IEA का खुला 40 करोड़ बैरल ‘इमरजेंसी’ तेल भंडार,फिर भी क्रूड ऑयल $100 पार,आखिर क्यों नहीं थम रही कच्चे तेल में लगी आग
IEA का खुल 40 करोड़ बैरल ‘इमरजेंसी’ तेल भंडार, फिर भी क्रूड ऑयल $100 पार, आखिर क्यों नहीं थम रही कच्चे तेल में लगी आग
Crude Oil Price Hike: कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में एक बार फिर बड़ा उबाल आया है. ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध के 13वें दिन हालात और भी बिगड़ गए हैं, जिसका सीधा असर तेल के अंतरराष्ट्रीय बाजार पर दिख रहा है.
बाजार में तेल की सप्लाई बढ़ाने की खबरों के बाद भी दाम इसलिए बढ़ रहे हैं क्योंकि ईरान युद्ध खतरनाक मोड़ पर है.
ईरान और इजरायल-अमेरिका में युद्ध से कच्चे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है.IEA ने आपूर्ति वृद्धि को अपने इमरजेंसी स्टॉक से 40 करोड़ बैरल तेल खोला है.स्ट्रैट ऑफ होर्मुज और बसरा पोर्ट के पास ईरानी हमलों से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन को खतरा है.
नई दिल्ली: 12 मार्च 2026। दुनियाभर में कच्चे तेल (Crude Oil Price) की कीमतों को लेकर घमासान मचा है. ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच युद्ध ने बाजार में खलबली मचा दी है. तेल की कीमतें घटा को अमेरिका और अन्य देशों ने अपने इमरजेंसी स्टॉक से लाखों बैरल तेल निकालना तय किया है। लेकिन इसके बावजूद कच्चे तेल के दाम थमने का नाम नहीं ले रहे हैं.
ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Price) सुबह $100 प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गया. कुछ ही दिन पहले यह $120 भी पहुंच गया था.सप्लाई रुकने के डर से तेल कीमतों में 9% से ज्यादा की तेजी देखी गई है. वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क (WTI) भी उछलकर $95 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है
इमरजेंसी में रखा तेल भी नहीं रोक पा रहा ‘आग’
तेल की कीमतों को काबू में करने के लिए इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाया है. एजेंसी ने अपने सदस्य देशों के इमरजेंसी स्टॉक से 400 मिलियन (40 करोड़) बैरल तेल बाजार में उतारने का फैसला किया है. इसमें से अकेले अमेरिका 172 मिलियन बैरल तेल अगले हफ्ते से जारी करना शुरू करेगा. जापान और जर्मनी भी अपना स्टॉक खोल रहे हैं.
लेकिन जानकारों का कहना है कि यह कोशिश धधकती आग में बगीचे वाले पाइप से पानी डालने जैसी है, क्योंकि युद्ध का खतरा इससे कहीं बड़ा है.
क्यों फिर से महंगा हुआ कच्चा तेल?
बाजार में तेल की सप्लाई बढ़ाने की खबरों के बाद भी दाम इसलिए बढ़ रहे हैं क्योंकि ईरान के साथ चल रहा युद्ध खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है.तेल की कीमतों में इस अचानक तेजी की सबसे बड़ी वजह स्ट्रैट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) और इराक के बसरा पोर्ट के पास कमर्शियल जहाजों पर हुए ईरानी हमले हैं. दुबई के तट के पास भी एक कंटेनर शिप पर हमला हुआ है, जिससे ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन खतरे में पड़ गई है.’होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) लगभग बंद हो गया है. दुनिया का 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है.
ईरान ने चेतावनी दी है कि वह अमेरिका और उसके सहयोगियों के आर्थिक केंद्रों और बैंकों को निशाना बनाएगा, जिससे दुनिया की अर्थव्यवस्था तबाह हो सकती है.खाड़ी देशों (Gulf countries) से होने वाली तेल सप्लाई पर ईरान के बढ़ते दबाव ने दुनिया भर के बाजारों में डर का माहौल बना दिया है, जिससे कीमतें काबू से बाहर होती दिख रही हैं.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स ?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि कच्चे तेल के लिए अब $90 से $100 प्रति बैरल का रेट एक न्यू नॉर्मल (New Normal) बन गया है. भले ही अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप कह रहे हों कि उन्होंने युद्ध जीत लिया है और ईरान अब खत्म होने की कगार पर है, लेकिन जमीन पर हालात अलग हैं. इजरायली सेना का कहना है कि उनके पास अभी भी हमलों के लिए बहुत सारे टारगेट बाकी हैं, यानी यह संकट अभी लंबा खिंच सकता है.
IEA ‘इमरजेंसी रिलीज’: खोला तेल का भंडार, 40 करोड़ बैरल तेल जारी, तेल-गैस कमी होगी दूर!
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने ऊर्जा संकट से निपटने को ऐतिहासिक बड़ा कदम उठा अपने आपातकालीन भंडार से 40 करोड़ बैरल तेल बाजार में लाना तय किया है. यह एजेंसी के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी आपातकालीन तेल रिलीज है । उद्देश्य वैश्विक अर्थव्यवस्था को तेल की कमी से बचाना है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में पेरिस से सुखद महत्वपूर्ण खबर है. हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से पूरी दुनिया में पेट्रोल, डीजल और गैस की कमी का डर बना था. यही डर खत्म करने को अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने अपने भंडार से 40 करोड़ बैरल कच्चा तेल बाजार में लाने का फैसला किया है. ऐतिहासिक फैसले का असर विस्तार से समझिये.
क्यों लेना पड़ा फैसला?
IEA के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल के अनुसार, पश्चिम एशिया संघर्ष ने ऊर्जा बाजार की कमर तोड़ दी।
हॉर्मुज का महत्व: हॉर्मुज जलडमरूमध्य से रोज 1.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल और 50 लाख बैरल रिफाइंड प्रोडक्ट्स गुजरते हैं. यह दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का 25% है.
सप्लाई ठप: युद्ध से यह रास्ता जोखिमपूर्ण हो गया, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति 20% गिरी.
रिफाइनरी प्रभावित: तेल की कमी से रिफाइनरियो बाधित हैैं, जिससे विशेष रूप से जेट फ्यूल और डीजल की भारी कमी हो गई.
प्रमुख भागीदारों से चर्चा: फैसले से पहले सऊदी अरब, ब्राजील जैसे उत्पादकों और भारत व सिंगापुर जैसे बड़े आयातक देशों से गहन चर्चा हुई.
IEA ने चेताया कि तेल से ज्यादा गंभीर स्थिति गैस मार्केट की है:
LNG सप्लाई रुकी: कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से आने वाले लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) के जहाजों का कोई वैकल्पिक रास्ता नहीं है.
एशिया पर मार: भारत, चीन और जापान जैसे एशियाई देशों पर गैस की कमी का सबसे बुरा असर पड़ रहा है क्योंकि यहां गैस की मांग बहुत अधिक है.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
फातिह बिरोल ने साफ कहा है कि 40 करोड़ बैरल तेल तात्कालिक राहत तो देगा, लेकिन बाजार में स्थिरता तभी आएगी जब हॉर्मुज जलडमरूमध्य फिर से पूरी तरह खुले. यह रिलीज केवल ‘मरहम’ है, ‘इलाज’ तो युद्ध विराम ही है.
IEA का यह कदम उन निवेशकों और उपभोक्ताओं को बड़ी राहत है जो तेल की कीमतों के $150 पार जाने की आशंका से डरे हुए थे. अपनी ऊर्जा जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातकर्ता भारत जैसे देशों को यह खबर महंगाई पर लगाम लगायेगी. इससे वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में और नरमी आयेगी.
अक्सर उठने वाले सवाल (FAQs)
1- IEA ने कितना तेल बाजार में छोड़ने का फैसला किया?
IEA ने अपने इतिहास की सबसे बड़ी रिलीज में 40 करोड़ (400 मिलियन) बैरल तेल जारी किया है.
2- हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) क्यों महत्वपूर्ण है?
यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है जहां से वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का 25% हिस्सा गुजरता है.
3- फैसले का भारत पर क्या असर होगा?
भारत बड़ा आयातक है, इसलिए तेल उपलब्धता बढ़ने से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता आएगी और महंगाई घटेगी.
4- क्या गैस आपूर्ति यथावत होगी?
IEA के अनुसार तेल की भरपाई तो संभव है, लेकिन कतर से LNG सप्लाई के विकल्प सीमित हैं, जो एशिया के लिए चिंताजनक है.
5- IEA मुख्यालय कहां है?
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) मुख्यालय पेरिस, फ्रांस में
LPG Shortage: रसोई गैस सिलेंडर की टेंशन दूर! एक्शन मोड में आई सरकार ने तेल-गैस के 5 नए रास्ते खोजे, बड़ी डील की तैयारी
India LPG Gas Cylinder Shortage: भारत ने ईरान-इजरायल युद्ध से होर्मुज के रास्ते कच्चे तेल और गैस की आवाजाही रुकने के बाद नए वैकल्पिक मार्गों की तलाश शुरू कर दी है. भारतीय कंपनियां दूसरे रूट से तेल-गैस की खरीद कर रही है.
LPG Shortage India: भारत ने होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते खाड़ी देशों से आ रहे तेल-गैस की आपूर्ति में आने के बाद वैकल्पिक रास्ते तलाशने शुरू कर दिए हैं. भारत का फोकस ऑस्ट्रेलिया, रूस, कनाडा और अल्जीरिया जैसे देशों से गैस मंगाने की तैयारी कर रहा है. होर्मुज के रास्ते भारत सऊदी अरब, कतर, यूएई जैसे देशों से बड़े पैमाने पर तेल और गैस खरीदता था. लेकिन ईरान-इजरायल युद्ध के कारण होर्मुज से तेल-गैस के जहाजों की आवाजाही नहीं हो पा रही है. इसलिए सरकार एक्शन मोड में आ गई है.
रूस से तेल-गैस की बड़ी खेप
खबरों के मुताबिक, मिडिल ईस्ट संकट के बीच रूस भारत के लिए तेल का सबसे बड़ा वैकल्पिक स्रोत बना है. मार्च के पहले 11 दिनों में रूस से तेल का आयात 50 फीसदी बढ़कर 15 लाख बैरल प्रतिदिन (bpd) तक पहुंच गया है, जो फरवरी में करीब 1 मिलियन था. हालांकि रूस अब तेल खरीद पर छूट नहीं दे रहा है. अमेरिका ने भारत को समुद्र में फंसे हुए रूसी तेल खरीद के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट दी है. रिपोर्ट के अनुसार, इंडियन ऑयल (IOC) और रिलायंस जैसी कंपनियों ने करीब 3 करोड़ बैरल रूसी तेल के सौदे किए हैं.
88 फीसदी जरूरत का कच्चे तेल की खरीद करता है भारत
25 से 27 लाख बैरल तेल खाड़ी देशों से होर्मुज के रास्ते
55 फीसदी रसोई गैस का आयात विदेश से
30 फीसदी एलएनजी गैस की खरीद भी दूसरे देशों से
अमेरिका से तेल-गैस खरीद
भारत ने अपनी आपूर्ति में विविधता लाने के लिए अमेरिका से भी तेल और गैस की खरीद बढ़ाई है. मिडिल ईस्ट से आपूर्ति रुकने के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने अमेरिकी कच्चे तेल की ओर रुख किया है. गेल (GAIL) ने अमेरिका के साथ गैस (LNG) के बड़े सौदे किए हैं, ताकि घरेलू कमी को पूरा किया जा सके.
लैटिन अमेरिका और अफ्रीका
भारत उन रास्तों से तेल मंगवा रहा है जो होर्मुज के रास्ते पर निर्भर नहीं हैं.भारत ने पहली बार गुयाना से सीधे कच्चे तेल की खरीद शुरू की है। इंडियन ऑयल और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने वहां से करीब 40 लाख बैरल तेल मंगवाया है.नाइजीरिया और अंगोला जैसे पश्चिमी अफ्रीकी देशों से भी भारत तेल की अतिरिक्त खेप मंगवा रहा है.
प्राकृतिक गैस के नए स्रोत
प्राकृतिक गैस आपूर्ति में आई 25% की कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने नए कदम उठाए हैं.भारत ने अल्जीरिया, नॉर्वे और कनाडा जैसे देशों से वैकल्पिक LPG और LNG आपूर्ति के लिए संपर्क साधा है.नए स्रोतों से खरीदे गए दो बड़े LNG कार्गो इस समय भारत के रास्ते में हैं.
होर्मुज स्ट्रेट का रास्ता ब्लॉक
भारत अब अपनी तेल जरूरतों का 70% हिस्सा उन रास्तों से मंगवा रहा है जो होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर हैं, पहले यह 55% था. भारत करीब 40 अलग-अलग देशों से तेल खरीद रहा है ताकि किसी एक क्षेत्र (मिडिल ईस्ट) पर निर्भरता कम की जा सके.सरकार ने घरेलू स्तर पर LPG की कमी न हो, इसके लिए रिफाइनरियों को गैस उत्पादन अधिकतम करने के आदेश दिए हैं.
भारत में रोज लगभग 5.8 मिलियन बैरल तेल की खपत
भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल खरीदने वाला देश है. वो करीब 88 फीसदी तेल भारत विदेश से खरीदता है. देश में रोज लगभग 5.8 मिलियन बैरल तेल की खपत है. इसमें से 25 से 27 लाख बैरल तेल सऊदी अरब, इराक और जैसे खाड़ी देशों से होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आता है. भारत की लगभग 55 फीसदी रसोई गैस (एलपीजी) और करीब 30 फीसदी तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) भी आती है. इस गैस का इस्तेमाल बिजली उत्पादन, उर्वरक बनाने, सीएनजी और घरेलू खाना पकाने में होता है.
ईरान-इजरायल युद्ध कब खत्म होगा
सरकारी सूत्रों ने ये भी स्पष्ट कर दिया है कि ईरान के अमेरिका-इजरायल युद्ध से पैदा हुई समस्या के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें फिलहाल नहीं बढ़ेंगी. रसोई गैस की कीमतों में हालिया इजाफे को लेकर कहा कि कोई बड़ी उछाल नहीं है. भारत ने होर्मुज से अलग दूसरे इलाकों से ईंधन की खरीद पहले के 60 फीसदी से बढ़ाकर अब 70 प्रतिशत कर दी है. सरकार ने किसी भी संकट से निपटने के लिए फ्यूल सप्लाई मैनेजमेंट को एक्टिव कर दिया है.
तेल-गैस खरीद के नए रास्ते तलाशे गए
मिडिल ईस्ट संकट के चलते भारत ने वैकल्पिक देशों से तेल-गैस की खरीद शुरू कर दी है.पहले लगभग 40% आपूर्ति खाड़ी देशों से होती थी, अब देश में किसी भी एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर के पास स्टॉक की कमी नहीं है. जनता की मांग को पूरा करने का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है. ईंधन और गैस आपूर्ति में घरेलू उपभोक्ता सरकार की प्राथमिकता में हैं.सरकार जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त है. ईंधन और एलपीजी की कालाबाजारी रोकने के लिए तंत्र बनाया गया है.
Topics mentioned in this article
LPG Shortage
LPG Gas Cylinder
LPG Crisis In India
Iran Israel War
Hormuz Strait
LPG संकट बीच आउट ऑफ स्टॉक इंडक्शन कुकर, क्रोमा-ऐमेजॉन ने पहले नहीं देखा ऐसा ट्रेंड
LPG सिलेंडर कई जगहों पर नहीं मिल रहा. इससे विकल्पों की तलाश हो रही हैं. इंडक्शन कुकर विक्रय में तेजी है. क्रोमा के अनुसार ऐसा ट्रेंड पहली बार दिखा है.
मीडिल ईस्ट में वॉर और LPG आपूर्ति बाधा का असर अब सीधे भारतीय किचन में दिखने लगा है. कई शहरों में गैस की उपलब्धता और कीमतों की अनिश्चितता बढ़ी तो गैस के विकल्प खोज जा रहे हैं.
इसी से पिछले कुछ दिनों में इंडक्शन कुकटॉप और दूसरे इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों की मांग तेजी से बढ़ी है.
इंडक्शन कुकटॉप आउट ऑफ स्टॉक
रिटेल और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी इसका असर दिखा है. कई जगह इंडक्शन कुकटॉप विक्रय अचानक बढ़ा । कुछ प्लेटफॉर्म पर प्रोडक्ट टेम्परेरी आउट ऑफ स्टॉक है.
ट्रेंड देश की बड़ी इलेक्ट्रॉनिक्स रिटेल चेन Croma ने पुष्ट किया है. उसके अनुसार कुछ दिनों में इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों की मांग बढ़ी है।
Amazon India के प्रवक्ता के अनुसार दो दिनों में इंडक्शन कुकटॉप विक्रय तेज हुआ . इस बीच इंडक्शन कुकटॉप विक्रय सामान्य दिनों की तुलना में 30 गुना तक बढ़ा .
Amazon और Croma में स्थिति?
Amazon के अनुसार सिर्फ इंडक्शन ही नहीं, दूसरे इलेक्ट्रिक किचन उपकरणों की मांग भी तेजी से बढ़ी है. कंपनी के अनुसार राइस कुकर और इलेक्ट्रिक प्रेशर कुकर की बिक्री 4 गुना बढ़ी, जबकि एयर फ्रायर और मल्टी-यूज इलेक्ट्रिक केतली जैसे उपकरणों का विक्रय दोगुना हो गया.
Amazon के अनुसार दिल्ली-NCR, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में ग्राहक Amazon Now जैसे क्विक डिलीवरी प्लेटफॉर्म से प्रोडक्ट्स मिनटों में मंगवा रहे हैं. यह संकेत है कि गैस उपलब्धता अनिश्चित है।
Croma संचालक Infiniti Retail Ltd के CEO और MD शिबाशिश रॉय के अनुसार, इंडक्शन कुकटॉप की मांग अचानक बढ़ी. कंपनी के स्टोर्स में इनका दैनिक विक्रय सामान्य से तीन गुना है.
एकाधिक इंडक्शन खरीद रहे लोग
उन्होंने बताया कि अब कई ग्राहक एकाधिक इंडक्शन कुकटॉप खरीद रहे हैं. पहले ऐसा कम दिखता था, लेकिन अब लोग सावधानी को बैकअप कुकिंग विकल्प घर में चाहते हैं.
शिबाशिश रॉय के अनुसार इंडक्शन कुकटॉप के साथ इलेक्ट्रिक केतली की मांग भी तेजी से बढ़ी है. सामान्य से इनकी बिक्री दोगुनी हुई है. उनका कहना है कि अब कई घरों में इंडक्शन कुकटॉप और इलेक्ट्रिक केतली गैस का भरोसेमंद विकल्प बन रहा है.
उन्होंने यह भी कहा कि इलेक्ट्रिक कुकिंग सॉल्यूशन अपनाने का रुझान तेजी से बढ़ा है और Croma अपने स्टोर्स और ऑनलाइन चैनलों पर पर्याप्त स्टॉक की कोशिश कर रही है ताकि बढ़ती मांग पूरी हो सके.
डबल से ज्यादा इंडक्शन कुकर विक्रय
रिपोर्ट्स के अनुसार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इंडक्शन कुकटॉप की बिक्री कुछ मामलों में कई गुना तक बढ़ गई है, क्योंकि लोग गैस पर निर्भरता घटाने को इलेक्ट्रिक कुकिंग विकल्प ढूंढ रहे हैं.
कुछ शहरों में तो होटल, ढाबे और छोटे रेस्तरां भी गैस अनिश्चितता देख इंडक्शन और इलेक्ट्रिक कुकिंग सेटअप अपनाने लगे हैं, जिससे बिजली की मांग बढेगी. गैस सिलेंडर के साथ-साथ अब कई घरों में इंडक्शन कुकटॉप और दूसरे इलेक्ट्रिक उपकरण भी बैकअप बन रहे हैं, ताकि गैस न मिले तो भी दैनिक भोजन आसानी से बन सके.
