आधार पर अनुमान हैं। जाति की गिनती 1931 के बाद आधिकारिक रूप से नहीं हुई। 
  • मानवविज्ञानी सुनील के. खन्ना के अनुसार, 2010 में दक्षिण एशिया में जाट जनसंख्या 3 करोड़  होने का अनुमान था। उनका यह अनुमान 1931 में आयोजित अंतिम जाति जनगणना आंकड़ा आधारित है, जिसमें जाट जनसंख्या  80 लाख  बताई गई थी , जो ज्यादातर भारत और पाकिस्तान में केंद्रित थी , और इस क्षेत्र की बाद की जनसंख्या वृद्धि  आधारित है। 
  • इसी प्रकार, डेरिक ओ. लॉड्रिक ने 2009 में दक्षिण एशिया में जाट जनसंख्या 3.3 करोड़ से अधिक होने का अनुमान लगाया था—जिनमें से लगभग 120 लाख भारत में और 210 लाख से अधिक पाकिस्तान में थे। माना जाता है कि भारत में जाट खेतीहर है और पीढी दर पीढी जोत घटने से बचाने को उन्होने परिवार नियोजन अपनाया जिससे जनसंख्या में घटने का रूझान है। उनकी गणना 1980 के दशक के उत्तरार्ध के जनसंख्या अनुमानों और दोनों देशों के विकास रुझानों पर आधारित थी। लॉड्रिक ने सटीक सांख्यिकीय आंकड़ों की कमी को भी नोट किया और उल्लेख किया कि कुछ अनुमानों के अनुसार 2009 में दक्षिण एशिया में उनकी कुल जनसंख्या  430 लाख थी। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *