मुरादाबाद 2011दंगे:15 वर्ष बाद मैनाठेर दंगे में न्याय पल,सपा राज होता तो मिलता न्याय?
- मैनाठेर मुरादाबाद में 6 जुलाई 2011 को मुरादाबाद के डीआईजी/ एसएसपी पर समाजवादी पार्टी के मुसलमानों ने योजनाबद्ध तरीके से हंगामा खड़ा कर दिया। जब डीआईजी/ एसएसपी मुरादाबाद अशोक कुमार सिंह,जिलाधिकारी राजशेखर के साथ पहुंचे तो भीड़ ने उनके और एसआई रविकुमार पर जानलेवा हमला कर दिया। डीएम राजशेखर गाड़ी से उतरे ही नहीं और गाड़ी मुड़वाकर भाग लिए। उनके साथ डीआईजी की गाड़ी और एस्कोर्ट भी चली गई।
डीएम वायरलेस पर डीआईजी मिसिंग की सूचना देते रहे और डीआईजी अशोक कुमार सिंह की एस्कोर्ट को भी नहीं छोड़ा।मैं उस दिन मेरठ में कैम्प कर रहा था। मैं तुरंत मुरादाबाद पहुचा और स्थिति संभाली नहीं तो सांप्रदायिक दंगा अपरिहार्य था।
भीड़ ने डीआईजी और एसआई रवि कुमार को मरा समझ कर छोड़ा था। हमले के मुकदमें में चार्जशीट लगी जिसे मुख्यमंत्री बनते ही अखिलेश यादव ने वापस लिया लेकिन न्यायालय ने नहीं माना।
अखिलेश यादव ने पुलिस की गाड़ियों में आग, चौकी में हथियार लूट, पुलिस पीएसी पर जानलेवा हमला, तोड़फोड़ के 5 और मुकदमें अपने चहेते अधिकारियों से समाप्त करवा दिये। एस्कॉर्ट और गनर कायरता के आरोप में विभागीय कार्यवाई कर बर्खास्त कर दिया गया था जिन्हें अखिलेश यादव ने सेवा में बहाल करके नोएडा, गाजियाबाद में मनचाही पोस्टिंग दे दी। डीएम राजशेखर को राजधानी लखनऊ का जिलाधिकारी बना दिया।
आज 27 मार्च 2026 को मुरादाबाद की अदालत ने 16 आरोपियों को आजन्म कारावास की सजा दी। अखिलेश की तुष्टिकरण राजनीति में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के जीवन की कोई कीमत नहीं। अखिलेश को 2013 में आतंकवादियों के 14 चार्जशीट वापस लेनें में भी कोई संकोच नहीं हुआ। अदालत के दख़ल के बाद आतंकियों को फाँसी और आजन्म कारावास की सजाएँ हुई। तुष्टिकरण राजनीति का मैं भी शिकार हुवा था, जब 19-5-2013 को आतंकी खालिद मुजाहिद की अयोध्या कोर्ट से लखनऊ आते समय “लू” लगने से मौत मामले में मेरे ऊपर बाराबंकी कोतवाली में हत्या का मुकदमा करवाया था। मेरे अलावा सेवानिवृत डीजीपी विक्रम सिंह, 2 एसपी, डीएसपी सहित 38 पुलिसजनों पर हत्या के फर्जी मुकदमें हुए थे।
आज सीनियर आईपीएस अधिकारी अशोक कुमार सिंह पर जानलेवा हमले में 16 समाजवादियों को सजा हो गई जिनको आप ने बचाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी थी, अखिलेश जी।आप को नैतिकता के नाते पुलिसजनों और प्रदेशवासियों से माफ़ी मागनी चाहिए।
Brij Lal IPS Retd
Ex- DGP UP
Member of Parliament (Rajya Sabha)
Dated New Delhi March 27,2026.
मुरादाबाद के मैनाठेर में 2011 दंगे मामले में 15 साल बाद न्याय की घड़ी आई। एडीजे-2 कोर्ट ने 16 उपद्रवी दोषी ठहराये । छह नाबालिगों की किशोर न्यायालय में सुनवाई अंतिम चरण में है, जल्द फैसले की आशा है। दो भागे आरोपितों के गिरफ्तारी वारंट हुए हैं, एक दोषी ने समर्पण कर दिया है।
मुरादाबाद 26 मार्च 2026 । मुरादाबाद के बहुचर्चित मैनाठेर दंगे में 15 वर्ष बाद अदालती फैसले में 16 जन दोषी पाये गये हैं। कोर्ट ने 14 दोषियों को तत्काल जेल भेजने के आदेश दिए, जबकि दो जन सुनवाई से गायब रहे। सजा अब 28 मार्च को घोषित होगी। अभियोजन अधिकारी के अनुसार, वर्ष 2011 में मैनाठेर थाना क्षेत्र के डींगरपुर गांव में हुए दंगे की सुनवाई अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-2) कृष्ण कुमार की अदालत में थी। साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।
6 जुलाई 2011 को पुलिस एक छेड़छाड़ का आरोपित पकड़ने गांव पहुंची तो कुरान के अपमान की अफवाह फैलाई हिंसा की गई। उग्र भीड़ ने डीआईजी अशोक कुमार सिंह तक पर जानलेवा हमला किया। चौतरफा पथराव से बचने वे पैट्रोल पंप के कमरे में घुसे तो भीड दरवाजा तोड़ उन्हे बाहर ले आई. सुरक्षाकर्मी भी उन्हे छोड भागे. डीआईजी ने डराने को हवाई फायरिंग को पिस्टल निकाली तो भीड़ ने सरकारी पिस्टल छीन ली, वर्दी फाड़ दी और बुरी तरह पीटा, जिससे उन्हें कई फ्रैक्चर आए और गंभीर स्थिति में तीन महीने बिस्तर पर रहे। तब जिलाधिकारी राजशेखर पर भी हमला हुआ था लेकिनवे बच निकले थे। दंगे में भीड़ ने मुरादाबाद-संभल मार्ग जाम कर मैनाठेर थाने, पुलिस चौकी तथा पीएसी के वाहन जला दिये, जिससे हालात बेहद गंभीर हो गए।
अखिलेशु यादव के समर्थन के गुमान के चलते मुसलमानो की भीड़ ने 6 जुलाई 2011 को मुरादाबाद में डीआईजी अशोक कुमार सिंह की मोब लिंचिंग कर दी । जब भीड को उनके मरने का यकीन हो गया, तब उन्हें छोड़ा ।
अशोक कुमार सिंह इस गंभीर पिटाई से 12 दिन कोमा में चले गए थे, कान के दोनों पर्दे फट गए, एक आंख की रोशनी चली गई, एक- दो नहीं बल्कि 13 जगह फ्रैक्चर हुआ, आठ पसलियां टूट गई थी ।
वहां कई पुलिसजन थे जिनके पास 9 MM पिस्टल से लेकर AK 47 जैसे हथियार थे लेकिन किसी ने गोली इसलिए नहीं चलाई क्योंकि अखिलेश राज की sop थी कि मुस्लिम कुछ भी ,पुलिस पर हमला भी करें,उनके ऊपर गोली क्या लाठी भी नही चलेगी । इसी डर में पुलिस ने चुपचाप डीआईजी की माब लिंचिंग देखी ।
आरोपितों को बचाने को अखिलेश यादव और आजम खान ने पूरी कोशिश की। आजम खान ने तो यहां तक कहा कि “हम मुस्लिम कुरान को बेहतरीन किताब मानते हैं। अगर कुरान के नाम पर मुसलमान का गुस्सा भड़का तो यह स्वाभाविक है” ।
अखिलेश यादव ने भी ऐसे ही कुछ बातें कही थी और मामले में ना तो ठीक से पैरवी की ना कोई मजबूत सरकारी वकील रखा ।
योगी के सत्ता में आने के बाद डीआईजी अशोक कुमार सिंह के मोब लिंचिंग की पूरी फाइल फिर से खोली गई ।
नए सिरे से वीडियो एविडेंस सारे एविडेंस बताए गए मजबूत सरकारी वकील रखा गया और कल इसमें 16 आरोपियों को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई तीन आरोपियों को 30 साल की सजा सुनाई और चार आरोपित मर चुके थे ।
पुलिस ने दंगे में परवेज आलम समेत 25 के खिलाफ आरोपपत्र दिया था। सुनवाई में तीन की मौत हो गई। छह नाबालिग किशोर न्याय बोर्ड में विचाराधीन रहे। शेष में से 16 दोषी पाये गये हैं। सरकारी अधिवक्ताओं ब्रजराज सिंह और नितिन गुप्ता के अनुसार, अदालती आदेश पर 14 दोषी मेडिकल परीक्षण कर जेल भेजे गये हैं। डेढ़ दशक पुराने इस संवेदनशील मामले में आया यह फैसला न्याय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजरें 28 मार्च को दंड की घोषणा पर हैं।
भागे दोषी रिजवान ने अगले दिन अदालत में समर्पण कर दिया। अब पुलिस दोषी फिरोज को ढूंढ रही है। फैसले से उन गांवों में खुशी है जहां छह जुलाई को उपद्रवियों ने घुसकर बवाल किया था।
गांव में युवती से छेडखानी के आरोपित के घर पुलिस टीम छह जुलाई, 2011 को दबिश देने गई थी। तभी पुलिस पर महिलाओं ने कुरान का अपमान करने का आरोप लगाकर हंगामा कर दिया था। पूरे गांव की भीड़ जमा हो गई। भीड़ डींगरपुर के पाकबड़ा तिराहे पर पहुंची और संभल-मुरादाबाद मार्ग पर जाम लगाकर बवाल कर दिया।
लोग पुलिस से भिड़ गए और पथराव कर दिया। फायरिंग भी हुई। हालात नियंत्रित करने गए डीआइजी अशोक कुमार, डीएम राजशेखर को भीड़ ने घेर लिया। चौतरफा फंसा देख डीएम टीम संग निकल पाये। लेकिन डीआइजी स्टाफ संग घिर गए। उपद्रवियों ने डीआइजी व पुलिसकर्मियों पर निशाना कर दिया।
जान बचाने डीआइजी पेट्रोल पंप के कमरे में घुसे। भीड़ दरवाजा तोड़कर डीआइजी को बाहर निकाल लाई। उन्हे बुरी तरह पीटा और गोली मार दी। बेहोश डीआईजी को मरा मान भीड चली गई । डीआइजी के पीआरओ रवि कुमार की शिकायत पर 33 आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी लिखी गई । सुनवाई में तीन आरोपितों की मौत हो गई।
मुरादाबाद का वो काला बुधवार जब DIG को ‘मरा’ समझ भीड़ छोड़ गई, 6 घंटे जलता रहा शहर
तारीख: 6 जुलाई 2011। स्थान: मुरादाबाद। जब एक अफवाह ने पूरा शहर बारूद के ढेर पर बिठा दिया था। पुलिस अफसरों की घेराबंदी, जलती गाड़ियाँ और कर्फ्यू का सन्नाटा
मुरादाबाद 2011 दंगे की फाइल फोटो
निशाने पर थे पुलिसकर्मी, डीआइजी की घेराबंदी से हो गए हालात बेकाबू
चौकी के बाद पुलिस व पीएसी वाहनों तक जलाये, घंटाें तक उठा आग का धुआं
6 जुलाई साल 2011। दिन बुधवार। एक दम शांत मुरादाबाद दोपहर में उपद्रवियों ने कब्जा लिया। उपद्रवी पूरी तैयारी में थे, मगर पुलिस को इसकी भनक नहीं थी। तभी वे सामान्य तरीके से छेड़खानी के आरोपित को ढूंढने गए थे। मगर, पुलिस छापे में उपद्रवियों ने तय योजनानुसार महिलायें आगे कर दी। फिर एक-एक कर हर मोर्चे पर पुलिस की घेराबंदी शुरू कर दी।
उपद्रवियों का था मारने का टार्गेट
उपद्रवियों का टार्गेट था कि कैसे भी पुलिस और प्रशासनिक अफसरों को छोड़ना नहीं है। हर मोर्चे पर उनकी घेराबंदी थी। मोर्चा संभालने पीएसी पहुंची तो उपद्रवियों ने आगजनी शुरू कर दी। मैनाठेर थाने में ही भीड ने पुलिस जीप फूंक दी।
मैनाठेर थाने की डींगरपुर चौकी में आग लगा पीएसी की गाड़ी भी आग में झोक दी। पुलिस मनोबल गिराने को तत्कालीन डीआइजी अशोक कुमार पर प्राणघातक हमला हुआ। उपद्रवियों ने जमकर बवाल काट पूरा क्षेत्र कब्जा लिया । जो भी पुलिसकर्मी दिखा भीड़ उधर ही टूट पड़ी। छह घंटे संभल-हसनपुर मार्ग बंद रहा। वाहन सवार यात्रियों को भागकर जान बचानी पड़ी। मुरादाबाद से संभल तक कर्फ्यू लगा।
हर ओर कुरान के अपमान की अफवाह फैलाकर जगह-जगह हंगामे और प्रदर्शन हुए। डींगरपुर में हजारों मुस्लिम जुट गए। तकरीरों से माहौल और बिगड़ा। भीड़ ने संभल रोड से गुजरतै लोगों को पीटा। बवाल की सूचना के बाद मुरादाबाद शहर, संभल और असमोली, अमरोहा तक से लोग पहुंच गए थे और उपद्रव करने लगे थे।
तब के अधिकारियों के अनुसार जानबूझकर कुरान के अपमान की बात कहकर तय षडयंत्र अनुसार बवाल किया गया था, क्योंकि प्रदेश में चुनाव सिर पर थे। पूर्व निर्धारित षडयंत्र में ही पडोसी जनपदों से भी बवाली पहुंचे। भय से बाजार बंद हो गए । मैनाठेर इलाका सील कर स्कूलों में छुट्टी करा दी गई।
पुलिस के साथ ढूंढ-ढूंढ कर हिंदू भी बनाये निशाना
पुलिस से शुरू उपद्रवियों के टकराव ने सांप्रदायिक रूप लिया। उपद्रवियों ने बवाल बढ़ाने को पहले वहां से गुजरते लोगों को पीटा। हिंदग ढूंढ-ढूंढ कर निशाना बनाये गए । यह देख हिंदू वाहन छोड़-छोड़कर भागने लगे । यात्री बेबस थे ।
उपद्रवियों ने बस्तियां घेर हिंदू पीटे। उपद्रवी नारे लगा रहे थे कि सब हिंदू खत्म करेंगें।
संभल में भी हालात पूरी तरह बेकाबू होते कि पहले ही वहां के अधिकारियों ने शहर में कर्फ्यू लगा दिया। संभल की चारों सीमाओं पर नाकेबंदी की जिससे उपद्रवी संभल को आग में झोंकने में कामयाब नहीं हो पाए।
शहर की सीमाएं सील, चप्पे-चप्पे पर पुलिस पहरा
उपद्रव की आग शासन तक पहुंची। डीजी कानून व्यवस्था बृजलाल मैनाठेर पहुंचे। लखनऊ से आइपीएस नीलेश कुमार डैमेज कंट्रोल को भेजे गये । हालात नियंत्रित करने को शहर में कर्फ्यू लगाया गया । सीमाएं सील की गई। किसी को भी शहर सीमा में प्रवेश की अनुमति नहीं थी।
मामले में कुल 20 लोगों के खिलाफ चार्जशीट थी, जिनमें से 4 मर चुके, शेष बचे सभी 16 दोषी पाये गये हैं। विभिन्न समाचार स्रोतों (जैसे अमर उजाला और दैनिक जागरण) के अनुसार, इन 16 दोषियों में कुछ प्रमुख नाम जो सामने आए हैं:
ज्ञात दोषियों के नाम
कामिल (इन्हें मुख्य आरोपित और भीड़ का नेतृत्व करने वाला माना गया है)
रिजवान (जिन्होंने फैसले के बाद कोर्ट में सरेंडर किया)
फिरोज (जिसकी गिरफ्तारी को पुलिस ने छापा मारा)
मुस्लिम अहमद (जिनके घर हुई छापेमारी से दंगा शुरू हुआ)
इसके अलावा इकरार, अबरार, इशाक, यूनुस, रईस और अन्य स्थानीय ग्रामीण मूल एफआईआर और चार्जशीट का हिस्सा रहे हैं।
केस का संक्षिप्त सारांश
अदालत: एडीजे-2, कृष्ण कुमार सिंह (मुरादाबाद)।
दोष सिद्धि की तारीख: 23 मार्च 2026।
प्रमुख धाराएं: 307 (हत्या का प्रयास), 395 (डकैती), 147/148 (दंगा), 353 (लोक सेवक पर हमला)।
बड़ी घटना: तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह पर जानलेवा हमला और उनकी सर्विस पिस्टल छीनना।
एक महत्वपूर्ण जानकारी: इस मुख्य केस के अलावा, 6 अन्य आरोपित नाबालिग (Juvenile) निकले, जिनका मामला किशोर न्याय बोर्ड में अलग से चल रहा है।

