उत्तराखंड ब्लैकआउट! कल एक घंटे बंद रहेंगी अनावश्यक लाइटें और उपकरण 

बिजली बचाने को कल एक घंटे लाइटें बंद रहेंगी. सरकार ने सभी से सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों से यह अपील की है.
EARTH HOUR IN UTTARAKHAND
उत्तराखंड में ब्लैक आउट!

देहरादून 27 मार्च2026 । : अर्थ आवर’ की 20वीं वर्षगांठ पर पूरे भारत में उत्सव मनाया जायेगा जिसमें भारत सरकार ने 28 मार्च की रात 8:30 बजे से 9:30 बजे तक गैर-जरूरी लाइटें और विद्युत उपकरण बंद रखने की अपील की है.

इसमें उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक, देश के कुछ प्रसिद्ध स्मारक, पारंपरिक स्थल और सरकारी इमारतें, ग्रह के प्रति एकजुटता दिखाने को अपनी लाइटें बुझा देंगी. इसी क्रम में उत्तराखंड सरकार ने भी प्रदेश की जनता से अपील की है कि वह 28 मार्च रात 1 घंटे को सभी गैर-जरूरी लाइटें एवं विद्युत उपकरण बंद रखे.

भारत सरकार के निर्णय के बाद उत्तराखण्ड शासन ने 28 मार्च, 2026 को रात्रि 8:30 बजे से 9:30 बजे तक ‘अर्थ ऑवर (Earth Hour)’ मनाने का निर्णय लिया है. ये पहल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के प्रति जागरुकता बढ़ाने को की जा रही है. यह अभियान WWF India, नई दिल्ली की ओर से जारी पत्र के क्रम में प्रदेश में अर्थ ऑवर मनाने का निर्णय लिया जा रहा है.

ऐसे में उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश के सभी नागरिकों से इस वैश्विक पर्यावरणीय पहल में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील करते हुए निर्धारित समयावधि में एक घंटे को अनावश्यक विद्युत उपकरण बंद रखने का आह्वान किया है. साथ ही शासन ने प्रदेश के सभी नागरिकों, संस्थानों, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों और सरकारी कार्यालयों से इस अभियान में अपनी भागीदारी निभाने की अपील की है.

अर्थ ऑवर को लेकर राज्यपाल गुरमीत सिंह ने आदेश भी जारी किया है. आदेश में उल्लेख है कि 28 मार्च, 2026 को राज्य में अर्थ ऑवर (Earth Hour) अभियान चलेगा. ऐसे में लोकभवन के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से अपील है कि 28 मार्च, 2026 को रात्रि 8:30 बजे से 09:30 बजे तक अपने-अपने कार्यालयों एवं घरों की अनावश्यक लाईट एवं अनावश्यक विद्युत उपकरण बन्द रखें.

अर्थ ऑवर (Earth Hour) विश्व वन्यजीव कोष (WWF) द्वारा आयोजित एक वैश्विक वार्षिक अभियान है, जो मार्च के आखिरी शनिवार को रात 8:30 बजे से 9:30 बजे तक गैर-जरूरी बिजली के उपकरण बंद करके पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता बढ़ाता है। 2026 में यह 28 मार्च को मनाया जा रहा है, जिसका विषय ‘पृथ्वी को एक घंटा दें’ (Give an Hour for Earth) है।

अर्थ ऑवर से जुड़ी मुख्य बातें:
उद्देश्य: बिजली बचाना, कार्बन फुटप्रिंट कम करना और प्रकृति की रक्षा के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश देना।
शुरुआत: यह पहल 2007 में सिडनी, ऑस्ट्रेलिया से एक सांकेतिक स्विच-ऑफ के रूप में शुरू हुई थी।
भागीदारी: दुनिया भर के लोग, घर, व्यवसाय और प्रतिष्ठित स्मारक (जैसे भारत में इंडिया गेट) इस दौरान एक घंटे के लिए अंधेरे में रहकर अपना समर्थन देते हैं।
महत्व: यह केवल बिजली बंद करने का अभियान नहीं है, बल्कि यह याद दिलाता है कि हमारे छोटे-छोटे प्रयास ‘पृथ्वी के लिए सबसे बड़े घंटे’ के रूप में पर्यावरण को बचाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

यह अभियान हमें याद दिलाता है कि एक घंटे का ‘ब्लैकआउट’ हमारे ग्रह को एक बेहतर भविष्य की ओर ले जाने की दिशा में एक साझा कदम है।

‘अर्थ आवर’ के 20 साल पूरे होने पर स्मारकों और विरासत स्थलों पर एक घंटे बिजली रहेगी गुल, ASI ने की घोषणा
27 मार्च 2026 — पर्यावरण संरक्षण को लेकर उठाया गया कदम पश्चिम बंगाल में, कोलकाता का नजारा तब धुंधला हो जाएगा जब रबींद्र सेतु (हावड़ा ब्रिज), की लाइटें बंद हो जायेंगी।
अर्थ अवर एक वैश्विक आन्दोलन है। वर्ल्ड वाइल्ड फण्ड फ़ॉर नेचर आन्दोलन के अंतर्गत विश्वभर के ऊर्जा मामलों पर चिंतित व्यक्ति हर वर्ष मार्च माह के अंतिम शानिवार को स्थानीय समय के अनुसार 8:30 PM से 9:30 PM बजे तक घर, मोहल्ले, दफ़तरों और अन्य स्थानों पर विद्युत का प्रयोग बन्द करके केवल मोमबत्ती का प्रयोग करते हैं।

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