छह केस:बेटियां घर में भी असुरक्षित,पिता को फांसी,गुजरात केस में पिता फाँसी से बचा
बेटी को प्रेग्नेंट करने के दोषी पिता को मौत की सजा, बच्चे के DNA टेस्ट से हुई थी पुष्टि
1-तिरुनेलवेली जिला पॉक्सो अदालत ने अबोध बेटी के यौन उत्पीड़न और उसे प्रेग्नेंट करने के दोषी पिता को मौत की सजा सुनाई है.
Tamil Nadu POCSO court sentences man to death for impregnating his minor daughter
तिरुनेलवेली (तमिलनाडु) 05 जनवरी 2026 । जिला पॉक्सो कोर्ट ने एक व्यक्ति को अपनी अबोध बेटी के यौन उत्पीड़न और उसे प्रेग्नेंट करने के अपराध में दोषी पा मौत की सजा सुनाई है. पॉक्सो कोर्ट ने 5 जनवरी को फैसला सुनाया.
तिरुनेलवेली जिले के पानागुडी इलाके के दिहाड़ी मजदूर की दो पत्नियां हैं. दूसरी पत्नी की दो बेटियां हैं. उनमें से एक, 14 साल की 10वीं कक्षा में पढ़ती थी.
पिछले साल जनवरी में, लड़की के शरीर में बदलाव दिखे, तो मां उसे अस्पताल ले गई. वहां डॉक्टरों ने लड़की की जांच कर पाया कि वह गर्भवती है. लड़की की मां और डॉक्टर हैरान रह गए. पूछने पर लड़की ने बताया कि पिता 2024 से उसका यौन शोषण कर रहा था.मां ने फरवरी 2025 में महिला पुलिस स्टेशन में शिकायत की. पुलिस ने मुकदमा लिख मामले की जांच शुरू की.
इस बीच, गर्भवती बच्ची ने बच्चे को जन्म दिया. बच्चे के DNA टेस्ट से पुष्टि हुई कि बच्चे का बायोलॉजिकल पिता वही व्यक्ति है, जिसने अपनी बेटी का यौन उत्पीड़न किया और वह गर्भवती हुई थी. केस की सुनवाई तिरुनेलवेली POCSO कोर्ट में हो रही थी. DNA टेस्ट के प्रमाणों के आधार पर पॉक्सो कोर्ट ने 5 जनवरी को मुकदमें में अपना फैसला सुनाया. POCSO कोर्ट जज सुरेश कुमार ने पिता को मौत की सजा सुनाई और अबोध बेटी के यौन उत्पीड़न और उसे गर्भवती करने को 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया. जज ने यह भी आदेश दिया कि पीड़ित लड़की को तमिलनाडु सरकार 10 लाख रुपये क्षतिपूर्ति दे.
10 दिन पहले, तिरूनेलवेली जिले के नांगुनेरी में भी इसी तरह के मामले में एक पिता को मौत की सजा सुनाई गई थी, जिसे अपनी अबोध बेटी का यौन उत्पीड़न करने का दोषी पाया गया था, जिससे लड़की गर्भवती हो गई थी.
तमिलनाडु में POSCO कोर्ट
तमिलनाडु सरकार ने POCSO एक्ट, 2012 में स्पेशल कोर्ट बनाए हैं. ये कोर्ट चेन्नई, मदुरै, कोयंबटूर और सलेम शहरों के जिला और सत्र न्यायालय में फास्ट-ट्रैक कोर्ट या महिला कोर्ट का काम करते हैं. इन कोर्ट को खास ट्रायल और अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में मुकदमें तेजी से निपटाते हैं.
2-हाथ काटा, जीभ काटी… 6 वर्षीय अबोध से राक्षसी कर्म करने वाले को फांसी, कोर्ट ने 56 दिनों के भीतर सुनाई सजा
बांदा में छह वर्षीय अबोध बच्ची से राक्षसी कर्म करने वाले अमित रैकवार को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है. उसने अबोध का हाथ तोड़ा, जीभ काटी और शरीर के कई हिस्से गंभीर घायल किये. घटना 25 जुलाई 2025 को कालिंजर थाना क्षेत्र की है. पुलिस ने उसे एनकाउंटर में पकड़ा । 56 दिन में कोर्ट ने सजा सुना दी।
अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा कि दोषी को तब तक फांसी पर लटकाया जाए, जब तक उसकी मौत न हो जाए. सजा सुनते आरोपी के चेहरे पर कोई पछतावा नहीं दिखा. वहीं, पीड़ित परिवार ने अदालत के फैसले पर संतोष जताया है.
गुटखे के बहाने बुलाया, फिर बना दानव
यह जघन्य घटनी 25 जुलाई 2025 की है. बांदा के कालिंजर थाना क्षेत्र में छह साल की अबोध बच्ची अपने घर के बाहर खेल रही थी. तभी पड़ोसी आरोपित अमित रैकवार उसे गुटखा देने के बहाने अपने साथ ले गया.
आरोपित ने बच्ची से दुष्कर्म किया और विरोध करने पर उस पर बर्बरता की. बच्ची का हाथ तोड़ दिया, जीभ काट दी और दांतों से उसके नाजुक अंगों बुरी तरह घायल कर दिये. जब परिजनों ने बच्ची खोजी तो वह खून से लथपथ मिली.
अस्पताल से कानपुर रेफर, हालत आज भी गंभीर
घायल अबोध तुरंत जिला अस्पताल ले जायी गयी, उसकी गंभीर हालत देख उसे कानपुर भेजा गया. डॉक्टरों के अनुसार बच्ची के प्राण थी. छह महीने बीत जाने के बाद भी बच्ची पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है.
परिजनों का कहना है कि बच्ची आज भी बदहवास रहती है । उसके और भी ऑपरेशन होने हैं. घटना ने पूरा परिवार नष्ट कर दिया.
एनकाउंटर में गिरफ्तारी, पैरों में लगी गोली
घटना के कुछ ही घंटों बाद पुलिस सक्रिय हो गई. दुष्ट अमित रैकवार मध्य प्रदेश की ओर जंगलों में भागने की कोशिश में था. तभी पुलिस से मुठभेड़ हुई।आरोपी के दोनों पैरों में गोली लगी.
पुलिस ने उसे जेल भेज दिया. पूरा जिला आक्रोशित था और लोग आरोपित को गोली मारने की मांग कर रहे थे. तब से वह जेल में है.
20 दिन में चार्जशीट, 56 दिन में फैसला
मामले की गंभीरता देखते हुए विवेचना अधिकारी इंस्पेक्टर दीपेंद्र सिंह ने 20 दिनों में जांच पूरी की. 12 नवंबर को पुलिस अभियोजन ने आरोप पत्र अदालत में दिया.ट्रायल में अभियोजन पक्ष ने 10 गवाह पेश किए. दोनों पक्षों के तर्क सुन अदालत ने आरोपित दोषी पाया. मामले में 36 तारीखें पड़ीं और 56 दिनों में अदालत ने फांसी की सजा सुना दी.
जज का कठोर संदेश, अर्थदण्ड भी
अदालत ने फैसले में कहा कि अपराध समाज की आत्मा को झकझोर गया है. ऐसे जघन्य अपराधों में कठोर सजा जरूरी है. कोर्ट ने आरोपित को फांसी की सजा के साथ 75 हजार रुपये अर्थदण्ड भी लगाया है.
खास यह कि जिस जज ने इस मामले की सुनवाई शुरू की थी, उसी जज ने अंतिम फैसला भी सुनाया. सजा के बाद पुलिस टीम आरोपित को जेल ले गई.
मां बोलीं- हमारी बेटी का जीवन नष्ट कर दिया
फैसले के बाद पीड़ित बच्ची की मां ने कहा कि आरोपित ने उनकी बेटी का पूरा जीवन नष्ट कर दिया. बच्ची मिली थी तो उसकी सांस चल रही थी, लेकिन शरीर पर गंभीर घाव थे. हाथ टूटा था, जीभ कटी थी और कई ऐसे घाव थे जो आज तक नहीं भर पाए हैं.
मां ने कहा कि आरोपित के साथ यही होना चाहिए था. उन्होंने अदालत के फैसले और पुलिस की कार्रवाई पर संतोष जताया और कहा कि इससे उन्हें न्याय मिला है.
अपराधियों में जाएगा कठोर संदेश- पुलिस अधीक्षक
बांदा के पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने बताया कि 25 जुलाई को कालिंजर थाना क्षेत्र में छह साल की बच्ची से पड़ोसी ने दुष्कर्म किया था . बच्ची की हालत बेहद गंभीर थी, इसलिए उसे तुरंत बेहतर इलाज को कानपुर भेजा गया.
उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार की लिखित शिकायत पर मुकदमा लिखा गया और मुठभेड़ में आरोपित पकड़ा गया. पुलिस ने तेजी से चार्जशीट दाखिल की और कोर्ट में मजबूत पैरवी की. बंसल के अनुसार सरकार चाहती है कि ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ में महिला और बच्चों के खिलाफ अपराधों में कठोर और निष्पक्ष कार्रवाई हो. ऐसे फैसलों से अपराधियों में डर पैदा होगा और समाज में कड़ा संदेश जाएगा.
Gujarat High Court Lets Off Father On Death Row For Pregnant Daughter Rape And Murder
3-बेटी से रेप बाद हत्या, ट्रायल कोर्ट से पिता को फांसी की सजा, अब गुजरात हाईकोर्ट ने छोड़ा
सूरत में बेटी से रेप और हत्या के मामले में बड़ा कानूनी मोड़ आया है। गुजरात हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट ने फांसी की सजा का जो फैसला सुनाया था, उसे रद्द करते हुए डीएनए सबूतों में गंभीर कमियों के आधार पर आरोपित पिता को छोड़ दिया।
गुजरात हाईकोर्ट ने सूरत की एक ट्रायल कोर्ट का वह निर्णय कर दिया जिसमें रेप और हत्या के मामले में एक व्यक्ति को फांसी की सजा सुनाई गई थी। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जिस डीएनए रिपोर्ट के आधार पर आरोपित को दोषी ठहराया गया, उसे विश्वसनीय और ठोस प्रमाण नहीं माना जा सकता, क्योंकि जांच प्रक्रिया में गंभीर चूक पाई गईं। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में सजा तभी दी जा सकती है, जब साक्ष्यों की कड़ी पूरी तरह से मजबूत और बिना किसी संदेह के हो।
मामला ओडिशा की 14 वर्षीय प्रवासी किशोरी से जुड़ा है, जिसका शव 29 जून 2017 को सूरत के डुमस समुद्र तट पर मिला था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चला कि किशोरी गर्भवती थी जिसे गला घोंटकर मारा गया था । इस सनसनीखेज घटना के बाद पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर उसका पिता पकड़ा। जांच एजेंसियों ने भ्रूण और आरोपित के डीएनए का मिलान कर पिता को दुष्कर्मी और हत्यारा माना ।
कोर्ट ने सुनाई थी मौत की सजा
जनवरी 2020 में सूरत की ट्रायल कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता और पॉक्सो एक्ट में आरोपित को दोषी ठहरा मौत की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष का दावा था कि डीएनए मिलान इस मामले में निर्णायक प्रमाण है। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में मौत की सजा की पुष्टि को याचिका की, तो पूरे मामले की दोबारा गहन जांच हुई। जस्टिस इलेश वोरा और जस्टिस आर. टी. वच्छानी की खंडपीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष सभी जरूरी परिस्थितियां विश्वसनीय और निर्णायक प्रमाणों से सिद्ध करने में विफल रहा। अदालत के अनुसार, साक्ष्यों की ऐसी श्रृंखला नही बनी, जो बिना किसी टूट के सीधे आरोपित के दोष की ओर संकेत करती हो।
नमूने फॉरेंसिक लैब पहुंचाने में 13 दिन की देरी हुई
हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि डीएनए नमूना संग्रह और संरक्षण में लापरवाही हुई। पीड़िता के अजन्मे बच्चे और आरोपित के नमूनें फॉरेंसिक लैब 13 दिन बाद पहुंचे। अत्यंत संवेदनशील जैविक सामग्री आइस बॉक्स में सुरक्षित रखने में भी चूक हुई, जिससे नमूनों के दूषित होने की आशंका से इनकार नहीं हो सकता। ये सभी कमियां देख हाईकोर्ट ने डीएनए रिपोर्ट निर्णायक प्रमाण मानने से मना कर ट्रायल कोर्ट का फैसला निरस्त कर आरोपित छोड़ दिया।
4-अपनी ही अबोध बेटी से दुष्कर्म, आरोपित को आजीवन कारावास; पीड़िता को 10 लाख क्षतिपूर्ति
झारसुगुड़ा पोक्सो विशेष अदालत ने नाबालिग बेटी से बलात्कार के मामले में आरोपित पिता रोहित रजक को आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। 8 जुलाई की रात नशे में धुत पिता ने बेटी से दुराचार किया। पीड़िता ने थाने में शिकायत की। पुलिस ने POCSO एक्ट में मुकदमा लिख जांच पूरी की। पीड़िता को 10 लाख क्षतिपूर्ति भी मिलेगी।
झारसुगुड़ा पोक्सो विशेष अदालत ने एक अबोध बेटी से बलात्कार के मामले में फैसला सुनाया। अदालत ने गत 9 जुलाई को लिखे मामले की सुनवाई करते हुए आरोपित पिता रोहित रजक को आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
मामले के विवरण के अनुसार, यह घटना गत 8 जुलाई की रात की है। पिता रात में घर लौटने के बाद नाबालिग बेटी के साथ अमानवीय व्यवहार किया। बेटी के विरोध के बावजूद वह बेटी के साथ दुराचार करने से पीछे नहीं हटा। उस समय आरोपी पिता नशे की हालत में था।
यह बेटी को असहनीय हो गया। अबोध बेटी ने न्याय की गुहार को झारसुगुड़ा सदर थाने में पहुंचकर घटना की जानकारी दे न्याय की मांग की।
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(2)(एफ) और पोक्सो एक्ट की धारा 6 में मुकदमा लिख पीड़िता और आरोपित का मेडिकल परीक्षण कराया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मधुसिक्ता मिश्रा के नेतृत्व में जांच अधिकारी इंस्पेक्टर स्वपनारानी गोछायत ने मामले की जांच की। आरोपित को पकड कोर्ट लाया गया।
गत 1 सितंबर को पुलिस की ओर से कोर्ट में मामले का आरोप पत्र आया था।मामले की सुनवाई पुलिस कर न्यायालय ने अभियुक्त पिता को दोषी बताते हुऐ उसे आजीवन कारादंड की सजा के साथ 50 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है।
साथ ही पीड़िता को दस लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि राज्य से देने को कदम उठाए गए हैं। कोर्ट में सरकारी वकील पी आर सिंहदेव ने मामले की पैरवी की।
5-रेपिस्ट पिता जीवन काल रहेगा जेल
कन्नौज में अपनी ही अबोध बेटी का रेपिस्ट पिता पूरे जीवनकाल जेल में रहेगा। पिता को इस तरह से सजा दिलवाने में शासकीय अधिवक्ता सन्त कुमार दुबे की मुख्य भूमिका रही। गुरसहायगंज कोतवाली क्षेत्र के एक कस्बा निवासी युवक ने 6 जून 2022 को अपनी ही 11 वर्षीय बेटी को कमरे में बन्द कर दुष्कर्म किया। किशोरी की बुआ ने उसे बचाने को शोर मचाया जिसे सुनकर आसपास के लोग एकत्र हो गए, लेकिन तब तक रमेश वहां से भाग गया।
दुष्कर्म से किशोरी की हालत बिगड़ गई। घटना की सूचना मिलते ही उसके बाबा घर पहुंच गए और फिर पौत्री को लेकर गुरसहायगंज कोतवाली पहुंचे। जहां बाबा की लिखित शिकायत पर पुलिस ने आरोपित पिता के खिलाफ दुष्कर्म की एफआईआर लिखी ।
इस जघन्य मामले में रेपिस्ट को सजा दिलाने को शासकीय अधिवक्ता सन्त कुमार दुबे ने पीड़िता की ओर से पक्ष रखा। उन्होंने पॉक्सो एक्स कोर्ट की स्पेशल जज अलका यादव के समक्ष अपनी बात रखते हुए कहा कि इस तरह की घटना सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करेगी। आरोपित को इस तरह की सजा दी जाये जो समाज में सबक की तरह जीवित रहे और अपराध करने वालों में भय व्याप्त हो।
तमाम तर्क सुनने, पीड़िता के बाबा की महत्वपूर्ण गवाही व साक्ष्य के आधार पर जज अलका यादव ने रमेश कुमार को दोषी पाते हुए पूरे जीवनकाल जेल में रहने की सजा सुनाई है। उस पर 10 हजार का अर्थदण्ड भी लगाया गया।
10 साल पहले घर छोड़कर गया था आरोपित
किशोरी के बाबा ने बताया कि जब बच्ची पैदा हुई थी, उसके कुछ समय बाद ही रमेश नाराज होकर घर से कहीं चला गया था। 10 साल के बाद वह लौटकर अपने घर आया था। घटना से 8 दिन पहले ही वह लौटा था। उसकी पत्नी का पहले ही निधन हो चुका था।
घर में किशोरी अपनी बुआ और बाबा के साथ रहती थी। घटना वाले दिन बाबा बकरियां चराने चले गए और किशोरी अपनी बुआ के साथ दोपहर में सो गई थी। ऐसे में युवक अपनी बेटी को उठाकर दूसरे कमरे में ले गया और उसके हाथ-पैर बांधकर दुष्कर्म किया।
6- नेत्रहीन अबोध बच्ची से बलात्कार के दोषी को आजीवन कारावास की सजा
झारसुगुड़ा जिला पुलिस ने मामला दर्ज होने के 100 दिनों के भीतर ही दोषी को सजा दिलवा दी; अदालत ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की मुआवजा योजना में पीड़ित को ₹10,50,000 का मुआवजा भी दिया।
ओडिशा के झारसुगुडा जिले की एक स्थानीय अदालत ने नेत्रहीन लड़की से बलात्कार के मामले में एक व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई, और मामले के पंजीकरण के 100 दिनों के भीतर फैसला सुनाया।
पीड़िता, एक नेत्रहीन नाबालिग लड़की, टीवी सुनने अक्सर आरोपित के घर जाती थी। 6 मई की दोपहर जब परिवार सो रहा था, तब आरोपित ने उससे बलात्कार किया। 54 वर्षीय आरोपित को दो दिन के भीतर 8 मई को पकड़ लिया गया।
झारसुगुड़ा पुलिस के अनुसार, डीएनए विश्लेषण सहित उन्नत फोरेंसिक तकनीकों का उपयोग करके अकाट्य मामला तैयार किया गया। पुलिस ने कहा, “तेज जांच और वास्तविक समय में मुकदमे की निगरानी ने यह सुनिश्चित किया कि कोई देरी न हो, जो नए आपराधिक कानूनों में समय पर न्याय पर दिए गए जोर के अनुरूप है।”
22 दिनों में आरोप पत्र
22 दिनों के भीतर 28 मई को आरोप पत्र सौंपा गया। आरोपित को बीएनएस की धारा 64(2)(के) और पीओसीएसओ अधिनियम की धारा 6 में दोषी ठहराया गया।
इसके अलावा, अदालत ने राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) की यौन उत्पीड़न/अन्य अपराधों की महिला पीड़ितों/उत्तरजीवियों के लिए मुआवजा योजना – 2018 में पीड़िता को ₹10,50,000 का मुआवजा भी प्रदान किया।
झारसुगुड़ा के पुलिस अधीक्षक स्मित पी परमार ने कहा कि “न्याय में देरी न्याय से इनकार के समान है। हमारा संकल्प है कि हम त्रुटिरहित जांच सुनिश्चित करेंगे ताकि कोई भी अपराधी कानून से बच न सके। यह दोषसिद्धि कमजोर वर्ग की रक्षा करने और बिना देरी किए न्याय दिलाने के हमारे संकल्प को और मजबूत करती है,”
इससे पहले एक मामले में, झारसुगुडा पुलिस ने 55 दिनों में एक सीरियल बाल बलात्कारी को दोषी ठहराते हुए 25 साल के कठोर कारावास की सजा दिलवाई थी। झारसुगुडा पुलिस ने कहा कि वे महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों के मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने को प्रतिबद्ध हैं।

