कॉकरोच आंदोलन तत्काल समाप्त,अब विपक्ष क्यों आलोचना कर रहा CJP की?
जितेंद्र सिंह के टोकने पर CJP ने कहा- ‘तुरंत प्रभाव से आंदोलन खत्म करते हैं’
दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना अब खत्म हो गया है. जंतर मंतर अब लगभग खाली हो गया है. इस बीच सरकार और सीजेपी की प्रेस कांफ्रेंस का एक वीडियो वायरल है.
जितेंद्र सिंह के टोकने पर CJP ने कहा- ‘तुरंत प्रभाव से आंदोलन खत्म करते हैं’जितेंद्र सिंह की बात को ध्यान से सुनते सौरव दास.
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपना जंतर-मंतर पर धरना खत्म कर दिया. केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ प्रेस कांफ्रेंस में सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने इसकी घोषणा की. मगर इस घोषणा में साफ दिखा कि सरकार और सीजेपी के बीच विश्वास बढ़ा है. एक-दूसरे की बातों का सम्मान बढ़ा है. साथ ही अनुभव और यूथ का मिलन हुआ है.
क्यों टोका जितेंद्र सिंह ने
सौरव दास जब प्रेस से मुखातिब होकर इस बात की घोषणा कर रहे थे कि कॉकरोच जनता पार्टी घोषणा करती है कि हम धरने को गुड फेथ में वापस लेते हैं और समझते हैं कि जिन बातों पर सरकार के साथ हमारी सहमति बनी है उस पर तय समय में कार्रवाही होगी. इस पर जितेंद्र सिंह ने कहा, ‘सौरव, विथ इमिडिएट इफेक्ट बोल दो.’ इस पर सौरव ने सवालियों नजरों से जितेंद्र सिंह को देखा और फिर कहा-‘जी’. मगर तब तक माइक आशुतोष रांका के पास पहुंच गई थी. आशुतोष रांका ने इसके बाद कहा कि हमारी जो तमाम मांगे जो थीं, वो मान ली गई हैं तो हम इमिडिएट इफेक्ट से प्रोटेस्टर से रिक्वेस्ट करते हैं कि आप विद ड्रा करें और पीसफुली अपने घर जाएं.’ इस दौरान इमिडिएट इफेक्ट शब्द के आने तक जितेंद्र सिंह लगातार पर नजर बनाए हुए थे. जैसे ही ये शब्द उन्होंने सुने वो निश्चिंत हो गए.
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ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. कई लोग अपनी समझ के हिसाब से इस पर टिप्पणी कर रहे हैं. सोनम वांगचुक के बाद अब सीजेपी को भी बीजेपी का ही आदमी बताने लगे हैं. मगर राजनीति चश्मे से देखने के बजाए अगर इसे एक गंभीर मुद्दे के लिए किए गए आंदोलन के रूप में देखें तो होना यही चाहिए कि दोनों पक्षों के बीच जिस बात पर सहमति बन जाए, उसे पूरा किया जाए. अगर एक पक्ष युवा होने के कारण कोई तथ्य रखने से छूट भी जाए तो अनुभवी पक्ष उसे समय रहते करेक्ट करे. इस आंदोलन पर अगर नजर डालें तो जितना तीखा हमला सरकार पर किया गया, जंतर-मंतर पर जितने कड़वे नारे लगे, उसके बाद भी सरकार ने बातचीत का रास्ता चुन युवाओं के गुस्से को शांत कर दिया तो ये उसकी सफलता ही कही जाएगी. साथ ही जंतर-मंतर आए नौजवान भी सिर्फ अपनी मांगों तक सीमित थे, सरकार ने जैसे ही बातचीत का रास्ता खोला उन्होंने भी वैसे ही बात की जैसे घर के बच्चे अपने बड़ों से नाराजगी के बाद बात करते हैं.
