कौन हैं सुष्मिता देव जिन्होने राज्यसभा और तृणमूल दोनों एकसाथ छोड दी?

सुष्मिता देव कौन हैं, जिन्होंने ममता बनर्जी की टीएमसी से तोड़ा नाता

सुष्मिता देव  2021 में टीएमसी में शामिल हुई थीं

बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी को एक और झटका लगा है.सुष्मिता देव ने टीएमसी  और राज्यसभा दोनों से त्यागपत्र दे दिया है.दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने पार्टी छोड़ने की घोषणा की.

सुष्मिता देव ने कहा, “मैंने तृणमूल कांग्रेस छोड़ दी है. मेरे  टीएमसी छोड़ने की कथा लंबी है. मैं  एक ही समय में दो नावों की सवारी नही करना चाहती. मैं ममता दीदी पर कोई टिप्पणी नहीं करूँगी.”

इससे पहले सुष्मिता देव ने राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन को पत्र लिखकर राज्यसभा से त्यागपत्र दे  दिया था.उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि उनका त्यागपत्र तुरंत प्रभाव से स्वीकार किया जाए.

राज्यसभा से त्यागपत्र के बाद उनका एक वीडियो भी आया है, जिसमें वो अपने दिल्ली निवास पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा से मिलती दिख रही हैं.

सुष्मिता देव ने पत्रकारों से कहा,कि “मैं बंगाल के लोगों का आभार व्यक्त करती हूं. अब मैं असम में काम करना चाहती हूं, इसको ध्यान में रखते हुए ही मैंने ये फ़ैसला किया है।

सुष्मिता देव  असम कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे संतोष मोहन देव की बेटी हैं. उनका राजनीतिक करियर भी कांग्रेस से ही शुरू हुआ था. वो कांग्रेस के टिकट पर असम के सिलचर से लोकसभा सांसद भी रहीं और महिला कांग्रेस की अध्यक्ष भी. लेकिन वर्ष 2021 में वो कांग्रेस छोड़ टीएमसी में शामिल हो गईं.

ममता बनर्जी विधानसभा चुनाव में भवानीपुर सीट से भी हार गईं थी
पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव भाजपा ने जीता और शुभेंदु अधिकारी राज्य के मुख्यमंत्री बने. इसके बाद से ही टीएमसी में विद्रोह के स्वर सुनाई देने लगे.

कई विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई. पार्टी के एक विद्रोही विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी के 58 विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिख पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता चुनने की मांग की. विधानसभा अध्यक्ष ने  उनकी मांग मान भी ली.अभी विधायकों के विद्रोह से टीएमसी निपट भी नहीं पाई थी कि राष्ट्रीय स्तर पर उसके कई सांसद पार्टी के ख़िलाफ़ होने लगे.

तृणमूल कांग्रेस की लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पिछले दिनों दावा किया कि उनके साथ 20 सांसद हैं और उन्होंने लोकसभा स्पीकर से सदन में अलग बैठाने की मांग की है.

उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को समर्थन देने की भी बात कही.

सुष्मिता देव से पहले टीएमसी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे ने भी राज्यसभा और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र  दे दिया था.

लोकसभा में टीएमसी के 28 और राज्यसभा में 13 सांसद थे. लेकिन सुखेंदु शेखर और सुष्मिता देव के  त्यागपत्र के बाद राज्यसभा में टीएमसी के 11 सांसद ही रह गए हैं.

सुष्मिता देव महिला कांग्रेस की भी अध्यक्ष रहींं (फ़ाइल फोटो)
सुष्मिता देव असम के एक राजनीतिक परिवार से आती हैं. उनके दादा सतिन्द्र मोहन देव स्वतंत्रता सेनानी थे. बाद में असम के स्वास्थ मंत्री बने और लंबे समय तक सिलचर म्यूनिसिपैलिटी बोर्ड के चेयरमैन रहे थे.

सुष्मिता देव के पिता एक स्पोर्ट्समैन भी थे. संतोष मोहन देव सिलचर से 6 बार सांसद चुने गए थे. संतोष मोहन देव इस्पात मंत्री थे. सुष्मिता देव की मां भीतिका देव भी राजनीति में रही हैं. वह असम में विधायक चुनी गई थीं.

सुष्मिता ने भी राजनीति को अपना पेशा बनाया. उन्होंने राजनीति की शुरुआत सिलचर म्यूनिसिपैलिटी से की थी. सिलचर म्यूनिसिपैलिटी असम का दूसरा सबसे बड़ा नगर निकाय है.

सुष्मिता देव   इमेज स्रोत,Vipin Kumar/Hindustan Times

दिल्ली के मिरांडा हाउस कॉलेज से सुष्मिता ने पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया था (फ़ाइल फ़ोटो)
सुष्मिता ने दिल्ली के मिरांडा हाउस कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में 1993 में ग्रेजुएशन किया था. इसके बाद उन्होंने लंदन से लॉ की पढ़ाई की. सुष्मिता ने लंदन में थॉमस वैली यूनिवर्सिटी से लॉ में बैचलर की पढ़ाई की. यहां से सुष्मिता ने 1997 में अपना कोर्स पूरा किया था.

इसके बाद उन्होंने लंदन में ही किंग्स कॉलेज से कॉर्पोरेट लॉ में मास्टर्स की डिग्री ली. सुष्मिता दिल्ली बार काउंसिल की सदस्य भी हैं.

सुष्मिता की दिल्ली में देव एंड एसोसिएशन नाम की एक लॉ फ़र्म भी है. जब वह दिल्ली में पढ़ाई कर रही थीं, उसी दौरान कांग्रेस पार्टी के छात्र यूनियन एनएसयूआई में सक्रिय थीं. मिरांडा हाउस कॉलेज में स्टूडेंट यूनियन का चुनाव भी लड़ा ।

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