मोदी ने मेलोनी को क्यों गिफ्ट की “मेलोडी”…? व्यापारी संगठन CTI ने खोला भेद
PM मोदी ने मेलोनी को इसलिए गिफ्ट की मेलोडी टॉफी…? व्यापारी संगठन ने बताई ये बड़ी वजह
Melody Toffee: CTI महासचिव रमेश आहूजा और उपाध्यक्ष राहुल अदलखा के अनुसार मेलोडी टॉफ़ी के पीछे एक साधारण से परिवार के भारतीय व्यापारी का संघर्ष छिपा हुआ है, इसीलिए भारत के लोगों को स्वदेशी उत्पादों को अपनाने के लिए प्रेरित करने के लिए ही प्रधानमंत्री मोदी ने मेलोडी का उपहार मेलोनी को दिया होगा.
प्रधानमंत्री मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी को स्वदेशी उत्पाद मेलोडी टॉफ़ी का उपहार दिया था
पारले कंपनी की शुरुआत 1939 में 12 कर्मचारियों और साठ हजार रुपए से मुंबई के विले पारले में हुई थी
1983 में पारले ने भारतीय बाजार में मेलोडी नामक टॉफ़ी को लॉन्च कर चॉकलेट का स्वाद बाजार में उतारा
मुंबई 21 मई 2026। मेलॉडी खाओ खुद जान जाओ…ये उस टॉफ़ी की टैग लाइन है जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी को दिया था।
मात्र 12 कर्मचारियों और 60 हजार की लागत से विले पारले से शुरु हुई कंपनी देखते ही देखते 16 हजार करोड़ रुपए की कंपनी बन गई. पारले कंपनी 1939 में शुरु हुई थी लेकिन 1983 में मेलोडी नाम की मशहूर टॉफ़ी को कंपनी ने भारतीय बाज़ार में उतारा. ताकतवर मार्केटिंग और विदेशी मंहगे चॉकलेट के बीच इसका स्वाद और सस्ता होने के चलते भारतीय बाज़ार में ये छा गई. ये जानकारी CTI के चेयरमैन ब्रजेश गोयल ने दी.
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री में PM के स्वदेशी उपहार तारीफ
अब प्रधानमंत्री के इस गिफ़्ट की देश-विदेश में चर्चा है. अब व्यापारी संगठन CTI यानि चैंबर आफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री में प्रधानमंत्री के स्वदेशी उपहार की जमकर तारीफ़ की है. CTI के चेयरमैन ब्रजेश गोयल ने कहा कि स्वदेशी उत्पादों को अपनाने के लिए प्रधानमंत्री का ये मास्टर स्ट्रोक बताया.
12 कर्मचारियों और 60000 रुपए से शुरू हुआ बिजनेस
ब्रजेश गोयल ने बताया कि मुंबई के विले पारले इलाके के चौहान परिवार ने 12 कर्मचारियों और 60000 रुपए की मशीनरी से इस कंपनी की शुरुआत की थी. कंपनी ने 1939 में पारले बिस्किट बनाना शुरू किया जो बाद में मशहूर पारले जी बिस्किट के नाम से मशहूर हो गया.इसके बाद पारले ने 1983 में मेलोडी को बाजार में उतारा था.
मेलोडी टॉफ़ी के पीछे साधारण परिवार का संघर्ष
CTI महासचिव रमेश आहूजा और उपाध्यक्ष राहुल अदलखा के अनुसार मेलोडी टॉफ़ी के पीछे एक साधारण से परिवार के भारतीय व्यापारी का संघर्ष छिपा हुआ है, इसीलिए भारत के लोगों को स्वदेशी उत्पादों को अपनाने को प्रेरित करने को ही प्रधानमंत्री मोदी ने मेलोडी का उपहार मेलोनी को दिया होगा.
प्रधानमंत्री मोदी ने मेलोनी को इसलिए गिफ्ट की मेलोडी
जिस तरह से डॉलर के मुकाबले रूपया गिरता जा रहा है, इसलिए प्रधानमंत्री मोदी चाहते हैं कि भारत में ज्यादा से ज्यादा लोग विदेशी उत्पादों का उपयोग बंद करके स्वदेशी उत्पादों का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करें. जिससे कि ना केवल देश का पैसा देश में ही रहेगा बल्कि भारत में कारोबार और रोजगार बढ़कर देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी.
PM Modi’s special gift: Assamese muga silk stole presented to Italian PM Meloni
PM Modi Gifts: केसर आम, मधुबनी पेंटिंग और मूगा सिल्क स्टोल, पांच देशों की यात्रा में PM मोदी ने दिए खास उपहार
प्रधानमंत्री मोदी ने पांच देशों की यात्रा के दौरान विभिन्न नेताओं को भारतीय संस्कृति से जुड़े खास उपहार भेंट किए। जॉर्जिया मेलोनी को मूगा सिल्क और शिरुई लिली स्टोल, सर्जियो मैटारेला को मार्बल इनले वर्क बॉक्स, मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान को केसर आम, विलेम-अलेक्जेंडर को ब्लू पॉटरी और जोनास गहर स्टोरे को ऑर्किड पेंटिंग भेंट की गई। आइए विस्तार से जानते हैं।
पीएम मोदी ने दिया उपहार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की अपनी पांच देशों की यात्रा पूरी कर ली। इस दौरे के दौरान भारत की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक कला और कृषि उत्पादों को वैश्विक मंच पर विशेष पहचान मिली। प्रधानमंत्री मोदी ने विभिन्न देशों के नेताओं को भारत की विविध परंपराओं और हस्तशिल्प से जुड़े खास उपहार भेंट किए।
प्रधानमंत्री मोदी ने मेलोनी को क्या उपहार दिया?
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को प्रधानमंत्री मोदी ने असम की प्रसिद्ध मूगा सिल्क स्टोल भेंट की। गोल्डन सिल्क के नाम से मशहूर मूगा सिल्क पूर्वोत्तर भारत की ब्रह्मपुत्र घाटी की एक दुर्लभ और प्रतिष्ठित पारंपरिक विरासत मानी जाती है।
इसका प्राकृतिक सुनहरा रंग और सादगीपूर्ण आकर्षण इसे बेहद खास बनाता है। यह सिल्क बिना किसी कृत्रिम रंग के तैयार की जाती है, जो इसे पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ परंपरा का प्रतीक बनाती है। मूगा सिल्क दुनिया के सबसे मजबूत प्राकृतिक रेशों में गिनी जाती है और इसकी चमक समय के साथ और निखरती जाती है। इसकी नमी सोखने और UV-प्रतिरोधी क्षमता भी इसे बेहद उपयोगी बनाती है। इटली की लग्जरी टेक्सटाइल परंपरा और असम की गोल्डन सिल्क के बीच एक स्वाभाविक सांस्कृतिक जुड़ाव भी देखा जाता है।
शिरुई लिली सिल्क भी की भेंट
प्रधानमंत्री मोदी ने मेलोनी को शिरुई लिली सिल्क स्टोल भी भेंट की। यह स्टोल मणिपुर के शिरुई काशोंग पर्वत की धुंध भरी पहाड़ियों से प्रेरित है। इसका डिजाइन दुर्लभ शिरुई लिली फूल पर आधारित है, जो हल्के गुलाबी-सफेद रंग की घंटी के आकार वाली एक विशेष प्रजाति है और दुनिया में केवल मणिपुर में ही पाई जाती है।
तंगखुल नागा समुदाय के लिए यह फूल पवित्रता, सांस्कृतिक पहचान और गौरव का प्रतीक माना जाता है। यह स्टोल हिमालयी हस्तकला की सुंदरता के साथ-साथ आदिवासी परंपरा और लोककथाओं की भावना को भी दर्शाता है। इटली में भी लिली फूल को पवित्रता, सौंदर्य और कलात्मक परिष्कार का प्रतीक माना जाता है तथा पुनर्जागरण कालीन कला में इसकी विशेष मौजूदगी रही है। इस साझा सांस्कृतिक प्रतीकवाद ने भारत और इटली के बीच एक अनोखा सांस्कृतिक संबंध स्थापित किया।
मार्बल इनले वर्क बॉक्स
इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मैटारेला को प्रधानमंत्री मोदी ने आगरा की प्रसिद्ध पच्चीकारी कला से बना मार्बल इनले वर्क बॉक्स और पंडित भीमसेन जोशी व एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी की सीडी भेंट की। मार्बल इनले बॉक्स भारत की हस्तशिल्प कला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है।
पच्चीकारी या पिएत्रा ड्यूरा कला की शुरुआत इटली के फ्लोरेंस शहर से मानी जाती है, जो बाद में भारत में शाही संरक्षण के तहत विकसित हुई। इस तरह यह उपहार भारत और इटली के बीच ऐतिहासिक कलात्मक संबंधों का प्रतीक बनकर सामने आया।
यूएई के राष्ट्रपति को प्रधानमंत्री मोदी ने केसर आम भेंट किया
संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान को प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के GI टैग वाले केसर आम भेंट किए।
क्वीन ऑफ मैंगोज कहलाने वाला यह आम गुजरात के जूनागढ़ क्षेत्र से जुड़ा है और अपने केसरिया रंग, बिना रेशों वाले गूदे और खास सुगंध के लिए प्रसिद्ध है। गुजरात की पारंपरिक आमरस संस्कृति में इसका विशेष महत्व माना जाता है।
यूएई के क्राउन प्रिंस को प्रधानमंत्री ने दी कटार
यूएई के क्राउन प्रिंस को प्रधानमंत्री मोदी ने राजस्थान की पारंपरिक कोफ्तगिरी कला से सजी औपचारिक कटार भेंट की। यह विशेष कटार भारत की युद्धक और कलात्मक विरासत का प्रतीक मानी जाती है।
उदयपुर के सिकलीगर और पारंपरिक धातु शिल्पकार इस कला में स्टील पर सोने और चांदी की महीन तारों से फूलों और ज्यामितीय आकृतियों की नक्काशी करते हैं। राजपूत काल में यह कला शाही प्रतिष्ठा और सम्मान का प्रतीक मानी जाती थी। हस्तनिर्मित भारतीय कटार और अमीराती खंजर परंपरा के बीच समानता भी इस उपहार को खास बनाती है।
यूएन के महानिदेशक को प्रधानमंत्री का खास उपहार
प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र के खाद्य व कृषि संगठन (FAO) के महानिदेशक क्यू डोंगयु को भारत के प्रसिद्ध चावल की विभिन्न किस्मों के नमूने भी भेंट किए। इनमें केरल का पलक्कड़ रेड राइस, पश्चिम बंगाल का गोविंदभोग चावल, इंडो-गंगेटिक क्षेत्र का बासमती चावल, असम का जोहा राइस और उत्तर प्रदेश का कालानमक चावल शामिल रहे। इन सभी किस्मों की अपनी विशेष सुगंध, स्वाद और पोषण संबंधी खूबियां हैं। कालानमक चावल को “बुद्धा राइस” भी कहा जाता है, जबकि बासमती को “क्वीन ऑफ फ्रेगरेंस” के नाम से जाना जाता है।
प्रधानमंत्री ने हेल्दी मिलेट बार्स किया भेंट
इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने FAO महानिदेशक को हेल्दी मिलेट बार्स भी भेंट किए। महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर उगाए जाने वाले ज्वार और बाजरा जैसे मोटे अनाज पोषण, फाइबर और प्रोटीन से भरपूर माने जाते हैं। ये जलवायु के अनुकूल फसलें हैं और आधुनिक स्वास्थ्यवर्धक खाद्य उत्पादों के रूप में भी तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। मिलेट बार्स को भारत की पारंपरिक कृषि और आधुनिक स्वास्थ्य संस्कृति के संगम के रूप में देखा जा रहा है।
नीदरलैंड के राजा को प्रधानमंत्री ने क्या किया भेंट?
नीदरलैंड के राजा विलेम-अलेक्जेंडर को प्रधानमंत्री मोदी ने राजस्थान की प्रसिद्ध ब्लू पॉटरी भेंट की। जयपुर की GI-टैग्ड ब्लू पॉटरी अपनी चमकदार कोबाल्ट ब्लू, सफेद और पीले रंगों की डिजाइन के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। इसे मिट्टी के बजाय क्वार्ट्ज पाउडर, कांच के चूरे और फुलर्स अर्थ के विशेष मिश्रण से तैयार किया जाता है, जिससे इसमें कांच जैसी चमक दिखाई देती है। इसकी खास फायरिंग तकनीक इसे अनोखा पारदर्शी रूप और गहरा नीला रंग देती है। इस कला में फूलों और पक्षियों की बारीक आकृतियां बनाई जाती हैं।
नीदरलैंड की रानी को प्रधानमंत्री ने दिया खास उपहार
वहीं नीदरलैंड की महारानी मैक्सिमा को पीएम मोदी ने मीनाकारी और कुंदन ईयररिंग्स उपहार में दिए। राजस्थान की शाही परंपरा से जुड़ी यह कला भारतीय आभूषण शिल्प की उत्कृष्ट मिसाल मानी जाती है। मीनाकारी में धातु पर रंगीन एनामेल का बारीक काम किया जाता है, जबकि कुंदन कला में बिना कटे रत्नों को सोने की परत में जड़ा जाता है। पारंपरिक शिल्प और आधुनिक सुंदरता का यह संगम भारतीय कारीगरी की खास पहचान माना जाता है।
नीदरलैंड के प्रधानमंत्री को प्रधानमंत्री ने दिया मधुबनी पेंटिंग
प्रधानमंत्री मोदी ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन को मछली की आकृति वाली मधुबनी पेंटिंग भेंट की। मिथिला क्षेत्र की GI-टैग्ड मधुबनी कला अपनी ज्यामितीय आकृतियों और चमकीले रंगों के लिए प्रसिद्ध है। पारंपरिक रूप से महिलाओं द्वारा बनाई जाने वाली यह कला त्योहारों, विवाह और धार्मिक अनुष्ठानों में इस्तेमाल होती रही है। भारतीय लोककथाओं और पौराणिक कथाओं से प्रेरित इस कला में फूल, पेड़, पक्षी और मछली जैसे प्रतीकों का विशेष महत्व होता है।
नॉर्वे के प्रधानमंत्री को मोदी ने क्या तोहफा दिया?
नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे को प्रधानमंत्री मोदी ने प्रेस्ड ऑर्किड पेंटिंग और ऑर्किड पेपरवेट्स उपहार में दिए। सिक्किम की धुंध भरी घाटियों से लाए गए असली ऑर्किड और फर्न से तैयार ये कलाकृतियां पूर्वी हिमालय की जैव विविधता को दर्शाती हैं।
स्थानीय कारीगरों ने इन्हें बेहद सावधानी से संरक्षित किया है। भारत के पहले ऑर्गेनिक राज्य सिक्किम से जुड़ी यह कला पर्यावरण संरक्षण, पारंपरिक हस्तशिल्प और सतत विकास की भावना को भी प्रदर्शित करती है। प्रकृति और स्थिरता के प्रति नॉर्वे की गहरी रुचि के साथ यह उपहार खास सांस्कृतिक जुड़ाव बनाता है।
डेनमार्क के प्रधानमंत्री को मोदी ने दिया खास उपहार
प्रधानमंत्री मोदी ने डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन को बीदरी सिल्वर वर्क वास उपहार में भेंट किया। दक्कन क्षेत्र की प्रसिद्ध बीदरी कला अपनी काले धातु पर चांदी की बारीक नक्काशी के लिए जानी जाती है।
स्वीडन के प्रधानमंत्री को मोदी का तोहफा
मोदी ने स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन को शांतिनिकेतन मैसेंजर बैग भेंट किया, जो गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की कलात्मक सोच और बंगाल की हस्तशिल्प परंपरा को दर्शाता है। इसके साथ ही पीएम मोदी ने टैगोर की रचनाओं का संग्रह, मणिपुर की लोकटक चाय और लद्दाख की शुद्ध ऊनी स्टोल भी उपहार में दी।

