उत्तराखंड STF पुलिस का पराक्रम:कश्मीर से पकड़ लाई साइबर ठग शौकत और बिलाल
Uttarakhand STF Operation in Kashmir Nationwide Cyber Fraud Network Busted Two Accused arrested Amidst Crowd
उत्तराखंड STF का कश्मीर में ऑपरेशन: देशभर में सक्रिय साइबर ठगी के नेटवर्क का पर्दाफाश, दो ठग गिरफ्तार
दोनों आरोपित फर्जी बैंक खातों, मोबाइल सिम और एटीएम कार्ड से देशभर में साइबर ठगी कर रहे थे। पुलिस ने संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में घेराबंदी कर दोनों आरोपितों को पकड़ा।
देहरादून/कानपुर 08 अप्रैल 2026। उत्तराखंड एसटीएफ साइबर क्राइम टीम ने देशभर में सक्रिय साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड कर जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर (बड़गाम) से दो धूर्त आरोपित पकड़ेे हैं । यह अभियान बेहद संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में पूरा किया गया , जहां स्थानीय भीड़ ने पुलिस टीम को घेरकर दबाव बनाने की कोशिश की। पूरा ऑपरेशन ऐसे क्षेत्र में किया गया, जहां ग्रेनेड हमले की घटनाएं होती रही हैं।
उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ STF) के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने बताया कि शौकत हुसैन मलिक और बिलाल अहमद फर्जी बैंक खातों, मोबाइल सिम और एटीएम कार्ड से देशभर में साइबर ठगी कर रहे थे। जांच में सामने आया है कि इन खातों से जुड़े मामलों में उत्तराखंड समेत देश के सात राज्यों में शिकायतें पुलिस में अंकित हैं।
उन्होने बताया कि गिरफ्तारी के समय स्थानीय स्तर पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। पुलिस टीम जब आरोपितों को पकड़कर थाने से न्यायालय ले जा रही थी, तब बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए और टीम पर दबाव बनाने की कोशिश की। इसके बावजूद एसटीएफ टीम ने संयम और रणनीति से काम लेते हुए आरोपितों को सुरक्षित हिरासत में लिया और अदालत से रिमांड भी प्राप्त किया। ऐसे संवेदनशील वातावरण में भी एसटीएफ टीम ने साहस और सूझबूझ के साथ मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया।
65 लाख की ठगी का खुलासा
मामला देहरादून के एक 71 वर्षीय वृद्ध से जुड़ा है, जिन्हें डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगा गया। ठगों ने खुद को टेलीकॉम विभाग, दिल्ली पुलिस और सीबीआई अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर फर्जी वारंट दिखाया और डराकर करीब 65 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लिए। जांच में बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल डेटा के विश्लेषण से इस संगठित गिरोह का पता चला । आरोपित फर्जी दस्तावेजों और व्हाट्सएप प्रोफाइल से लोगों को जाल में फंसाते थे और ठगी की रकम को विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर निकाल लेते थे। पुलिस ने आरोपितों के पास से तीन मोबाइल फोन, कई एटीएम कार्ड, आधार-पैन सहित महत्वपूर्ण प्रपत्र ढूंढे हैं। शुरुआती जांच में इन खातों में लाखों रुपये के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है।
कानपुर में ‘मिनी जामताड़ा’! पुलिस ने फिल्मी ढंग से ड्रोन से रेकी कर पूर गांव घेरा, ऐसे पकड़े 19 साइबर ठग
कानपुर में पुलिस ने बड़ा ऑपरेशन करके एक ही गांव से एक साथ 19 साइबर ठग पकड़ लिये हैं। ये लोग सरकारी योजनाओं का लालच देकर फोन पर ही बैंक अकाउंट और बाकी व्यक्तिगत डेटा ले लेते थे।
कानपुर में 19 साइबर ठग पुलिस ने पकड़े हैं।
उत्तर प्रदेश की कानपुर पुलिस ने साइबर क्राइम नियंत्रण को फिल्मी ढंग से अभियान चला सफलता पाई है। रेउना इलाके के एक छोटे से गांव को ‘मिनी जामताड़ा’ का अड्डा बनाकर चल रहे बड़े साइबर ठगी नेटवर्क पुलिस ने पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। भारी पुलिस बल, आसमान से ड्रोन निगरानी और चारों तरफ से घेराबंदी यह ऑपरेशन किसी एक्शन थ्रिलर फिल्म के क्लाइमेक्स की याद दिलाता है।
‘जामताड़ा’ स्टाइल में की ठगी
दरअसल, पुलिस को सूचना मिली थी कि रेउना क्षेत्र के एक गांव में पूरा का पूरा परिवार और युवा साइबर ठगी में लिप्त हैं। यहां जामताड़ा स्टाइल की ठगी चल रही थी, जहां अपराधी सरकारी योजनाओं के नाम पर अबोध लोगों को फंसाते थे। लोगों को फोन कर केंद्र सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का लालच देते थे। फिर उनके व्यक्तिगत डेटा, बैंक खाता विवरण और OTP प्राप्त कर उनके खातों से लाखों रुपये लूट लेते थे। इस गिरोह ने न केवल कानपुर बल्कि आसपास के कई जिलों और अन्य राज्यों के सैकड़ों लोग अपने शिकार बनाये थे।
ड्रोन कैमरों से की इलाके की रेकी
पुलिस ने अपराधियों को बचने का कोई भी मौका न देने को विशेष रणनीति बनाई। ड्रोन कैमरों से गांव की पूरी रेकी की। हर गली, हर घर और हर मूवमेंट पर नजर रखी गई। योजना पूरी तरह पक्की हो गई, तब भारी संख्या में पुलिसकर्मियों ने पूरा गांव चारों तरफ से घेर लिया। अपराधियों को समर्पण की चेतावनी दी गई। तब पुलिस ने सर्च ऑपरेशन चला 19 शातिर साइबर ठग दबोच लिये।
पुलिस ने एकत्र किये प्रमाण 
पकड़े आरोपितों में स्थानीय युवा और कुछ अन्य राज्यों से जुड़े लोग हैं। इनसे भारी मात्रा में प्रमाण मिले। इसमें दर्जनों मोबाइल फोन, सिम कार्ड, म्यूल अकाउंट्स (मनी लॉन्ड्रिंग को इस्तेमाल होने वाले फर्जी बैंक खाते) की डिटेल, फर्जी आईडी प्रूफ, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स हैं। पुलिस का मानना है कि यह नेटवर्क सिर्फ स्थानीय नहीं बल्कि अंतरराज्यीय स्तर का है और इसके तार देश के अन्य बड़े साइबर अपराधी गिरोहों से भी जुड़े हो सकते हैं।
सैकड़ों शिकायतों के बाद हुआ एक्शन
एडीसीपी क्राइम सुमित रामटेके ने बताया कि पकड़े गए सभी आरोपितों से कड़ी पूछताछ जारी है। शुरुआती जांच में पता चला है कि ये ठग मुख्य रूप से सरकारी योजनाओं जैसे पीएम किसान, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना आदि के नाम पर लोगों को कॉल करते थे। फर्जी अधिकारी बनकर डराते-धमकाते और फिर उनके बैंक डिटेल्स प्राप्त कर ठगते थे। अब तक सैकड़ों शिकायतें इस गिरोह से जुड़ी मिली हैं। पुलिस को उम्मीद है कि इस मामले में और बडे अनावरण होंगें जिसमें कुछ और नाम भी सामने आयेंगें।
अभियान कानपुर पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच की बेहतर खुफिया जानकारी और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल का नतीजा है। ड्रोन का उपयोग करके पुलिस ने अपराधियों की हर गतिविधि पर नजर रखी, जिससे कोई भी आरोपित भाग नहीं सका। इस ऑपरेशन ने सिद्ध किया है कि हाईटेक अपराधों से निपटने को पुलिस भी हाईटेक हो चुकी है।
कानपुर पुलिस के इस ‘ऑपरेशन जामताड़ा’ की पूरे उत्तर प्रदेश में चर्चा है। कार्रवाई ने न सिर्फ एक बड़े ठगी नेटवर्क को तोड़ा है बल्कि अन्य संभावित अपराधियों को भी कठोर संदेश दिया है कि कानून के हाथ अब बहुत लंबे हो चुके हैं। तकनीक का गलत इस्तेमाल करने वाले अपराधी अब आसानी से नहीं बच पाएंगें।

