सीजफायर? होर्मुज फिर बंद,लेबनान पर 10 मिनट में 100 हमले

सीजफायर खतरे में, ट्रंप ने धमकाया, ईरान को तैयार रहेगी US सेना, खतरनाक शूटिंग को है तैयार

नई दिल्ली /वाशिंगटन/तेल अवीव 08 अप्रैल 2026 । पश्चिम एशिया युद्ध में भले ही सीजफायर की घोषणा हो गई  लेकिन, यह शांति कमजोर धागे के सहारे टिकी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि समझौता लागू होने तक ईरान में अमेरिकी सेना तैनात रहेगी.

पश्चिम एशिया युद्ध के मोर्चे में भले ही अमेरिका और इजरायल ने दो हफ्ते का सीजफायर घोषित किया है, लेकिन युद्ध के बादल फिर गहरा रहे हैं. इजरायल ने लेबनान पर आक्रामक हमला कर दिया है. ईरान ने भी फिर रणनीतिक तौर से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बंद कर दिया है. ईरान के मुंबई कंसोलेट ने फार्स न्यूज एजेंसी से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर यह जानकारी दी है. व्हाइट हाउस ने मांग की है कि समुद्री रास्ता तुरंत पुन: खोल जाए. वहीं, राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट ट्रूथ सोशल में ईरान को चेताया है कि उसने समझौते का पूर्ण पालन नहीं किया, तो अमेरिका अब तक की सबसे बड़ी और विनाशकारी सैन्य कार्रवाई करेगा.

ईरान में तैनात रहेंगे अमेरिकी सैनिक
राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा है कि अमेरिकी जहाज, विमान और सैन्यकर्मी अतिरिक्त गोला बारूद और हथियारों के साथ ईरान के आसपास तब तक रहेंगे, जब तक कि समझौते का पूर्ण पालन नहीं हो जाता है.

दोबारा शुरू हो जाएगी शूटिंग

डॉनल्ड ट्रंप के अनुसार यदि किसी भी कारण से समझौते का पालन नहीं होता है तो शूटिंग शुरू हो जाएगी, यह शूटिंग इतनी बड़ी, बेहतर और ताकतवर होगी जो किसी ने पहले कभी नहीं देखी होगी. हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि आशंका बेहद कम है.
ट्रंप ने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर अमेरिका का रुख साफ किया- “यह काफी पहले तय हो गया था, कोई परमाणु अधिकार नहीं होंगे और हॉर्मुज खुला और सुरक्षित रहेगा.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी पोस्ट में आखिरी में लिखा- अमेरिकी सेना पूरी तरह से तैयार होकर फिलहाल आराम कर रही है, और असल में अपनी अगली जीत की तरफ देख रही है.
बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा- ‘हिजबुल्लाह पर जारी रहेगा प्रहार’
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ किया है कि लेबनान में सीजफयर कभी भी अस्थायी सीजफायर समझौते में  नहीं था. उन्होंने कहा है कि हिजबुल्लाह युद्धविराम में शामिल नहीं है और उस पर पूरी ताकत से प्रहार जारी रहेगा.

10 मिनट में 100 ठिकानों पर किया हमला

प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने हमले की जानकारी दी कि, “आज हमने हिजबुल्लाह को पेजर धमाकों के बाद से अभी तक का सबसे बड़ा झटका दिया है.
इजरायल ने उन जगहों पर 10 मिनट में 100 ठिकानों पर हमला किया है, जहां हिजबुल्लाह को यकीन था कि वह पूरी तरह से सुरक्षित है.
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि हमारी उंगली ट्रिगर पर है और हम किसी भी समय युद्ध में लौटने को तैयार है. नेतन्याहू ने सीजफायर को अभियान का अंत नहीं, बल्कि सभी लक्ष्य  प्राप्ति के रास्ते में मील का पत्थर बताया है.
नेतन्याहू के मुताबिक इजरायल का पहला उद्देश्य ईरान को यूरोनियम संवर्धन से रोकना है, क्योंकि तेल अवीव के अनुसार इसका इस्तेमाल परमाणु हथियार को बनाने में होगा.

10-सूत्रीय शांति प्रस्ताव का किया उल्लंघन
ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गालिबाफ ने अमेरिका और इजरायल पर 10-सूत्रीय शांति प्रस्ताव के तीन प्रमुख खंडों का गंभीर उल्लंघन करने का आरोप लगाया है.

इस कारण अमेरिका से अविश्वास

गालिबाफ के अनुसार अमरिका के प्रति हमारा गहरा ऐतिहसिक अविश्वास उनकी प्रतिबद्धताओं के बार-बार उल्लंघन से उपजा है, एक ऐसा पैटर्न जो दुर्भाग्य से एक बार फिर दोहराया जा रहा है.
गालिबाफ के अनुसार

  • 10-सूत्रीय प्रस्ताव के पहले खंड का पालन नही हुआ.  पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी साफ लेबनान और दूसरे क्षेत्रों सहित हर जगह तत्काल प्रभाव से लागू होने वाले युद्धविराम की बात की थी.
  • घुसपैठिए ड्रोन का ईरानी एयर स्पेस में प्रवेश, जिसे फारस प्रांत के लार शहर में नष्ट कर दिया है. 
  • बातचीत शुरू होने से पहले इन उल्लंघनों के कारण अब द्विपक्षीय सीजफायर या बातचीत अनुचित है.

वीकेंड में इस्लामाबाद में होगी बातचीत
सीजफायर समझौता आगे बढ़ाने को दोनों पक्ष के बीच इस वीकेंड में इस्लामाबाद में सीधी बातचीत होनी तय थी. इस महत्वपूर्ण बैठक में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस करेंगें. दूसरी तरफ ईरानी प्रतिनिधिमंडल की कमान स्पीकर मोहम्मद बघेर गालिबाफ के हाथों में है. हालांकि, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के बंद होने और लेबनान में हमले से यह कूटनीतिक प्रक्रिया एक धागे के सहारे लटकी है.

Ceasefire News India Distance Itself Not Without Good Reason Could Not Betray Israel Or Iran
सीजफायर की ‘नौटंकी’ से भारत ने यूं ही नहीं बनाई दूरी! दोस्त इजरायल या ईरान को धोखा नहीं दे पाता
भारत ने शुरू में ही अमेरिका और इजरायल में पाकिस्तानी मध्यस्थता को लेकर आशंकाए  जताई थी। अब जैसे युद्धविराम नौटंकी सिद्ध हो रहा है, उससे भारत के स्टैंड पर मुहर लग गई क्योंकि, भारत के लिए दोस्तों को धोखा देना संभव नहीं।

ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम की घोषणा के कुछ ही मिनटों बाद से इससे जुड़ी ‘नौटंकियां’ सामने आने शुरू हो गईं। जब तक दुनिया को इस सीजफायर के बारे में ठीक से कुछ पता चलता, उससे पहले ही इजारायल ने लेबनान पर हमले जारी रखने की घोषणा करके इसके पीछे की असलियत सामने ला दी।
भारत के स्टैंड पर सीजफायर ‘संकट’ से लगी मुहर

अब अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जनरल में छपी रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने युद्धविराम समझौते में इजरायल को अंतिम समय तक बिल्कुल अंधेरे में रखा। भारत युद्धविराम में मध्यस्थ  होता तो ऐसा किसी भी सूरत में असंभव था। शायद इसीलिए, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान पर भरोसा किया।

अमेरिका और पाकिस्तान का इजरायल से धोखा 
रिपोर्ट के अनुसार युद्धविराम समझौते में ठीक से परामर्श नहीं करने, देर से जानकारी देने और इसके कुछ प्रावधानों पर इजरायल के अधिकारी बहुत ही ज्यादा नाराज हैं।
इसी से इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सीजफायर का सार्वजनिक समर्थन किया, लेकिन इसमें अपनी सीमाएं भी बता दीं।
रिपोर्ट में तो यहां तक दावा है कि पूरी प्रक्रिया में इजरायल को शुरू से अंधेरे में रख सीजफायर घोषणा से ठीक पहले ट्रंप ने नेतन्याहू को यह बताया।

इजरायल दो हफ्तों के लिए ईरान पर हमले रोकने के राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले का समर्थन करता है, जो कि इसपर निर्भर है कि ईरान जलडमरूमध्य को तत्काल खोल रहा है और अमेरिका, इजरायल और क्षेत्र के देशों पर सभी तरह के हमले बंद कर रहा है।
बेंजामिन नेतन्याहू, इजरायल के प्रधानमंत्री

इजरायल को लेबनान पर अंधेरे में क्यों रखा गया
ट्रंप की घोषणा के चार घंटे बाद ही इजरायली प्रधानमंत्री- कार्यालय ने बयान जारी कर सीजफायर का तो स्वागत किया, लेकिन पाकिस्तानी मध्यस्थतों के दावे के उलट स्पष्ट कहा कि युद्धविराम लेबनान पर लागू नहीं होगा। रिपोर्ट के अनुसार इजरायल को युद्धविराम में लेबनान को शामिल किए जाने पर आपत्ति है, जो इसे मौजूदा संघर्ष की परिधि से अलग मानता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी स्पष्टता नहीं
ठीक इसी तरह होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने को लेकर डोनाल्ड ट्रंप का दावा ईरानी दावे से पूर्ण विरोधाभासी है। इजरायल के रुख से भी साफ है कि उसे दी गई जानकारी ईरान के स्टैंड से पूरी तरह अलग है। अमेरिका ने होर्मुज पूरी तरह खोले जाने का दावा किया और ईरान ने लगभग पूर्व शर्तें ही दोहराईं।

  • दोस्त इजरायल या ईरान को धोखा नहीं दे पाता
    सीजफायर के सारे स्टेकहोल्डर्स के दावों-प्रतिदावों से साफ है कि मध्यस्थ ने सीजफायर समझौते में युद्धरत सभी पक्षों को ही नहीं, पूरी दुनिया को धोखा दिया।
    इस केस में इसके लिए पाकिस्तान जिम्मेदार है, जिसे चीन और अमेरिका ने कठपुतली जैसा नचाया है।
    भारत को इस तरह झूठ के आधार पर कोई समझौता करवाना कभी भी संभव नहीं है।
    भारत और इजरायल बहुत ही करीबी दोस्त हैं तो ईरान से उसके संबंध सदियों पुराने हैं।
    भारत ने शुरू में ही भांप लिया कि पाकिस्तानी मध्यस्थता में हुए समझौते की पोल जल्द खुलेगी, इसलिए उसने अपने नागरिकों को तुरंत ईरान छोड़ने की कठोर एडवाइजरी भी जारी कर दी।
    विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान को भरी संसद में क्यों ‘दलाल’ कहा, यह अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित है।
 ‘दबा यूरेनियम खोद निकालेंगे…’, सीजफायर के बाद बोले ट्रंप, ईरान को हथियार देने वालों को दिया झटका

ईरान पर अमेरिका दबाव और बातचीत दोनों रास्तों पर साथ-साथ आगे बढ़ रहा है. इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर कठोर रुख अपना यूरेनियम एनरिचमेंट पूरी तरह बंद करने का रोडमैप बता यह चेतावनी भी दी कि जो देश ईरान को हथियार देगा, उस पर 50% टैरिफ लगेगा.

ट्रंप के अनुसार, अब ईरान में किसी भी तरह का यूरेनियम संवर्धन नहीं होगा.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़े बयान में साफ कहा कि अमेरिका ईरान में यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद कराने को काम करेगा. यह भी संकेत दिए कि टैरिफ और आर्थिक प्रतिबंधों में राहत को लेकर बातचीत शुरू हो चुकी है. ट्रंप ने उन देशों को भी झटका दिया, जो ईरान को हथियार देंगे.

बुधवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर ट्रंप ने कहा कि हाल ही में हुए संघर्ष के बाद जो सीजफायर हुआ, वह एक बेहद अच्छा बदलाव सिद्ध हुआ है. उन्होंने दावा किया कि अब अमेरिका और ईरान मिलकर आगे की दिशा में काम करेंगे और एक बड़े समझौते के कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति भी बन चुकी है.

ट्रंप के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते में ईरान में कैसा भी यूरेनियम संवर्धन नहीं होगा. उन्होंने कहा, ‘कोई भी संवर्धन नहीं होगा और अमेरिका, ईरान से मिलकर गहराई में दफन यूरेनियम अवशेषों को खोद निकाल कर खत्म करेगा.’

उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान के परमाणु ठिकाने अभी भी सैटेलाइट की कड़ी निगरानी में हैं और हमले के बाद से वहां कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है. इससे साफ है कि अमेरिका पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए है.

टैरिफ और प्रतिबंधों पर बातचीत

ट्रंप ने कहा कि भविष्य में आर्थिक विषय इस बातचीत का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे. अमेरिका और ईरान के बीच टैरिफ में कमी और प्रतिबंधों में राहत को लेकर चर्चा जारी है. उन्होंने कहा, ‘हम टैरिफ और प्रतिबंधों में राहत पर बात कर रहे हैं और आगे भी करेंगें.’

उन्होंने यह नहीं बताया कि प्रस्तावित समझौते के 15 बिंदुओं में क्या-क्या है, लेकिन इतना जरूर कहा कि उनमें से कई पर पहले ही सहमति बन चुकी है. इसी के साथ ट्रंप ने एक बड़ी चेतावनी  एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट में दी, ‘जो भी देश ईरान को सैन्य हथियार सप्लाई करेगा, उस पर अमेरिका 50% टैरिफ लगाएगा. इसमें कोई छूट या रियायत नहीं मिलेगी.’

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