बैरिकेड्स तोड निहंग घुसे देहरादून,बंदी चारों निहंग साथ ले जाने की जिद

पंजाब से आए निहंगों का जत्था हिमाचल सीमा पर बैरिकेड्स तोड़कर देहरादून में घुस गया है, जिसके बाद प्रेमनगर में भारी पुलिस बल तैनात कर छावनी में बदल  दिया गया।

पांवटा साहिब गुरुद्वारा से मत्था टेककर आते यात्रियों से प्रेमनगर में पूछताछ करती पुलिस।

निहंग हिमाचल बॉर्डर पर बैरिकेड्स तोड़ देहरादून घुसे

प्रेमनगर क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात, क्षेत्र बना छावनी

कर्णप्रयाग विवाद में पकड़े निहंग छोडने की मांग

विकासनगर (देहरादून) 26/25 जून 2026। कर्णप्रयाग और नगरासू गुरुद्वारा विवाद के बाद पंजाब के निहंगों का उत्तराखंड कूच बेहद तनावपूर्ण मोड़ पर है। हिमाचल बॉर्डर (कुल्हाल) पर पुलिस प्रशासन के रोकने और लंबी वार्ता बाद भी स्थिति अनियंत्रित है ।

देर रात निहंगों का जत्था बल्लूपुर-दून-पांवटा फोरलेन मार्ग पर पुलिस अवरोधक तोड़ते हुए राजधानी देहरादून की सीमा में प्रवेश कर गया। इसके बाद देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र में भारी संख्या में पुलिस बल लगा पूरे इलाके को छावनी बना दिया गया ।

पुलिस फोर्स लगी
प्रेमनगर में भारी तनाव में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र डोबाल और जिलाधिकारी आशीष चौहान खुद मोर्चा संभाले हैं। सभी थानों की सशस्त्र पुलिस फ़ोर्स बुलेट प्रूफ जैकेट से लैस होकर लगी है। सड़क की एक लेन पर खनन से भरे डंपर खड़े हैं,जबकि दूसरी लेन पुलिस बल ने पूरी तरह घेर रखी है।

प्रशासनिक वार्ता और बॉर्डर की स्थिति
पांवटा साहिब में वार्ता: पंजाब से आए निहंग जत्था हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब गुरुद्वारे में रुका था। सूचना मिलते ही परगनाधिकारी विकासनगर विनोद कुमार, तहसीलदार विवेक राजौरी,नायब तहसीलदार ग्यारुदत्त जोशी और पुलिस अधीक्षक देहात पंकज गैरोला गुरुद्वारे पहुंचे। अधिकारियों ने मत्था टेक निहंगों से वार्ता की, लेकिन कोई ठोस हल नहीं निकल सका।
सीमा पर रोका : बातचीत बाद निहंग जत्था हेमकुंड साहिब रवाना हुआ, जिन्हें कुल्हाल बॉर्डर पर बैरिकेड्स लगाकर रोका गया।
सघन चेकिंग अभियान: खुफिया तंत्र सक्रिय, बॉर्डर पर सुरक्षा बढ़ी । निहंग दिखने वालों की गहन जांच कर उन्हें वापस हिमाचल प्रदेश की ओर भेजा जा रहा है। कोतवाल राजीव रौथाण लगातार स्थिति पर नजर बनाए हैं।

निहंगों को नहीं पता थे रास्ते, पर राह भटक गया पुलिस-प्रशासन, कहां गए कोई नहीं जानता

निहंगों के शहर की ओर बढ़ने की सूचना पर पुलिस ने प्रेमनगर को केंद्र बनाकर सुरक्षा घेरा तैयार किया, लेकिन मूवमेंट की दिशा का पता लगाने में सिस्टम पीछे रह गया। कई रास्तों में पुलिस उलझ गई और अब इस पूरे मामले में इंटेलिजेंस इनपुट व सुरक्षा प्लानिंग पर सवाल हैं।

पंजाब, हिमाचल के रास्ते उत्तराखंड आने वाले निहंग सिखों को शायद देहरादून के रास्ते नहीं पता थे लेकिन यहां तो पुलिस और प्रशासन ही राह भटक गया। विकासनगर से आ रहे निहंग किस रास्ते से निकल गए ये पुलिस को पता ही नहीं चला। बैरियर तोड़कर प्रेमनगर आ रहे हैं तो पुलिस ने प्रेमनगर छावनी बना दिया। जबकि, विकासनगर से प्रेमनगर के एक नहीं बल्कि कई रास्ते हैं। इन्हीं रास्तों की भूलभुलैया में निहंग तो निकल गए लेकिन देहरादून पुलिस भटक गई।

दिनभर पांवटा साहिब गुरुद्वारे में चली बैठक बाद कुछ निहंग चकमा दे देहरादून की ओर बढ़ गए। पुलिस को जानकारी मिली कि निहंग प्रेमनगर जा रहे हैं तो पूरी जिला फोर्स प्रेगनगर क्षेत्र में लगा दी गई। बैरिकेडिंग लगाकर यहां अधिकारियों ने चेकिंग की ।
कुछ इक्का दुक्का लोग आए आए तो उन्हें निकाला गया। पता चला कि कुछ निहंगों को झाझरा तक पुलिस ने ट्रैक किया है। जानकारी थी कि झाझरा तक निहंग आए हैं। प्रेमनगर में खड़ी पुलिस और प्रशासन की टीम यहां शिथिल पड़ गई। निहंग कहां गए ये किसी को नहीं पता।

निहंगों को मुख्य मार्गों पर ढूंढती रही पुलिस

दूसरे रास्ते पर नया गांव तक पुलिस ने बैरियर लगाए थे। नया गांव भी कोई निहंग नहीं आया। नया गांव आए नहीं प्रेमनगर पहुंचे नहीं तो निहंग गए कहां यह जानकारी पुलिस को देर रात तक नहीं लगी। दरअसल, विकासनगर से प्रेमनगर या देहरादून शहर के दो रास्ते तो प्रमुख हैं लेकिन इसके अलावा भी यहां कई रास्ते हैं जहां कोई भी गांवों के रास्ते आ सकता है। नया हाईवे से भी कई रास्ते शहर को कटते हैं। पुलिस निहंगों को मुख्य मार्गों पर ढूंढती रही और ये अनजान निहंग पुलिस को उन्हीं के जाने पहचाने रास्तों पर चकमा देकर निकल गए।

थमी रहीं लोगों की सांसें, तनावपूर्ण हालात
निहंगों के दून आने की सूचना पर प्रेमनगर क्षेत्र में दो घंटे बेहद तनावपूर्ण हालात रहे। भारी संख्या में पुलिस बल लगने और अधिकारियों की आवाजाही से स्थानीय लोगों में भय रहा । प्रेमनगर चौक पर सैकड़ों स्थानीय और सिख एकत्र हो गए। निहंग आने और पुलिस कार्रवाई की आशंका पर प्रेमनगर चौक, मुख्य बाजार और आसपास के मार्गों पर भीड़ बढ़ने लगी। पुलिस ने सुरक्षा को चौक और मुख्य मार्गों पर बैरिकेडिंग कर दी। पुलिसकर्मी लगने, वाहन जांच और अधिकारियों की लगातार बैठकें देखकर लोग किसी बड़ी घटना की आशंका जताने लगे। लोगों ने प्रेमनगर हाईवे पर एक साथ इतना बड़ा पुलिस जमावड़ा पहले कभी नहीं देखा।

निहंगों की एंट्री से देहरादून में हड़कंप मच गया। उत्तराखंड की सीमाओं पर पुलिस निगहबानी करती रही, लेकिन सुरक्षा इंतजामों को चकमा देकर निहंगों का जत्था शहर में पहुंच गया। कुल्हाल बॉर्डर के अलावा प्रेमनगर में भी रोकने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए थे, बावजूद इसके जत्था पटेलनगर थाना क्षेत्र तक पहुंच गया। पूरे घटनाक्रम में पुलिस और इंटेलिजेंस की कमियां सामने आई हैं, जिससे पुलिस-प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

कर्णप्रयाग और रुद्रप्रयाग की घटनाओं के बाद निहंगों के उत्तराखंड कूच की सूचना पर देहरादून पुलिस ने हिमाचल सीमा से लगे कुल्हाल में कड़ी निगरानी और बैरिकेडिंग की थी। प्रेमनगर क्षेत्र में भी पुलिस बल तैनात किया गया था। इसके बावजूद निहंगों का एक जत्था शहर के भीतर पहुंच गया और पटेलनगर थाना क्षेत्र तक आ गया। यहां पुलिस ने उन्हें रोककर वापस भेजा।

इस घटनाक्रम ने पुलिस की घेराबंदी, खुफिया तंत्र और आपसी समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।जानकारी के अनुसार, निहंग सिक्खों ने उत्तराखंड की ओर कूच का आह्वान किया था। इसके बाद देहरादून जिले में विशेष सतर्कता बरती गई। कुल्हाल सीमा पर वाहनों की जांच, बैरिकेडिंग और पुलिस बल की तैनाती की गई थी। प्रेमनगर क्षेत्र में भी निहंगों के संभावित प्रवेश को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का दावा किया गया।

निहंगों की पुलिस से बहस
पुलिस-प्रशासन का फोकस मुख्य रूप से सीमावर्ती मार्गों पर रहा। लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के बीच निहंग शहर कैसे पहुंच गए, यह बड़ा सवाल है। जत्था वैकल्पिक मार्गों से देहरादून में पटेलनगर थाना क्षेत्र तक पहुंच गया। सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस सक्रिय हुई। समझा कर उन्हें शहर से वापस भेजा गया।

जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मैदान में
सीमा चौकसी के बावजूद जत्थे देहरादून पहुंचने से स्थानीय लोग चिंतित रहे। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने बताया कि निहंग वापस भेज दिये गए हैं और शांति व्यवस्था कायम है। पुलिस हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर बनाए है। चमोली जिले के कर्णप्रयाग में निहंग सिखों और स्थानीय लोगों के विवाद से तनावपूर्ण स्थिति बनी। चंडीगढ़ से हिमाचल के रास्ते उत्तराखंड जाते 200 निहंग पुलिस-प्रशासन ने कुल्हाल चेक पोस्ट पर बैरियर लगाकर रोके।
प्रेमनगर में भारी पुलिस बल लगा
इसके बाद पांवटा साहिब गुरुद्वारे में दो घंटे प्रशासन, पुलिस और निहंग सिखों में वार्ता विफल रही। कुछ निहंग लौट गए,जबकि 20 से 30 निहंग कुल्हाल पुल पार कर चेकपोस्ट पहुंच गए।पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोका ,कई घंटे तनातनी रही। निहंग बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ गए। पुलिस और आईटीबीपी के सामने ही तलवारें लहराते हुए वह देहरादून-पांवटा राजमार्ग की ओर जाने लगे। उन्हें रोकने पुलिस के खड़े किए दो डंपरों में भी उन्होंने तोड़फोड़ की ।
निहंगों के उत्तराखंड में घुसने की सूचना पर शासन-प्रशासन ने जिलेेभर से पुलिस और अन्य बल भेजे। नारे लगाते निहंग हेमकुंड साहिब जाने को अड़े थे। उन्हें देहरादून आने से रोकने को पुलिस ने प्रेमनगर चौक पर बैरियर लगाया। जिलाधिकारी डॉक्टर आशीष चौहान और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र डोबाल बड़ी संख्या में फोर्स लेकर पहुंचे। रात एक बजे तक निहंग प्रेमनगर नहीं पहुंचे थे,लोकेशन पुलिस को भी नहीं पता थी।

क्यों बढ़ा विवाद?
इस पूरे तनाव के पीछे हाल ही में उत्तराखंड के चमोली और रुद्रप्रयाग जिले में हुई दो घटनाएं हैं।

16 जून (कर्णप्रयाग विवाद): पार्किंग को लेकर स्थानीय लोगों और निहंगों में हिंसक झड़प हुई थी,जिसमें तलवारों के हमले से चार स्थानीय लोग घायल हो गए थे। मामले में चार निहंग पकड़े गए हैं।
नगरासू गुरुद्वारा मामला: शनिवार को कुछ निहंगों ने नगरासू गुरुद्वारा दमदमा साहिब का ऊपरी हिस्सा कब्जा लिया था। उनका आरोप था कि कर्णप्रयाग मामले में स्थानीय सेवादारों ने उनकी मदद नहीं की। हालांकि,तीसरे दिन स्थानीय प्रशासन और पंजाब के शिष्टमंडल की मध्यस्थता से गुरुद्वारा मुक्त कराया गया था।

निहंग जत्थे की मांग: चार सिंहों की रिहाई तक वापसी नहीं
कुल्हाल बॉर्डर पर पहुंचे निहंग जत्थे के प्रतिनिधियों ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि हम कानून-व्यवस्था खराब करना नहीं चाहते और न ही कोई लड़ाई चाहते हैं। हम सिर्फ शांतिपूर्वक ‘सतनाम वाहेगुरु’ का जाप करते हुए हेमकुंड साहिब जाना चाहते हैं।

कर्णप्रयाग की घटना में गलती दोनों पक्षों की ओर से हुई थी,इसलिए मामला समझौते से रफा-दफा किया जाना चाहिए।

निहंगों का कहना था कि उनके चार गिरफ्तार सिंह साथियों को रिहा कर पंजाब भेजा जाए। जब तक उन्हें उनके साथी नहीं मिलेंगे,वे वापस नहीं लौटेंगे।

प्रशासन का आश्वासन
वार्ता में प्रशासनिक अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि कानूनी प्रक्रिया से दो-चार दिनों में गिरफ्तार निहंगों की जमानत हो जाएगी।  बॉर्डर पर पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स पूरी अलर्ट मोड में रही।

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