चंपत राय हिंदुत्व की चमक से त्यागपत्र तक
हिंदुत्व के मंच की चमक से चंदा चोरी की धुंधलाहट में इस्तीफे तक… कहानी चंपत राय की
श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में एक्शन शरू हो गया है. चंदा चोरी मामले में 8 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद अब ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. आइए जानते हैं कि चंपत राय कौन हैं और कैसे मंदिर ट्रस्ट में अहम भूमिका में आए थे.
राममंदिर ट्रस्ट के महासचिव पद से चंपत राय का इस्तीफा
नई दिल्ली,26 जून 2026,
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राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा घटनाक्रम: आरोपी नहीं चंपत राय और अनिल मिश्रा फिर क्यों छोड़ा पद? दिया गया बड़ा संदेश
Fri, 26 Jun 2026 07:21 PM IST
विकास कुमार पीटीआई, लखनऊ
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सार
दोनों के इस्तीफों के बाद एसआईटी की जांच और तेज होने की संभावना है। जांच एजेंसियां दान प्रबंधन से जुड़े दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। वहीं गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को 29 जून तक के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
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Ram Mandir Trust why General Secretary Champat Rai and Trustee Anil Mishra resign
चंपत राय और अनिल मिश्रा – फोटो : अमर उजाला
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अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में शुक्रवार को बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया। राम मंदिर में मिले दान में कथित अनियमितताओं की जांच के बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। दोनों नेताओं पर सीधे तौर पर कोई आरोप नहीं लगाया गया है, लेकिन जांच के बीच उनके इस्तीफे को नैतिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जा रहा है।
Ram Mandir Trust why General Secretary Champat Rai and Trustee Anil Mishra resign
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी। – फोटो : अमर उजाला।
सात करोड़ का घोटाला
सूत्रों के अनुसार, राम मंदिर में प्राप्त दान में सात करोड़ रुपये से अधिक की कथित गड़बड़ी की जांच विशेष जांच दल (SIT) कर रहा है। जांच के दौरान दान प्रबंधन में कई स्तरों पर कथित खामियां सामने आने के बाद आठ लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। हालांकि जांच एजेंसियों ने अब तक चंपत राय और अनिल मिश्रा को आरोपी नहीं बनाया है।
Ram Mandir Trust why General Secretary Champat Rai and Trustee Anil Mishra resign
चंपत राय व डॉ. अनिल मिश्रा ने दिया इस्तीफा। – फोटो : amar ujala
यह संदेश देने के लिए छोड़ा पद
बताया जा रहा है कि दोनों ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और मंदिर प्रशासन की पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से अपने पद छोड़ने का फैसला किया है। ट्रस्ट के भीतर इसे प्रशासनिक जवाबदेही के रूप में भी देखा जा रहा है।
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चंपत राय – फोटो : amar ujala
कौन हैं चंपत राय?
80 वर्षीय चंपत राय उत्तर प्रदेश के बिजनौर के रहने वाले हैं। सार्वजनिक जीवन में आने से पहले वह रसायन विज्ञान के प्राध्यापक रहे। कम उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े और वर्ष 1980 में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) का हिस्सा बने। राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में उनकी गिनती होती रही है। आपातकाल के दौरान वह 18 महीने तक जेल में भी रहे। वर्ष 2020 में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के बाद उन्हें महासचिव बनाया गया था। मंदिर निर्माण, प्रशासन और दान प्रबंधन की जिम्मेदारी उनके पास थी।
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अनिल मिश्रा – फोटो : अमर उजाला
अनिल मिश्रा की क्या थी भूमिका?
अनिल मिश्रा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी थे। वह अयोध्या के सामाजिक और प्रशासनिक कार्यों से लंबे समय से जुड़े रहे हैं। ट्रस्ट में उनकी भूमिका मंदिर के प्रशासनिक कार्यों, चढ़ावे और दान व्यवस्था की निगरानी से जुड़ी थी। स्थानीय स्तर पर उनकी मजबूत पकड़ के चलते उन्हें ट्रस्ट में शामिल किया गया था।
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अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की चोरी मामले में एसआईटी की रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद एक्शन शुरू हो गया है. इस मामले में 8 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई है, जिसमें सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है. राम मंदिर ट्रस्ट में सबसे अहम भूमिका निभा रहे महासचिव चंपत राय सवालों के घेरे में है, जिसने उनकी हिंदुत्व की छवि को धुमिल कर दिया है.
राम मंदिर चंदा चोरी विवादों के बीच शुक्रवार को चंपत राय ने श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया. चंपत राय के साथ मंदिर ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने भी इस्तीफा दे दिया है.
चंदा चोरी का मामला सामने आने के बाद से चंपत राय पर उंगलियां उठ रही थी. विपक्षी नेता मांग कर रहे हैं कि मंदिर के फंड और जमीन के लेन-देन से जुड़ी गड़बड़ियों में चंपत राय की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए.
जानिए कौन है चंपत राय
हिंदुत्व की प्रयोगशाला के चमके चंपत राय का जन्म 18 नवंबर 1946 को उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले की नगीना तहसील में हुआ था. उनके पिता रामेश्वर प्रसाद बंसल आरएसएस से जुड़े थे, उनकी मां का नाम सावित्री देवी है. चंपत राय अपने 10 भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर हैं.
परिवार का माहौल वैचारिक रूप से हिंदुत्व की दिशा में झुका हुआ था, जिसके चलते वो प्रभावित होकर बचपन से संघ की शाखाओं में जाना शुरू कर दिया था. इस तरह आरएसएस से जुड़ गए. चंपत राय ने अपनी पढ़ाई-लिखाई पूरी करने के बाद शिक्षक के रूप में बिजनौर के धामपुर में आरएसएम डिग्री कॉलेज में केमिस्ट्री पढ़ाने लगे थे.
मंदिर आंदोलन से मिली पहचान
चंपत राय शिक्षक के रूप में सेवा करते हुए आरएसएस के प्रचार-प्रसार शुरू कर दिए थे. इंदिरा गांधी ने आपतकाल लगाया तो चंपत राय भी विरोध करने उतर गए, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. 8 महीने तक जेल में बंद रहने के बाद चंपत राय बाहर आए तो शिक्षक की नौकरी को छोड़कर संघ के पूर्णकालिक प्रचारक बन गए.
संघ में रहते हुए चंपत राय ने शुरू में आगरा, देहरादून और हरिद्वार समेत कई जगहों पर संगठन के विस्तार का काम किया. वे संघ में विभाग प्रचारक रहे और बाद में उन्हें विश्व हिंदू परिषद में भेज दिया गया, जहां उन्होंने सह क्षेत्रीय संगठन मंत्री के तौर पर काम संभाला. यहीं से उनकी भूमिका राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़ने लगी.
बात 1984 की धर्म संसद के बाद जब विश्व हिंदू परिषद ने राम जन्मभूमि आंदोलन को संगठित रूप से आगे बढ़ाना शुरू किया, तब संघ से अशोक सिंघल समेत कई प्रचारकों को वीएचपी में भेजा गया था, जिनमें चंपत राय भी शामिल थे. आंदोलन के सार्वजनिक चेहरों के पीछे रहकर रणनीति तैयार करना, उसे अमल में लाना, मुकदमों की पैरवी के लिए दस्तावेज़ जुटाना और वकीलों के साथ समन्वय करना जैसे काम चंपत राय कर रहे थे.
साल 1991 में अयोध्या भेजा गया, उन्होंने राम मंदिर आंदोलन की तैयार की थी. उन्होंने इस आंदोलन के दौरान मंदिर से जुड़े हजारों ऐतिहासिक दस्तावेज और ग्रंथ सहेजे. जब 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचा गिराया गया उस समय वे वहां मौजूद थे. चंपत राय को एक कुशल रणनीतिकार माना जाता रहा. वो फ्रंटफुट के बजाय पर्दे के पीछे रहकर खामोशी से काम करने के लिए जाने जाते थे.
अयोध्या का इनसाइक्लोपीडिया
राम मंदिर वाले शहर के इतिहास और रास्तों के बारे में गहरी जानकारी के चलते ही चंपत राय को अयोध्या का इनसाइक्लोपीडिया कहा जाता है. अयोध्या राम जन्मभूमि मामले की लडाई अदालत पहुंची तो कानूनी दस्तावेज जुटाने और उसे पेश करने का काम किया था. सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई की हर अहम तारीख से पहले दिल्ली में वकीलों की बैठकें आयोजित कराने में भी चंपत राय की महत्वपूर्ण भूमिका रहती थी.
अयोध्या आंदोलन और राम मंदिर की पैरवी के चलते वीएचपी के भीतर भी उनका कद लगातार बढ़ता गया. चंपत राय को अशोक सिंघल का भरोसेमंद सहयोगियों में गिना जाता था. जब विश्व हिंदू परिषद के भीतर नेतृत्व को लेकर संकट पैदा हुआ और संगठन डॉ. प्रवीण तोगड़िया और अन्य नेताओं के बीच टकराव का सामना कर रहा था, तब चंपत राय उन लोगों में शामिल थे, जिन्होंने संगठन को संभालने और संतुलन बनाए रखने में रोल अदा किया.
विश्व हिंदू परिषद के शीर्ष नेतृत्व का हिस्सा बने और संगठन के सबसे प्रभावशाली रणनीतिकारों में गिने जाने लगे. 2002 में विश्व हिंदू परिषद के संयुक्त महामंत्री और इसके बाद अंतरराष्ट्रीय महामंत्री बने. इसके चंपत राय विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए गए.
राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव बने
नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या फैसले आया और फरवरी 2020 में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के बाद चंपत राय की भूमिका एक बार फिर बदल गई. चंपत राय राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव बने. आंदोलनकर्ता और रणनीतिकार के रूप में पहचाने जाने वाले चंपत राय अब मंदिर निर्माण परियोजना के प्रशासक और ट्रस्ट के महासचिव की भूमिका में आ गए.
5 अगस्त, 2020 को भव्य मंदिर के ‘भूमि पूजन’ से लेकर अब तक, राय श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव के तौर पर मंदिर के निर्माण और अन्य गतिविधियों से जुड़े रहे हैं. राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा जुटाने का अभियान शुरू हुआ तो उसे ‘निधि समर्पण अभियान’ नाम दिया गया. अभियान की योजना बनाने और उसे लोगों तक पहुंचाने में चंपत राय की अहम भूमिका थी. ट्रस्ट के महासचिव के रूप में वो मीडिया के सामने आकर बताते रहे कि अभियान कैसे चलेगा, पैसा कैसे जमा होगा और उसका इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा.
कैसे विवादों में आए चंपत राय
राम मंदिर निर्माण के लिए अयोध्या में जमीन खरीदी की गई. जून 2021 में राम मंदिर ट्रस्ट पर अयोध्या में ख़रीदी गई एक ज़मीन को लेकर सवाल खड़े हो गए थे. आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया था कि कैसे जमीन खरीदारी में हेरफेर किया जा रहा है. चंपत राय और ट्रस्ट ने इन आरोपों को सिरे से ख़ारिज किया था.
चंपत राय कहना था कि सभी भूमि खरीद पारदर्शी तरीके से की गईं, भुगतान बैंकिंग माध्यमों से हुआ और ट्रस्ट ने बाज़ार मूल्य से कम कीमत पर भूमि ख़रीदी गई हैं. आरोपों को राजनीति के प्रेरित बताया था. अब दोबारा से जून 2026 में राम मंदिर के चढ़ावा और चंदा चोरी का मामला सामने आया. राम मंदिर जुड़े चंदे, ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और कथित अनियमितताओं को लेकर उठाए जा रहे हैं.
सपा के प्रमुख अखिलेश यादव राम मंदिर के चंदा चोरी को लेकर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर निशाना साध रहे थे. आरोप है कि ट्रस्ट की नाक के नीचे मंदिर का दान और चढावे की रकम के हिसाब-किताब में हेरफ़ेर की गई.विपक्ष के हमलावर होने के बाद योगी सरकार ने एसआईटी का गठन किया और एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद एक्शन शुरू हो गया,
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले की एसआईटी जांच पूरी होने के बाद आठ लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है, जिसमें से सात लोगों की गिरफ्तारी हो गई हैय इसके बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इस्तीफा दे दिया है, क्योंकि गिरफ्तार लोगों में राम मंदिरपत राय के ड्राइवर और करीबी सहयोगी, रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू भी शामिल हैं. जांचकर्ताओं का आरोप है कि दान के पैसे को कथित तौर पर दूसरी जगह लगाने में उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई थी.
