भक्ति का अंतिम लक्ष्य भगवान से गहरा संबंध स्थापित, प्रेमानंद अनुभव: आचार्य सौरभ सागर महामुनिराज

देहरादून 14 जुलाई 2025। परम पूज्य संस्कार प्रणेता ज्ञानयोगी जीवन आशा हॉस्पिटल मुरादनगर के प्रेरणा  स्रोत  उत्तराखंड के राजकीय अतिथि आचार्य श्री 108 सौरभ सागर महामुनिराज के मंगल सानिध्य में श्री दिगंबर जैन पंचायती मंदिर जैन भवन 60 गांधी रोड पर  प्रातः 6.15 बजे से जिनेन्द्र भगवान् का अभिषेक कर शांतिधारा की गयी। विधानाचार्य संदीप जैन सजल इंदौर,रामकुमार एंड पार्टी संगीतकार भोपाल का संगीतमय कल्याण मंदिर विधान चल रहा है । विधान में भक्तों ने बड़े भक्ति भाव के साथ 23वें तीर्थंकर चिंतामणि भगवान पार्श्वनाथ की आराधना की। आज के विधान के पुण्यार्जक सौरभ सागर सेवा समिति रही। सभी पदाधिकारी ने इसमें बढ़ चढ़ कर भाग लिया।

पूज्य आचार्य श्री ने प्रवचन में कहा कि धार्मिक विधान का भक्तों, “भक्ति” का अर्थ है भगवान के प्रति प्रेम, समर्पण और श्रद्धा की भावना। यह एक आध्यात्मिक मार्ग है जो भक्तों को भगवान के करीब लाता है। भक्ति के कई रूप हैं, जैसे कि श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य और आत्मनिवेदन भक्ति का अर्थ है।
श्रवण भगवान की कथाओं और महिमा को सुनना, भगवान के गुणों का गुणगान करना भगवान को हमेशा याद रखना, भगवान के चरणों की सेवा करना  स्वयं को भगवान को समर्पित करना,  भक्ति एक व्यक्तिगत अनुभव है, और प्रत्येक भक्त इसे अपने तरीके से व्यक्त करता है। कुछ लोग मंदिरों में जाते हैं, कुछ लोग भजन गाते हैं, कुछ लोग ध्यान करते हैं, और कुछ लोग दूसरों की सेवा करते हैं। भक्ति का अंतिम लक्ष्य भगवान के साथ एक गहरा संबंध स्थापित करना और उनके प्रेम और आनंद का अनुभव करना है।

इसके पूर्व परम पूज्य संस्कार प्रणेता ज्ञानयोगी जीवन आशा हॉस्पिटल प्रेरणा स्रोत उत्तराखंड के राजकीय अतिथि आचार्य श्री 108 सौरभ सागर जी महामुनिराज के मंगल सानिध्य में 12 जुलाई प्रातः 6.15 बजे से जिनेन्द्र भगवान् का अभिषेक कर शांतिधारा की गयी। इसके पश्चात संगीतमय कल्याण मंदिर विधान का आयोजन किया गया। विधान में उपस्थित भक्तों ने बड़े भक्ति भाव से 23वे तीर्थंकर चिंतामणि भगवान पार्श्वनाथ की आराधना की। आज के विधान के पुण्यार्जक सौरभ सागर युवा समिति रही।
भगवान पार्श्वनाथ की भक्ति आराधना 30 जुलाई तक निरंतर पूज्य आचार्य श्री के मंगल सानिध्य में इसी प्रकार से होगी। 31 जुलाई भगवान पार्श्वनाथ निर्वांण महोत्सव श्री सम्मेद शिखरजी की कृत्रिम रचना कर मनाया जाएगा।
पूज्य आचार्य श्री ने प्रवचन में कहा कि युवा वर्ग देश का भविष्य है परन्तु आधुनिकता के इस युग में युवा पीढ़ी भटक रही है। हमें चाहिए कि हम युवा पीढ़ी को धर्म की और प्रेरित करे जिससे समाज एव देश का विकास हों।

 

 

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