उत्तराखंड

उत्तराखंड सरकार के चार वर्ष पूरे होने के अवसर पर आर्थिक सर्वेक्षण जारी, प्रमुख सचिव ने की प्रेस कांफ्रेंस

देहरादून 05 मार्च 2027 ।प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम ने  आज सचिवालय  मीडिया सेंटर में आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी कर बताया कि वर्ष 2024-25 में राज्य की सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) 3,81,889 करोड़ रहा, जो वर्ष 2021-22 में 2.54 लाख रुपए था।

2021-22 के मुकाबले जीएसडीपी में डेढ़ गुना से ज्यादा का उछाल आया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021-22 में राज्य में प्रति व्यक्ति आय 194670 थी, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 2,73,921 हो गई। प्रमुख सचिव ने बताया कि इस वर्ष यह सर्वेक्षण नेशनल कांउसिल ऑफ एप्लाइड इकोनाॅमिक रिसर्च (एनसीएईआर) के साथ मिलकर तैयार किया गया है।

प्रमुख सचिव ने बताया कि वर्ष 2024-25 में ग्रोथ रेट 7.23 प्रतिशत रहा है। मल्टी डायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स वर्ष 2021-22 में 9.7 प्रतिशत था जो वर्ष 2024-25 में घटकर 6.92 प्रतिशत पर आ गया है।

लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट वर्ष 2021-22 में 60.1 प्रतिशत था, वर्ष 2024-25 में 64.4 प्रतिशत है तथा यह रोजगार के क्षेत्र में 4.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स वर्ष 2001 में 0.247, वर्ष 2017 में 0.684, वर्ष 2021-22 में 0.718 जो अब बढ़कर वर्ष 2024-25 में 0.722 हो गया है।

प्रमुख सचिव ने बताया कि राज्य में वर्ष 2021-22 में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) की कुल संख्या 59798 थी, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 79394 हो गई है।

एमएसएमई में रोजगार पाने वालों की संख्या वर्ष 2022 में 343922 थी जो वर्ष 2025 में बढ़कर 456605 हो गई है।

राज्य में वर्ष 2021-22 तक लार्ज इंडस्ट्री की संख्या 107 थी जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 128 हो गई हैं।

इसके साथ राज्य में वर्ष 2017 तक स्टार्टअप संख्या शून्य थी, जो वर्ष 2021-22 में 702 थी तथा वर्ष 2024-25 में बढ़कर 1750 हो गई है।

प्रमुख सचिव ने बताया कि राज्य में सड़कों की कुल लम्बाई वर्ष 2021-22 में 50393 किलोमीटर थी, जो 2024-25 में बढ़कर 51278 किलोमीटर हो गई है। राज्य में 2022 तक 2 हेलीपोर्ट थे, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 7 हो गए। हेलीपेड वर्ष 2021-22 में 60 थे जो वर्ष 2024-25 में 118 हो गये हैं।

उन्होंने बताया कि प्राइमरी विद्यालयों में ड्रॉपआउट का अनुपात वर्ष 2021-22 में 1.64 प्रतिशत था जो वर्ष 2024-25 में 1.41 प्रतिशत हो गया है, जबकि सेकेंडरी विद्यालयों में यह अनुपात वर्ष 2021-22 में 7.65 प्रतिशत था जो वर्ष 2024-25 में 4.59 प्रतिशत हो गया

प्रमुख सचिव ने कहा कि राज्य में शासकीय एवं अशासकीय डिग्री कॉलेजों की संख्या वर्ष 2021-22 में 124 थी, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 139 हो गई है।

इसके साथ इजीनियरिंग कॉलेज गवर्नमेंट एवं प्राइवेट की संख्या वर्ष 2021-22 में 20 थी, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 52 हो गई है।

उन्होंने बताया कि राज्य में 2021-22 में कुल 5157 मिलियन यूनिट का विद्युत उत्पादन होता था, जो 2024-25 में यह उत्पादन बढ़कर 16500 मिलियन यूनिट हो गया है। जबकि कंजम्पशन ऑफ इलेक्ट्रिसिटी (विद्युत खपत) में वृद्धि हुई। वर्ष 2022 में बिजली की खपत 12518 मिलियन यूनिट थी, जो 2024-25 में बढ़कर 17192 मिलियन यूनिट हो गई है।

प्रमुख सचिव ने बताया कि सोलर इलेक्ट्रिसिटी जेनरेशन के क्षेत्र में राज्य में अभूतपूर्व कार्य हुआ है। वर्ष 2021-22 में सौर ऊर्जा के माध्यम से 439 मेगावाट उत्पादन होता था, जो 2025 में बढ़कर 1027 मेगावाट हो गया है।

उन्होंने बताया कि राज्य में शिशु मृत्यु दर (Infant Mortality Rate) वर्ष 2021-22 में 22 था, जो 2024-25 में घटकर 20 पर आ गया है।  मातृ मृत्यु दर वर्ष 2021-22 में 103 थी, जो 2024-25 में घटकर 91 पर आ गया है। इसके साथ ही राज्य में लाइफ एक्सपेर्टेंसी की उम्र 71.7 साल से बढ़कर 73 साल हो गई है।

प्रमुख सचिव ने बताया कि राज्य में वर्ष 2021-22 में 97 प्रतिशत घरों में शौचालय की सुविधा थी जो अब शतप्रतिशत हो गई है।

उन्होंने बताया कि राज्य में धान और गेहूं उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई। राइस एवं व्हीट प्रोडक्शन वर्ष 2021-22 में 28.23 कुंतल प्रति हेक्टेयर था जो अब बढ़कर 32.47 कुंतल प्रति हेक्टेयर पहुंच गया है। वर्ष 2021-22 में औषधिया एंड एरोमैटिक प्लांट का एरिया कुल 900 हेक्टेयर था, जो 2024-25 में बढ़कर 10 हजार हेक्टेयर पहुंच गया है।

प्रमुख सचिव ने बताया कि राज्य में वर्ष 2021-22 तक 50.92 लाख लीटर प्रतिदिन दुग्ध उत्पादन होता था, जो 2024-25 में बढ़कर 54.59 लाख लीटर प्रतिदिन हो गया है।

वहीं फिश उत्पादन में काफी बढ़ोत्तरी हुई है। फिश उत्पादन वर्ष 2021-22 में कुल 7325 टन प्रति साल होता था, जो 2024-25 में बढ़कर 10487 टन प्रति साल हो गया है।

उन्होंने बताया कि राज्य में पर्यटन के क्षेत्र में वर्ष 2021-22 में 8225 होटल/अदर स्टे थे जो 2024-25 में बढ़कर 10509 हो गए है। वहीं राज्य में 2021- 22 में 3935 होमस्टे थे, जिनकी संख्या 2024-25 में बढ़कर 6161 पहुंच गई है।

प्रमुख सचिव ने बताया कि एसडीजी इंडेक्स में वर्ष 2021-22 में राज्य ने चैथा स्थान प्राप्त किया था, वहीं वर्ष 2023-24 में उत्तराखण्ड एसडीजी इंडेक्स की रेंक में प्रथम स्थान पर रहा। वर्ष 2026-27 के लिए राज्य की जीएसडीपी 8.2 प्रतिशत अनुमानित है।

GSDP का मतलब Gross State Domestic Product होता है।
सरल शब्दों में GSDP किसी राज्य की अर्थव्यवस्था का कुल आकार बताता है — यानी उस राज्य में एक साल में बनने वाले सभी सामानों (goods) और सेवाओं (services) का कुल मूल्य।
यह उसी तरह है जैसे पूरे देश के लिए Gross Domestic Product (GDP) होता है, लेकिन GSDP सिर्फ किसी एक राज्य के लिए होता है।
उदाहरण को अगर हम Uttarakhand की बात करें, तो उस राज्य में एक साल में:
उद्योगों में बना सामान
खेती से उत्पादन
सेवाएँ (जैसे पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग)
इन सबका कुल मूल्य मिलाकर उत्तराखंड का GSDP बनता है।
GSDP से क्या पता चलता है
राज्य की आर्थिक ताकत
राज्य की विकास दर (Growth Rate)
कौन-सा राज्य ज्यादा समृद्ध है
उदाहरण
भारत के बड़े GSDP वाले राज्य:
Maharashtra
Tamil Nadu
Gujarat
Uttar Pradesh

अभी के हाल के आँकड़ों के अनुसार Uttarakhand की अर्थव्यवस्था का आकार (GSDP) काफी बढ़ा है।
उत्तराखंड का वर्तमान GSDP
2024–25: लगभग ₹3.81 लाख करोड़
2021–22: लगभग ₹2.54 लाख करोड़
यानी कुछ वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था में बड़ा विस्तार हुआ है। �

प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income)
2024–25: लगभग ₹2.73 लाख प्रति व्यक्ति
आगे का अनुमान
राज्य के बजट अनुमानों के अनुसार:
2025–26 में GSDP लगभग ₹4.29 लाख करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है।
PRS Legislative Research
उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था किन क्षेत्रों पर निर्भर है
मुख्य योगदान:
पर्यटन
जलविद्युत (Hydropower)
फार्मास्यूटिकल और उद्योग
कृषि व बागवानी
✅ इसलिए GSDP यह बताता है कि राज्य की कुल आर्थिक गतिविधि कितनी बड़ी है।

✅ 📈।

भारत में राज्यों का GSDP (Gross State Domestic Product) के आधार पर लगभग यह शीर्ष क्रम माना जाता है (हाल के अनुमानित आँकड़ों के अनुसार):
भारत के 10 सबसे बड़े GSDP वाले राज्य
Maharashtra – लगभग ₹40 लाख करोड़+
Tamil Nadu – लगभग ₹30 लाख करोड़+
Uttar Pradesh – लगभग ₹25–26 लाख करोड़
Karnataka – लगभग ₹25 लाख करोड़
Gujarat – लगभग ₹24 लाख करोड़
West Bengal – लगभग ₹18–19 लाख करोड़
Rajasthan – लगभग ₹16–17 लाख करोड़
Telangana – लगभग ₹15 लाख करोड़
Andhra Pradesh – लगभग ₹14–15 लाख करोड़
Madhya Pradesh – लगभग ₹14 लाख करोड़
उत्तराखंड की स्थिति
Uttarakhand का GSDP लगभग ₹3.8–4 लाख करोड़ के आसपास है।
भारत के राज्यों में इसका स्थान लगभग 20–21वें नंबर के आसपास माना जाता है।
एक महत्वपूर्ण बात
छोटे राज्यों का GSDP छोटा दिखता है, लेकिन उनकी प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) कई बड़े राज्यों से ज्यादा हो सकती है।
उदाहरण:
Uttarakhand की प्रति व्यक्ति आय Uttar Pradesh और Bihar से काफी अधिक है।
✅ अगर चाहें तो मैं आपको यह भी बता सकता हूँ:
भारत के सबसे अमीर राज्य (Per Capita Income के आधार पर)
और उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था इतनी तेजी से क्यों बढ़ रही है 📈।✅  📈।

GSDP का मतलब Gross State Domestic Product होता है।
सरल शब्दों में GSDP किसी राज्य की अर्थव्यवस्था का कुल आकार बताता है — यानी उस राज्य में एक साल में बनने वाले सभी सामानों (goods) और सेवाओं (services) का कुल मूल्य।
यह उसी तरह है जैसे पूरे देश के लिए Gross Domestic Product (GDP) होता है, लेकिन GSDP सिर्फ किसी एक राज्य के लिए होता है।
उदाहरण को अगर हम Uttarakhand की बात करें, तो उस राज्य में एक साल में:
उद्योगों में बना सामान
खेती से उत्पादन
सेवाएँ (जैसे पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग)
इन सबका कुल मूल्य मिलाकर उत्तराखंड का GSDP बनता है।
GSDP से क्या पता चलता है
राज्य की आर्थिक ताकत
राज्य की विकास दर (Growth Rate)
कौन-सा राज्य ज्यादा समृद्ध है
उदाहरण
भारत के बड़े GSDP वाले राज्य:
Maharashtra
Tamil Nadu
Gujarat
Uttar Pradesh

अभी के हाल के आँकड़ों के अनुसार Uttarakhand की अर्थव्यवस्था का आकार (GSDP) काफी बढ़ा है।
उत्तराखंड का वर्तमान GSDP
2024–25: लगभग ₹3.81 लाख करोड़
2021–22: लगभग ₹2.54 लाख करोड़
यानी कुछ वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था में बड़ा विस्तार हुआ है। �
प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income)
2024–25: लगभग ₹2.73 लाख प्रति व्यक्ति �
आगे का अनुमान
राज्य के बजट अनुमानों के अनुसार:
2025–26 में GSDP लगभग ₹4.29 लाख करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है। �
उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था किन क्षेत्रों पर निर्भर है
मुख्य योगदान:
पर्यटन
जलविद्युत (Hydropower)
फार्मास्यूटिकल और उद्योग
कृषि व बागवानी
✅ इसलिए GSDP यह बताता है कि राज्य की कुल आर्थिक गतिविधि कितनी बड़ी है।✅ 📈।✅ 📈।✅  📈।

प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) के आधार पर भारत के सबसे समृद्ध राज्यों की सूची अलग होती है। इसमें छोटे लेकिन विकसित राज्य ऊपर आ जाते हैं।

भारत के सबसे अमीर राज्य (Per Capita Income के आधार पर)
Sikkim – लगभग ₹5–6 लाख प्रति व्यक्ति
Goa – लगभग ₹5 लाख+
Telangana – लगभग ₹3.5–4 लाख
Karnataka – लगभग ₹3.5 लाख
Haryana – लगभग ₹3.2–3.5 लाख
Tamil Nadu – लगभग ₹3 लाख+
Gujarat – लगभग ₹3 लाख के आसपास
Maharashtra – लगभग ₹2.8–3 लाख
Uttarakhand – लगभग ₹2.7–2.8 लाख
Kerala – लगभग ₹2.6–2.8 लाख
उत्तराखंड की खास बात
Uttarakhand का कुल GSDP भले ही बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन प्रति व्यक्ति आय भारत में ऊपर के राज्यों में आती है।
इसकी अर्थव्यवस्था में इन क्षेत्रों का बड़ा योगदान है:
पर्यटन (चारधाम यात्रा, हिमालयी पर्यटन)
जलविद्युत परियोजनाएँ
फार्मा और मैन्युफैक्चरिंग उद्योग
सेना और सरकारी सेवाएँ
📊 इसलिए छोटा राज्य होने के बावजूद उत्तराखंड आर्थिक रूप से काफी मजबूत माना जाता है।

 

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