Social Media Reels And Memes On Sir Process Voter List Public
घर से भागकर कर ली शादी, अब वोटर लिस्ट में नाम डलवाने की चिंता… SIR पर रील्स और मीम्स की बाढ़
SIR फॉर्म को लेकर बनाए गए कंट्रोल रूम की घंटी तो खूब घनघना ही रही है, लेकिन अब सोशल मीडिया पर SIR से जुड़ी रील्स और मीम्स की भी बाढ़ आ गई है। इन रील्स के जरिए खासकर दामाद और उसके ससुरालवालों के बीच की कटुता और SIR से बदलते सुरों को भी लोग चुटीले अंदाज में दिखा रहे हैं।
लखनऊः …ये ससुराल वाले… पढ़े-लिखे जाहिल हैं, इनसे 2003 की वोटर लिस्ट भी नहीं भेजी जा रही है।”…अरे सासूजी, भूल-चूक माफ करो, अब तो अपनी बेटी का आधार कार्ड भिजवा दो, सिर्फ दस दिन बचे हैं।”… सासूजी, जब कहोगी विदा कर देंगे, अपना और ससुरजी का इपिक नंबर भेज देव।’ SIR फॉर्म को लेकर बनाए गए कंट्रोल रूम की घंटी तो खूब घनघना ही रही है, लेकिन अब सोशल मीडिया पर SIR से जुड़ी रील्स और मीम्स की भी बाढ़ आ गई है। इन रील्स से खासकर दामाद और उसके ससुरालवालों के बीच की कटुता और SIR से बदलते स्वरों को भी लोग चुटीले अंदाज में दिखा रहे है।
एसआईआर की खबर
राजधानी में SIR के फॉर्म में भरी जाने वाली सूचनाओं को लेकर कई लोग इधर-उधर चक्कर लगा रहे है। कोई चुनाव आयोग की वेबसाइट पर 2003 की वोटर लिस्ट ढूंढने में माथापच्ची कर रहा है, तो कोई कंट्रोल रूम की घंटी घनघना रहा है। बूथों पर भी गणना प्रपत्र भरने के लिए लंबी कतार है। इस बीच सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने भी अपने लिए मौका ढूंढ लिया है। ये गांव, शहर के हालात पर रील्स बनाकर लोगों को गुदगुदा रहे है।
घर से भागकर शादी करने वालो का भी बुरा हाल
सोशल मीडिया पर उन लोगों का दर्द भी आ रहा है, जिन लोगों ने घर वालों की मर्जी बिना भागकर शादी कर ली। घर वालों से नाता तोड़ लिया था, लेकिन SIR शुरू होने पर उन्हें वोटर लिस्ट में नाम डलवाने की चिंता सता रही है। सोशल मीडिया में इन रील्स में घर से भागे युवक-युवती डेटा हासिल करने को पैतरे चल रहे हैं। किसी रील में विद्रोह कर शादियां करने वाले सरेंडर कर रहे हैं, तो किसी में घर वाले उन्हें मजा चखा रहे है।
सरकारी महकमों की चिल्ल-पों भी
गणना प्रपत्र बांटने के बाद उसे दिन भर इकट्ठा करने और वॉर रूम में देर रात तक उनकी फीडिंग के दौरान बीएलओ, सुपरवाइजर, RO और ARO के बीच होने वाली चिल्ल-पों पर भी खूब मीम्स वायरल है। इन रोल्स में फिल्मों के अलग-अलग सीन में मालिक और नौकर के बीच चुटीले संवाद है।
लव मैरिज कर माता-पिता से अलग हुए बेटे-बेटियों को SIR सर्वे ने मिलवाया… 3 परिवारों की कहानी
SIR अभियान सिर्फ मतदाता सूची अपडेट नहीं कर रहा, बल्कि वर्षों से बिछड़े परिवारों को फिर जोड़ रहा है. प्रेम विवाह कर घर से कटे कई युवक-युवतियां अब पुराने वोटर विवरण जुटाने के लिए अपने माता-पिता से संपर्क कर रहे हैं. 15 साल, 10 साल और 9 साल बाद हुई भावुक बातचीतों के कई मामले सामने आए हैं. अधिकारियों का कहना है कि ऐसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं.
“SIR से कई जन अपने परिवार से दोबारा बातचीत कर रहे हैं.
- बरेली,01 दिसंबर 2025,उत्तर प्रदेश के बरेली में चल रहा SIR अभियान मतदाता सूची अपडेट करने के साथ-साथ बिछड़े परिवारों को भी जोड़ रहा है. कई ऐसे युवक-युवतियां, जो प्रेम विवाह के बाद घरवालों से कट गए थे, अब अपने पुराने वोटर डिटेल जुटाने के लिए वर्षों बाद परिवार से संपर्क कर रहे हैं.
15 साल बाद स्नेहलता ने किया घर पर फोन
जोगी नवादा की रहने वाली 40 वर्षीय स्नेहलता ने 15 साल पहले प्रेम विवाह के कारण अपने परिवार से सारे रिश्ते तोड़ दिए थे. अब जब SIR के दौरान अधिकारियों ने उनसे 2003 की वोटर लिस्ट वाला EPIC ID मांगा, तो वह विवरण याद न होने पर आखिरकार अपने माता-पिता को फोन करने पर मजबूर हो गईं. यह बात वर्षों बाद दोनों के बीच बातचीत का कारण बनी.
धर्म परिवर्तन के बाद संपर्क टूटा, अब परिवार से जुड़े
बुलंदशहर की सुलेखा, जिसने विवाह के बाद इस्लाम कबूल कर अपना नाम रिहाना कर लिया था, लगभग 10 साल से अपने परिवार से बात नहीं कर रही थीं. SIR फॉर्म में पुराने विवरण की मांग पर उन्होंने अपनी मां को फोन किया, जिससे भावुक बातचीत हुई.
SIR ने शख्स को अपनों से मिलाया
15 साल की उम्र में घर से भागा, दिल्ली में धर्म बदला…SIR सर्वे ने 40 साल बाद परिवार से मिलाया
कई अंतर-धार्मिक और अंतर-राज्यीय विवाह वाले इलाके प्रभावित
तिरिया निजावत खान नगर पंचायत, जहां मुस्लिम आबादी लगभग 80% है, में ऐसे कई मामले सामने आए हैं. यहां दिल्ली, कश्मीर, बंगाल, बिहार और ओडिशा से शादी करके आई महिलाएं रहती हैं, जिन्हें पुराने मतदाता दस्तावेज जुटाने में कठिनाई हो रही है.
गुजरात से 10 साल बाद आया बेटे का फोन
खेडा गांव के रामवीर सिंह ने बताया कि उनका बेटा अवधेश 10 साल पहले प्रेम विवाह कर गुजरात चला गया था. अचानक अब उसने कॉल कर 2003 की वोटर लिस्ट का विवरण मांगा, जिससे परिवार में भावुक माहौल बन गया.
अधिकारियों का दावा- ऐसे कई मामले सामने आ रहे
जिला उप निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, खासकर प्रेम विवाह करने वाले कपल्स के. SIR फॉर्म में पुराने पता, पिता का EPIC ID और 2003 की लिस्ट की जानकारी मांगे जाने पर लोग अपने परिवारों से संपर्क कर रहे हैं. अधिकारियों ने कहा कि जानकारी की कमी हो तो SIR फॉर्म में तीसरा विकल्प भर सकते हैं।
SIR अभियान ने 45 साल पहले खोए बेटे को मिलाया, 1300 किलोमीटर दूर जी रहा था गुमनाम जिंदगी
SIR से एक मां को बिछड़ा बेटा और बिछड़े बेटे को उसका परिवार 45 साल बाद मिला है. अब यह मामला काफी चर्चाओं में है.
देशभर भर में एसआईआर को लेकर तरह-तरह की चर्चाओं का दौर जारी है.वोटर लिस्ट संशोधन अभियान को लेकर तमाम सवाल उठाए जा रहे हैं.लेकिन इस बीच SIR से जुड़ा एक अनोखा मामला सामने आया है.वास्तव में, SIR से एक मां को बिछड़ा बेटा मिला है जबकि बिछड़े बेटे को उसका परिवार 45 साल बाद मिला है.अब यह मामला काफी चर्चाओं में है.यह मामला भीलवाड़ा का है जहां सूरज गांव के मझरे से करीब 45 साल पहले लापता हुआ बेटा 1300 किलोमीटर दूर छत्तीसगढ़ में गुमनामी की जिंदगी जी रहा था. तभी वोटर लिस्ट संशोधन (SIR) अभियान के चलते परिजनों से बिछड़ उदय सिंह 45 साल बाद बुधवार शाम को अपने गांव पहुंचा.
तीन दशक से बिछड़े बेटे को तलाश रहे परिजन युवक को देखकर भावुक हो गए.जबकि मां के आखों के आंसू नहीं थम रहे.दूर दराज के रिश्तेदार बिछड़े बेटा मिलने की सूचना मिलने पर मिलने आ रहे हैं.डेढ़ सौ घरों की बस्ती वाले ग़ांव में अलग माहौल है.उदय सिंह के गांव लौटने पर जिससे दूल्हे का स्वागत होता है वैसे घोड़ी पर बिठाकर स्वागत किया गया और बिंदोरी निकाली गई.
उदय सिंह रावत को कैसे मिला परिवार
उदय सिंह रावत साल 1980 में अचानक घर से लापता हो गए. तब से परिजन उनकी तलाश में लगे थे,लेकिन बेटे का कोई सुराग नहीं मिला.वहीं उदय सिंह राजस्थान से छत्तीसगढ़ पहुंच गए और एक निजी कंपनी में गार्ड की नौकरी करने लगे.इस दौरान उदय सिंह का एक सड़क एक्सीडेंट भी हुआ था,जिसमें उन्हें सिर पर चोट लगी थी.इस वजह से उनकी याददाश्त चली गई और घर-परिवार की यादें भी धुंधली हो गई.लेकिन जब SIR अभियान शुरू हुआ तो दस्तावेज को लेकर जिज्ञासा हुई.उदय सिंह को अपने गांव का नाम सुराज याद था और अपनी जाति याद थी.
वोटर फॉर्म की जानकारी लेने पहुंचे भीलवाड़ा
उदय सिंह जैसे-तैसे बुधवार को भीलवाड़ा के सुराज गांव स्थित स्कूल में वोटर फॉर्म की जानकारी लेने पहुंचे.उनकी दी गई जानकारी और रिकॉर्ड मिलान के समय स्कूल के शिक्षक को शक हुआ तो उसने परिजनों को सूचना दी.परिजन जैसे ही स्कूल पहुंचे तो उदय सिंह और उनका परिवार आश्चर्यचकित हो गए क्योंकि 45 साल बीत गए थे तो पहचान करना मुश्किल हो गया था.ऐसे में उदय ने परिवार की पर्सनल यादों और बचपन की बातें बताईं,तो यकीन हो गया कि सामने उनका ही भाई खड़ा है.पहचान की अंतिम पुष्टि तब हुई जब मां चुनी देवी रावत ने बेटे के माथे व सीने पर पुराने घावों के निशान देखे.तो मां को विश्वास हो गया कि वह उसका ही बेटा है.
मिल गया मां का लाल
बेटे की पहचान होते ही पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई. परिजन और ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों और DJ के साथ जुलूस निकाल कर उदय सिंह का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया.उन्हें घर ले जाया गया.उदय सिंह ने कहा कि एक्सीडेंट के बाद उनकी याददाश्त चली गई थीं और अब परिवार से मिलकर उन्हें अवर्णनीय खुशी हो रही है.वह चुनाव आयोग के SIR अभियान के चलते ही परिवार से जुड़ पाए हैं.
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