आरोप नही फिर भी चंपत राय और डाॅ.अनिल मिश्र का त्यागपत्र क्यों?
Ram Mandir Trust why General Secretary Champat Rai and Trustee Anil Mishra resign
हिंदुत्व के मंच की चमक से चंदा चोरी की धुंधलाहट में त्यागपत्र तक… कहानी चंपत राय की
श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में एक्शन शुरू हो गया है. चंदा चोरी मामले में 8 लोगों के खिलाफ नामांकित पुलिस प्राथमिकी के बाद अब ट्रस्ट महासचिव चंपत राय ने अपन पद छोड दिया है. जानें कि चंपत राय कौन हैं और कैसे मंदिर ट्रस्ट में महत्वपूर्ण भूमिका में आए थे.
नई दिल्ली,26 जून 2026,श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्रा के त्यागपत्रों के बाद एसआईटी जांच और तेज होने की संभावना है। जांच एजेंसियां दान प्रबंधन से जुड़े दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। पकडे गये सभी आठ आरोपितों को 29 जून तक को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में आज बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम हुआ। राम मंदिर में मिले दान में कथित अनियमितताओं की जांच बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पद छोड़ दिये। दोनों पर सीधे तौर पर कोई आरोप नहीं लगा, लेकिन जांच बीच उनके त्यागपत्र को नैतिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जा रहा है।
राम मंदिर चढावे में सात करोड़ का घोटाला
सूत्रों के अनुसार, राम मंदिर में प्राप्त दान में सात करोड़ रुपये से अधिक की कथित गड़बड़ी की जांच विशेष जांच दल (SIT) कर रहा है। जांच में दान प्रबंधन में कई स्तरों पर कथित कमियां सामने आने पर आठ लोगों को जेल भेजा गया है। हालांकि जांच एजेंसियों ने अब तक चंपत राय और अनिल मिश्रा को आरोपित नहीं बनाया है।
संदेश देने को छोड़ा पद
बताया जा रहा है कि दोनों ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और मंदिर प्रशासन की पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से अपने पद छोड़ने का फैसला किया है। ट्रस्ट में इसे प्रशासनिक उत्तरदायित्व के रूप में भी देखा जा रहा है।चंपत राय
कौन हैं चंपत राय?
उत्तर प्रदेश के बिजनौर के 80 वर्षीय चंपत राय सार्वजनिक जीवन में आने से पहले वह रसायन विज्ञान के प्राध्यापक रहे। चंपत राय का जन्म 18 नवंबर 1946 को उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले की नगीना तहसील में हुआ था. उनके पिता रामेश्वर प्रसाद बंसल आरएसएस से जुड़े थे, उनकी मां सावित्री देवी है. चंपत राय अपने 10 भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर हैं. बाल स्वयंसेवक चंपत राय वर्ष 1980 में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) में आये। राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में उनकी गिनती होती रही है। आपातकाल में वह जेल में भी रहे। वर्ष 2020 में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट गठन में उन्हें महासचिव बनाया गया था। मंदिर निर्माण, प्रशासन और दान प्रबंधन की जिम्मेदारी उनके पास थी।
चंपत राय अपनी पढ़ाई-लिखाई पूरी करने के बाद बिजनौर के धामपुर में आरएसएम डिग्री कॉलेज में केमिस्ट्री पढ़ाने लगे थे.
मंदिर आंदोलन से मिली पहचान
चंपत राय ने शिक्षक सेवा करते हुए ही आरएसएस के प्रचार-प्रसार में समय देना शुरु कर दिया था. इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाया तो चंपत राय को व्यक्तिगत सत्याग्रह में पुलिस ने पकड जेल भेज दिया. चंपत राय बाहर आए तो शिक्षक की नौकरी छोड़कर संघ के पूर्णकालिक प्रचारक बन गए.
संघ में रहते हुए चंपत राय ने शुरू में आगरा, देहरादून और हरिद्वार समेत कई जगहों पर संगठन विस्तार किया. वे संघ में विभाग प्रचारक रहे और बाद में उन्हें विश्व हिंदू परिषद में भेजा गया, जहां उन्होंने सह क्षेत्रीय संगठन मंत्री पद संभाला. यहीं से उनकी भूमिका राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़ने लगी.
1984 की धर्म संसद बाद विश्व हिंदू परिषद ने राम जन्मभूमि आंदोलन संगठित रूप से आगे बढ़ाना शुरू किया, तो संघ से अशोक सिंघल समेत कई प्रचारक वीएचपी में भेजे गये थे, जिनमें चंपत राय भी थे. आंदोलन के सार्वजनिक चेहरों के पीछे रहकर रणनीति निर्माण, उसका कार्यान्वयन, मुकदमों की पैरवी को अभिलेख जुटाना और वकीलों से समन्वय जैसे काम चंपत राय कर रहे थे.
साल 1991 में अयोध्या भेजे गये
उन्होंने राम मंदिर आंदोलन की तैयार की थी. आंदोलन में मंदिर से जुड़े हजारों ऐतिहासिक दस्तावेज और ग्रंथ सहेजे. 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचा गिराये जाने के समय वे वहां मौजूद थे. चंपत राय को कुशल रणनीतिकार माना जाता रहा. वो फ्रंटफुट के बजाय पर्दे के पीछे रहकर मौन काम को जाने जाते थे.
अयोध्या का इनसाइक्लोपीडिया
राम मंदिर वाले शहर के इतिहास और रास्तों के बारे में गहरी जानकारी के चलते ही चंपत राय को अयोध्या का इनसाइक्लोपीडिया कहते हैं. अयोध्या राम जन्मभूमि लडाई अदालत पहुंची तो कानूनी अभिलेख जुटाने और उसे पेश करना उनके ऊपर था. सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई की हर महत्वपूर्ण तारीख से पहले दिल्ली में वकीलों की बैठकें आयोजित कराने में भी चंपत राय की महत्वपूर्ण भूमिका रहती थी.
अयोध्या आंदोलन और राम मंदिर की पैरवी के चलते वीएचपी में भी उनका कद लगातार बढ़ता गया. चंपत राय को अशोक सिंघल का भरोसेमंद सहयोगियों में गिना जाता था. विश्व हिंदू परिषद में नेतृत्व संकट पैदा हुआ और संगठन डॉक्टर प्रवीण तोगड़िया और अन्य नेताओं के टकराव का सामना कर रहा था, तब चंपत राय उन लोगों में थे, जिन्होंने संगठन संभाल संतुलन बनाए रखा. वें
विश्व हिंदू परिषद के शीर्ष नेतृत्व का हिस्सा बन संगठन के सबसे प्रभावशाली रणनीतिकारों में गिने जाने लगे. 2002 में विश्व हिंदू परिषद के संयुक्त महामंत्री और इसके बाद अंतरराष्ट्रीय महामंत्री बने. फिर चंपत राय विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए गए.
राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव बने
नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट का अयोध्या फैसला आया और फरवरी 2020 में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट गठन बाद चंपत राय की भूमिका फिर बदली. वें राम मंदिर ट्रस्ट महासचिव बने. आंदोलनकर्ता और रणनीतिकार चंपत राय अब मंदिर निर्माण परियोजना के प्रशासक और ट्रस्ट के महासचिव की भूमिका में थे.
5 अगस्त, 2020 को भव्य मंदिर के ‘भूमि पूजन’ से लेकर अब तक, राय श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव रुप में मंदिर निर्माण और अन्य गतिविधियों से जुड़े रहे . राम मंदिर निर्माण को चंदा अभियान/ ‘निधि समर्पण अभियान’ की योजना बनाने और उसे लोगों तक पहुंचाने में चंपत राय की महत्वपूर्ण भूमिका थी. ट्रस्ट महासचिव के नाते वो मीडिया को बताते रहे कि अभियान कैसे चलेगा, पैसा कैसे जमा होगा और उसका इस्तेमाल कैसे किया जाएगा.
कैसे विवादों में आए चंपत राय
राम मंदिर निर्माण को अयोध्या में जमीन खरीदी गई. जून 2021 में राम मंदिर ट्रस्ट पर अयोध्या में ख़रीदी एक ज़मीन को लेकर सवाल खड़े हुए थे. आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया था कि कैसे जमीन खरीदारी में हेरफेर किया जा रहा है. चंपत राय और ट्रस्ट ने इन आरोपों को सिरे से निरस्त किया था.
चंपत राय कहना था कि सभी भूमि खरीद पारदर्शी तरीके से हुईं, भुगतान बैंकिंग माध्यमों से हुआ और ट्रस्ट ने बाज़ार मूल्य से कम कीमत पर भूमि ख़रीदी हैं. आरोप राजनीति प्रेरित बताये थे. अब दोबारा जून 2026 में राम मंदिर के चढ़ावा और चंदा चोरी का मामला आया. राम मंदिर जुड़े चंदे, ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और कथित अनियमितताओं को लेकर उठा रहे हैं.
अनिल मिश्रा
डॉक्टर अनिल मिश्रा की क्या थी भूमिका?
डाॅक्टर मिश्रा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी थे। वह अयोध्या के सामाजिक और प्रशासनिक कार्यों से लंबे समय से जुड़े रहे हैं। ट्रस्ट में उनकी भूमिका मंदिर के प्रशासनिक कार्यों, चढ़ावे और दान व्यवस्था की निगरानी से जुड़ी थी। स्थानीय स्तर पर उनकी मजबूत पकड़ से उन्हें ट्रस्ट में शामिल किया गया था।
जीजा-साला, ससुर-दामाद और अनिल मिश्रा से भी रिश्ता; राम मंदिर के ट्रस्ट में रिश्ता क्या कहलाता है?
अनुकल्प मिश्रा तो लवकुश मिश्रा का जीजा है। वहीं रमाशंकर मिश्रा लवकुश के पिता हैं और अनुकल्प के ससुर हैं। इस तरह राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में जीजा-साला, ससुर-दामाद का कनेक्शन जुड़ता है। यही नहीं अनुकल्प मिश्रा की ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा से भी रिश्तेदारी बताई जा रही है।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जांच तेज होने के साथ ही नए अनावरण भी लगातार हो रहे हैं। पुलिस प्राथमिकी में अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और रमाशंकर मिश्र शामिल हैं। ये आपस में रिश्तेदार भी हैं। अनुकल्प मिश्रा लवकुश मिश्रा का जीजा है। रमाशंकर मिश्रा लवकुश के पिता हैं और अनुकल्प के ससुर हैं। ऐसे राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में जीजा-साला, ससुर-दामाद का कनेक्शन जुड़ता है। अनुकल्प मिश्रा की ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा से भी रिश्तेदारी बताई जाती है।
अनुकल्प मिश्रा की चढ़ावा गणना में ड्यूटी थी। उसके घर से चोरी की रकम भी मिली है। एक रिश्ता चाचा-भतीजा का भी मामले में आया है। टिन्नू का भतीजा मनीष भी गणना प्रक्रिया में था। उसके घर से भी चोरी की रकम मिली है। मनीष के चाचा रमाशंकर उर्फ टिन्नू यादव चंपत राय का करीबी है। टिन्नू मंदिर की हर व्यवस्था में हस्तक्षेप रखता था और उसके पास गणना कक्ष की चाबी थी। आरोप है कि रमाशंकर यादव से ही मनीष यादव को एंट्री मिली थी और वह काउंटिंग में शामिल था।
इसके अलावा रमाशंकर मिश्र पर भी कर्मचारियों से मिलकर षडयंत्र का आरोप है। उन्होंने अपने बेटे और दामाद को भी पैसे गिनने के काम में लगा दिया था।
मनीष यादव का भाई बोला- बड़े लोग बचाने को फंसाया
घर में पर्दे के पीछे से हमसे बात करते मनीष के भाई (अपना नाम छुपाया) ने कहा कि मनीष की उम्र सिर्फ 20 साल है और वो बीकॉम कर रहा है। उसे मंदिर में बैंक ने रखवाया और उसे काम करते सिर्फ एक महीना हुआ था। सिर्फ बड़े लोगों को बचाने को उसको फंसा दिया गया है। इस मामले में विश्व हिंदू परिषद अध्यक्ष आलोक कुमार का भी बयान आया है कि चंपत राय, अनिल मिश्रा या फिर गोपाल राव भी जांच परिधि से बाहर नहीं हैं।
6 जनों पर चोरी की रकम रखने की शिकायत
केस में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, कमलेश पांडे, शशांक मिश्रा पर चढ़ावा धनराशि चोरी की संपत्ति रखने और प्राप्त करने की शिकायत है। वहीं सुभाष श्रीवास्तव, श्याम शंकर (टिन्नू) के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया जाना आवश्यक है।
सपा के प्रमुख अखिलेश यादव राम मंदिर के चंदा चोरी को लेकर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर निशाना साध रहे थे. आरोप है कि ट्रस्ट की नाक के नीचे मंदिर का दान और चढावे की रकम के हिसाब-किताब में हेरफ़ेर की गई.विपक्ष के हमलावर होने पर योगी सरकार ने SIT गठित की और SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने के बाद एक्शन शुरू हो गया।
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले की एसआईटी जांच पूरी होने के बाद आठ लोगों पर FIR लिखी गई है, जिसमें से सात लोग बंदी है। तब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट महासचिव चंपत राय ने पद छोड़ा , क्योंकि बंदियों में चंपत राय के ड्राइवर और करीबी सहयोगी, रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू भी शामिल हैं. जांचकर्ताओं का आरोप है कि दान के पैसे को कथित तौर पर दूसरी जगह लगाने में उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई थी.

