ईसाइयों का हैलोवीन त्यौहार,कोई वैज्ञानिक आधार? अंधविश्वास पर सवाल? नही न?
सवाल हमारी आस्था पर ही क्यों?
अगले माह ईसाइयों का हैलोवीन त्यौहार आने वाला है, जिसमें वे अपने मृत पूर्वजों को याद करते हैं।इस त्यौहार में लोग मृत्यु या मृतकों का संकेत देने वाली वस्तुओं से लोग अपने घरों को सजाते हैं। इनमें कंकाल, चुड़ैल, भूत-प्रेतों वाले मुखौटे, मकड़ियां और कटे हुए हाथ-पैर आदि कई प्रकार की वीभत्स चीजें होती हैं।इन दिनों वहां के लगभग सभी बड़े स्टोर हैलोवीन के सामान से पटे हुए हैं। यूरोप, अमरीका और कनाडा जैसे आधुनिक और विकसित समझे जाने वाले देशों में भी आज तक वहां के लोग अपने त्यौहारों को अपनी परंपराओं के अनुसार पूरे उत्साह व धूमधाम से मना रहे हैं। कोई इसे अंधविश्वास नहीं कहता और न कोई इसका वैज्ञानिक आधार पूछकर किसी की आस्था का मजाक उड़ाता है।
इधर दूसरी ओर भारत में कई नमूने हैं, जो लगभग हर हिन्दू त्यौहार के खिलाफ कोई न कोई सवाल उठाते हैं और कभी पर्यावरण के नाम पर, कभी अंधविश्वास मिटाने के नाम पर, तो कभी किसी और बहाने से हमारे त्यौहारों को मिटाने में लगे रहते हैं। इन दिनों पितृ-पक्ष चल रहा है तो उस पर भी सवाल उठाने वाले या पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने वालों को अंधविश्वासी बताने वाले कई लोग आपको भी दिखते होंगे।
मेरा सुझाव है कि ऐसे कुंठित लोगों को उनके हाल पर छोड़ दें। उन्हें किसी बात का वैज्ञानिक आधार बताने या किसी त्यौहार का अर्थ समझाने के फेर में पड़कर अपना समय बर्बाद न करें क्योंकि ऐसे लोग कुछ जानने समझने के लिए सवाल नहीं पूछते हैं, बल्कि केवल आपकी आस्था को ठेस पहुंचाने या आपको अपमानित करके स्वयं प्रसन्न होने के लिए ही ऐसे सवाल पूछते हैं। आप इनकी उपेक्षा कीजिए और अपनी आस्था पर अडिग रहिए।
सैकड़ों वर्षों के अन्याय, अत्याचार और गुलामी के कालखंड में भी हमारे और आपके पूर्वज सारे संकटों का सामना करते हुए भी अपने धर्म, संस्कृति और आस्था पर अडिग रहे, इसीलिए आप और मैं आज भी गर्व से स्वयं को हिन्दू कह पा रहे हैं और अपनी आस्था का पालन कर पा रहे हैं। हम सबके पूर्वजों के प्रति हमें कृतज्ञ होना चाहिए। मैं उन सबको प्रणाम करता हूं।
✍🏻शिवम
हैलोवीन
हैलोवीन त्यौहार 31 अक्टूबर की रात को मनाया जाता है
यह सामान्यतः आयरलैंड गणराज्य आयरलैंड, संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, प्युर्तोरिको, इंग्लैंड, न्यूज़ीलैंड, और ऑस्ट्रेलिया में मनाया जाता है।
इस दिन बड़े और बच्चे सभी डरावने अवतार में नजर आते हैं। जानिए हैलोवीन कब और क्यों मनाया जाता है? विदेशों में लोग 31 अक्टूबर का बेसब्री से इंतजार करते हैं। 31 अक्टूबर को ईसाई समुदाय के सेल्टिक कैलेंडर के आखिरी दिन हैलोवीन डे मनाया जाता है। हैलोवीन डे की शुरुआत स्कॉटलैंड और आयरलैंड में हुई थी, लेकिन अब कई देशों में इसे मनाया जाता है। इस दिन लोग तरह-तरह के डरावने गैटअप में नजर आते हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन भूतों जैसे लुक में आने से पूर्वजों की आत्माओं को शांति मिलती है। हैलोवीन डे पर लोग अपने दोस्त, रिश्तेदार और पड़ोसियों के घर जाते हैं और उनके साथ मिलकर कई गेम खेलते हैं।
कब मनाया जाता है हैलोवीन?
हैलोवीन डे 31 अक्टूबर को मनाया जाता है। अमेरिका से लेकर ब्रिटेन तक कई देशों में लोग इसे अपने पूर्वजों की याद में मनाते हैं। इस बार गुरुवार को हैलोवीन डे का आयोजन किया जाएगा। हैलोवीन डे का इतिहास करीब 2000 साल पुराना है। उत्तरीय यूरोप में 1 नवंबर को ‘आल सेट्स डे’ फेस्टिवल मनाया जाता था जिसे अब लोग हैलोवीन ईव कहते हैं।
हैलोवीन की शुरुआत कैस हुई?
ईसाई समुदाय से हैलोवीन डे की शुरूआत हुई थी। पहले आयरलैंड और स्कॉटलैंड में लोग हैलोवीन डे मनाते थे। ईसाई लोग ऐसा मनते हैं कि इस दिन भूतों का गेटअप में आने से पूर्वजों की आत्माओं को शांति मिलती है। इस दिन के साथ ही नए साल के आगमन की तैयारियां शुरू हो जाती हैं।
हैलोवीन और कद्दू का कनेक्शन?
हैलोवीन के दिन कद्दू पर डरावना फेस बनाया जाता है। वैसे तो असली कद्दू को अंदर से खोखला करके उसके अंदर लाइट लगाकर ऊपर से डरानवा फेस बनाकर तैयार किया जाता है। हालांकि आजकल मार्केट में तरह तरह के प्लास्टिक और दूसरी चीजों से बने कद्दू शेप के लांटेन्स मिलते हैं। इन कद्दू को ही हैलोवीन कहा जाता है। हैलोवीन के जश्न के बाद इन कद्दू को अंधेरे में पेड़ों पर लटकाने की मान्यता है। कुछ लोग इस कद्दू को दफना भी देते हैं।
हैलोवीन शब्द प्रयोग पहली बार सोलहवीं शताब्दी में किया गया, जो कि हैलोवीन का Scottish ढंग प्रस्तुत करता है, जिसे All-Hallows’-Even (“evening”) कहते है, जिसका मतलब है – हैलोवीन की रात के पहले। हैलोवीन की आधुनिक छुट्टियों का मूल प्राचीनता में है।

