श्रीराम मंदिर ट्रस्ट खाते में हैं 18 अरब से ज्यादा

चंपत राय का इस्तीफा राम मंदिर ट्रस्ट ने किया मंजूर, महंत नृत्य गोपाल दास बोले- चंदा चोरी से आहत हूं
कौन हैं कृष्ण मोहन, जो संभालेंगे चंपत राय वाला काम; बताया कैसे राम मंदिर ट्रस्ट का बढ़ाएंगे ‘ट्रस्ट’

कृष्ण मोहन बने राम मंदिर ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव, चंपत राय पर क्या बोले कोषाध्यक्ष

गोविंद देव गिरी ने कहा कि कुछ अधिकारियों की नियुक्ति को समिति गठित की है. ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को होगी. तब तक विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट भी आने की उम्मीद है.

गोविंद गिरी महाराज ने कहा कि राम भक्तों को बदनाम करने की साजिश रची रही है.

राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक के बाद उसके कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी महाराज ने प्रेस से बात की. शुरूआत मंत्र पढ़कर की और कहा कि अत्यंत असाधारण परिस्थिति में ये अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक हुई.  जिस परिस्थिति का सामना करना पड़ा है, वो बहुत दुखदायक है. राम मंदिर को लोगों ने अपने प्राणों, परिवारों करियर की परवाह नहीं की और अब उसमें चोरी से हम लज्जित हैं, दुखी हैं. कितने की चोरी हुई ये बाद की बात है.

अब कृष्ण मोहन संभालेंगे कामकाज
गोविंद गिरी महाराज ने आगे बताया कि राम मंदिर के ट्रस्ट से महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार हो गया है. साथ ही विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव को भी अब ट्रस्ट से बाहर हैं. चंपत राय का कामकाज अब कृष्ण मोहन संभालेंगें। नया महासचिव कौन होगा, तय नही हुआ लेकिन अंतरिम तौर पर कृष्ण मोहन को कमान मिली है.

के. पारासरण ने दिखाई राह
राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष ने बताया कि चंपत राय ने स्वयं ही त्यागपत्र दे दिया था. हम लोग इसी पर निर्णय लेने को आज जुटे थे.इस ट्रस्ट के नियमों का निर्माण करने वाले 99 वर्ष के के. पारासरण भी पूरे समय तक ऑनलाइन उपस्थित थे. पूरे कोरम के साथ बैठक हुई. बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्र के त्यागपत्र मान्य करने और न करने पर विचार होना था. मगर के पारासरण  ने बताया कि ट्रस्ट के संविधान के अनुसार, त्यागपत्र देते ही स्वीकृत हो जाता है. इसलिए हम लोगों के पास त्यागपत्र स्वीकार करने के अलावा कोई चारा ही नहीं था. के पारासरण ने खुद ट्रस्ट का संविधान पढ़कर सुनाया कि आप लोगों के पास कोई ऑप्शन नहीं है. त्यागपत्र आ गया है तो उसे स्वीकार करना ही होगा. तब हम लोगों ने चंपत राय का त्यागपत्र स्वीकार कर लिया. मगर हम लोगों ने चंपत राय की सेवा का अभिनंदन भी किया. चंपत राय के राम मंदिर के लिए योगदान सराहा गया. चंपत राय और अनिल मिश्रा लंबे समय से ट्रस्ट के कार्यों से जुड़े रहे हैं, लेकिन मौजूदा परिस्थितियां देखते हुए उन्होंने स्वयं को ट्रस्ट के कामकाज से अलग करने का निर्णय लिया है.

ट्रस्ट ने दिखाया दान वाला रजिस्टर
प्रेस कॉन्फ्रेंस में गोविंद देव गिरी ने कहा कि मामले को लेकर कई तरह की बातें कही जा रही हैं और समाज में भ्रम फैलाने की कोशिश हो रही है.उन्होंने कहा कि आरोप लग रहे हैं कि केवल दानपात्रों से ही नहीं,बल्कि कई कीमती वस्तुएं भी चोरी हुई हैं.इन आरोपों के बीच ट्रस्ट कुछ महत्वपूर्ण वस्तुएं मीडिया के सामने लाया .उन्होंने बताया कि ट्रस्ट के पास 2,800 से अधिक वस्तुओं का विस्तृत रजिस्टर मौजूद है. इनमें अंकित कई वस्तुयें प्रमाण रुप में प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखायी गयी. उन्होंने भरोसा जताया कि ट्रस्ट भविष्य में और अधिक सतर्कता तथा पारदर्शिता से कार्य करेगा.

कठोर कार्रवाई हो
गोविंद देव गिरी ने कहा कि कुछ अधिकारियों की नियुक्ति को समिति गठित की गयी है. साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को होगी. तब तक विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट भी आने की उम्मीद है. एसआईटी रिपोर्ट मिलने पर ट्रस्ट उसकी समीक्षा करेगा और कुछ नए न्यासियों की नियुक्ति की घोषणा भी हो सकती है. अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए और उन्हें उचित सजा मिलनी चाहिए.हालांकि,उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना को आधार बनाकर देशभर में अनावश्यक राजनीतिक खेले जा रहे हैं.

कारसेवकों पर गोलियां चलाने वाले उठा रहे सवाल’
गोविंद देव गिरी ने कहा,कि “आज वे लोग हमें उपदेश दे रहे हैं जिन्होंने कभी कारसेवकों पर गोलियां चलवाई थीं.राम के अस्तित्व पर सवाल उठाने वाले लोग अचानक रामभक्ति की बात कर रहे हैं.इसके पीछे कई कारण हैं, लेकिन सबसे बड़ा उद्देश्य समाज बांटना है.ऐसे लोगों के किसी भी प्रलाप का विश्वास मत कीजिए.ये सब रामभक्तों को लांक्षित करने को कर रहे हैं.इनके इरादे भारत माता के लिए घातक हैं.हम लोग रामराज्य लाकर रहेंगे.” उन्होंने कहा कि अगर आपको लगता है कि आपका कोई सामान गायब है तो आप ट्रस्ट से समय लीजिए,आकर मिलिए और पूरी जानकारी रखिए.आप सभी धैर्य रखें, अपराधियों को दंड मिलेगा.रामराज्य आएगा,हम सभी रुकने वाले नहीं है.उन्होंने अपील की कि धैर्य रखें, शांत रहें,आपके हर सवालों का जवाब दिया जाएगा.

Ram Mandir Trust Still Holds Corpus Of Rs 1800 Crore
राम मंदिर ट्रस्ट के पास अब भी ₹18000000000 का कोष, दान चोरी के बीच कोषाध्यक्ष ने दिखाया हिसाब-किताब
श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने कहा कि मंदिर के सिस्टम को इस तरह से बदला जाएगा कि भविष्य में ऐसी कोई खामी सामने ना आए। उन्होंने कहा कि बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

स्वामी गोविंद देव गिरि ने किया चंपत राय का बचाव
कहा- कार्रवाई काम करने के तरीके को लेकर हुई
दान को लेकर बने भ्रम को दूर कर रहे- स्वामी गोविंद देव
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने राम मंदिर दान और खर्च के आंकड़े बताए हैं

अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर इन दिनों चंदा चोरी के विवादों में घिरा हुआ है। चंदा चोरी विवाद के बाद मंदिर की व्यवस्थाओं में बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि का इस मामले पर कहना है कि राम मंदिर की कार्यप्रणाली को और ज्यादा पारदर्शी, खामियों से रहित और बेहतर तरीके से प्रभावी बनाया जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि इस समस्या का समाधान केवल इस्तीफा देने से नहीं होगा, बल्कि बहुत बड़े स्तर पर सुधार की जरूरत है।

राम मंदिर दान चोरी विवाद के बीच मंदिर प्रबंधक के पद से जुड़े सवाल पर स्वामी गोविंद देव गिरि ने कहा कि गोपाल राव को पहले ही सूचना दे दी गई है कि अब वह इस पद पर काम नहीं करेंगे। उन्होंने बताया कि व्यवस्थाओं में बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और आने वाले समय में अधिक प्रभावी प्रणाली लागू की जाएगी। इसके साथ ही गोविंद देव गिरी ने मंदिर को मिलने वाले दान और आय का भी ब्योरा दिया।

स्वामी गोविंद देव गिरि ने बताया कि मंदिर निर्माण शुरू होने के बाद से अब तक ट्रस्ट को लगभग 3,200 करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई है। मंदिर निर्माण और बाकी कार्यों पर खर्च के बाद भी ट्रस्ट के पास करीब 1,800 करोड़ रुपये बचे हुए हैं। उन्होंने कहा कि दान को लेकर जो भी भ्रम की स्थिति बनी थी, उसे दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

स्वामी गोविंद देव गिरि ने कहा कि हाल की घटनाओं के बाद लोगों के बीच कुछ भ्रम पैदा हुआ था, लेकिन अब उसे दूर करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उन्होंने विश्वास जताया कि जल्द ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी और ट्रस्ट पहले की तरह बेहतर ढंग से काम करेगा। ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे मंजूर किए जाने के संबंध में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि मामला केवल पद छोड़ने तक सीमित नहीं है। स्थायी समाधान कार्यप्रणाली में सुधार है। इसके लिए ऐसी व्यवस्था तैयार की जाएगी, जिसमें पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो।

चंपत राय पर क्यों हुई कार्रवाई?
चंपत राय के बारे में पूछे गए सवाल पर स्वामी गोविंद देव गिरि ने कहा कि उनका चंपत राय से लंबे समय का जुड़ाव रहा है और वे उन्हें व्यक्तिगत रूप से अच्छी तरह जानते हैं। उन्होंने कहा कि कार्रवाई उनके काम करने के तरीके को लेकर हुई है, न कि उनके चरित्र को लेकर। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई चंपत राय पर आर्थिक अनियमितता का आरोप लगाता है, तो वह इसे सही नहीं मानते। स्वामी गोविंद देव गिरि ने बताया कि चंपत राय को कार्यशैली में सुधार के लिए कई बार सलाह दी गई थी। उनके अनुसार, कुछ कमियां उनकी कार्यशैली का हिस्सा थीं, लेकिन उन्हें उनके चरित्र से जोड़ना उचित नहीं है।

अखिलेश यादव पर स्वामी गोविंद देव गिरि ने क्या कहा?
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा पहले उठाए गए चढ़ावा चोरी के मुद्दे और कथित आरोपियों के संपर्कों से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि इस विषय पर वह विशेष जांच दल (एसआईटी) की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही कोई टिप्पणी करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट में लिए गए सभी फैसलों की समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए। किसी भी संस्था में कार्यप्रणाली की समीक्षा एक सतत प्रक्रिया होती है और इससे व्यवस्था अधिक मजबूत होती है।

कौन हैं कृष्ण मोहन, जो संभालेंगे चंपत राय वाला काम; बताया कैसे राम मंदिर ट्रस्ट का बढ़ाएंगे ‘ट्रस्ट’

कृष्ण मोहन RSS के पदाधिकारी और पूर्व इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (IFS) अधिकारी रह चुके हैं. मोहन ने पिछले साल ट्रस्ट में कामेश्वर चौपाल की जगह ली थी.

कौन हैं कृष्ण मोहन, जो संभालेंगे चंपत राय वाला काम; बताया कैसे राम मंदिर ट्रस्ट का बढ़ाएंगे ‘ट्रस्ट’राम मंदिर तीर्थ ट्रस्ट के नए महामंत्री कृष्ण मोहन ने कहा कि दोषी को सजा मिलेगी.
राम मंदिर के ट्रस्ट से महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार हो गया है. अब दोनों के कामकाज को कृष्ण मोहन संभालेंगे. इस बैठक के बारे में पूरी जानकारी ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंदानंद गिरी ने दी है.

जिम्मेदारी मिलने पर कृष्ण मोहन ने कहा कि मुझे अंतरिम महामंत्री की जिम्मेदारी मिली है. मेरी प्राथमिकता दोषी को सजा दिलाना है.

उन्होंने कहा कि प्रबंधन और संचालन की कुछ कमियों का फायदा कुछ लोगों ने उठाया.भविष्य में ऐसा कुछ न हो, यह तय करना हमारी जिम्मेदारी होगी। ट्रस्ट की छवि धूमिल हुई और समाज में अविश्वास पैदा हुआ तो उसे दूर करने को जो भी जरूरी होगा,हम करेंगे. राम जन्मभूमि में जो कुछ भी दान आएगा,उसके बारे में सभी को पूरी जानकारी दी जाएगी.इससे समाज में ट्रस्ट के प्रति भरोसा बन सकेगा.

कौन हैं कृष्ण मोहन?
कृष्ण मोहन RSS के पदाधिकारी और पूर्व इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (IFS) अधिकारी रह चुके हैं.73 साल के कृष्ण मोहन को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पिछले साल ही ट्रस्ट मेंबर बनाया गया था.वह हरदोई के हैं।

कृष्ण मोहन पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए RSS के क्षेत्र संघ चालक (क्षेत्र प्रभारी) हैं.मोहन ने पिछले साल ट्रस्ट में कामेश्वर चौपाल की जगह ली थी.
चंपत राय को क्यों देना पड़ा इस्तीफा, क्या है राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला?
राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर गड़बड़ी और चोरी का मामला जून महीने में सामने आया था. विवाद बढ़ने के बाद सरकार ने एसआईटी जांच का गठन किया था.एसआईटी इस मामले में अब तक आठ अभियुक्तों को गिरफ्तार कर चुकी है. गठन के 10 दिनों के अंदर 23 जून को एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी.

इसके बाद 25 जून की शाम को इस मामले में आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया. ये नामित अभियुक्त 40 दानपात्रों के चढ़ावे को तीर्थयात्री सुविधा केंद्र पहुंचाने के बाद गिनती का काम करने वाली टीम के हिस्सा थे.

इसके बाद चंपत राय ने 6 जुलाई को मंदिर ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया.

चंपत राय, अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर होगा या नहीं? सस्पेंस कायम, ट्रस्ट के नियमों से उलझे पेच, बैठक कुछ घंटों में

किसी स्थायी ट्रस्टी को हटाने का कोई सीधा प्रावधान नहीं है. इसका मतलब यह है कि यदि चंपत राय महासचिव का पद छोड़ देते हैं और अनिल मिश्रा अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियों से अलग हो जाते हैं तो भी वे ट्रस्ट के स्थायी सदस्य बने रहेंगे जब तक कि वे खुद ट्रस्ट की सदस्यता से इस्तीफा न दे दें.

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक पर सबकी नजरें टिकी है.अयोध्या:
राम मंदिर चढ़ावा चोरी के विवाद के बीच आज श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बहुप्रतीक्षित बैठक दोपहर तीन बजे होगी. बैठक के एजेंडे में सबसे पहले महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र के त्यागपत्र पर विचार होगा. इसके साथ ही राम मंदिर के दान-पात्रों से प्राप्त राशि की गणना के संबंध में SIT की अंतरिम रिपोर्ट भी ट्रस्ट के समक्ष रखी जाएगी. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार, दोनों से स्वतंत्र संस्था है. ट्रस्ट के सभी निर्णय स्थायी ट्रस्टी ही आंतरिक रूप से लेते हैं. ट्रस्ट RTI Act के दायरे में नहीं आता क्योंकि यह न तो सरकारी वित्तीय सहायता लेता है और न ही किसी सरकारी प्रशासनिक नियंत्रण में है.

चंपत राय, अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर सबकी नजर
बैठक में महामंत्री चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे को लेकर चर्चा होगी. आज इस्तीफा स्वीकार होगा या नहीं, ये स्पष्ट नहीं है. दरअसल ट्रस्ट की बाय-लॉज के मुताबिक किसी सदस्य को हटने के लिए कम से कम एक महीना पहले ट्रस्ट को सूचना देनी होती है. उसके बाद ट्रस्ट उस पर सदस्यों से इस्तीफे का कारण पूछकर उस पर फैसला लेता है.

एक महीने पहले नोटिस, फिर दो तिहाई बहुमत
अगर किसी सदस्य को हटाना हो तो उस सदस्य को एक महीने का नोटिस देकर उन पर वोटिंग करके दो तिहाई बहुमत से हटाया जा सकता है. कहा जा रहा है कि आज चंपत राय और अनिल मिश्रा से इस्तीफे को लेकर बातचीत की जाए उसके बाद बाकी बातें तय होंगी.इस नियम ने आज की बैठक के समीकरण को काफी उलझा दिया है. एक सीट पहले से खाली है और अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास स्वास्थ्य कारणों से अनुपस्थित रह सकते हैं, ऐसे में सक्रिय वोटिंग वाले सदस्यों की संख्या बेहद सीमित रह जाएगी.
आज की बैठक में होने वाली वोटिंग का गणित समझें
चंपत राय और अनिल मिश्रा ने दान चोरी विवाद के बाद नैतिक आधार पर अपने पदों से इस्तीफा दिया है. दोनों इस्तीफे के बावजूद ट्रस्ट की बैठक में शामिल होने और मतदान के पात्र हैं. ट्रस्ट में कुल 15 सदस्य हैं, जिनमें 4 पदेन (Ex-officio) सदस्य बिना मतदान अधिकार के हैं और एक सदस्य का निधन हो चुका है.

ऐसे में प्रभावी रूप से 10 मतदान योग्य सदस्य हैं, जिनमें कम से कम 6 सदस्यों की सहमति किसी बड़े फैसले के लिए आवश्यक होगी. केंद्र और राज्य सरकार के प्रतिनिधि ट्रस्ट के सदस्य जरूर हैं, लेकिन उन्हें मतदान या निर्णय लेने का अधिकार नहीं है.

वर्तमान व्यवस्था में किसी भी ट्रस्टी को हटाने का स्पष्ट प्रावधान नहीं है. ऐसे में इस्तीफा ही एकमात्र व्यावहारिक विकल्प माना जा रहा है. बैठक में ट्रस्ट की वर्तमान संरचना में व्यापक बदलाव की संभावना पर भी चर्चा हो सकती है. जो सदस्य बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो पाएंगे, वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ सकेंगे.

सुप्रीम कोर्ट से फैसले से बना ट्रस्ट, दिल्ली में दफ्तर
ट्रस्ट का गठन नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद फरवरी 2020 में किया गया था. ट्रस्ट की पंजीकृत कार्यालय का पता वरिष्ठ अधिवक्ता के. परासरण का दिल्ली स्थित आवास है. आज ट्रस्ट की अहम बैठक होगी, जिसमें महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के भविष्य पर फैसला लिया जाएगा.

हर तीन महीने पर होती है बैठक
ट्रस्ट की बैठक हर तीन महीने में होती है. पिछली बैठक 21 मार्च को रामनवमी की तैयारियों को लेकर हुई थी. जनवरी 2021 से मंदिर निर्माण कार्य की निगरानी गोपाल नागरकट्टे (राव) कर रहे हैं, जो ट्रस्ट के आमंत्रित सदस्य हैं. ट्रस्ट के पहले अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास, महासचिव चंपत राय और कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी बनाए गए ।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट सदस्य
महंत नृत्य गोपाल दासः ट्रस्ट के अध्यक्ष और राम मंदिर आंदोलन के सबसे वरिष्ठ संतों में से एक हैं. वे इस समय अस्वस्थ हैं और अस्पताल में भर्ती हैं, जिसके कारण उनके आज की बैठक में शामिल होने की संभावना कम है.चंपत रायः वीएचपी के उपाध्यक्ष और ट्रस्ट के महासचिव हैं. अगस्त 2020 में निर्माण कार्य शुरू होने के बाद से वे ही ट्रस्ट के दैनिक कामकाज और प्रशासनिक फैसलों के मुख्य कर्ताधर्ता रहे हैं.अनिल मिश्राः अयोध्या के जाने-माने होम्योपैथिक डॉक्टर और ट्रस्ट के मूल सदस्यों में से एक हैं, जो मंदिर के प्रशासनिक मामलों की देखरेख कर रहे हैं.

गोविंद गिरि महाराजः पुणे के आध्यात्मिक गुरु हैं, जो ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष के रूप में वित्तीय मामलों को संभालते हैं.

स्वामी वासुदेवानंद सरस्वतीः प्रयागराज के ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य हैं.

स्वामी विश्वप्रशन्नतीर्थ जी महाराजः कर्नाटक के उडुपी के पेजावर मठ के 33वें प्रमुख हैं.

युगपुरुष परमानंद गिरि महाराजः हरिद्वार के प्रमुख आध्यात्मिक संत हैं.

महंत दिनेंद्र दासः अयोध्या के निर्मोही अखाड़े के वरिष्ठ संत हैं, जो मूल विवाद में प्रमुख पक्षकार थे.

कृष्ण मोहनः दलित नेता कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद इस पद पर आरएसएस कार्यकर्ता कृष्ण मोहन को शामिल किया गया था.

के पारासरन: सुप्रीम कोर्ट के वकील

पूर्व IAS अधिकारी नृपेंद्र मिश्रा निर्माण समिति के अध्यक्ष हैं. ट्रस्ट में विभिन्न धार्मिक संतों, अयोध्या राजपरिवार के प्रतिनिधि, चिकित्सक और समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है.दिवंगत कामेश्वर चौपाल के स्थान पर कृष्ण मोहन को ट्रस्ट में शामिल किया गया, जबकि विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद उनकी सीट अभी रिक्त है. आमंत्रित सदस्य अपनी राय दे सकते हैं, लेकिन उन्हें मतदान या प्रशासनिक अधिकार प्राप्त नहीं हैं.
वर्तमान में केवल चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल नागरकट्टे के पास आरती पास और वीआईपी पास जारी करने सहित प्रशासनिक अधिकार रहे हैं. ट्रस्ट में किसी नए स्थायी सदस्य को शामिल करने के लिए मौजूदा स्थायी सदस्यों के बहुमत से प्रस्ताव पारित होना अनिवार्य है.
ट्रस्ट में किसे होता है वोटिंग का राइट
ट्रस्ट के नियमों के मुताबिक,किसी भी फैसले पर मतदान का अधिकार सिर्फ स्थायी ट्रस्टियों को ही है.पदेन सदस्य केंद्र और राज्य सरकार के प्रशासनिक प्रतिनिधि शामिल होते हैं.उनके पास वोट देने का अधिकार नहीं है.यह व्यवस्था ट्रस्ट का पूरा नियंत्रण पूरी तरह से इसके स्थायी सदस्यों के हाथों में सौंपती है.किसी नए ट्रस्टी को शामिल करना हो या ट्रस्ट के कामकाज में कोई बड़ा बदलाव, इसके लिए स्थायी ट्रस्टियों के बहुमत की मंजूरी अनिवार्य है.

स्थायी ट्रस्टी को हटाने का कोई सीधा प्रावधान नहीं
ट्रस्ट के सूत्रों के अनुसार, इसके नियमों में किसी स्थायी ट्रस्टी को हटाने का कोई सीधा प्रावधान नहीं है. इसका मतलब यह है कि यदि चंपत राय महासचिव का पद छोड़ देते हैं और अनिल मिश्रा अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियों से अलग हो जाते हैं तो भी वे ट्रस्ट के स्थायी सदस्य बने रहेंगे जब तक कि वे खुद ट्रस्ट की सदस्यता से इस्तीफा न दे दें.

विशेष आमंत्रित सदस्य भी होते हैं शामिल
बैठक में कुछ विशेष आमंत्रित सदस्य भी शामिल होते हैं जो चर्चाओं में तो भाग ले सकते हैं लेकिन उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं होता. इनमें आरएसएस और वीएचपी के वरिष्ठ पदाधिकारी सुरेश भैयाजी जोशी और दिनेश चंद्र शामिल हैं. इनके अलावा कर्नाटक से वीएचपी के वरिष्ठ नेता गोपाल नागरकट्टे भी एक प्रमुख आमंत्रित सदस्य हैं, जो जनवरी 2021 से मंदिर के निर्माण और सिविल कार्यों की निगरानी कर रहे हैं

आज की बैठक के प्रमुख एजेंडे
महासचिव चंपत राय एवं ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के त्यागपत्र पर विचार
दान-पात्रों से प्राप्त राशि की गणना पर SIT की अंतरिम रिपोर्ट की जानकारी
मंदिर प्रबंधन की आगामी व्यवस्थाओं पर विचार
रिक्त पदों पर चयन को नामों पर विचार
अध्यक्ष की अनुमति से अन्य आवश्यक विषयों पर निर्णय

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