राघव चड्ढा समेत 7 AAP रास सांसदों के भाजपा में विलय सभापति से मान्य,BJP बहुमत से एक सीट दूर ,AAP 3
राघव चड्ढा समेत 7 आप सांसदों के भाजपा में विलय को राज्यसभा सभापति की स्वीकृति, 113 हो गई BJP की संख्या, AAP 3
राघव चड्ढा समेत सात AAP सांसदों ने पार्टी छोड़ BJP में शामिल होकर राज्यसभा में BJP की संख्या बढ़ाई. राज्यसभा में BJP के सांसदों की संख्या बढ़कर 113 हुई, जबकि AAP के सांसद घटकर तीन रह गए.
- राघव चड्ढा समेत सात AAP राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने की मंजूरी पाई है
- भाजपा के राज्यसभा सांसदों की संख्या बढ़कर 33 हो गई है जबकि आम आदमी पार्टी के सांसद घटकर तीन रह गए
- सांसदों ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी सिद्धांतों और नैतिक मूल्यों से भटक गई है
नई दिल्ली 28 अप्रैल 2026 । राघव चड्ढा समेत सात राज्यसभा सांसदों के आम आदमी पार्टी से अलग होकर भाजपा में शामिल होने को राज्यसभा सभापति की मंजूरी मिल गई है. ऐसे में राज्यसभा में भाजपा सांसदों की संख्या 106 से बढ़ कर 113 हो गई है. वहीं, आम आदमी पार्टी के सांसदों की संख्या 10 से घट कर 03 रह गई है. राघव चड्ढा ने पिछले दिनों घोषणा की थी कि उनके साथ AAP के 6 सांसद पार्टी छोड़ भाजपा में शामिल हो रहे हैं. भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने AAP सांसदों का स्वागत मिठाई खिलाकर किया था.
मालीवाल को छोड़कर बाकी सभी पंजाब से
आम आदमी पार्ट को बड़ा झटका लगा जब राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल ने पार्टी छोड़ दी और भाजपा में शामिल हो गए. उन्होंने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी अपने सिद्धांतों, मूल्यों और मूल नैतिक मूल्यों से भटक गई है. राघव चड्ढा ने राज्यसभा में पार्टी के 10 सांसदों का संदर्भ देते हुए कहा कि संविधान के अनुसार, किसी पार्टी के कुल सांसदों में से दो-तिहाई सांसद दूसरी पार्टी में सम्मिलित हो सकते हैं. दिल्ली से राज्यसभा सदस्य मालीवाल को छोड़कर बाकी सभी पंजाब से हैं.
क्या AAP के और नेता टूटेंगे?
राज्यसभा के सभापति ने आम आदमी पार्टी के सात सांसदों के भाजपा में विलय को स्वीकार करने से भाजपा फायदे में है. वहीं, आम आदमी पार्टी में टूट की स्थिति दिख रही है. बताया जा रहा है कि पंजाब के कई बड़े नेता भी राघव चड्ढा के संपर्क में हैं, जो पार्टी छोड़ना चाहते हैं. हालांकि, आप सांसद संजय सिंह ने इन बातों को अफवाह बताया. संजय सिंह ने भाजपा और राघव चड्ढा पर जानबूझकर ये अफवाहें फैलाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि चड्ढा और भाजपा में शामिल होने वाले अन्य राज्यसभा सदस्यों के खिलाफ ‘विश्वासघात’ को लेकर पूरे पंजाब में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.
राघव चड्ढा ने बताया क्यों छोड़ा केजरीवाल का साथ?
राघव चड्ढा ने जब से आम आदमी पार्टी छोड़ने की घोषणा की है, तब से अब तक उनके कई वीडियो मैसेज सामने आ चुके हैं. अब राघव चड्ढा का एक और वीडियो मैसेज सामने आया है, जिसमें वह बता रहे हैं आखिर, उन्होंने अरविंद केजरीवाल का साथ छोड़ने का फैसला क्यों किया?
राघव चड्ढा ने वीडियो में कहा कि पिछले तीन दिनों से उनके पास ढेर सारे मैसेज आ रहे हैं. ज्यादातर लोग उन्हें बेस्ट विशेस और बधाई दे रहे हैं, जबकि कुछ लोग उनके इस बड़े फैसले के पीछे क्या वजहें हैं, ये जानना चाहते हैं. इसलिए उन्होंने यह वीडियो उन सभी को बनाया है, जिन्होंने शायद उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस भी नहीं देखी. उन्होंने बताया कि राजनीति में आने से पहले वह एक प्रैक्टिसिंग चार्टर्ड अकाउंटेंट थे. उनके सामने एक बहुत अच्छा करियर था, लेकिन उन्होंने वह करियर छोड़कर राजनीति में कदम रखा. उन्होंने कभी करियर बनाने को राजनीति नहीं की. बल्कि वे आम आदमी पार्टी के फाउंडिंग मेंबर बने और उस पार्टी को अपने युवा दिनों के पूरे 15 साल दिए. उन्होंने अपनी मेहनत, खून-पसीने से उस पार्टी को सींचा और बड़ा किया. लेकिन अब वह पार्टी अब पहले जैसी नहीं रही. आम आदमी पार्टी में टॉक्सिक माहौल बन गया है. वहां काम करने से रोका जाता है, संसद में बोलने से रोका जाता है. पूरी पार्टी अब कुछ भ्रष्ट और समझौता करने वाले लोगों के हाथ में फंसकर रह गई है. ये लोग अब देश के लिए नहीं, बल्कि अपने निजी फायदे को काम करते हैं.
राघव चड्ढा ने कहा कि पिछले कई सालों से ये महसूस हो रहा था कि वे सही जगह पर नहीं हैं. उन्होंने कहा, “शायद मैं सही आदमी हूं, लेकिन गलत पार्टी में.” उनके सामने सिर्फ तीन रास्ते थे. पहला, पूरी तरह राजनीति छोड़ देना. दूसरा, उसी पार्टी में रहकर चीजें सुधारने की कोशिश करना, जो संभव नहीं हुआ और तीसरा, अपनी एनर्जी और अनुभव को लेकर किसी और प्लेटफॉर्म पर जाकर सकारात्मक राजनीति करना. इसलिए उन्होंने तीसरा रास्ता चुना, लेकिन उन्होंने अकेले यह फैसला नहीं लिया. उनके साथ और भी सांसद थे. कुल सात सांसदों ने मिलकर यह तय किया कि अब वो इस पार्टी से अपना रिश्ता तोड़ रहे हैं. उन्होंने कहा, “एक आदमी गलत हो सकता है, दो आदमी गलत हो सकते हैं, लेकिन सात लोग गलत नहीं हो सकते.”
क्या वो सब गलत हो सकते हैं?
राघव चड्ढा ने कहा कि कितने सारे पढ़े-लिखे, समझदार लोग इस पार्टी के सपने के साथ जुड़े थे, लेकिन बाद में उन्होंने भी पार्टी छोड़ दी. क्या वो सब गलत हो सकते हैं? राघव चड्ढा ने उदाहरण देते हुए कहा, “आप में से जो लोग नौकरी करते हैं, अगर आपका ऑफिस एक टॉक्सिक जगह बन जाए, जहां आपको काम करने नहीं दिया जाता, आपकी मेहनत को दबाया जाता है और आपको चुप करा दिया जाता है, तो आप क्या करेंगे? जाहिर है, आप उस जगह को छोड़ देंगे.” उन्होंने कहा कि उन्होंने भी ठीक वही किया है. उन्होंने कहा, “मैं अब आपकी समस्याओं को पहले से भी ज्यादा जोश और एनर्जी के साथ उठाऊंगा. अच्छी बात ये है कि अब हम उन समस्याओं के समाधान भी ढूंढ पाएंगे और उन्हें लागू भी करा पाएंगे.
राज्यसभा में BJP ऐतिहासिक नंबर पर पहुंची, अपने बूते बहुमत से बस जरा दूर
इस साल के अंत तक भाजपा की स्थिति और मजबूत हो सकती है, क्योंकि अभी 35 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने हैं. इनमें उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तराखंड जैसे राज्यों में बीजेपी की स्थिति मजबूत मानी जा रही है.
राज्यसभा में BJP ऐतिहासिक नंबर पर पहुंची, अपने बूते बहुमत से बस जरा दूर
राज्यसभा के सभापति ने ‘आप’ के एक गुट के BJP में विलय स्वीकार कर लिया है.भाजपा के राज्यसभा सांसदों की संख्या बढ़कर 113 और बहुमत के आंकड़े 123 से केवल एक सीट पीछे रह गई है.वर्ष 1988 के बाद पहली बार कोई दल अकेले दम पर राज्यसभा में बहुमत के करीब पहुंचा है, जिसमें भाजपा अग्रसर है.
राज्यसभा के सभापति ने आम आदमी पार्टी (आप) के एक गुट के BJP में विलय मान लिया है. इसके साथ ही ‘आप’ के 7 सांसद औपचारिक रूप से BJP में शामिल हो गए हैं. राज्यसभा के ताजा आंकड़ों के अनुसार डॉक्टर अशोक कुमार मित्तल, राघव चड्ढा, हरभजन सिंह, डॉक्टर संदीप कुमार पाठक, डॉक्टर विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल और राजेंद्र गुप्ता अब भाजपा के सांसद माने जाएंगे. अब भाजपा की राज्यसभा सांसद संख्या बढ़कर 113 हो गई है.
बहुमत के आंकड़े 123 से सिर्फ एक सीट पीछे
इस विलय बाद आम आदमी पार्टी के राज्यसभा में अब केवल 2 सांसद रह गए हैं. इसके साथ ही राज्यसभा में भाजपा की स्थिति ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई है. यदि सात मनोनीत सांसदों और दो निर्दलीय सांसदों—दिलीप रे और कार्तिकेय शर्मा—को भी जोड़ लें, तो भाजपा बिना किसी सहयोगी दल के बहुमत के आंकड़े 123 से सिर्फ एक सीट पीछे है. इससे पहले वर्ष 1988 में कांग्रेस आखिरी बार अपने दम पर राज्यसभा में बहुमत के निकट पहुंची थी. यानी पिछले चार दशकों में कोई भी दल अकेले दम इस स्थिति तक नहीं पहुंच सका था, लेकिन अब भाजपा धीरे‑धीरे उस स्तर की ओर बढ़ रही है.
भाजपा की स्थिति और मजबूत होगी
इस साल के अंत तक भाजपा की स्थिति और मजबूत होगी, क्योंकि अभी 35 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने हैं. इनमें उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तराखंड जैसे राज्यों में भाजपा की स्थिति मजबूत है. सहयोगी दलों को मिलाकर भाजपा की कुल संख्या राज्यसभा में 148 तक पहुंच चुकी है, जो दो‑तिहाई बहुमत के आंकड़े के निकट है. इतनी बड़ी संख्या के साथ भाजपा अब राज्यसभा में कई महत्वपूर्ण विधेयक आसानी से पारित कराने की स्थिति में आ गई है.
विपक्ष को बड़ा झटका
दूसरी ओर यह विपक्ष को बड़ा झटका है. हाल ही में महिला आरक्षण लागू करने को लाए गए संविधान के 131वें संशोधन विधेयक को सरकार लोक सभा में पारित नहीं करा सकी थी. विरोध में पड़े 30 वोट विपक्षी एकता का प्रमाण है. लेकिन अब स्थिति बदल जाएंगी. लोक सभा में चाहे सरकार को दो-तिहाई बहुमत पाने में परेशानी हो. लेकिन राज्य सभा में वह इसके काफी नजदीक पहुंच गई हैं.
आम आदमी पार्टी को ये बड़ा झटका
सर्वदलीय बैठकों में भी सरकार की ओर से निमंत्रण संख्या बल के आधार पर मिलता है. कई बार पांच से कम सदस्य संख्या वाली पार्टियों को नहीं बुलाया गया. हालांकि, लोक सभा में आम आदमी पार्टी के तीन सांसद हैं और ऐसे में उसके संसदीय दल में अब भी 6 सांसद हैं. संसदीय समितियों में भी आम आदमी पार्टी का प्रतिनिधित्व घटेगा और विपक्ष की बैठकों में भी उसकी आवाज कमजोर पड़ेगी.

