रामलीला मैदान शुद्धिकरण पर भड़के खड़गे,भाजपा ने झाडे हाथ
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रैली के बाद रामलीला मैदान के ‘शुद्धीकरण’ पर भड़के खड़गे, राज्यसभा में बोले- मेरा अपमान हुआ
हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद श्रीराम सेना के ‘शुद्धीकरण यज्ञ’ पर राजनीति भड़क गई है. कांग्रेस ने इसे दलित और पिछड़ा विरोधी मानसिकता बताते हुए कार्रवाई की मांग की है, जबकि भाजपा ने इस आयोजन से खुद को पूरी तरह अलग बताया है.
मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद श्रीराम सेना ने रामलीला मैदान में कराया यज्ञ (Photo-Screengrab)
हल्द्वानी,13 अगस्त 2026, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की 8 अगस्त को उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान में हुई ‘विजय शंखनाद रैली’ के बाद अब सियासत गर्मा गई है. खड़गे रैली कर लौट गए, लेकिन उनके जाने के बाद रामलीला मैदान में हुए शुद्धीकरण यज्ञ को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गई हैं.
इसे लेकर आज संसद में भी हंगामा हुआ. राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान खड़गे ने कहा कि मैं अपने एससी होने को विषय नहीं बनाता, शुद्धीकरण करके मेरा अपमान किया गया.
खड़गे ने कहा,कि ‘बड़े दुःख के साथ कहना पड़ता है कि मैं हल्द्वानी में पब्लिक स्पीच में रामलीला मैदान में भाषण दिया. लाखों लोग वहां पर थे. तब मैंने किसी समाज का किसी धर्म का नाम नहीं लिया सिर्फ मैं लोगों के समस्याओं को वहां पर बताया, लेकिन मेरे स्पीच होने के बाद कल उन लोगों ने हवन करके उस स्टेज का शुद्धीकरण किया.’
वहीं खड़गे के बयान पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार इस कृत्य की भत्सर्ना करती है और इसकी जांच करायेगी।
जेपी नड्डा ने कहा,कि “भाजपा ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती. मैं आपकी भावना का समर्थन करता हूं. हमारे लिए भी यह दुखद है. कृपया बार-बार यह मत कहिए कि हमने किया. भाजपा इसका समर्थन नहीं करती.”
इस पर खड़गे ने कहा, “मैं नड्डा जी का नाम नहीं ले रहा हूं. मैं सिर्फ यह कह रहा हूं कि मामला दर्ज किया जाए और जिन लोगों ने ऐसा किया है, उन्हें गिरफ्तार किया जाए. हमारी यही मांग है.”
वहीं इस पर राज्यसभा सभापति ने कहा, “अगर अस्पृश्यता पाप नहीं है, तो इस दुनिया में कोई पाप नहीं है. हम सभी इसकी निंदा करते हैं, चाहे हमारी पार्टी कोई भी हो. हम सभी शुद्ध हैं. जिन्होंने यह किया है, उन्हें पकड़ा जाना चाहिए. इस पर कोई दो राय नहीं है.”
क्या था मामला
दरअसल हल्द्वानी में आयोजित हुई खड़गे की रैली के बाद श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास की ओर से रामलीला मैदान में शुद्धीकरण यज्ञ कराया गया था. संगठन के सदस्यों ने खड़गे को सनातन और हिंदू संगठनों का विरोधी बताते हुए कहा कि जिस मैदान में रामलीला का मंचन होता है, वहां ऐसे व्यक्ति के आने के बाद मैदान का शुद्धीकरण किया जाना जरूरी था. संगठन ने खड़गे के पिछले कथित सनातन विरोधी बयानों को इसका आधार बताया.
लेकिन यज्ञ की अग्नि के साथ ही दलगत राजनीति भी भड़क उठी. कांग्रेस अनुसूचित मोर्चे ने इस पूरे घटनाक्रम को दलित विरोधी मानसिकता बताते हुए भाजपा पर निशाना साधा. कांग्रेस का आरोप है कि शुद्धिकरण यज्ञ भाजपा से जुड़े लोगों ने कराया. पार्टी नेताओं ने सवाल उठाया कि आखिर कांग्रेस की रैली के बाद ही रामलीला मैदान के ‘शुद्धीकरण’ की जरूरत क्यों पड़ी?
कांग्रेस ने इस विषय को सामाजिक सम्मान से जोड़ते हुए कहा कि 8 अगस्त की शंखनाद रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य मंच पर मौजूद थे. कांग्रेस नेताओं के अनुसार, इन नेताओं की सामाजिक पृष्ठभूमि को देखते हुए रामलीला मैदान का शुद्धीकरण कराया जाना दलित और पिछड़ा विरोधी सोच को दर्शाता है.
इसी आरोप को लेकर कांग्रेस अनुसूचित मोर्चे ने बुधवार को हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में धरना देकर भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. कांग्रेस नेताओं ने शुद्धिकरण यज्ञ को लेकर भाजपा से जवाब मांगा और इसे सामाजिक भेदभाव की मानसिकता का प्रतीक बताया.
‘खड़गे के पुराने बयानों के चलते विरोध’
वहीं, श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास ने कांग्रेस के आरोपों को निरस्त करते हुए कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य किसी जाति या समुदाय का अपमान करना नहीं था. संगठन का दावा है कि खड़गे के पिछले बयानों को सनातन विरोधी मानते हुए ही यह यज्ञ किया गया. संगठन के अनुसार, रामलीला जैसे धार्मिक आयोजन से जुड़े मैदान में सनातन विरोधी विचार रखने वाले व्यक्ति की रैली के बाद शुद्धीकरण करना उनकी धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय है.
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के संबोधन वाले मंच का भाजपा से जुड़े लोगों का ‘शुद्धिकरण ’ किया जाना बेहद निंदनीय और लोकतांत्रिक भारत के लिए शर्मनाक है. यह जातिगत भेदभाव और संकीर्ण मानसिकता की पराकाष्ठा है. नैनीताल वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक इस मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच करें और कानून का उल्लंघन पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करें. छुआछूत और भेदभाव के लिए आधुनिक भारत में कोई स्थान नहीं है. कांग्रेस ऐसी विभाजनकारी मानसिकता का लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से पुरजोर विरोध करती है.
भाजपा की सफाई
उधर,भाजपा ने भी इस विवाद से खुद को पूरी तरह अलग कर लिया है. भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट ने साफ कहा कि शुद्धिकरण यज्ञ में भाजपा का कोई पदाधिकारी शामिल नहीं था और पार्टी का इस आयोजन से कोई लेना-देना नहीं है. ऐसे में अब हल्द्वानी का रामलीला मैदान राजनीतिक अखाड़ा बन गया है. एक तरफ कांग्रेस इसे दलित और पिछड़ा विरोधी मानसिकता का मामला बताकर भाजपा को घेर रही है, तो दूसरी तरफ हिंदूवादी संगठन इसे सनातन के सम्मान से जोड़ रहा है. भाजपा कह रही है कि आयोजन से उसका कोई संबंध नहीं.
सवाल अब सिर्फ रामलीला मैदान के शुद्धिकरण का नहीं, बल्कि उस राजनीति का है जिसमें एक धार्मिक अनुष्ठान ने कांग्रेस और भाजपा के बीच जाति, सनातन और राजनीतिक सम्मान की बहस को फिर से आमने-सामने ला खड़ा किया है.
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